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शनिवार, 11 अगस्त 2018

बाड़मेर सरहद से आई खुशियों भरी खबर* कई दशकों बाद सरहद पर अमृत धारा बही,लोगो को उम्मीदे जगी ,पेयजल समस्या से स्थायी छुटकारा मिलेगा*





 बाड़मेर सरहद से आई खुशियों भरी खबर*

कई दशकों बाद सरहद पर अमृत धारा बही,लोगो को उम्मीदे जगी ,पेयजल समस्या से स्थायी छुटकारा मिलेगा*


चन्दन सिंह भाटी
बाड़मेर भारत पाक सीमा पर चोहटन क्षेत्र के गफनो के चौदह गांवो में पेयजल समस्या का दशकों के अभिशाप खत्म हो गया।सरहद से खुशियों भरी खबर आई।।जब छोटा भोजरिया और भोजरिया में परंपरागत पेयजल स्रोत को जलदाय विभाग द्वारा गहरा कराने के साथ ही इन कुओं से बरसे अमृत ने सरहदी ग्रामीणों को नए जीवन की सौगात दी दी।।हम बात कर रहे सरहद इलाके के पेयजल समस्या से अभिशप्त गफन क्षेत्र के भोजरिया ग्राम पंचायत की।इस क्षेत्र के 14 गांवों में सदा पानी का अभाव रहा। पानी को तालों में कैद करके रखा जाता रहा।मीडिया के लिए इसी क्षेत्र से हर साल कैद में पानी की खबरे निकलती रही। मगर इस बार जलदाय विभाग ने सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत प्राचीन और परंपरागत पेयजल स्रोतों को गहरा करने की योजना ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुई।।भोजरिया और छोटा भोजरिया में ग्राम पंचायत योजना में ओपन वेलो का निर्माण कई साल पहले किया गया था।।मगर बोरिंग के बाद भी इन कुओं में पानी नही आया तो इन्हें स्थायो रूप से बन्द कर दिया।।इस बार जिला प्रशासन द्वारा सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों के परंपरागत पेयजल स्रोतों को गहरा करने की योजना को शामिल कर बजट आवंटित किया।।बजट आवंटन के साथ अधीक्षण अभियन्ता सोनाराम बेनीवाल की देख रेख में भोजरिया और छोटा भोजरिया गांवो के लंबे अरसे से बन्द पड़े ओपन वेल को गहरा करने का कार्य आरंभ किया।।करीब दो सौ फीट तक गहरा करने पर इन कुओं से अमृत की धारा बह उठी।।इन कुओं से निकले पानी ने सरहदी इलाको के ग्रामीणों की आंखों में नई चमक पैदा की वही नई जिन्दगि दी।।ये लीग आज भी दस से पन्द्रह किलोमीटर पैदल चल कर पीने के पानी की व्यवस्था करते थे।।शुक्रवार को तकनीकी विशेषज्ञ सोनाराम बेनीवाल की मेहनत रंग लाई।।धरती से मीठे पानी के झरने भ उठे।।कुओं में पानी आया देख ग्रामीण खुशी से सरोबार झूम उठे।।शायद इन ग्रामीणों को कभी उम्मीद रही हो कि इन नकारा पड़े ओपन वेलो में भी पानी आएगा।अधीक्षण अभियंता सोनाराम बेनीवाल ने बताया कि सरहदी इलाके के इन गांवों में पानी की सदैव समस्या रही।विभागीय योजनाए भी यहां सफल नही रही। समस्या के समाधान के लिए परंपरागत पेयजल स्रोत ही एक उम्मीद की किरण थी।।प्रारंभिक तौर पे भोजरिया और छोटा भोजरिया में बंद पड़े ओपन वेल को गहरा करवाया ।करीब दो सौ फीट पर पानी आ गया।।लोगो के लिए यह नव जीवन जैसा है। इस क्षेत्र में पानी का लेवल अच्छा है इसलिए उम्मीदे बलवती है।।नियमो में आने वाले परंपरागत पेयजल स्रोतों को गहरा करवाने का कार्य जारी रखा जाएगा।।कई दशकों से पेयजल समस्या से पीड़ित इन गांवों में अब समस्या नही रहेगी विश्वास है।।*