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रविवार, 5 सितंबर 2021

खबरों का असर। 72 बीघा सरकारी जमीन के अवैध म्यूटेशन रसूखदारों के नाम कर फंस गए तहसीलदार,हुए निलंबित

 खबरों का असर। 72 बीघा सरकारी जमीन के अवैध म्यूटेशन रसूखदारों के नाम कर फंस गए तहसीलदार,हुए निलंबित 

चंदन सिंह भाटी

नायब तहसीलदार पुष्पेंद्र पांचाल


जैसलमेर दैनिक महानगर टाइम्स द्वारा जैसलमेर में 72 बीघा सरकारी भूमि की उप खंड अधिकारी  सरकार के खिलाफ जाकर राजनितिक दबाव और सुविधा शुल्क के चलते निजी व्यक्तियों को करोडो रुपयों की जमीन की फर्जी डिक्री करने और बाद में तत्कालीन तहसीलदार  द्वारा प्रभावी राजनीतिज्ञ परिवारों के नाम नियम विरुद्ध म्यूटेशन भने का मामला निरन्त प्रकाशित करने के  सरकार के प्रसंज्ञान में यह मामला आया साथ  तहसीलदार द्वारा मूलसागर और सम ग्राम पंचायतों में नियमविरुद्ध करोड़ों रुपयों की जमीन आवंटन कर तहसीलदार फंस गए और निलंबित हो गए ,नायब तहसीलदार पुष्पेंद्र पांचाल को राजनीती प्रभाव से तहसीलदार का चार्ज दिलाया गया , अवधि में तहसीलदार ने सरकारी खाते की करोड़ों रुपयों की जमीन की हेरफेर कर ली ,कुछ मामले न्यायलय में चले गए , उच्च न्यायलय के आदेश पर जमीनों के फर्जी म्यूटेशन मामले में तहसीलदार के खिलाफ  पुलिस में मामले भी दर्ज हुए ,तहसीलदार द्वारा जैसलमेर में रहते तीन बड़े जमीन घोटाले किये जिनके चलते उन्हें निलंबित कर दिया।

पहला मामला

 परिषद जैसलमेर की कृष्णा नगर के पास स्थित करोडो रुपयों की बहतर बीघा जमीन की तत्कालीन उप खंड अधिकारी दिनेश विश्नोई द्वारा फर्जी डिक्री जारी की  गयी ,इस फर्जी  की  जानकारी होने के बाद भी स्थानीय विधायक के चालक ,कांग्रेस के बड़े नेता गाज़ी खान के पुत्र के नाम म्यूटेशन भर दिए जबकि इस जमीन के बाकी खातेदारों के म्यूटेशन नहीं भरे तो मामला उच्च न्यायलय में चला गया ,उच्च न्यायलय ने तहसीलदार के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी किये ,यह मं सरकारी खाते में दर्ज होने के बावजूद तहसीलदार द्वारा म्यूटेशन भरे गए ,

दूसरा मामला

सम में 50 साल पुराने प्रकरण को सही मानते हुए 45 बीघा जमीन आवंटन: सम गांव में खसरा नं. 135/444 व 142 बीघा की 75 बीघा भूमि का आवंटन वर्ष 1971 में किए जाने के लिए डूंगराराम/चांदनमल को आवंटन पत्र जारी कर 2500 रुपए से जमा करवाने के लिए लिखा गया था। इस दौरान डूंगराराम ने 30 बीघा भूमि की राशि जमा करवाई तथा शेष 45 बीघा जमीन की राशि जमा नहीं होने पर खारिज हो गई। हाल ही में डूंगराराम ने 45 बीघा जमीन आवंटन के लिए तहसीलदार पुष्पेंद्र पांचाल ने राशि 2500 रुपए के हिसाब से जमा करवाने के लिए पत्र जारी कर दिया।

तीसरा मामला

मूलसागर में 35 साल पुराने प्रकरण में 50 बीघा जमीन आवंटन: मूलसागर गांव के खसरा नं. 193/152 की 50 बीघा भूमि का आवंटन वर्ष 1983 में किए जाने के लिए भगवानाराम निवासी मूलसागर को आवंटन पत्र जारी कर राशि 1383 रुपए के हिसाब से जमा करवाने के लिए लिखा गया था लेकिन भगवानाराम द्वारा राशि जमा नहीं करवाई और प्रकरण को समाप्त कर दिया गया था। 2005 में भगवानाराम की मृत्यु भी हो गई। नियमानुसार प्रकरण को समाप्त कर देना चाहिए था लेकिन तसहीलदार पुष्पेंद्र पांचाल ने प्रकरण को सही मानते जमा करवाने का पत्र जारी कर दिया और आवेदकों द्वारा तुरंत राशि जमा करवा दी गई।

सम व मूलसागर में इनके द्वारा 50 साल पुराने मामलों में खारिज जमीन को फिर से आवंटित करने को लेकर बड़ी शिकायत थी। यह मामला सीएमओ तक पहुंच गया था। शुक्रवार को निलंबित करने की कार्रवाई के बाद  इस मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दोनों ही मामलों में तहसीलदार ने 72 करोड़ की जमीन कौड़ियों के भाव आवंटित कर दी।

सूत्रों के अनुसार सम क्षेत्र में जो 45 बीघा जमीन आवंटित की जा रही थी। उस मामले में तहसीलदार ने भारी रिश्वत भी ली थी। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मूलसागर वाले मामले में भी इतनी रिश्वत ली होगी। जानकारी के अनुसार तहसीलदार ने पटवारी से मौका रिपोर्ट करने के बाद आर आई को फाइल पर साइन करने के लिए कहा।

लेकिन तत्कालीन आर आई ने साइन नहींं किए। यह बात जब उन नामी व प्रभावशाली लोगों को पता चली तो उन्होंने आर आई को बदलवा दिया। इतना ही नहीं दूसरे व तीसरे आर आई ने भी हस्ताक्षर नहीं किए। 10 दिन के भीतर इन लोगों ने अपने प्रभाव से तीन आर आई बदलवा दिए। आखिरकार चौथे आर आई ने साइन किए और फाइल आगे बढ़ गई।

ऐसे मामलों में जमीन आवंटन का अधिकार राज्य सरकार के पास जानकारी के अनुसार सालों पुराने मामलों में जो जमीन आवंटन राशि जमा नहीं करवाने पर खारिज हो चुकी है उसे फिर से आवंटित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। लेकिन तहसीलदार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अपने स्तर पर ही कार्रवाई करवाकर 95 बीघा जमीन आवंटित कर दी।

हसीलदार ने इस कार्रवाई को चोरी छिपे किया और किसी को भनक तक नहीं लगी। स्थानीय स्तर पर कलेक्टर, अति. कलेक्टर व उपखंड अधिकारी को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार जब मामले का खुलासा हुआ तो तहसीलदार ने जमीन आवंटन के लिए जमा करवाए जाने वाले चालान को फाड़ दिया था।

सूत्रों के अनुसार इस मामले में जिले के नामी लोग भी शामिल थे। जानकारों के अनुसार एक तहसीलदार इतनी बड़ी कार्रवाई बिना किसी दबाव के नहीं कर सकता था और करोड़ों की जमीन को सामान्य दर पर नहीं दे सकता था। ऐसे में कहीं न कहीं प्रभावशाली लोग भी इस फर्जी आवंटन में शामिल थे।