जाँच लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जाँच लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2019

बाड़मेर न्यूज़ ट्रैक खबर का असर जैसलमेर जाँच में मातृ वंदना योजना में एक करोड़ का घोटाला उजागर ,अस्सी लाख का भुगतान रोका


बाड़मेर न्यूज़ ट्रैक खबर का असर 

जैसलमेर जाँच में मातृ वंदना योजना में एक करोड़ का घोटाला उजागर ,अस्सी लाख का भुगतान रोका

जैसलमेर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके तहत करीब 1 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ है। इसके साथ ही 80 लाख रुपए खातों में जमा होने से पहले ही रुकवा दिए गए। गौरतलब है कि गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से चल रही इस योजना में जैसलमेर महिला एवं बाल विकास विभाग में अनियमितताएं सामने आई हैं।

  बाड़मेर न्यूज़ ट्रैक  द्वारा मामले के उजागर करने  पर जिला  कलेक्टर नमित मेहता के निर्देशानुसार लेखाधिकारी देरावरसिंह की अध्यक्षता में गठित आंतरिक जांच कमेटी ने प्राथमिक जांच में यह पाया कि पूरे जिले में इस योजना के कुल 18 हजार 853 लाभार्थी महिलाएंहै । इनमें से 7230 लाभार्थी महिलाएं ऐसी पाई गईं, जिनका कोई आवेदन रिकाॅर्ड संबंधित सीडीपीओ कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं है। इस तरह प्राथमिक जांच में 1 करोड़ से रुपए अधिक की राजकोष हानि पहुंचाने की पुष्टि हुई है।

उपनिदेशक ने 80 लाख रुपए का भुगतान रुकवाया

इस अनियमितता की जानकारी उपनिदेशक कार्यालय को होते ही बिना आवेदन के ही भुगतान के लिए प्रोसेस किए गए फॉर्मों को उपनिदेशक राजेन्द्र कुमार चौधरी ने 26 सितंबर, 2019 को ही उच्चाधिकारियों को सूचित कर भुगतान रुकवा दिया। जिससे लगभग 80 लाख रुपए की हानि को बचाया गया।

रिकवरी की कार्रवाई शुरू, राजकोष में होगी जमा अनियमित भुगतान की सूची तैयार हो चुकी है। उपनिदेशक चौधरी ने अपील की है कि जिस किसी का भी इस सूची में नाम है, वह वहां पर उपलब्ध खाता संख्या के माध्यम से राशि राजकोष में जमा करवाएं। उन्होंने बताया कि यह निर्देश उन लोगों के लिए है, जिनकी हार्डकॉपी में भरे हुए आवेदन पत्र सीडीपीओ कार्यालयों में नहीं पाए गए हैं। जिनके आवेदन पत्र सीडीपीओ कार्यालयों में उपलब्ध है उन व्यक्तियों को कोई भी कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। उनसे किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी। चौधरी ने बताया कि चूंकि यह राशि स्वीकृति   के पश्चात सीधे केन्द्र सरकार से खातों में जमा होती है अत: गलत स्वीकृति  करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है। लेकिन आमजन से अपील की है कि यदि गलती से भी उनके खातों में राशि आ गई है तो लौटाकर ईमानदारी का परिचय दें।

कमेटी ने जांच के बाद थाने में कराया मामला दर्ज

इस संबंध में पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया गया है। जांच कमेटी की भी विस्तृत जांच जारी है। संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस भी जांच कर रही है। जल्द ही मामले में अन्य कई खुलासे होंगे।




बुधवार, 9 अक्तूबर 2019

जैसलमेर कोऑपरेटिव बैंक में भ्रस्टाचार भाग 1 किसानों से वसूले आठ करोड़ सुविधा शुल्क के नाम पर ,बीज ऋण के भुगतान में

 जैसलमेर कोऑपरेटिव बैंक में भ्रस्टाचार  भाग 1 
किसानों से वसूले आठ करोड़ सुविधा शुल्क के नाम पर ,बीज ऋण के भुगतान में
किसानो ने बीज ऋण वितरण प्रक्रिया की उच्च स्तर पर जाँच की मांग की 

जेसलमेर राज्य सरकार द्वारा किसानो के हितार्थ फसल ऋण माफ़ी योजना के साथ साथ मानसून के समय किसानो को आर्थिक संबल प्रदान करते हुए फसल के लिए बीज खरीदने के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर किसानो को पच्चीस पचीस हजार रूपये ऋण देने का प्रावधान रखा गया था ,जैसलमेर सेन्ट्रल को ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से भी ये ऋण किसानो को देने के लिए आवेदन सहकारी समितियों के माध्यम से मांगे गए,किसानो को आवेदन के वक़्क़त  समितियों के व्यवस्थापकों द्वारा पांच पांच सौ रूपये लिए गए ,उसके पश्चात् ऋण आवेदन से लेकर स्वीकृत करने तक कोऑपरेटिव बैंक के अधिकारी ,कर्मचारियों के साथ साथ सोसायटी व्यवस्थापकों द्वारा चांदी कुटी गयी ।।प्रत्येक किसान के खाते में पच्चीस हजार रुपये डाले जा रहे है मगर भुगतान बीस  हजार का ही किया गया ।जिसमे किसानो से दो प्रतिशत हिस्सा राशि काटी  गयी ।आश्चर्यजनक है कि किसान के खाते में पैसा सीधा आने के बाद भी व्यवस्थापक और बैंक कर्मचारी उनका भुगतान खुद सीधा उठाकर तीन तीन हजार रुपये की कटौती कर शेस बीस हजार का नकद भुगतान किया गया ।भरष्टाचार का यह खेल लम्बे समय से खेला जा रहा है । जिसमे आवेदन से लेकर भुगतान तक कि प्रक्रिया में करोड़ो रुपये इधर उधर हो गए।बैंक में लगे अनुबंधित कार्मिक ही किसानों से मनमाना पैसा वसूल करके ही उनका आवेदन भर रहे है। पूरी प्रक्रिया भरस्टाचार से ग्रसित है।कई पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि बैंक कार्मिकों और व्यवस्थापकों की मनमानी से त्रस्त है पर दुखड़ा किसके आगे रोये।। किसानो को बीज ऋण राशि देने में भी भेदभाव किया गया ,कई किसानो को पांच हजार रूपये मात्र ऋण जारी किया ,,जिले में करीब बीस हजार किसानो को बीज ऋण जारी किया गया था जिसमे प्रत्येक किसान से तीन तीन हजार रूपये बैंक मैनेजर और व्यवस्थापकों ने सुविधा शुल्क के रूप में खुले आम लिए ,मुख्य प्रबंधक से बात की तो उन्होंने बताया की कोपरेटिव बैंक का समितियों पर कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं हैं ,जबकि वास्विकता यह थी की इस सुविधा खेल में ऊपर से निचे तक सब  मिले हुए थे ,किसानो ने अपना दर्द बताते हुए कहा की पच्चीस हजार के ऋण में पांच पांच हजार रूपये पहले ही काट लिए ,हमे तो ऋण राशि पूरी भरनी पड़ेगी कहाँ से लाये।इसी साल अप्रैल 2019 में रामगढ़ बैंक में वित्तीय अनियमितताओं में बैंक के दो कार्मिको को निलंबित किया गया था तथा सात कार्मिको के खिलाफ अनुसाशनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की गयी थी ,मगर ठोस कार्यवाही नहीं होने से जिन लोगो के  खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित थी उन्हें महत्वपूर्व पदों पर लगा दिया जो बीज ऋण वितरण में घोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं।

बताया की एक एक महीना बैंक के चक्कर निकाले तब जाकर यह बीस हज़ार रूपये मिले ,किसानो ने बीज ऋण वितरण में हुई धांधली की शिकायत मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से पूरी प्रकरण की जाँच उच्च स्तर पर कराने की मांग की हैं. एक एक महीना बैंक के चक्कर निकाले तब जाकर यह बीस हज़ार रूपये मिले ,किसानो ने बीज ऋण वितरण में हुई धांधली की शिकायत मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से पूरी प्रकरण की जाँच उच्च स्तर पर कराने की मांग की हैं.