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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

बायतु विधानसभा में वरिष्ठ कोंग्रेसियो कि कार सेवा से बेफिक्र कर्नल सोनाराम कड़े मुकाबले में फंसे


वरिष्ठ कोंग्रेसियो कि कार सेवा से बेफिक्र कर्नल सोनाराम कड़े मुकाबले में फंसे

गहरे पेठ पानी बायतु विधानसभा में



बाड़मेर जिले कि नवेली विधानसभा बायतु में दूसरी बार विधानसभा के लिए चुनाव हो रहे हें ,जाट बाहुल्य इस विधानसभा को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधी कर्नल सोनाराम चौधरी का गढ़ माना जाता हें ,कर्नल कि लोकप्रियता बायतु के लोगो के सर चढ़ कर बोलती थी मगर रिफायनरी के मुद्दे पर उनकी पकड़ कमज़ोर होती प्रतीत होती हें खास कर रिफायनरी के लीलाला से पचपदरा जाना उनके लिए सबसे बड़ा झटका हें वही लोग आज भी कर्नल से जानना चाहते हें कि पचपदरा में रिफायनरी का शिलान्यास करने आई श्रीमती सोनिआ गांधी का उन्होंने किये वाडे अनुसार विरोध क्यूँ नहीं किया। अलबता कर्नल को इस बार फिर गया हें उनके सामने गत चुनावो में उनसवे चौतीस हज़ार मतो से हारे कैलाश चौधरी भाजपा से प्रत्यासी हें। चुनावो के आरम्भ में कर्नल सोनाराम चौधरी बहुत मजबूत लग रहे थे मगर चुनावो कि तारिख आते आते वो कड़े मुकाबले में फंस गए हें


कर्नल सोनाराम चौधरी। । बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से तीन बार सांसद रहे सोनाराम चौधरी ने गत बार बायतु से पहला चुनाव विधानसभा के लिए लड़ा जिसमे उन्होंने कैलाश चौधरी को करीब चौंतीस हज़ार से अधिक मतों से हरा कर बायतु के प्रथम विधायक होने का गौरव हासिल किया था।


जातिगत आंकड़े। । परिसीमन के बाद प्रथम बार अस्तित्व में आए बायतु विधानसभा क्षेत्र में पिचहत्तर हज़ार जाट ,पचीस हज़ार अनुसूचित जाती पांच हज़ार जनजाति ,राजपूत रावण राजपूत बीस हज़ार ,आठ हज़ार प्रजापत ,मुस्लिम सत्रह हज़ार मुख्य मतदाता हें।


इस विधानसभा क्षेत्र में चार राजस्व मंडल के टायल्स पतवार मंडल। आठवां ग्राम पंचायते ,और तीन सौ चौरासी गाँव में फेला हें।


कर्नल सोनाराम चौधरी। । कर्नल कि दबंग नेता कि छवि राष्ट्रीय स्तर पर हें ,बाड़मेर जिले के युवा सोनाराम कि दबंगता के कायल हें। अशोक गहलोत से लेकर सांसद हरीश चौधरी के घूर विरोध और बयानो के कारण हमेशा चर्चा में रहे ,अपने पांच साल के कार्यकाल में कोई ख़ास काम नहीं करवा पाये ,मगर जनता के सुख दुःख में हमेशा साथ खड़े रहे ,रिफायनरी ,का मुद्दा हो या रॉयल्टी का उन्होंने राज्य में अपनी सरकार पर दबाव बनाया। रिफयानी को लेकर चले आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी ,जिसके कारन उन्हें चुनाव समिति का सदस्य बना मुख्यमंत्री ने दांव खेला ,रिफायरी के मुद्दे पर वो नायक के रूप में से मगर बायतु से रिफायनरी के पचपदरा शिलान्यास होते ही कर्नल के खिलाफ सुगबुगाहट हो गयी ,उन्होंने जिस पर रिफायनरी के लिए पैरवी ना करने पर हेमाराम चौधरी ,सांसद हरीश चौधरी को निशाना बनाया उसी से आहात होकर हेमाराम ने इस्तीफा दे दिया ,हेमाराम ने बाद में चुनाव लड़ने से मन भी किया। कर्नल का विरोध गाँवो में बढता जा रहा हें वाही उनके विरोधी उनके खिलाफ लामबंद होकर उन्हें हारने में जूट हें ,कहने को कर्नल बायतु में भारी हें मगर उनके विरोधी कितना रुख बदल पाते हें परिणाम उसी से प्रभावित होगा

कैलाश चौधरी गत चुनाव हारने के बाद कैलाश चौधरी द्वारा क्षेत्र में सक्रीय नहीं रहने का ऑट्रोप कार्यकर्ता लगा रहे हें ,टिकट से पहले बालाराम मूंढ कि संभावनाए व्यक्त कि जा रही थी उन्होंने अपना कम भी शुरू कर दिया था ,मगर एन वक्त पर टिकट कैलाश को मिली ,कैलाश बायतु कि बजाय बालोतरा पट्टी में ज्यादा सक्रीय रहे उनका पटौदी और गिडा बेल्ट में अच्छा प्रभाव हें मगर बायतु क्षेत्र में वे कमजोर हें। कोंग्रेस कि भीतरघात जितना अधिक होगा कैलाश कि सम्भावना उतनी अधिक बढ़ेगी। कैलाश चौधरी को नरेंद्र मोदी और वसुंधरा राजे कि लोकप्रियता और उनके नाम के जादू का आसरा हें। हालांकि उनकी सभाओ में भीड़ उमड़ रही हें जिसे वोटो में तब्दील करना उनके लिए चुनौती पूर्ण हें। उनका कर्नल को कमज़ोर समझना भी भरी भूल होगी।


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मंगलवार, 15 अक्तूबर 2013

बायतु विधानसभा क्ष्रेत्र। ऱिफ़यनरि की राजनीती भारी पड़ सकती हें कर्नल को चुनावो में

बाड़मेर चुनावी रणभेरी 2013

बायतु विधानसभा क्ष्रेत्र। ऱिफ़यनरि की राजनीती भारी पड़ सकती हें कर्नल को चुनावो में 


बाड़मेर सरहदी जिले की बायतु विधानसभा क्षेत्र जन्हा दूसरी बार विधायक आगामी चुनाव में चुना जाना हें ,इस बार बायतु में राजनीति करवटें लेने लगी हें ,बायतु के विधायक कर्नल सोनाराम बायतु में मजबूती से जमे थे मगर रिफायनरी पर की गयी राजनीती में उन्हें क्षेत्र में कमज़ोर कर दिया। खासकर श्रीमती सोनिया गांधी के पचपदरा में रिफायनरी का शिलान्यास करने के बाद। बायतु गत चुनावो से पहले विधानसभा बनी ,गत चुनावो में भाजपा के कैलाश चौधरी से उनका मुकाबला हुआ। जिसमे कर्नल ने बड़ी जीत हासिल की। कर्नल गत पांच सालो में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार की खिलाफत में गुजरे ,बायतु में रिफायनरी लगाने की घडी में सरकार ने किसानो द्वारा अधिक मुआवजा मांगने की आड़ में रिफायनरी पचपदरा शिफ्ट कर ली। जन प्रतिनिधि कुछ नहीं कर पाए। कर्नल सोनाराम चौधरी और उनके पुत्र डॉ रमण चौधरी ने रिफायनरी बायतु में ही लगे इसके लिए आन्दोलन की अगुवाई की। जिला मुख्यालय पर यह आन्दोलन चलता ही रहा। बायतु की जनता कर्नल के दिलेरी की खुले में प्रसंशा करते नहीं थकते थे ,की कर्नल साब रिफायनरी बायतु जरुर ले आयेंगे ,इसी बीच कर्नल सोनाराम चौधरी को कांग्रेस की चुनाव समिति में सदस्य बना दिया ,इस समिति में आने के बाद कर्नल का विरोध स्वर लडखडा गया। अशोक गहलोत ने पचपदरा में रिफायनरी समिति की विरोध की चेतावनी की बावजूद सोनिया गांधी से शिलान्यास करा दिया ,बायतु के ,गए आगामी विधानसभा चुनावप में इसका असर जरुर देखने को मिलेगा ,हालांकि भाजपा भी इस मुद्दे पर कोई कारगर रणनीति नहीं अपना पाई ,कर्नल का क्रेज युवा वर्ग में जरुर हें मगर रिफायनरी पर की राजनीती से बायतु कर्नल से खफा हें ऐसा बायतु के लोग बताते हें। वही बायतु में रिफायनरी या पेट्रोकेमिकल यूनिवर्सिटी ना ला पान कर्नल की कमज़ोर कड़ी में शुमार हें। सोनिया गाँधी का पचपदरा में शांतिपूर्वक शिलान्यास होना कर्नल के उस दावे पर भरी पद सकती हे जिसमे उह्नोने बायतु में रिफायनरी ना लगने पर शिलान्यास ना होने देने की चेतावनी दी थी। बहरहाल कर्नल के सामने भाजपा के कई उम्मीदवार तयारी में जुटे हें। हाल में बायतु में संकल्प रथ यात्रा गाँव गाँव घूम रही हें जिसे जनता का समर्थन ठीक ठाक से ज्यादा मिल रहा हें। ऐसे में अब बायतु चल रहा कर्नल सोनाराम का एक तरफ़ अभियान थमता नज़र आ रहा हें