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शनिवार, 26 जुलाई 2014

बाड़मेर सड़क हादसे में वायुसेना के दो अधिकारियो की मौत

बाड़मेर सड़क हादसे में वायुसेना के दो अधिकारियो की मौत 


बाड़मेर सरहदी जिले बाड़मेर में जोधपुर रोड पर स्थित नागाणा थाना क्षेत्र के माडपुरा गांव के समीप शनिवार प्रातः वाहन के आगे ऊँठ आ जाने से वाहन पलट कर क्षतिग्रस्त हो गया तथा उसमे सवार वायुसेना के दो अधिकारियो की मौत हो गयी जबकि तीन जने घायल हो गए। सूत्रानुसार नागाणा थाना क्षेत्र के माडपुरा गांव के समीप उत्तरलाई वायुसेना के वाहन में सवार वायुसेना के अधिकारी जा रहे थे ,माडपुरा सरहद पर यकायक सड़क पर ऊँठ आ जाने से वाहन से टक्कर गया जिससे वाहन पलटी खा गया ,जिससे वहां में सवार लोग बुऋ तरह घायल हो गए ,इनमे से दो जनो ने दम  तोड़ दिया जबकि तीन घायलो को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। 

मंगलवार, 28 मई 2013

वायुसेना का बाढ़ राहत प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर का आयोजन



वायुसेना का बाढ़ राहत प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर का आयोजन



जोधपुर वायुसेना स्टेशन, जोधपुर में वायुसेना एवं नागरिक प्रशासन के अधिकारियों के लिए आज बाढ़ राहत एवं बचाव की जानकारी हेतु बाढ़ राहत प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर को आयोजित करने का उददेश्य हैलीकाप्टर दल को बाढ़ राहत संबंधित प्रशिक्षण देना एवं राज्य सरकार के अधिकारियों को प्राकृतिक आपदाओं जैसे भारत के पशिचमी क्षेत्र में बाढ़ आदि से निपटने के लिए उचित कदम उठाना है। शिविर में सिविल आपदा प्रबंधनद ल के साथ भारतीय वायुसेना के वायुयानों की क्षमताओं एवं सीमाओं के बारे में तथा विमानों के संचालन में से मौसम संबंधी सिथतियों पर विस्तृत चर्चा की।


वर्ष 2007 में जोधपुर वायुसेना स्टेशन के हैलीकाप्टरों ने राजस्थान एवं गुजरात के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में लगभग 250 लोगों की जान बचार्इ। वर्ष 2008 के दौरान वायुसेना के हैलीकाप्टरों ने पूर्णिया (बिहार) में बाढ़ग्रस्त जनसंख्या को राहत प्रदान करने कें लिए 106 टन खाध सामग्री हैलीकाप्टर के जरिये वितरित की। वर्ष 2009 में हैलीकाप्टरों ने भारत के दक्षिणी राज्यों, विशेष रूप से आंध्रप्रदेश में हैलीकाप्टरों के जरिये 46 लाख टन खाध पैकेट, जल एवं अन्य राहत सामग्री वितरित की तथा कर्इ बहुमूल्य मानव जीवन को बचाया। विजयवाड़ा में किसी भी प्रकार का हैलीपेड न होने की सिथति में भी वायुसेना के हैलीकाप्टरों ने राहत कार्मिकों एवं बाढ़-राहत उपकरणों को नीचे उतारा और बाढ़ग्रस्त गांवों में लगातार प्रभावित जन-जीवन से संपर्क बनाए रखा। सितम्बर 2010 में जोधपुर वायुसेना के हैलीकाप्टरों ने 22 दिन से फंंसे कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालुओं को वहां से निकालकर अन्य सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उत्तरांचल में रोड़ अतिवृषिट के कारण अवरूद्ध हो गर्इ थी। उसी माह में हैलीकाप्टरों ने अल्मोड़ा के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में 6-7 टन दवाइयों तथा खाध सामग्री का वितरण किया।


वायुसेना स्टेशन, जोधपुर में एडवांस्ड लाइट हैलीकाप्टर (ए एल एच) निकट भविष्य में शामिल हो जाऐंगे जिससे कि भारतीय वायुसेना को बाढ़-राहत त्रासदी प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आ सकेगा। इसके अतिरिक्त वायुसेना स्टेशन, फलौदी (राजस्थान) के वायुबेस में एम आर्इ-75 हैलीकाप्टर (भारतीय वायुसेना का अधतन हैलीकाप्टर) की तैनाती हुर्इ है, इससे राजस्थान एवं गुजरात क्षेत्र में बाढ़-राहत त्रासदी प्रबंधन में वायुसेना की क्षमता को अतिरिक्त बल प्राप्त होगा।





इस शिविर में भारतीय वायुसेना एवं राजस्थान के सभी जिलों से 40 अधिकारी एवं भारतीय वायुसेना के 20 अधिकारी शामिल हुए। उन्हें बाढ़-राहत उपकरणों से सुसजिजत मिग-17 तथा चेतक हैलीकाप्टरों के स्थैतिक प्रदर्शन के अलावा लोगों को बाढ़ से निकालने और उन्हें अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का उड़ान अभ्यास भी करवाया गया।


मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

दुनिया देखेगी वायुसेना की ताकत व क्षमता



दुनिया देखेगी वायुसेना की ताकत व क्षमता


आयरन फीस्ट में प्रतिद्वंद्वी देश देखेंगे एयरफोर्स की ताकत व रण कौशल 


 जैसलमेर   पश्चिमी मोर्चे के समीप पोकरण स्थित चांधन फील्ड फायरिंग रेंज में 22 फरवरी को होने वाले वॉर गेम 'आयरन फीस्ट' में भारतीय वायुसेना प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी देश चीन व पाकिस्तान को अपनी हवाई ताकत दिखाएगी।'आयरन फीस्ट' यानी 'फौलादी मुक्का' में भारत तीन साल में बढ़ी हवाई ताकत का प्रदर्शन कर एशिया में अपनी धाक जमाने का सार्थक प्रयास करेगा। वहीं इसमें वायुसेना अपने लड़ाकू विमानों व योद्धाओं की क्षमता परखेगी। 'आयरन फीस्ट' के बाद 'लाइव वायर' में समूची वायुसेना अपनी स्थापना के 80 वें साल में एकीकृत रूप से ताकत दिखाएगी। 

युद्धाभ्यास का मकसद

: पड़ोसी देश व दुनिया को फोर्स की ताकत दिखाना।

: कूटनीतिक संदेश देना।

: फोर्स का हर स्तर पर समय के साथ समन्वय।

: हथियारों की क्षमता परखना।

: जवानों व अफसरों का युद्धक प्रशिक्षण परखना।

: युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाओं में समन्वय।

हर फोर्स का अलग युद्धाभ्यास

: थलसेना में यूनिट से कमान लेवल तक युद्धाभ्यास होता है

: वायुसेना में विंग से कमान स्तर तक युद्धाभ्यास

: नौसेना में कमान स्तर पर होता है युद्धाभ्यास

बड़े स्तर के युद्धाभ्यास की सूचना

थलसेना जब यूनिट से डिवीजन स्तर का युद्धाभ्यास करती है तो इस बारे में पड़ोसी देशों को बताना जरूरी नहीं है। कोर व कमान स्तर का युद्धाभ्यास होने पर पड़ोसी देशों को बताना जरूरी होता है। वायुसेना व नौसेना भी कमान लेवल के युद्धाभ्यास की जानकारी पड़ोसी मुल्क को देते हैं।

कागज से काल्पनिक रणक्षेत्र

थलसेना कमान लेवल से बड़े स्तर पर मैदान में काल्पनिक युद्ध नहीं लड़ती है। साल में एक बार थलसेना प्रमुख सभी कमान व कोर कमांडर को किसी स्थान पर बुलाते हैं। वहां वॉर रूम में युद्ध पर मंथन होता है। कागजों पर उकेरी गई रणनीति की फौज काल्पनिक रणक्षेत्र में आजमाइश करती है। नौसेना व वायुसेना भी ऐसा ही करती हैं। मित्र देशों के साथ संयुक्त रूप से युद्धाभ्यास कर तकनीक व युद्ध के तरीकों का आदान-प्रदान करते हैं।

थार में ही 'मैदान-ए-जंग'

देश में तीनों सशस्त्र सेनाओं के करीब 60 फायरिंग रेंज हैं, लेकिन पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज जितनी बड़ी जगह कहीं नहीं है। यही कारण है कि थलसेना व वायुसेना को हर स्तर के युद्धाभ्यास के लिए यहीं आना पड़ता है। पिछले साल नौसेना ने भी अपने कमांडो के साथ यहां युद्धाभ्यास किया था।