चुनाव आयोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चुनाव आयोग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

कर्नल सोनाराम द्वारा नामांकन हलफनामे में दिए गलत तथ्य मुख्य निर्वाचन आयुक से कि शिकायत

कर्नल सोनाराम द्वारा नामांकन हलफनामे में दिए गलत तथ्य 

मुख्य निर्वाचन आयुक से कि शिकायत 


बाड़मेर बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा नामांकन पत्र के साथ रिटर्निंग अधिकारी को पेश हलफनामे में गलत तथ्य पेश कर चुनाव आयोग को गुमराह किया हें। इस आशय कि शिकायत कैलाश मेहता ने जिला निर्वाचन अधिकारी बाड़मेर को पेश कि। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा जो हलफनामा पेश किया गया उसमे कर्नल सोनाराम ने चल सम्पति जो कि एक करोड़ पचपन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस हें उसे एक करोड़ बावन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस लिखा गया हें। इस तरह से उन्होंने अपनी चल सम्पति तीन लाख कम बता कर चुनाव आयोग के दिशा निर्देशो कि धजिया उड़ाई हें। उन्होंने बताया कि कि उन्होंने अपने हलपनामे में अपनी और पत्नी कि अचल सम्पति का जो कि सीरियल नंबर 8 (v 1 ) नहीं बताया गया। जनता उनकी और उनकी पत्नी कि समस्त सम्पतियो का योग जानने में असमर्थ रही हेह। 

मेहता के अनुसार हलपनामे के पार्ट b में अचल सम्पति को दो भागो में विभाजित करना था स्व अर्जित और दूसरी विरासत में मिली सम्पति ,मगर उन्होंने कालम के आगे नील लिखा हें। मेहता के अनुसार एक जगह उन्होंने अपनी और अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बताई हें जिसमे खुद कि अचल सम्पति उन्तीस लाख नब्बे हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग दो करोड़ निन्यानवे लाख होता हें। इसी तरह अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बरानवे लाख दस हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग नौ करोड़ इक्कीस लाख होता हें.उन्होंने बताया कि हलपनाने के आधार पर विभिन समाचार पत्रो ने उनकी हैल्पनामे के योग के आधार पर जानकारिया प्रकाशित कि हें। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी और उनकी पत्नी पर देहली के पुलिस थाना में भारतीय दंड संहिता कि धारा 420 /४६७/४६८/४७१/120b के अनतर्गत फाईल किया जाना बताया हें ,इन्होने अपनी और दिए कथन में बताया कि यह प्राथमिकी इनके चचेरे भाई ने सम्पति विवाद के कारन दायर कि गयी हें वास्तव में सम्पति विवाद का निपटारा सिविल कोर्ट करती हैंऔर उसमे धाराएं लागू नहीं होती हें ,उनके खिलाफ फ़ाइल प्राथमिकी के तथ्यो को छुपाया गया हें उन्होंने बताया कि इनके हलपनामे को चौहटन के ऑथ कमिसनर द्वारा प्रमाणित किया गया हें। जबकि हलपनामा बाड़मेर में दस्तखत किया बताया गया हें। चौहटन का ऑथ कमिश्नर उसी क्षेत्र में दस्तखत किये हैल्पनामे को प्रमाणित कर सकता हें।

 ंएह्ता ने बताया कि इसी तरह हलपनामे के हेड शीर्ष पे जिस सदन के लिए चुनाव लड़ रहे हें उस पर पार्लियामेंट भरा हें जबकि लोकसभा भरा जाना चाहिए था ,कैलाश मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर जो कि निर्वाचन अधिकारी भी हें ने हलपनामे में दर्ज गलतियों को सुधर करने का कम करना चाहिए था जो कि छबीस मार्च को तीन बजे तक प्रत्यासी को अवसर देकर हैल्पनामा कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए था ,मगर राज्य सरकार के दबाव में निर्वाचन अधिकारी ने न तो हलपनामे कि जांच नहीं कि। इस तरह कि चूक और छिपाये तथ्यो का निस्तारण नहीं किया। मेहता ने हलपनामा में पेश किये गलत तथ्यो कि जानकारी देने वाले भाजपा प्रत्यासी के खिलाफ कार्यवाही कर नामांकन निरस्त किया जाए ,

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

विधानसभा चुनाव किसके खाते में गया 17 करोड़ का पेट्रोल खर्च ?

चुनाव आयोग को धत्ता या जानबूझ कर आँखे मूंद के बेठा आयोग

विधानसभा चुनाव किसके खाते में गया 17 करोड़ का पेट्रोल खर्च  ? 


सबलसिंह भाटी

बाड़मेर जिले में 3 दर्जन से ज्यादा पेट्रोल पम्पों से 5 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक लगभग 15 करोड़ का पेट्रोल बिक गया है । ये सब कुछ पर्चियों के माध्यम से हुआ है. क्या इस पर चुनाव आयोग की नज़र नही पड़ी या फिर जानबूझ कर अनजान बने रहा।
चुनाव आयोग जो निष्पक्ष चुनाव का ढिढोरा पिट रहा है. उसको इसकी निष्पक्ष जाँच करा कर राजनीतिक पार्टियों के खाते में इसका खर्च भी डालना चाहिए। जो चुनावी उम्मीदवार 7 - 8 लाख में चुनाव लड़ने की बात चुनाव आयोग को बता रहे है , उसकी पोल खोलनी चाहिए। अभी चुनाव आयोग जो प्रत्यासियों द्वारा दिखाए गये खर्च को सही मान कर आम जनता की नज़र में बेवकूफ लग रहा है, जब आम जनता में भी ये मत है कि कोई भी चुनाव 5 - 8 करोड़ से कम नही लड़ा जा सकता, उसको चुनाव आयोग 12 - 13 लाख रुपियों में लड़ा गया मान कर अपनी जग हँसाई करा रहा है। अब भी वक्त है की चुनाव आयोग इसकी निष्पक्ष जाँच करा कर अपने को निष्पक्ष साबित कर सकता है। चुनाव आयोग कि आचार संहिता कि खुले आम धज्जिया उड़ी। चुनाव आयोग को शिकायते मिलने के बाद भी कार्यवाही न होना साबित करता हें कि आयोग सब कुछ जानकार भी अनजान बना हुआ हें। इन पेट्रोल पम्पो कि आयोग ऑडिट करले तो सच्चाई सामने आ जायेगी कि एक नंबर के पेट्रोल कि खपत दो नंबर में कैसे हुई। 

मंगलवार, 5 नवंबर 2013

सरहद का सुलतान हिस्टीशीटर गाजी फकीर कांग्रेस कि राजनीती में फिर सक्रीय

सरहद का सुलतान हिस्टीशीटर गाजी फकीर कांग्रेस कि राजनीती में फिर सक्रीय

राज्य मंत्री के साथ किया चुनावी सभा का आगाज़ चुनाव आयोग मौन 


चन्दन सिंह भाटी 
बाड़मेर। विगत दिनों सरहद के सुलतान गाज़ी फ़क़ीर कि जिला पुलिस जैसलमेर द्वारा हिस्ट्रीशीट खोलने तथा उनके राष्ट्रद्रोही गतिविधियो में शामिल होने के आरोपो के बाद उनसे पल्ला झाड़ चुकी कांग्रेस ने मुस;लिम वोटो के लिए फिर उनसे गठबंधन करने का मानस बना। हिस्ट्रीशीटर गाज़ी फ़क़ीर कांग्रेस कमिटी के अल्पसंख्यक मोर्चे कि शिव के कानासर में सोमवार को आयोजित बैठक में भाग भाग लिया । इस बैठक में राज्य सरकार के अल्पसंख्यक मामलात मंत्री अमिन खान उनके साथ थे। अमिन खान ने उन्हें गले लगा कर स्वागत किया 
गौरतलब हे विगत दिनों गाज़ी फ़क़ीर कि हिस्ट्रीशीट पुनः खोलने के बाद विवादो में आने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वीकार किया था कि पुलिस ने अपनी कार्यवाही को सरकार के आदेशानुसार सही अंजाम दिया हें। मगर विधानसभा चुनावो कि आहात के साथ कांग्रेस गाज़ी फ़क़ीर को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने कि रणनीति बना चुकी हें। कांग्रेस का ध्येय हें गाज़ी फ़क़ीर के जरिये पाकिस्तान में बेठे उनके आका पीर पगारो का समरतजहां हासिल किया जाए।गाज़ी फ़क़ीर ने कांग्रेस के चुनावी सभा में मुस्लिमो से कांग्रेस को वोट देने कि अपील कि। जबकि गाज़ी के खिलाफ राज्य सरकार जांच कर रही हें। प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट तलब कि हें। उनके विधायक पुत्र पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जैसलमेर पंकज चौधरी ने पाकिस्तान जासूस को पनाह देने का आरोप लगाया था। चौधरी ने ही राज्य सरकार के आदेशानुसार गाज़ी फ़क़ीर कि हिस्ट्रीशीट पुनः खोली थी ,राजस्थान और केंद्र सरकार कि खुफिया एजेंसियो कि नज़र में गाज़ी फ़क़ीर सबसे ज्यादा संदिग्ध व्यक्ति हें जिनके पाकिस्तान के साथ तालुकात हें।

चुनाव आयोग मौन। ।चुनव आयोग द्वारा कानासर में आयोजित कांग्रेस कि इस धर्म सभा कि न तो फोटोग्राफी कराई गई न ही विडिओग्राफी। हिस्ट्रीशीटर गाज़ी फ़क़ीर के कांग्रेस कि राजनीती में सक्रीय होना पश्चिमी राजस्थान में चर्चा का विषय बन गया।

रविवार, 6 अक्तूबर 2013

चुनाव आचारसंहिता लागू होने 48 घंटे के बाद भी होर्डिंग्स नहीं हटाए गये



चुनाव आचार संहिता लागू होने 48 घंटे के बाद भी होर्डिंग्स नहीं हटाए गये


बाड़मेर गत 3 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो गया। आचार संहिता के अमल के साथ ही जिलाधीश के मार्गदर्शन में अब तक शहर-जिले में छोटे-बड़े कुल 2400 होर्डिंग्स-बैनर लगे थे। जिसमे से बहुत कम होर्डिंग हटाये गए हें ,जिला मुख्यालय पर अभी भी सरकार के गुणगान करते होर्डिंग चुनाव आयोग को चिढ़ा रहे हें ,जिला प्रशासन की बेरुखी के चलते होर्डिंग हटाये नहीं गए ,आचार संहिता की शिकायतों के लिए कंट्रोल रम तक स्थापित नहीं किया गया। जिला मुख्यालय पर राजकीय अस्पताल प[अरिसर ,सी एम् एच ओ कार्यालय,भूमि अवाप्ति कार्यालय के पास सरकार की योजनाओ के गुणगान करते होर्डिंग अभी लगे हुए हें। जबकि जिले में आचार संहिता लगे कोई अडतालीस घंटे से अधिक हो चुके हें। 

बाड़मेर बेक डेट में लोकार्पण का दिलचस्प मामला ,चुनाव आयोग की आँखों में धुल झोंकने का प्रयास

बेक डेट में लोकार्पण का दिलचस्प मामला ,चुनाव आयोग की आँखों में धुल झोंकने का प्रयास 
बाड़मेर विधायक पर आचार संहिता उलंघन का मामला ,उप खंड अधिकारी ने जाँच शुरू की 

बाड़मेर पंचायत समिति क्षेत्र के जाखड़ों की ढाणी ग्राम पंचायत में राप्रावि. फतेहपुरा के उप्रावि. में क्रमोन्नत होने पर आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में बाड़मेर जिले के कई जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। हालांकि लोकार्पण समारोह में अधिकारियों ने बड़ी समझदारी दिखाई। अनावरण पट्टिका पर एक दिन पूर्व की तारीख (4 सितंबर 2013) लिखवाई गई है। लेकिन लोकार्पण कार्यक्रम शनिवार को आयोजित हुआ है। आचार संहिता के उल्लंघन के इस मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से मामले की जांच उप खंड अधिकारी बाड़मेर को सौंप दी हें। बेक डेट में लोकार्पण का पहला मामला सामने आया हें अब तक सरकारी कार्यालयों में बेक डेट के काम होते थे 

जानकारी के अनुसार शनिवार को दोपहर 12 बजे नव क्रमोन्नत स्कूल का लोकार्पण समारोह था। जिसमें जिसमें बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, बीईईओ बाड़मेर मूलाराम बेरड, सरपंच हेमंत सारण सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। लेकिन स्कूल पर लगी अनावरण पट्टिका से विधायक ने दूरियां बनाए रखी और उसका अनावरण नहीं किया।

वहां आयोजित हुए कार्यक्रम में शिरकत करते हुए सरकार की उपलब्धियों की जमकर प्रशंसा की। इस दौरान राजनीतिक कार्यक्रम में बाड़मेर बीईईओ मूलाराम बेरड सहित कई अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। इस मामले की मीडिया को भनक लगने के बाद सभी सरकारी अधिकारी और जनप्रतिनिधि लोकार्पण समारोह पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देने लगे।

सवाल ये है कि अगर राजनीतिक कार्यक्रम है तो वहां सरकारी कर्मचारी या अधिकारी तो शिरकत कर ही नहीं कर सकते है। अगर सरकारी अधिकारी लोकार्पण करते है और जनप्रतिनिधि राजनीतिक कार्यक्रम करते हंै तो भी आचार संहिता का उल्लंघन है।

--
नेताओं पर रहेगी कैमरे की नजर 

जिला प्रशासन ने इस बार राजनीतिक दलों की हर गतिविधि को कैमरे की निगाह में रखने का निर्णय लिया है। कलेक्टर ने बताया कि इसके लिए पर्याप्त संख्या में वीडियोग्राफर की व्यवस्था की जा रही है। अलग से सेल बनाया जा रहा है। आचार संहिता का पालन नहीं करने वालों को वीडियो सेल की नजर में रखा जाएगा। इसके अलावा राजनीतिक दलों की ओर से होने वाली सभा व अन्य आयोजन की जानकारी रखी जाएगी।

प्रशासन ने ली राहत की सांस

आचार संहिता लागू होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। लोकार्पण, शिलान्यास कार्यक्रमों की होड़ के चलते रोजाना भागदौड़ में व्यस्त रहने वाले अफसरों ने शनिवार को राहत महसूस की। बीते चार साल की तुलना में सितंबर माह में रिकार्ड तोड़ शिलान्यास व लोकार्पण कार्यक्रम हुए। इसके चलते सरकारी मशीनरी पुरी तरह से व्यस्त रही।

॥विधायक मेवाराम जेन, पूर्व प्रधान मूलाराम चौधरी, बीईईओ मूलाराम बेरड सहित अन्य जनप्रतिनिधि स्कूल लोकार्पण कार्यक्रम में आए थे। लेकिन वहां लगी पट्टिका का अनावरण नहीं किया। पट्टिका पर एक दिन पुरानी तारीख लिखी गई। विधायक उद्घाटन से दूर रहे, लेकिन पट्टिका का अनावरण बीईईओ मूलाराम की ओर से किया गया।

चौखाराम, ग्रामीण

॥फतेहपुरा में स्कूल क्रमोन्नत हुआ है, लेकिन वहां उद्घाटन कार्यक्रम नहीं था। मैंने कोई उद्घाटन नहीं किया। वहां केवल लोगों की बैठक ली थी और उसे संबोधित किया है। मैंने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया।

मेवाराम जैन, विधायक बाड़मेर।

आचार संहिता में विधायक या मंत्री अपने दौरे में सरकारी काम को शामिल नहीं कर सके। कोई नई स्कीम, प्रोजेक्टर, नई मंजूरियां जारी नहीं की जा सकेगी। किसी भी योजना का उद्घाटन या शिलान्यास नहीं किया जा सकता। सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते। तबादले व नियुक्तियां नहीं हो सकती। सरकारी खर्चे से उपलब्धियों का विज्ञापन जारी नहीं कर सकते आदि कई नियम लागू होते हंै।

बीईईओ बोले मैंने तो नहीं किया लोकार्पण

॥मैं स्कूल लोकार्पण समारोह कार्यक्रम था, लेकिन स्कूल का लोकार्पण मैंने नहीं किया। एमएलए साहब ने मना कर दिया कि आचार संहिता है उद्घाटन नहीं करूंगा। इसके बाद तो वहां कार्यक्रम हुआ था। जहां मैं भी था।

मूलाराम बेरड, बीईईओ बाड़मेर

कार्रवाई अमल में लाई जाएगी

॥आचार संहिता में कोई लोकार्पण या शिलान्यास नहीं कर सकता है। सरकारी कर्मचारी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते है। अगर ऐसा मामला है तो गभीरता के साथ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।ञ्जञ्ज अरुण पुरोहित, एडीएम