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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

लॉकडाउन पर फैसला / राजस्थान के 14 इलाके रेड कैटेगरी में, ग्रीन और येलाे कैटेगरी वाली 18 जगहों पर मिलेगी राहत

लॉकडाउन पर फैसला / राजस्थान के 14 इलाके रेड कैटेगरी में, ग्रीन और येलाे कैटेगरी वाली 18 जगहों पर मिलेगी राहत


 आज लॉकडाउन का आखिरी दिन है। ऐसे में अगर 15 अप्रैल से यहां मोडिफाइड लॉकडाउन लागू किया जाता है तो उसके लिए प्रदेश को चार जोन में बांटा जा सकता है। ऐसे इलाके जो हाॅटस्पाॅट बने हुए हैं और बड़ी संख्या में कोरोना पाॅजिटिव मिल रहे हैं, उन क्षेत्रों और शहरों को रेड कैटेगरी के तहत रखा जाएगा। यानी वहां लाॅकडाउन पूर्व की तरह लागू रहेगा। वहीं, जिन इलाकों में अब तक कोई भी रोगी नहीं आया है, वहां राहत दी जा सकती है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके लॉकडाउन को लेकर स्मार्ट समाधान खोजने की बात कही है, ऐसे में राजस्थान उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है....

रेड कैटेगरी - जयपुर, बांसवाड़ा, टोंक, भरतपुर में वैर और बयाना, भीलवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर का पोकरण, झालावाड़ का पिड़ावा, झुंझुनू का गुढ़ा गौड़जी और मंडावा, दौसा, कोटा और चूरू।

रेड कैटेगरी में क्याें?- यहां अब तक 10 से ज्यादा पाॅजिटिव केस आ चुके हैं। हर जगह क्वारेन्टाइन में 100 से ज्यादा लोग रखे गए हैं।

आगे क्या : चूंकि यहां अब भी खतरा बना हुआ है, ऐसे में लॉकडाउन और कर्फ्यू पहले की तरह लागू रहेगा। हाई रिस्क जोन में रहने वाले लोगों को दफ्तर सहित सभी गतिविधियाें पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा जो कर्मचारी हार्ट, कैंसर या किड़नी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें दफ्तर नहीं बुलाया जाएगा। उनके लिए सरकार एडवाइजारी जारी करेगी।

ऑरेंज कैटेगरी - अलवर, डूंगरपुर, नागौर, खेतड़ी, अजमेर।
क्याें- इन 5 सिटी में कुल पाॅजिटिव की संख्या 5 से 10 के बीच है। डूंगरपुर को छोड़कर सभी जगह 100 से अधिक क्वारैन्टाइन हैं।
आगे क्या : यहां चूंकि हालात बहुत खराब नहीं हैं, इसलिए फेजवाइज छूट देने पर विचार किया जा रहा है। कुछ  छोटे उद्योगों को रियायत दी जा सकती है। इस बारे में सीएम गहलोत आज ऐलान कर सकते हैं।

येलो कैटेगरी:  धौलपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, हनुमानगढ़, करौली, पाली, सीकर, उदयपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़।
क्याें- इस सभी जिलों में 85 दिन में 5 से कम कोरोना पाॅजिटिव हैं। इनमें नए संक्रमित लोग भी सामने नहीं आ रहे हैं। 10 जिले ऐसे हैं जिनमें कोरोना का फैलाव बहुत धीमा है। इनमें एक से लेकर 2 या 3 तक कुल पाॅजिटिव केस हैं।
आगे क्या : दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए ऑड-ईवन जैसा फाॅर्मूला लागू किया जा सकता है। आधे-आधे कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर बुलाया जाएगा।

ग्रीन कैटेगरी:  श्रीगंगानगर, बारां, बूंदी, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, जालौर, सिरोही।
क्याें? : ये वे जिले और सिटी हैं, जिनमें अभी तक एक भी कोरोना रोगी नहीं मिला। न किसी पॉकेट विशेष में संक्रमण भड़का है। इन 8 जिलों में बाजार खोले जा सकते हैं।
आगे क्या : यहां सरकारी और प्राइवेट संस्थान, उद्योगों को लॉकडाउन में फेज वाइज छूट दी जाएगी, लेकिन यह छूट भी सशर्त होगी। शर्त यह होगी कि काम करने वाले स्थानीय लोग ही होंगे। इन कर्मचारियों की उम्र भी 50 साल से ज्यादा नहीं होगी। इसके अलावा उद्योगों में सैनिटाइजेशन, मास्क जैसी चीजों की अनिवार्यता भी रखी जाएगी।

अब तक 11 राज्य लाॅकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ा चुके हैं

प्रधानमंत्री की घोषणा से पहले ही देश के 11 राज्यों में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ चुका है। ये राज्य हैं- दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, पुड्डुचेरी, मिजाेरम।

काेराेना मामलाें के हिसाब से राज्याें का आकलन
यहां संघर्ष: महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश
सुधार की राह पर: आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, केरल, तेलंगाना
अनिश्चितता बरकरार: कर्नाटक, तमिलनाडु। तमिलनाडु के 1173 मामलाें में से 31 की उम्र 10 वर्ष से कम है।
केंद्र के लिए लाॅकडाउन में छूट के ये 3 आधार संभव

यानी काेराेना के अत्यधिक मामले
जिस जिले में काेराेना संक्रमण के 15 से अधिक मामले हाेंगे या हाॅटस्पाॅट घाेषित हाेंगे, उसे रेड जाेन माना जाएगा। यहां सारी गतिविधियाें पर लाॅकडाउन की तरह प्रतिबंध जारी रहेंगे। सिर्फ अत्यावश्यक सेवाओं जैसे दूध, दवा, सब्जी की सुविधा मिलेगी।

यानी काेराेना के सीमित मामले
जिन जिलों में काेराेना के सीमित यानी 15 से कम केस हैं और संक्रमितों की संख्या नहीं बढ़ी, वे ऑरेंज जोन में रखे जा सकते हैं। यहां गतिविधियाें के लिए सरकार द्वारा दिए गए निर्देशाें का पालन करना हाेगा। सीमित सार्वजनिक परिवहन शुरू हाे सकेगा।

यानी काेराेना का एक भी मामला नहीं
जिस जिले में एक भी संक्रमण का केस नहीं हाेगा, उसे ग्रीन जाेन माना जाएगा। ग्रीन और ऑरेंज जोन में एेसे 276 जिले हैं। यहां बाहर से आने वालों पर रोक लगाते हुए स्थानीय गतिविधियाें को छूट मिल सकती है। लघु एवं मध्यम उद्याेग शुरू हाे सकेेंगे।

काम पर न लौटने वाले कामगारों का वेतन काटने की छूट मिले
उद्योग मंत्रालय ने एक सिफारिश यह भी की है कि जिन उद्योगों को शुरू करने की मंजूरी मिले, वह अपने कामगारों को भी वापस बुलाएं। बुलाए जाने पर भी अगर कोई कामगार ड्यूटी पर नहीं लौटता है, तो नियोक्ता को उसके पारिश्रमिक का भुगतान न करने की छूट भी दी जाए। 

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

बाड़मेर-सिमरन चौधरी का राजस्थान की अंडर 19 क्रिकेट टीम में चयन

बाड़मेर-सिमरन चौधरी का राजस्थान की अंडर 19 क्रिकेट टीम में चयन

-परिवार और दोस्तों में खुशी की लहर
-राजस्थान क्रिकेट टीम में चयन होने वाली बाड़मेर की प्रथम महिला है सिमरन

बाड़मेर
शहर निवासी किसान की बेटी सिमरन चौधरी d/0 आदूराम का राजस्थान अण्डर 19 महिला क्रिकेट टीम में चयन हुआ है। सिमरन चौधरी सीमावर्ती बाड़मेर जिले की प्रथम महिला खिलाड़ी है जिसका राजस्थान अण्डर 19 महिला क्रिकेट टीम  में चयन हुआ है। चयन के बाद सिमरन के परिवार वालो और उनके साथियों में खुशी का ठिकाना नही रहा।
कोच विजय मायला के मुताबिक बलदेव नगर निवासी सिमरन चौधरी साधारण किसान की बेटी है और पिछले एक वर्ष से मेरे द्वारा जिला मुख्यालय स्थित संजय स्टेडियम में प्रशिक्षण के रही थी। सिमरन के कठोर अभ्यास का नतीजा ही है कि आज उसका चयन राज्य की अंडर 19 क्रिकेट टीम में चयन हुआ। जिला क्रिकेट संघ के सचिव देवाराम चौधरी ने चयनित खिलाड़ी को संजय स्टेडियम में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई। संजय स्टेडियम में लगातार अभ्यास करते रहने के कारण प्रथम प्रयास में ही राजस्थान क्रिकेट टीमें सिमरन चौधरी का चयन हुआ है जिससे उसके परिवार और दोस्तों के बीच खुशी की लहर दौड़ पड़ी है हर कोई सिमरन चौधरी को बधाई देने में लगा हुआ है। सचिव देवाराम चौधरी ने कहा कि सिमरन चौधरी का राज्य टीम में चयन होना बाड़मेर जिले के लिए गौरव की बात है।

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

राजस्थान के इन गांवों में जवानी में ही हो जाती है पुरुषों की मौत, यहां मर्द नहीं सिर्फ औरतें और वो भी विधवा

 राजस्थान के   इन गांवों में जवानी में ही हो जाती है पुरुषों की मौत, यहां मर्द नहीं सिर्फ औरतें और वो भी विधवा
Rajasthan: इन गांवों में जवानी में ही हो जाती है पुरुषों की मौत, यहां मर्द नहीं सिर्फ औरतें और वो भी विधवा

जयपुर,  राजस्थान में सिरोही जिले के "रणधीरा" और भीलवाड़ा जिले के "श्रीजी खेड़ा" गांवों में दूरी तो सैकड़ों किलोमीटर की है। लेकिन इन दोनों गांवों का दर्द एक जैसा है। इन दोनों गांवों में सिर्फ विधवा महिलाएं और छोटे बच्चे नजर आते हैं। दोनों ही गांवों में 35 साल से अधिक उम्र की महिला विधवा हैं। यहां पुरुष का बुढ़ापा नहीं आता, जवानी में ही इनकी मौत हो जाती है। इस भयावह स्थिति का कारण है "सिलिकोसिस" बीमारी।

सिंचाई के साधनों की कमी और रोजगार का कोई अन्य साधन नहीं होने के कारण इन दोनों गांवों के 95 फीसद पुरुष पत्थरों की घिसाई के काम से जुड़े हुए हैं। वहां उड़ने वाला पत्थरों का बुरादा (सिलिका) धीरे-धीरे काम करने वाले लोगों के सीने में जमता रहता है और बाद में "सिलिकोसिस" जैसी बड़ी बीमारी का रूप धारण कर लेता है। इलाज के दौरान अस्पतालों में मरीजों को सिलिकोसिस बीमारी का जो प्रमाण-पत्र दिया जाता है, उसे यहां "डेथ वारंट" या "ऊपर वाले का बुलावा" कहा जाता है। पैसों के अभाव में इलाज नहीं होता और फिर इनकी जवानी में ही मौत हो जाती है। कम उम्र में मौतों के कारण बदनाम हुए इन गांवों में अब युवकों के विवाह होना भी मुश्किल होते जा रहे हैं।


खनन उद्योग में काम करने वाले मजदूरों में हो रही इस लाइलाज बीमारी को देखते हुए प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने इसी साल अक्टूबर में सिलिकोसिस नीति जारी की है। इस नीति के अनुसार पीड़ित के पुनर्वास के लिए तीन लाख रुपये की सहायता देने, पीड़ित की मौत पर दो लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता देना प्रावधान किया गया है। पीड़ितों को मुख्यमंत्री विशेषयोग्यजन पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। दवाइयां फ्री उपलब्ध रहेंगी। वर्तमान में 11 हजार सिलिकोसिस पीड़ित प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं।


रणधीरा और श्रीजी खेड़ा गांवों की कहानी

सिरोही जिले की पिंड़वाड़ा तहसील में स्थित "रणधीरा" गांव में लगभग हर दो माह में एक व्यक्ति की मौत होती है। 57 घरों के इस गांव में 32 विधावाएं हैं। मात्र 11 पुरुष जिंदा, इनमें से तीन बुजुर्ग हैं। प्रशासनिक अधिकारी दबे स्वरों में खुद मानते हैं कि यहां 100 से अधिक बच्चे ऐसे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी विधवा महिलाओं पर है और वे या तो खेती करती हैं या फिर पास के ही गांव में मजदूरी के लिए जाती हैं। बच्चों की देखभाल उनकी दादी करती हैं। गरासिया (एसटी) बहुल इस गांव के 36 बच्चे ही पास के गांव के स्कूल में पढ़ने जाते हैंं।

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ग्रामीण रामभज का कहना है कि कई परिवार तो ऐसे हैं, जिनकी तीन से चार पीढ़ियों के पुरुष सदस्यों ने अपने बच्चों को जवान होते नहीं देखा। गांव में लगभग सभी परिवार कच्चे घरों में रहते हैं। भीलवाड़ा जिले के "श्रीजी खेड़ा" गांव के 85 घरों में विधवाएं रहती हैं। इस गांव में 35 साल से अधिक उम्र के मात्र सात बुजुर्ग नजर आते हैं। गांव के चार युवक मजदूरी के लिए मुंबई गए हैं। बाकी सभी नौजवानों की मौत सिलिकोसिस से हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पेट पालने का कोई अन्य साधन नहीं होने के कारण मजबूरी में पत्थरों की घिसाई का काम करते हैं।


मौत बांट रही खदानें

सरकारी आंकड़े के अनुसार, प्रदेश में 25 हजार से अधिक वैध और अवैध खदानों में 20 लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं। इनमें 11 हजरी सिलिकोसिस पीड़ित है। फेफड़ों में संक्रमण के कारण इस बीमारी की अधिकांश मामलों में पहचान काफी देरी से होती है, जब तक रोगी मौत के करीब पहुंच जाता है। पत्थरों की कटाई में काम आने वाले कटर और ग्राइंडर मशीनों से पत्थरों में जमा सिलकन डाई ऑक्साइड और सिलिका क्रिस्टल उड़ता है, जो मजदूरों के फेंफड़ों में जमा हो जाता है। प्रदेश के खानमंत्री प्रमोद जैन भाया का कहना है कि नई नीति के बाद इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण हो सकेगा। 

सोमवार, 18 नवंबर 2019

राजस्थान के बीकानेर में हादसा, 10 लोगों की मौत और 20-25 लोग घायल

राजस्थान के बीकानेर में हादसा, 10 लोगों की मौत और 20-25 लोग घायल


राजस्थान: बीकानेर जिले के श्री डूंगरगढ़ के पास नैशनल हाइवे 11 पर एक बस और ट्रक की टक्कर में 10 लोगों की मौत हो गई और 20-25 लोग घायल हो गए।

राजस्थान के बीकानेर में हादसा, 10 लोगों की मौत और 20-25 लोग घायल

राजस्थान की संस्कृति है भारत की सबसे खूबसूरत संस्कृति, पढ़ें

राजस्थान की संस्कृति है भारत की सबसे खूबसूरत संस्कृति, पढ़ें










 राजस्थान, भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है। यहां की संस्कृति दुनिया भर में मशहूर है। राजस्थान की संस्कृति विभिन्न समुदायों और शासकों का योगदान है। आज भी जब कभी राजस्थान का नाम लिया जाए तो हमारी आखों के आगे थार रेगिस्तान, ऊंट की सवारी, घूमर और कालबेलिया नृत्य और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान आते हैं।अपने सभ्य स्वभाव और शालीन मेहमाननवाज़ी के लिए जाना जाता है ये राज्य। चाहे स्वदेशी हो या विदेशी, यहां की संस्कृति तो किसी का भी मन चुटकियों में मोह लेगी। आखिर किसका मन नहीं करेगा रात के वक्त रेगिस्तान में आग जलाकर कालबेलिया नृत्य देखने का। जिन्होनें राजस्थान की संस्कृति का अनुभव किया है वो बहुत खुश नसीब हैं। लेकिन जो इससे अंजान हैं उन्हें हम बताएंगे इस शाही शहर की सरल लेकिन आकर्षक संस्कृति के बारे में कुछ ऐसी दिलचस्प बातें जिन्हें जानने के बाद यहां आने के लिए खुद को रोक नहीं पाएंगे

राजस्थानी परिधान 

जहां बात सभ्यता और सुंदरता को एक ही साथ जोड़ने की हो तो राजस्थानी कपड़ों के आगे कुछ नहीं टिकता। महिलाओं के लिए पारंपरिक राजस्थानी कपड़े काफी सभ्य, सुंदर और आरामदायक होते हैं। यहां की महिलाएं पारंपरिक घागरा, चोली और ओढ़नी (दुपट्टा)ल पहनती हैं। महिलाओं के ये कपड़े चटक रंग के होते हैं, जिनमें गोटा (बॉर्डर) लगा होता है। अपने से बड़ों के सामने और बाहरी लोगों के आगे महिलाएं घूंघट निकाल कर रखती हैं। इस तरह से वो उस व्यति को अपने से सम्मान देती हैं। तो वहीं पुरुष धोती कुर्ता या कुर्ता पजामा पहनना पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ पुरुष सिर पर बंधेज के प्रिंट वाली सूती कपड़े की पगड़ी भी पहनते हैं। उनके लिए पगड़ी का सिर्फ सिर ढकने वली एक टोपी की तरह नहीं होती, बल्कि इज़्ज़त होती है।

राजस्थानी आभूषण 

कपड़ों के बाद अब बात करते हैं राजस्थानी आभूषणों की जो ना सिर्फ राजस्थान में बल्कि अब पूरे विश्व में मशहूर हो रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आभूषण केलव महिलाएं ही पहनती हैं। राजस्थान में आपको बहुत से ऐसे लोगों के गले में सोने की चेन, हाथ में पुरुषों वाली भारी सी चूड़ी और एक कान में सोने की बाली या लौंग। इधर महिलाओं के आभूषण लोक प्रसिद्ध है। राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध और महिलाओं द्वारा सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला आभूषण है, बोरला। बोरला एक प्रकार का मांग टीका होता है जो दिखने में किसी लट्टू जैसा दिखता है। ये राजस्थान के पारंपरिक आभूषणों में से एक है। इसके अलावा महिलाएं, कमर बंद, बाजू बंद और लाख और सीप के कंगन भी पहनती हैं।

 राजस्थानी लोक नृत्य

 जहां बात राजस्थानी नृत्य की आती है सबसे पहले नाम आता है घूमर का। हां वही घूमर डांस जो एक फिल्म में भी किया गया था। लेकिन हकीकत में घूमर डांस इससे काफी अलग होता है जो ज्यादातर यहां कि महिलाएं ही निपुनता से कर पाती हैं। ये नृत्य देखने में भले ही आसान लगे लेकिन करने के लिए पैरों में बहुत ताकत चाहिए होती है। इसके अलावा राजस्थान का दूसरा मशहूर लोक नृत्य है कालबेलिया डांस। पारंपरिक रूप से ये राजस्थान के बंजारनों द्वारा किया जाता है। कालबेलिया नृत्य आम लोगों द्वारा नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें लोगों के मनोरंजन के लिए कई खतरनाक कर्तब भी किए जाते हैं जैसे, कीलों पर खड़े होकर नाचना, आंखों से ब्लेड उठाना और एक उंगली पर थाल घुमाना। इन सब कर्तबों के लिए महीनों के अभ्यास की ज़रूरत होती है।

राजस्थान के पारंपरिक पकवान  

 खाने का शौंकीन तो हर कोई होता है और अगर आपने राजस्थान आकर यहां का पारंपरिक खाना नहीं खाया तो ये बहुत अफसोस की बात होगी। राजस्थान का दाल, बाटी और चूर्मा तो देश के कोने-कोने में मशहूर है। दाल के साथ घी में डूबी गर्मागर्म बाटी और मीठे के तौर पर घी वाला गर्मागर्म चूर्मा, सोचकर ही मुंह में पानी आने लगता है। वैसे तो ये आपको आपके शहर में भी मिल जाएगा लेकिन यकीनन यहां जैसी बात और कहीं नहीं होगी।

 राजस्थान के मशहूर त्योहार

 त्योहार तो हर राज्य, हर शहर और हर धर्म के अच्छे होते हैं। लेकिन राजस्थान के कुछ मशहूर त्योहार, जैसे डेजर्ट महोत्सव: जैसलमेर में होने वाला डेजर्ट महोत्सव जहां अतरंगी मुकाबले आयोजित किए जाते हैं। यहां पुरुषों के बीच मूंछों का मुकाबला होता है और ऊंटों के खेल दिखाए और खेले जाते हैं। ये महोत्सव फरवरी में आयोजित किया जाता है।

 राजस्थान के मशहूर  ऊंट मेला: 

राजस्थान के बीकानेर में आयोजित होने वाला ऊंट मेला हर साल रेगिस्तान के जहाज़ माने जाने वाले, ऊंट के सम्मान में लगता है। इस मेले में ऊंटों को किसी दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इसके अलावा सभी ऊंटों के बीच दौड़ लगवाई जाती है। लोगों के मनोरंजन के लिए मेले मे राजस्थानी गीत भी चलाए जाते हैं। मेले के अंत में आतिशबाजियों से पूरे आसमान को रौशन किया जाता है। बीकानेर में आयोजित होने वाला ये ऊंट मेला हर साल जनवरी में आयोजित किया जाता है।बाड़मेर जिले का मल्लिनाथ पशु मेला तिलवाड़ा और पुष्कर मेला खास हे,

राजस्थान के मशहूर त्योहार पुष्कर मेला: 

पुष्कर मेला जो हर साल आयोजित किया जाता है और जिसमें तीन लाख से भी ज्यादा लोग और लगभग बीस हज़ार ऊंट, घोड़े, हाथ से बनी तरह-तरह की चीज़ें और घर सजाने की बहुत सी चीज़ों से भरी दुकानें देखने को मिलेगी। पुष्कर मेला हर साल नवंबर के महीने में पुष्कर में लगता है।


गुरुवार, 31 अक्तूबर 2019

राजस्थान / स्कूल लेक्चरर प्रतियोगी परीक्षा 2018 नए साल में होगी, 3 से 13 जनवरी 2020 तक होंगे पेपर


राजस्थान / स्कूल लेक्चरर प्रतियोगी परीक्षा 2018 नए साल में होगी, 3 से 13 जनवरी 2020 तक होंगे पेपर
Rajasthan, RPSC School Lecturer Exams 2018 News Updates
अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा स्कूल लेक्चरर प्रतियोगी परीक्षा 2018 अब नए साल में आयोजित होगी। परीक्षा 3 जनवरी से 13 जनवरी 2020 तक होगी। आयोग ने गुरुवार को परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया। आयोग सचिव रेणु जयपाल ने बताया कि स्कूल लेक्चरर प्रतियोगी परीक्षा 3 ग्रुप्स में आयोजित की जाएगी।

पहले ग्रुप की परीक्षा 3 और 4 जनवरी को होगी। तीन जनवरी को सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक जीके का पेपर होगा और दोपहर 2:00 से शाम 5:05 बजे तक हिंदी का पेपर होगा। चार जनवरी को सुबह 9:00 से 12:00 तक संस्कृत विषय का और दूसरी पारी यानी 2:00 से 5:00 तक राजस्थानी का पेपर आयोजित होगा।


ग्रुप बी की परीक्षा छह से आठ जनवरी तक होंगी। पहले दिन छह जनवरी 2020 को सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक जीके का पेपर होगा। इसी दिन दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक राजनीति विज्ञान का पेपर होगा। सात जनवरी 2020 को सुबह 9:00 से 12 की पारी में भूगोल और म्यूजिक के पेपर होंगे जबकि दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक जीव विज्ञान का पेपर होगा। आठ जनवरी 2020 को सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक अर्थशास्त्र का तथा दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक लोक प्रशासन और भौतिक विज्ञान के पेपर होंगे।


ग्रुप सी के पेपर 9:00 से 13 जनवरी तक होंगे। नौ जनवरी को जीके का पेपर सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक और दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक इतिहास का पेपर होगा। 10 जनवरी को सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक अंग्रेजी का पेपर और 2:00 से 5:00 बजे की शिफ्ट में कॉमर्स और एग्रीकल्चर के पेपर होंगे। 11 जनवरी को सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक केमिस्ट्री का पेपर होगा और दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक सोशियोलॉजी का पेपर होगा। 12 जनवरी को सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक गणित और दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक होम साइंस का पेपर होगा।

अंतिम दिन यानी 13 जनवरी को सुबह 9:00 से 12:00 बजे तक पंजाबी विषय का पेपर होगा तथा 2:00 से 5:00 तक ड्राइंग का पेपर होगा। आयोग द्वारा पूर्व में इस परीक्षा को आयोजित किया जाना था, लेकिन ईडब्ल्यूएस और एमबीसी आरक्षण शामिल किए जाने के चलते इस परीक्षा को आयोजित नहीं किया जा सका था । आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में शिक्षकों के 5000 पदों पर भर्ती के लिए यह परीक्षा आयोजित होगी।

सोमवार, 15 जुलाई 2019

राजस्थान: प्रेम विवाह करने पर पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान, मामला दर्ज

राजस्थान: पाली,प्रेम विवाह करने पर पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान, मामला दर्ज

राजस्थान: प्रेम विवाह करने पर पंचायत ने सुनाया तुगलकी फरमान, मामला दर्ज
(पाली): राजस्थान के पाली जिले में एक जातीय पंचायत ने प्रेम-विवाह करने पर परिवार के खिलाफ तुगलकी फरमान सुनाया. पंचायत के दौरान विवाह करने वाले लड़के के पिता के साथ मारपीट भी की गई. जिसके बाद वो घायल हो गया. लेकिन घायल को हॉस्पिटल पहुंचाने वाले को पंचों ने आर्थिक दंड का फैसला सुनाते हुए उसका भी हुक्का पानी बंद कर दिया.

घटना के सामने आने के बाद कालु थाने में कोर्ट के इस्तगाते के माध्यम से 23 पंचो के खिलाफ मामला दर्ज किय़ा गया है. मामले में पीड़ित परिवार न्याय के लिये पुलिस के आलाधिकारियों के पास चक्कर काट रहे हैं.

जानिए क्या है मामला
जैतारण के आनंदपुर कालु गांव के पास माली समाज के युवक व युवती के शादी की नीयत से भगाकर ले जाने के मामले में बस्सी चोराया पर महापंचायत का आयोजन हुआ. पंचायत के दौरान दौरान लड़के के पिता दुदाराम को पीटकर घायल कर दिया गया. इस दौरान गांव के रहने वाले अन्य ग्रामीण ने किसी तरह घायल पीड़ित को हॉस्पिटल पहुंचाया. जिस कारण पंचायत उनपर भी नाराज हो गई. जिसके बाद पंचायत ने पीड़ित को मदद करने वाले रामप्रकाश भाटी को कहा कि समाज में एक लाख 51 हजार रुपये जमा करे. पंचायत ने रुपये जमा कराने के बाद दोबारा 11 लाख रुपये का दंड सुनाया. इसके साथ रुपये जमा नहीं कराने पर समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुनाया.


जाति पंचायत को प्यार गुजरा नागवार
आनंदपुर कालू में रहने वाले माली जाति के युवक-युवती एक दूसरे को प्यार करते थे. लेकिन समाज की पंचायत को उनका प्यार नागवार गुजरा. बाद में दोनों ने भागकर शादी कर ली. जिसके बाद समाज के पंचो ने पंचायत बुलाई. इस दौरान पंचायत में लड़के के पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. इसके अलावा समाज के ठेकेदार बने पंचों ने युवक के पिता के साथ मारपीट भी की.

23 पंचो के खिलाफ मामला दर्ज
घटना के बाद पीड़ित रामप्रकाश आनंदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे. लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया गया. जिसके बाद कोर्ट के इस्तगासे से 23 पंचो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस संबंध में जेतारण वृत्त के डीवाईएसपी सुरेश कुमार ने बताया कि मामले में अनुसंधान जारी है.

पीड़ित परिवार लगा रहे हैं आरोप
वहीं, पीड़ित परिवार का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण कानून उनकी कोई भी मदद नहीं कर पा रहा है. परिवार का आरोप है कि 15 दिन बीतने के बाद आरोपी बैखौफ खुले में घूम रहे हैं. 

गुरुवार, 4 जुलाई 2019

राजस्थान में जन्म के समय शिशु लिंगानुपात बढ़कर हुआ 948,सर्वाधिक वृद्धि बाड़मेर जिले में, बाड़मेर में लिंगानुपात 954 से बढ़कर 982 हो गया।

राजस्थान में जन्म के समय शिशु लिंगानुपात बढ़कर हुआ 948,सर्वाधिक वृद्धि बाड़मेर जिले में, बाड़मेर में लिंगानुपात 954 से बढ़कर 982 हो गया।

-वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सर्वाधिक वृद्धि बाड़मेर जिले में, बाड़मेर में लिंगानुपात 954 से बढ़कर 982 हो गया।

बाड़मेर, 04 जुलाई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रारंभ किए गए प्रिग्नेंसी एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के तहत दर्ज आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रदेश में जन्म के समय का बाल लिंगानुपात बढ़कर 948 हो गया है। इसी तरह प्रदेश में पीसीटीएस के आंकड़ों के अनुसार जन्म के समय बाल लिंगानुपात वित्तीय वर्ष 2015-16 में 929, वर्ष 2016-17 में 938 एवं वर्ष 2017-18 में 944 रहा था। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यह मात्र 888 था। प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 17 लाख प्रसव होते हैं तथा इनमें से 14 लाख 50 हजार संस्थागत प्रसव के आंकड़े पीसीटीएस के तहत ट्रेक किए जाते हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि जन्म के समय के बाल लिंगानुपात की  दृष्टि से प्रदेश का बांसवाड़ा जिला सर्वोच्च स्थान पर रहा है। बांसवाड़ा जिले में वर्ष 2018-19 के दौरान हुए शिशु जन्म में 1000 बालकों की तुलना में 1003 बालिकाओं ने जन्म लिया। जिले में वर्ष 2015-16 में लिंगानुपात 941, वर्ष 2016-17 में 964, वर्ष 2017-18 में 954 था। डॉ. शर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान जन्म के समय बाल लिंगानुपात चूरू में 986, बाड़मेर 982, हनुमानगढ़ में 977 एवं जालोर में 974 रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान गत वर्ष की तुलना में सर्वाधिक वृद्धि बाड़मेर जिले में हुई है। बाड़मेर में 954 से बढ़कर 982 हो गया। इसी प्रकार जालोर में 950 से 974, भीलवाड़ा में 933 से बढ़कर 951, प्रतापगढ़ में 921 से 938 एवं जोधपुर में 947 से बढ़कर 963 हो गया।

अब तक 152 डिकॉय ऑपरेशनः चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट की सख्ती से अनुपालना करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस एक्ट का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। अब तक 152 डिकॉय ऑपरेशन तथा इस वर्ष अब तक 11 डिकॉय ऑपरेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2019 के दौरान अब तक 978 सॉनोग्राफी केन्द्रों का निरीक्षण किया जा चुका है।

45 इंटरस्टेट डिकॉय ऑपरेशन:डा.ॅ शर्मा ने बताया की प्रदेश की पीसीपीएनडीटी इकाई द्वारा वर्ष 2015 से 2018 के दौरान 45 इंटरस्टेट डिकॉय ऑपरेशन किये गये। गुजरात में 16, दिल्ली में 1, उत्तर प्रदेश में 12, हरियाणा में 4, पंजाब में 8 तथा मध्य प्रदेश में 4 इंटरस्टेट डिकॉय ऑपरेशन किये गए है। इन डिकॉय ऑपरेशन तथा पीसीपीएनडीटी एक्ट की अनुपालना में सख्ती के कारण दलालों ने पडौसी राज्यों में जाकर भ्रूण लिंग परीक्षण के तरीकों में बदलाव किया है। प्रदेश की पीसीपीएनडीटी इकाई द्वारा अगस्त में पडौसी राज्यों के अधिकारियों के साथ इंटरस्टेट कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर अवैध रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण करवाने वालों के विरूद्ध नए सिरे से प्रभावी रूपरेखा बनायी जाएगी।




शुक्रवार, 21 जून 2019

राजस्थान के वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को तोहफा,हवाई जहाज से विदेष जाएंगे तीर्थ यात्री ,यात्रा के लिये आवेदन 5 जुलाई से आरंभ

 राजस्थान के वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रियों को तोहफा,हवाई जहाज से विदेष जाएंगे तीर्थ यात्री ,यात्रा के लिये आवेदन 5 जुलाई से आरंभ 

झालावाड़ 21 जून। राजस्थान के वरिष्ठ नागरिक अब वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत विदेष भी जा सकेगे। हवाई मार्ग से वरिष्ठ नागरिक नेपाल के काठमाडू, पषुपतिनाथ की निःषुल्क तीर्थ यात्रा कर सकेगे। बुधवार को पर्यटन एवं देवस्थान मंत्री विष्वेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में पर्यटन भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समिति की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय पारित किये गये। इस वर्ष 5 हजार यात्री हवाई जहाज से एवं 5 हजार यात्री रेल से तीर्थ यात्रा पर जायेगे। देवस्थान मंत्री की पहल पर रेल यात्रा में 2 और हवाई यात्रा में 3 नये सर्किट जोडे गये है।

यात्रा के लिये आवेदन 5 जुलाई से शुरू होगे। आवेदन देवस्थान के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से ऑनलाइन ही स्वीकार किये जायेगे।

हवाई जहाज से कांठमाडू जायेगे तीर्थ यात्री

इस वर्ष हवाई यात्रा में 3 नये सर्किट जोडे़ गये है। नेपाल में पषुपतिनाथ-काठमांडू सर्किट में तीर्थ यात्रियों को काठमंाडू तक हवाई जहाज से एवं वहा से आगे पषुपतिनाथ तक बसों के माध्यम से ले जाया जायेगा। गंगासागर -दक्षिणेष्वर काली-वेलूर मठ-कोलकता सर्किट में यात्रियों को कोलकाता तक हवाई मार्ग से और वहा से आगे बस के माध्यम से ले जाया जायेगा। देहरादून- हरिद्वार-ऋषिकेष सर्किट में तीर्थ यात्रियों को देहरादून तक हवाई जहाज में एवं वहा से आगे बस के माध्यम से ले जाया जायेगा। गौरतलब है कि यह 3 नये सर्किट इस वर्ष योजना में शामिल किये गये है इससे पूर्व योजना में 6 सर्किट शामिल थे जिन्हे बढ़ाकर 9 कर दिया गया है।

रेल यात्रा में 2 नये सर्किट जोड़ेः-

वर्ष 2019 के लिये प्रस्तावित वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा में रेल यात्रा में 2 नये सर्किट जोड़े गये है। श्रीगोवर्धन-नंदगॉव-बरसाना-मथुरा-वृंदावन सर्किट एवं अजमेर (अजमेंर शरीफ) दिल्ली (शेख निजामुदद्ीन औलिया की दरगाह) एवं फतेहपुर सीकरी आगरा (षेेख सलीम चिष्ती की दरगाह) सर्किट को इस वर्ष योजना में शामिल किया गया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व रेल यात्रा में 6 सर्किट शामिल थे। जिन्हें बढ़ाकर 8 कर दिया गया है।

65 वर्ष के यात्री भी ले जा सकेगे सहायकः-

योजना के तहत रेल से जाने वाले 65 वर्ष या इससे अधिक के नागरिक भी अब अपने साथ सहायक ले जा सकेगे। गौरतलब है कि इससे पूर्व 70 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के यात्रियों को ही सहायक ले जाने की अनुमति थी। मुख्य यात्री के साथ रेल यात्रा में जाने वाले पुरूष सहायक की आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष से 50 वर्ष तक रखी गई है। इसके साथ ही सेवानिवृत्त सरकारी कार्मिक भी योजना का लाभ उठा सकेगे। इससे पूर्व सेवानिवृत्त सरकारी कार्मिक योजना का  लाभ उठाने के लिये पात्र नहीं थे।

पत्रकारों के लिये 5-5 प्रतिषत सीटे आरक्षितः-

तीर्थ यात्रा योजना में हवाई एवं रेल मार्ग पर 5-5 प्रतिषत सीटे पत्रकारों के लिये आरक्षित की गई है। योजना का लाभ 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के पत्रकार ले सकेगे।

व्हाटसअप ग्रुप से होगी मॉनिटरिंग-

यात्रा से जुडे़ सभी अधिकारी एवं यात्रियों के साथ गये हुये अधिकारी एवं कार्मिक व्हाटसअप ग्रुप के माध्यम से जुडे़ रहेगे ताकि उनके बीच समन्वय बना रहे। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिये नियन्त्रण कक्ष स्थापित किया जायेगा। संयुक्त शासन सचिव या सहायक शासन सचिव को इस नियन्त्रण कक्ष का नोडल अधिकारी नियुक्ति किया जायेगा।

ग्रामीण इलाकों तक पहुंचे योजना की जानकारीः- विष्वेन्द्र सिंह

देवस्थान एवं पर्यटन मंत्री ने देवस्थान विभाग के अधिकारियों को निर्देष दिये है कि तीर्थ यात्रा योजना के प्रचार-प्रसार के लिये जिला कलेक्टरों से समन्वय स्थापित कर हर जिले में प्रेस वार्ता आयोजित करवाई जाये। उन्होंने निर्देष दिये है कि योजना का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाये ताकि दूर दराज के ग्रामीण इलाकों तक भी इसकी जानकारी पहुंचे।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णयः-

किन्ही परिस्थितियों में रेल एवं हवाई यात्रा के दौरान स्थान रिक्त रहने पर आवष्यकता अनुसार ऐसे इच्छुक पात्र व्यक्ति जिन्होंने आवेदन नहीं किया है लेकिन यात्रा के आवेदन के पात्र है, ऐसे व्यक्ति को रिक्त रही सीटों पर राज्य स्तरीय अनुमोदन उपरान्त भिजवाया जा सकेगा।

हवाई यात्रा के दौरान 40 यात्रियों पर 1 अनुरक्षक 40 से 80 यात्रियों के लिये 2 एवं 80 से ज्यादा वरिष्ठ यात्रियों के लिये 3 अनुरक्षक जायेगे।

इस दौरान प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा, आयुक्त कृष्ण कुणाल देवस्थान, पर्यटन एवं अन्य विभागों के आलाधिकारी उपस्थित रहे।

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वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना

60 वर्ष से अधिक के आयु के नागरिक होगें योजना के लिये पात्र

देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक से करना होगा आवेदन

झालावाड़ 20 जून। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना के लिये आवेदन की प्रक्रिया 5 जुलाई से शुरू होगी। आवेदन देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किये जायेगे। आयुक्त देवस्थान कृष्ण कुणाल ने बताया कि आवेदक को आवेदन पत्र में अपनी पसंद के तीन तीर्थ स्थल वरीयता क्रम में अंकित करने होगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा इस योजना के लिये चयनित यात्रियों को हवाई एवं रेल सेवा के माध्यम से निःषुल्क तीर्थ यात्रा करवाई जाती है।

यह होगी पात्रता

योजना के अन्तर्गत आवेदन के लिये आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी होना एवं 60 वर्ष से अधिक आयु का होना जरूरी है। आवेदक आयकर दाता न हो और न ही आवेदक ने योजना का पूर्व में लाभ उठाया हो। आवेदक यात्रा हेतु शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो और किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित न हो। ऐसे आवेदक जिन्होंने विगत वर्षो में इस योजना के लिये आवेदन तो किया है किन्तु उनका नंबर उक्त योजना में यात्रा के लिये चयन े नहीं हुआ है वे आवेदन करने के लिये पात्र होगे।

रेल यात्रा के लिये आवेदन करने वाला अपने साथ जीवनसाथी अथवा सहायक में से एक को ले जाने के लिये अनुमत होगा। लेकिन आवेदन करते समय ही आवेदक को अपने आवेदन में उसका नाम बताना होगा।

आवेदन की प्रक्रिया

आवेदन देवस्थान विभाग के पोर्टल पर दिये गये लिंक के माध्यम से केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किये जायेगे। आवेदक व उसके साथ जाने वाले सहायक अथवा जीवनसाथी के पास आधार कार्ड/भामाषाह कार्ड आवष्यक रूप से होना चाहिए। आवेदन पत्र मंे आवेदक को अपनी पंसद के तीन तीर्थ स्थल वरीयता क्रम में अंकित करने होगे।

चयन की प्रक्रिया

यात्रियों का चयन जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जायेगा। प्रत्येक स्थान की यात्रा के लिये जिला वार कोटा निर्धारित किया जायेगा। निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर लॉटरी (कम्प्यूटराईज्ड ड्रॉ ऑफ लॉट्स) द्वारा यात्रियों का चयन किया जायेगा। कोटे के 100 प्रतिषत अतिरिक्त व्यक्तियों की प्रतीक्षा सूची भी बनाई जायेगी। 

सोमवार, 10 जून 2019

foto सचिन पायलट के देसी ठाठ,जालौर के कासेला गांव में किसान जयकिशन के घर पर पायलट का ये देसी अंदाज

 फोटो सचिन पायलट के देसी ठाठ,जालौर के कासेला गांव में किसान जयकिशन के घर पर पायलट का ये देसी अंदाज 

फेसबुक पर वायरल हुए डिप्टी CM सचिन पायलट के देसी ठाठ, खाट पर खाना-पीना और सेविंग स्टाइल
राजस्थान के डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट का ठेठ देसी अंदाज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. खेत के बीच चारपाई (खाट) पर बैठे हुए बातचीत करते हुए, खाना खाते हुए और रात को खुले में उसी खाट पर आराम करते फोटो तेजी से वायरल हो रहे हैं.







राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट का ठेठ देसी अंदाज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. पायलट के फॉलोवर्स के बीच उनके खेत के बीच चारपाई (खाट) पर बैठे हुए बातचीत करते, खाना खाते हुए और रात को खुले में उसी खाट पर आराम करते फोटो तेजी से वायरल हो रहे हैं. दरअसल, पायलट अपने दो दिवसीय मारवाड़ा दौरे पर ग्रामीण अंचल में रुके हैं. इस दौरान वे किसानों के बीच उनके खेत में रात को बातचीत करते नजर आए. रात का खाना, सोना और फिर सुबह दातुन और सेविंग भी खुले आसमान के नीचे करते दिखे. बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस दौरान दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं. वहीं डिप्टी सीएम पायलट प्रदेश में ग्राउंड पर लोगों के बीच नजर आ रहे हैं. अगली स्लाइड्स में जालौर के कासेला गांव में किसान जयकिशन के घर पर पायलट का ये देसी अंदाज को बयां करती तस्वीरों के साथ पढ़ें- पायलट की यात्रा की कहानी




पायलट ने रविवार को सांचोर के ग्राम कासेला में रात्रि विश्राम के दौरान ग्रामीणों से मुलाकात की.





किसान जयकिशन के यहां पायलट रुके और वहीं रात बिताई. सोमवार को पायलट ने कहा कि दो साल पहले भी वे इसी गांव में रूके थे.







पायलट ने यहीं पर रात का भोजन किया. सुबह उन्होंने किसान परिवार के लोगों एवं ग्रामीणों के द्वारा किये गए आदर-सत्कार के लिए आभार व्यक्त किया.







मारवाड़ दौरे पर आए सचिन पायलट ने पहले दिन सांचौर के समीप कासेला गांव में किसान के बीच समय बिताया.








सचिन पायलट यहां खुले आसमान के नीचे खेतो में चारपाई पर सोए तो वही अपने पुराने मित्र जयकिशन बिश्नोई के साथ खेत में बैठकर ही खाना भी खाया. सोशल मीडिया पर शेयर इस तस्वीर में पायलट के देसी अंदाज के साथ बोतलबंद पानी भी नजर आ रहा है.







दरअसल सचिन पायलट दो दिवसीय सिरोही, जालौर और पाली दौरे पर हैं.







इस दौरान आमजन से मिलने के साथ विभागीय अधिकारियों से समीक्षा बैठक के दौरान आमजन के कार्यों को जल्द पूरा करने के लिए निर्देशित कर रहे हैं.








पायलट का यह देसी अंदाज सोमवार को सभी को पसंद आया क्योंकि दो साल पहले जय किशन बिश्नोई से फिर उनके खेत पर आने का किया वादा पायलट ने पूरा किया. (फोटो- सुबह दातुन करते हुए.)







दो साल पहले जब पायलट सिर्फ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे तब उन्होंने इसी खेत में रात बिताई थी अब जब वे उप मुख्यमंत्री बने हैं और फिर से जालौर जिले के दौरे पर हैं तो वह अपने पुराने मित्र से मिलना नहीं भूले.







सचिन पायलट रविवार को पूरे दिन एक्शन में नजर आए. दिन भर नो आराम-ओनली काम की रणनीति बनाकर जनता के बीच पहुंचे और शाम को फिर खेतों में किसान के रूप में रुक कर सरकार और आमजन के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया.







फोटो- पायलट दो साल बाद फिर एक बार रात को वहीं पर रुके और किसान जयकिशन बिश्नोई साथ भोजन किया.

सोमवार, 17 दिसंबर 2018

गौरवमयी इतिहास का प्रतिक गागरोन फोर्ट ,दुर्ग शौर्य ही नहीं, भक्ति और त्याग की गाथाओं का साक्षी

गौरवमयी इतिहास का प्रतिक गागरोन फोर्ट ,दुर्ग शौर्य ही नहीं, भक्ति और त्याग की गाथाओं का साक्षी






गागरोन दुर्ग राजस्थान के झालावाड़ में स्थित है। यह प्रसिद्ध दुर्ग 'जल-दुर्ग' का बेहतरीन उदाहरण है। गागरोन दुर्ग हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। यहाँ सूफ़ी संत मीठे शाह की दरगाह भी है। मधुसूदन और हनुमान जी का मंदिर भी देखने लायक है। विश्व धरोहर में शामिल किए गए इस अभेद्य दुर्ग की नींव सातवीं सदी में रखी गई थी और चौदहवीं सदी तक इसका निर्माण पूर्ण हुआ। यहाँ मोहर्रम के महीने में हर साल बड़ा आयोजन होता है, जिसमें सूफ़ी संत मीठे शाह की दरगाह में दुआ करने सैंकड़ों की संख्या में मुस्लिम एकत्र होते हैं। वहीं मधुसूदन और हनुमान मंदिर में भी बड़ी संख्या में हिन्दू माथा टेकते हैं।

स्थिति तथा निर्माण
झालावाड़ से 10 कि.मी. की दूरी पर अरावली पर्वतमाला की एक सुदृढ़ चट्टान पर काली सिन्ध और आहू नदियों के संगम पर बना यह क़िला जल-दुर्ग की श्रेणी में आता है। इस क़िले का निर्माण कार्य डोड राजा बीजलदेव ने बारहवीं सदी में करवाया था। दुर्गम पथ, चौतरफ़ा विशाल खाई तथा मजबूत दीवारों के कारण यह दुर्ग अपने आप में अनूठा और अद्भुत है। यह दुर्ग शौर्य ही नहीं, भक्ति और त्याग की गाथाओं का साक्षी है।

विस्तार
गागरोन दुर्ग झालावाड़ तक फैली विंध्यालच की श्रेणियों में एक मध्यम ऊंचाई की पठारनुमा पहाड़ी पर निर्मित है। दुर्ग 722 हेक्टेयर भूमि पर फैला हुआ है। गागरोन का क़िला जल-दुर्ग होने के साथ-साथ पहाड़ी दुर्ग भी है। इस क़िले के एक ओर पहाड़ी तो तीन ओर जल घिरा हुआ है। क़िले के दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं। एक द्वार नदी की ओर निकलता है तो दूसरा पहाड़ी रास्ते की ओर। क़िला चारों ओर से ऊंची प्राचीरों से घिरा हुआ है। दुर्ग की ऊंचाई धरातल से 10-15 से 25 मीटर तक है। क़िले के पृष्ठ भाग में स्थित ऊंची और खड़ी पहाड़ी ’गिद्ध कराई’ इस दुर्ग की रक्षा किया करती थी। पहाड़ी दुर्ग के रास्ते को दुर्गम बना देती है।

गौरवमयी इतिहास
गागरोन दुर्ग अपने गौरवमयी इतिहास के कारण भी जाना जाता है और उल्लेखनीय स्थान रखता है। यह दुर्ग खींची राजपूत क्षत्रियों की वीरता और क्षत्राणियों की महानता का गुणगान करता है। कहा जाता है एक बार यहां के वीर शासक अचलदास खींची ने शौर्य के साथ मालवा के शासक हुशंगशाह से युद्ध किया। दुश्मन ने धर्म की आड़ में धोखा किया और कपट से अचलदास को हरा दिया। तारागढ़ के दुर्ग में राजा अचलदास के बंदी बनाए जाने से खलबली मच गई। राजपूत महिलाओं को प्राप्त करने के लिए क़िले को चारों ओर से घेर लिया गया; लेकिन क्षत्राणियों ने संयुक्त रूप से 'जौहर' कर शत्रुओं को उनके नापाक इरादों में कामयाब नहीं होने दिया। इस तरह यह दुर्ग राजस्थान के गौरवमयी इतिहास का जीता जागता उदाहरण है।

एकता का प्रतीक
इस अभेद्य दुर्ग की नींव सातवीं सदी में रखी गई और चौदहवीं सदी तक इसका निर्माण पूर्ण हुआ। यह दुर्ग हिन्दू-मुस्लिम एकता का ख़ास प्रतीक है। यहां मोहर्रम के महीने में हर साल बड़ा आयोजन होता है, जिसमें सूफ़ी संत मीठेशाह की दरगाह में दुआ करने सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम एकत्र होते हैं। वहीं मधुसूदन और हनुमान मंदिर में भी बड़ी संख्या में हिन्दू माथा टेकते हैं। इसके अलावा यहां गुरू रामानंद के आठ शिष्यों में से एक संत पीपा का मठ भी है।

शिल्पकला
दुर्ग में अठारवीं और उन्नीसवीं सदी में झाला राजपूतों के शासन के समय के बेलबूटेदार अलंकरण और धनुषाकार द्वार, शीश महल, जनाना महल, मर्दाना महल आदि आकर्षित करते हैं। यहां उन्नीसवीं सदी के शासक जालिम सिंह झाला द्वारा निर्मित अनेक स्थल राजपूती स्थापत्य का बेजोड़ नमूना हैं। इसके अलावा सोलवहीं सदी की दरगाह व अठारहवीं सदी के मदनमोहन मंदिर व हनुमान मंदिर भी अपनी बनावट से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राजस्थान के अन्य क़िलों की भांति गागरोन क़िले में भी अनेक स्मारक, जलाशय, कुएं, भंडारण के लिए कई इमारतें और बस्तियों के रहने लायक स्थल मौजूद हैं।

मौत का क़िला
गागरोन दुर्ग की ख़ात विशेषता यह भी है कि इस दुर्ग का इस्तेमाल अधिकांशत: शत्रुओं को मृत्युदंड देने के लिए किया जाता था। गागरोन के क़िले का स्थापत्य बारहवीं सदी के खींची राजपूतों की डोडिया और सैन्य कलाओं की ओर इंगित करता है। प्राचीरों के भीतर स्थित महल में राजसभाएं लगती थीं और किनारे पर स्थित मंदिर में राजा-महाराजा पूजा, उपासना किया करते थे।

आकर्षण
गागरोन का क़िला अपने प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ रणनीतिक कौशल के आधार पर निर्मित होने के कारण भी विशेष स्थान रखता है। यहां बड़े पैमान पर हुए ऐतिहासिक निर्माण और गौरवशाली इतिहास पर्यटकों का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करते हैं। दुर्ग में 'गणेश पोल', 'नक्कारखाना', 'भैरवी पोल', 'किशन पोल', 'सिलेहखाना का दरवाज़ा' आदि क़िले में प्रवेश के लिए महत्पवूर्ण दरवाज़े हैं। इसके अलावा 'दीवान-ए-आम', 'दीवान-ए-ख़ास', 'जनाना महल', 'मधुसूदन मंदिर', 'रंग महल' आदि दुर्ग परिसर में बने अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं। क़िले की पश्चिमी दीवार से सटा 'सिलेहखाना' उस दौर में हथियार और गोला-बारूद जमा करने का गोदाम था। एक तरफ़ गिद्ध कराई की खाई से सुरक्षित और तीन तरफ़ से काली सिंध और अहू नदियों के पानी से घिरे इस दुर्ग की ख़ास विशेषता यह है कि यह दुर्ग जल की रक्षा भी करता रहा है और जल से रक्षित भी होता रहा है। यह एक ऐसा दुर्लभ दुर्ग है, जो एक साथ जल, वन और पहाड़ी दुर्ग है। दुर्ग के चारों ओर मुकुंदगढ़ क्षेत्र स्थित है।

गुरुवार, 8 नवंबर 2018

राजस्थान प्रदेश में 53 फीसदी वोटर 18 से 40 तक की उम्र के, फिर भी पार्टियां युवाओं को तवज्जो नहीं देती

राजस्थान प्रदेश में 53 फीसदी वोटर 18 से 40 तक की उम्र के, फिर भी पार्टियां युवाओं को तवज्जो नहीं देती
Most young voters in Jaipur
राजस्थान के 2.54 करोड़ युवा मतदाता नई सरकार के चयन में इस बार अहम रोल अदा करेंगे, जिनकी आयु 18 से 40 साल के बीच है। वर्तमान में युवा मतदाताओं की संख्या के मामले में जयपुर जिला टॉप पर है। इस अकेले एक ही जिले के 19 विधानसभा क्षेत्रों में 24.80 लाख युवा मतदाता हैं। अगर बात विधानसभा क्षेत्रों की जाए तो युवा मतदाताओं की संख्या के लिहाज से प्रदेशभर में झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र टॉप पर है। यहां 1.94 लाख युवा मतदाता हैं। प्रदेश में इस बार कुल 4 करोड़ 72 लाख 20 हजार 597 मतदाता हैं।

सबसे अधिक युवा मतदाताओं वाले जिले

जिले का नाम कुल मतदाता युवा मतदाता


जयपुर 4556662 2480394

अलवर 2444927 1335890

नागौर 2364849 1262913

जोधपुर 2442544 1310038

सीकर 1979209 1067154

सबसे कम युवा मतदाताओं वाले जिले



जिले का नाम कुल मतदाता युवा मतदाता

प्रतापगढ़ 265996 265996

बूंदी 636093 340428

जैसलमेर 418912 247260

सिरोही 715797 383741

राजसमंद 850323 438122

सबसे अधिक युवा मतदाताओं वाले विधानसभा क्षेत्र
विधानसभा कुल मतदाता युवा मतदाता

झोटवाड़ा 356039 194619

बगरु 293929 169320

विद्याधर नगर 318501 169261

सांगानेर 301559 165198

बूंदी 286318 157335



सबसे कम युवा मतदाताओं वाले विधानसभा क्षेत्र

विधानसभा कुल मतदाता युवा मतदाता


केशोराय पाटन 102999 53874

जोधपुर 197565 92845

किशनपोल 196306 100408

खेतड़ी 202777 101785

अजमेर दक्षिण 200907 102300


राजस्थान की स्थिति एक नजर में

कुल मतदाता 47220597

18 से 40 आयु तक के युवा मतदाता 25481736

युवा मतदाताओं का प्रतिशत 53.96%

कुल बूथ 51796

नए मतदाता जुड़े 4083970

दलों की स्थिति

भाजपा : पार्टी में प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी की उम्र 75 साल है। कार्यकारिणी के अधिकांश पदाधिकारी की उम्र 50 साल से ज्यादा है।

कांग्रेस : कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष की कमान तो पार्टी ने युवा नेता सचिन पायलट को थमा रखी है जिनकी आयु 40 साल है, लेकिन कार्यकारिणी में ऐसे नेताओं की भरमार है, जिनकी आयु 50 साल से अधिक हैं।

युवा नेताओं की ना मंत्रिमंडल में उचित भागीदारी और ना ही विधायकी में

2008 में 40 की उम्र तक के कुल 36 विधायक थे

विधानसभा में युवा विधायकों का प्रतिशत 18 प्रतिशत

2008 में मंत्रिमंडल की औसत उम्र 59 साल

2013 में 40 की आयु तक के कुल 35 विधायक

2013 में मंत्रिमंडल की औसत उम्र 60 साल