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शनिवार, 7 मई 2016

इतिहास महन्त श्री श्री 1008 श्री चंचलनाथ जी महाराज



इतिहास महन्त श्री श्री 1008 श्री चंचलनाथ जी महाराज
दलित समाज के लोकमान्य प्रसिद्ध सन्त श्री चंचलनाथ जी महाराज जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन दलित समाज क़ी सेवा में व्यर्थ किया ऎसे माह पुरुष को शत् शत् नमन्

आदेश{ महन्त श्री श्री 1008 श्री चंचलनाथ जी महाराज }जिनका जन्म विक्रम संवत् 1955 में जिला जिलोर तहसील भीनमाल के जसवंन्तपुरा गांव मे हुआ ।पिताश्री रतनाराम जी माता गुलाबी बाई ने जन्म दिया ।ओर मेघवाल जाति मे परिहार कूल से सम्बन्धित थे ।ओर बचपन का नाम अखाराम था ।घर का वातावरण पूर्णतया सात्विक ओर धार्मिक था ओर पूजा आरधना ,भक्ति ,चिंतनो ओर मनन तो आपके गुण थेघर के अन्दर बने माताजी का मन्दिर में आप हर रोज सध्या के समय माला फेरना ओर घन्टो तक चिन्तन करते रहते थे ।बचपन मे ऐसी अच्छाईयो को देखकर घर के सदस्य आश्चर्य में पड़ जाते थे ।( घर मे एक कयास लगा रखी यह बालक एक दिन बड़ा योगी बनेगा)घरेलू कार्य ही विमुख होकर युवावस्था मे गृह त्याग कर आबू पर्वत मे चले गये थे ।वहा पर श्री पिथाराम मेघवाल के सान्निध्य मे ज्ञान व सिद्धियो कि प्राप्त किये ओर आबू पर्वत मे 12 वर्ष तकसाधना ओर कठोर तपस्या के बाद सिन्ध [ पाकिस्तान ] क्षेत्र मे फकड़ बाबा के नाम जाने जाते थेवही से मालाणी ( वर्तमान बाडमेर ) में स्थित प्राग मठ मे मठाधीश श्री उत्तमनाथ जी के शिष्य बने ।ओर हरिद्वार जाकर उत्तम नाथ जी निर्देश से नाथ सम्र्दाय के बारह पंथ में से "आई पंथ " मे दीक्षित होकर दीक्षा ग्रहण कि वंहा से लोटकर प्रागमठ बाडमेर मे आकर एक योगी के रूप मे शिव साधना मे लीन हो गये ।सिद्ध पूर्ण चमत्कार कई दीन दूखियो का कल्याण किया ओर हठ योग साधना मेह बरसाया था ओर चमत्कार का उल्लेख करना तो असंभव है ओर सफल कमाई करके 9 मई 1983 को परम धाम प्राप्त किया ।उनकी समाधि बाडमेर मे स्थित है यहा पर वर्तमान मठाधीश महन्त श्री श्री 1008 श्री शम्भूनाथ जी महाराज विराजमान हैपेलो परसो प्राग रो ,पिछे प्रेमानाथ जी ।मेंह बरसायो मोकळो ,चावा चंचल नाथ जी ।।बाडमेर शूभ शहर में,करी तपस्या जोर ।इन्द्र बहुत उल्टीयो ,जग मे मच गई घोर ।।चंचल चावो जगत मे, प्राग तणो प्रताप ।अलख लखायो आपने ,लगी उत्तम की छाप ।।उत्तम गुरू उत्तमनाथ जी ,नोसर मठ नरेश ।चावो चंचल नाथ जी ,नमो नाथ आदेश ।।उत्तम नाथ आधार से ,चंचल भयो चतुर ।ब्रह्म ज्योति प्रगट भई ,दुर्मति नासी दूर ।।