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बुधवार, 2 मार्च 2011

सोनार किले से उठी राजस्थानी को मान्यता की हुंकार










सोनार किले से उठी राजस्थानी को मान्यता की हुंकार
राजस्थान का सांस्कृतिक विकास राजस्थानी के बिना अधूरा डॉ आईदानसिंह भाटी
जैसलमेर। मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने के लिये कृष्णा संस्था, वारियर्स एजयुकेशनल एण्ड डवलपमेंट सोसायटी जैसलमेर के तत्वाधान में राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति द्वारा संचालित मान्यता हस्ताक्षर अभियान के दूसरे दिन गोपा चौक में समर्थनों का तातां लगा रहा रही वरिष्ठ साहित्य कार्यो ने अभियान को सार्थक व बहुउद्देशीय बताते हुए समर्थन किया। हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार एवं थार संस्थान के संरक्षक ने आईदानसिह भाटी ने कहा है कि मायड़ भाषा के अभाव में संस्कृतियां नष्ट हो रही है और हम अपनी जड़ो को खुद ही काटने में लगे हैं।
हस्ताक्षर अभियान में शामिल होकर वरिष्ठ इतिहासकार ने कहा कि राजस्थानी भाषा मॉ और हिन्दी बेटी है। बेटी मॉ से आगे निकल गई। उन्होने कहा कि इतिहास को कुरेदने से बेहतर से राजस्थानी भाषा को मान्यता में आ रही अड़चनों को दूर किया जाए। उन्होने कहा कि पिछले कुछ सालों से राजस्थानी को मान्यता देने की मांग बराबर की जा रही है मगर इस बार जो पूरे राजस्थान में राजस्थानी भाषा के प्रति आस्था का ज्वार उमड़ा है। उससे लगता है कि हम कायम होगें। उन्होने कहा कि जनगणना सबसे मजबूत कड़ी है, राजस्थानी अपनी मातृ भाषा के रूप में राजस्थानी दर्ज कराकर अपना धर्म निभाए।गोपा चौक में राजस्थानी भाशा को मान्यता के समर्थन में लोगों का हूजूम उमउ पडा। दोी विदोी पर्यटक भी उत्सुक्ता सें देख रहे थे।जब उन्हे मकसद बताया तो वे भी समर्थन में अभियान में भामिल हुऐ तथा अपने हस्तक्षर किएं।वारियर संस्था के सचिव प्रदीप गौड ने बताया कि राजस्थानी भाशा को मान्यता के लिऐ प्रदो भर में संधशर समितियों के माध्यम से जन अभियान चलाया जा रहा हैं। इस अवसर पर सैकडों जैसाण वासियों ़ ने राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रयासों का पुरजोर समर्थन कर भरपूर सहयोग के लिए आश्वस्त किया। अभियान में अब तक 1233 से अधिक जैसाणवासियों ने राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए हस्ताक्षर का अपना समर्थन दे चुके है। समिति के संयोजक सिकन्दर भोख ,मनीश रामदेव,आननद जगानी,, चन्दनसिंह भाटी, विजय कुमार, ने अपना योगणन दिया

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

मत भूलो मायड़ भाषा रो मान’


‘मत भूलो मायड़ भाषा रो मान’
दैनिक भास्कर टॉक शो में साहित्यकारों ने की मायड़ भाषा की पुरजोर पैरवी
भास्कर न्यूज & बाड़मेर
हम ये नहीं कहते कि अंग्रेजी या हिन्दी मत बोलो। हम तो कहते है कि मायड़ भाषा राजस्थानी का अधिक से अधिक चलन हो। मातृ भाषा हिन्दी व अंग्रेजी की जहां बोलने की आवश्यकता अधिक महसूस हो, वहीं उपयोग करें। केंद्र में कई मंत्री अपनी स्टेट की भाषा में ही भाषण देते है। वहीं का पहनावा पहनते है। राजस्थानी भाषा का समृद्ध इतिहास है। संस्कृति, लोककला, खान-पान, रहन सहन, पहनावा सबसे प्यारा और न्यारा है।’ मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने को लेकर यहीं पुरजोर पैरवी मंगलवार को ‘दैनिक भास्कर’ कार्यालय में आयोजित ‘राजस्थानी भाषा को कैसे मिले मान्यता’ विषयक टॉक शो में शहर के नागरिकों ने कही। 

मल्लीनाथ छात्रावास के व्यवस्थापक कमलसिंह महेचा ने कहा ‘राजस्थानी साहित्य सूं समृद्ध है। राजस्थानी री वीर रस, श्रृंगार रस तो कोई सांनी कोनी। राजस्थानी राजस्थान रे कोने-कोने में बोलीजे है। शब्दों रो अंतर है, पण भाव एक ही जेड़ों है।’

राजकीय महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. ओंकार नारायणङ्क्षसह ने कहा ‘मायड़ भाषा ने मान्यता दिलावण सांरू ओ प्रयास चोखो है। राजस्थानी मां है, जद की हिंदी उनरी बेटी है। पण आज बेटी मां रो स्थान ले अर बैठी है। राजस्थानी रो भक्ति साहित्य जिणमें पाबूजी री पड़, बाबा रामदेव रो इतिहास, मेवाड़ री वीर गाथा, मीरा रो अरदास किण ही साहित्य हूं कम नी है।’

शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी (प्रा.शि.) डॉ. लक्ष्मीनारायण जोशी ने कहा ‘आजादी रे इत्ता बरसो बाद भी राजस्थानी भाषा ने मान्यता दिलाण सारू आवाज उठाणी पड़े। जद कि इण मायड़ भाषा रो लंबो चौड़ो इतिहास संजोउड़ों है। भाषा रै साथै साथै अठै रो मान, संस्कृति, लोक कला, खान पान पुरी दुनियां मानै है। बाहर रा अंग्रेज अठे आ अठै री संस्कृति देखण सारूं तरसे है। अठै रो पहनाणों मन ने लुभावै।’

राजस्थानीय भाषा मान्यता समिति बाड़मेर के पूर्व अध्यक्ष कन्हैयालाल वक्र ने कहा ‘जिण भाषा में मीरा करी गिरधर री अरदास, बा आपणी राजस्थानी ने सब मान दिलाओ। म्हे खासे बरसों सूं राजस्थानी ने मान्यता दिलाण सारूं प्रयास करूं हूं, इण वास्ते म्हे पत्र पत्रिकाओं में लेख लिख्या। कविता सूं आपरी बात कही। पण आज खुशी है कि सब लोग इण सारूं आगे आया है। तीस मार्च राजस्थान दिवस माथै सगला लोग एक दिन रो उपवास राख न अरदास करें।’

एबीईईओ कमलसिंह राणीगांव ने कहा ‘राजस्थानी रो बोलचाल में ज्यादा सूं ज्यादा प्रयोग होवे। जिण सूं घर परिवार में इण भाषा रै प्रति मोह जागसी। ’

कमठा मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण वडेरा ने कहा ‘राजस्थानी मान्यता रो ओ हेलो घर घर से उठावणो पड़सी। राजस्थानी री मान्यता सारूं ईमानदारी, वफादारी सूं काम करणो पड़सी।’

कृष्णा संस्था के चंदनसिंह भाटी ने कहा ‘बाड़मेर सूं चली आ मान्यता री आवाज राजस्थान रै गांव गांव तक पहुंचसी। गांव-गांव सूं उठयूड़ी आवाज विधानसभा और संसद में पहुंच राजस्थानी ने मान्यता दैरासी।’

सामाजिक कार्यकर्ता रणवीरसिंह भादू ने कहा ‘राजस्थानी भाषा ने पाठ्यक्रम में लागू करवाणों पड़सी। छोटी कक्षाओं सूं टाबरों ने इणरो ज्ञान कराणों पड़सी।’

जिला परिषद सदस्य कोसर बानो ने कहा ‘राजस्थानी भाषा ने मान्यता दिलाण सांरी म्हारी दिलीं ख्वाहिश है।’

पार्षद सुरतानसिंह ने कहा ‘राजस्थानी भाषा रै साथै-साथै अठे री परंपरागत देशी ऊन हूं बणन वाला उत्पाद माथै भी संकट है। राजस्थानी भाषा जदै हूं छोड़ी बिण हूं पछै अठै रो पहनावो छूट गो, संस्कृति बिखर गी।’

पूर्व जिला परिषद सदस्य रिड़मलसिंह दांता ने कहा कि ‘मायड़ भाषा री मान्यता सारूं सब लोगों ने मिलजुल प्रयास करनो पड़सी। इणमें ही सगला राजस्थानियों रो मान बढ़सी।

जिला कांग्रेस कमेटी सदस्य युसुफ खान ने कहा कि ‘ऐडो जमाणों आयो है के आपरे टाबरों ने लोग कैवे बेटा मारवाड़ी मत बोलिजे म्हारो मान सम्मान घट जावेला। इण में सुधार लाणो पड़सी। मायड़ भाषा ने बोलण सारूं हिचक छोडऩी पड़सी।’

अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार फकीरा खां ने कहा कि ‘राजस्थानी भाषा, संस्कृति, लोक कला रै सारूं म्हारो विश्व में घणों घणों मान सम्मान होवे। बठै रा लोग अठै रा मीठा गीतों व धुनों ने सुण मस्ती में डूब जावे। अपणी नकल करणे री कोशिश करें। पणे अठे तो इण सूं लोग दूर भागे। नुवां बनड़ा तो राजस्थानी रा बोल ही ना समझै। अबे इण रो बदलाव करणो चाहिजे।’

कलाकार दिलावर खां ने कहा ‘आपरे टाबरों ने भले ही अंग्रेजी या हिंदी स्कूलों में पढ़ावो। पण राजस्थानी रो घरों व व्यवहार में घणों घणों उपयोग होनो चाहिजे। इणरे सारूं सब लोगों ने एको राखणों पड़सी।’

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

मायड़ भाषा की मान्यता रो काम सवा सू बडी धर्म -स्वामी प्रतापुरी



मायड़ भाषा की मान्यता रो काम सवा सू बडी धर्म -स्वामी प्रतापुरी

बाडमेर राजस्थानी भाषा म्हारी बोली री भाषा है। म्हारे हिये री जडी है इण भाषा की मानता सारू जो प्रयास हो रहा है वो पुनित प्रयास हैं औ काम मानव सेवा से सवा सू बडी धर्म है यह बात तारातरा मठ के स्वामी प्रतापपुरी ने कृष्णा संस्था, संकल्प एज्यूकेद्गान एण्ड सोद्गियल डवलपमेन्ट सोसासटी तथा गु्रप फोर पीपुल्स द्वारा राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति द्वारा
जिला कलेक्टर परिसर के बाहर संचालित हस्ताक्षर अभियान में अपने हस्ताक्षर कर कही। उन्होने कहा कि १३ करोड राजस्थनीयों की मायड भाषा हिन्दी भाषा की जननी है। राज्य सरकार केन्द्र सरकार पर दबाव बनाकर राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाकर जन भावना का आदर करें। उन्होने कहा कि आखो राजस्थान इण पैटे जागरूकता रा प्रमुख गवाह भी हैं आपनी बोली राजस्थानी ने हर हाल में मानता मिलनी चाहिए। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष मेजर पर्बतसिंह राठौड ने कहा कि राजस्थान रा लोग लारले ६३ साल सू आपणी मायड भाषा राजस्थानी ने संविधान री आठवी अनुसूची में भंलण री मांग वास्ते आगे रैया है। पूरे राजस्थानी में राजस्थानी भाषा ने मान्तया देवण सारू अभियान चलाया जा रहा है। मिनखां री भावनाओं से आदर कर राजस्थानी ने मान्यता देवणी दीजै। इस अवसर पर कमलसिंह चूली ने कहा कि मायड भाषा री मानता में इती देरी राजस्थानी लोगो रो अपमान है।दूजे प्रदेशो मेंअपणी अपणी भाषा ने मानता दिया, सरकारी नौकरियों में प्रदेशो री भाषा जरूरी कर दी है। राजस्थानी भाषा भी स्कूलों में प्राथमिक स्तर कार्य राजस्थानी भाषा अनिवार्य करनी चीजै। उन्होने कहा कि २२ प्रादेशिक के लियये ने मानता केन्द्र सरकार दे मगर राजसथानी भाषा ने टालता जावे जो बर्दासानी होवे। हस्ताक्षर अभियान में समिति के चन्दनसिंह भाटी थारवासियो ने पाछै याद दिरायों कि जनगणना में हर थारवासी अपनी मायड़ भाषा रे रूप में राजस्थानी भाषा दर्ज करा भाषा ने मानता रो शुभ काम करावें। इस अवसर संकल्प संस्था के सचिव विजय कुमार ने कहा कि.हिवडे री ने जल्द ही मान्यता मिलनी चाहिऐ। राजस्थानी भाषा राजस्थान इस अवसर पर सरपंच बलवंतसिह भाटी, मोटाराम चौधरी, उम्मेदअली राजड , भलदान सुरा, उगमसिह राठौड , पार्षद अरविन्द जागिड , अद्गाक दर्जी, लक्ष्मीनारायण जोद्गा, वरिष्ठ पत्रकार निखिल व्यास, अद्गाक दवे, मागूसिह राठौड , रोद्गान खलीफा, धोधा खां सहित सात से अधिक थार वासियों ने अपने हस्ताक्षर कर मायड भाषा री मानता के लिये अपना समर्थन दिया। समिति द्वारा चलाए जा रहे अभियान में अब तक तीन से अधिक थारवासियों ने अपने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन व सहयोग दिया


राजस्थानी भाषा री मान्यता सारू महामहिम राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन जन भावना और सहयोग के साथ ज्ञापन भेजेगे महामहिम कोगौरव



राजस्थानी भाषा री मान्यता सारू महामहिम राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन
जन भावना और सहयोग के साथ ज्ञापन भेजेगे महामहिम कोगौरव
बाड़मेर। कृष्णा संस्था, संकल्प एज्यूकेशनल एण्ड सोशियल डवलपमेन्ट सोसायटी तथा गु्रप फोर पीपुल्स के तत्वाधान में राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति बाड़मेर द्वारा मातृभाषा दिवस पर राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग लेकर कमलसिंह महेचा के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर गौरव गोयल को ज्ञापन सुपुर्द किया। ज्ञापन देने थारवासियों का हुजुम उमड़ पड़ा। राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति क तत्वाधान में जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन मे ंलिखा है कि राजस्थान रा 13 करोड़ लोग लारला 63 सालां सूं आपरी मायड़ भाषा राजस्थानी नै संविधान री आठ अनुसूची मेँ भेळण री मांग करता आय रै'या है अनै हाल आंदोलन रै गेड़ मेँ है ।
आपणी मायड भाषा राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळण सारू राजस्थान में चाल रैयै आंदोलन सूं आप आच्छी तरियां परिचित हो ! आप राजस्थान में इण पैटै जगरुकता रा पड़तख गवाह भी हो !राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में नीं भेळण सूं होवण आळा घाटा भी आप सूं छाना नीं है ! आज आखो राजस्थान आपणी मायड भाषा राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में नीं भेळण रै दुख सूं कितरो दुखी है-आ बात भी आप सूं छानी नीं है ! पूरै देश रा टाबर आपरी मायड भाषा में शिक्षा ले रैया है पण राजस्थान रा टाबर कित्ता निरभागी है कै दुनियां री ऐक लूंठी भाषा रा मालक होंवता थकां परभाषा में प्राथमिक शिक्षा लेवण नै मज़बूर है ! अब "नि:शुल्क एवम अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा अधिनियम" रै आयां तो ओ और भी लाजमी होग्यो कै राजस्थान रा टाबर भी आपरी मायड़ भाषा राजस्थानी में प्राथमिक शिक्षा लेवै ! पण लेवै तो कीयां लेवै ? हाल आपणी मायड़ भाषा राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में नीं भेळीजी है ! आप तो जाणो ई हो कै इण बिना आ बिद नीं बैठै सा ! आप सूं आपरी मायड़ भाषा राजस्थानी आस राखै कै आप उण री आन-बान-स्यान सारू खेचळ जरूर करस्यो । आपरै छेतर  रा लोग भी आस राखै कै आप उणां नै उणां री ज़ुबान दिरावस्यो ! आप नै ध्यान ई है कै राजस्थान विधान सभा सूं मानजोग अशोक जी गहलोत सा राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळण रो प्रस्ताव सर्वसम्मति सूं पारित कर लोकसभा में पारित करण सारू केन्द्र सरकार नै भेजियो हो । बो प्रस्ताव बठै लारला सात बरस सूं रुळै है !
आप सूं अरज़ है कै आप मानजोग प्रधानमंत्री जी अर गुहमंत्री जी सूं मिल परा बेगै सूं बेगो राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळण सारू संविधान संषोधन विधेयक ल्यावण री ताकीद करो सा !
राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळीज्यां आपरो जस सवायो अनै ऊजळो होसी सा राजस्थान री विधान सभा खानी सूं राजस्थानी भाषा नै आठवीँ अनुसूची मेँ भेळण रो संकळप प्रस्ताव ध्वनिमत सूं पास कर परा संसद मेँ पास करण सारु केन्द्र सरकार नै 8 बरस पै'ली खिंदा राखियो है पण केन्द्र सरकार इण पेटै जरूरी संविधान संशोधन विधेयक नीँ ल्याय'र 13 करोड़ राजस्थान्यां रो अपमान कर रै'ई है । आप सूं अरज है कै आप महामहिम रै नाते संघ सरकार नै ओ जरूरी संविधान संशोधन विधेयक संसद रै इणीज सत्र ल्यावण सारु कैय'र राजस्थान्यां नै बां री मायड़ भाषा बख्सावण री किरपा कराओ सा !


ज्ञापन लेकर जिला कलेक्टर गोरव गोयल ने आश्वस्त किया कि जनभावना अनुरूप पूर्ण सहयोग के साथ ज्ञापन महामहिम को प्रेषित किया जाएगा। उन्होने कहा कि जन भावना का पूर्ण आदर होगा। ज्ञापन देने में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष मेजर पर्बतसिंह, लक्ष्मण वडेरा, समिति संयोजक, रिड़मलसिंह दांता, चन्दनसिह भाटी, पार्षद सुरतानसिह देवड़ा, संकल्प संस्था के सचिव विजय कुमार, सांगसिंह लूणू, मांगूसिंह राठौड़, लक्ष्मीनारायण जोशी, दुर्जनसिंह गुडीसर, रहमान खां, कबुल खां, मुस्लिम इंतजामिया कमेमटी के सदर असरफ अली, इन्द्रप्रकाश पुरोहित, बाबुसिह, सरपंच बलवन्तसिह भाटी, भलदान चारण सुरा, रामसिंह बोथिया, दिलावर शेख, मोटाराम चौधरी सरपंच विशाला आगौर, देरासर सरपंच उम्मेदअली राजड़, राणीगांव सरपंच उगमसिह सहित सैकड़ो की तादात में राजस्थानी भाषा प्रेमी साथ थे।


रविवार, 20 फ़रवरी 2011

राजस्थानी भाषा मान्यता हस्ताक्षर अभियान, राजस्थान की ओलखाण राजस्थानीबाड़मेर



राजस्थानी भाषा मान्यता हस्ताक्षर अभियान, राजस्थान की ओलखाण राजस्थानीबाड़मेर

राजस्थान की ओलखाण राजस्थानी


राजस्थानी भाषा मान्यता हस्ताक्षर अभियान, राजस्थान की ओलखाण राजस्थानीबाड़मेर[चन्दन भटी] राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए बाड मेर में कृष्णा संस्था, संकल्प एज्यूकेद्गानल एण्ड सोद्गिायल डवलपमेंन्ट सोसायटी एवं गु्रप फोर पीपुल्स द्वारा राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति के तत्वाधान में चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान को थार की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभियान के तीसरे दिन शनिवार को साढे छः सौ से अधिक लोगो ने दस्तखत कर अपना समर्थन दिया। समिति राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के उद्‌देद्गय से जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर हस्ताक्षर अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला परिषद्‌ सदस्य श्रीमती कोसर बानो ने कहा कि राजस्थानी भाषा संसार की सिरेजोड ा भाषावा माये सू एक है, इण में रती भर रो ही फरक कोनी। इण भाषा रौ इतिहास ढाई हजार बरस जूनी है। अर इण रो सयद कौस सैसू लूंठौ है। जिणमें दो लाख दस हजार शब्द है। मिसरी सी मीठी भाषा के सागे भेदभाव कर लोगों मिनखौ रे मूडे माथे तालों लगा दियों। आज तकाल भारत सरकार २२ भाषावां रे मानता दे राखी है राजस्थानी साथे आ दुभांत क्यू? कठै है राजस्थानी लोगो रो समानता रो अधिकार। राजस्थानी मिनखांॅ ने राजस्थानी भाषा ने मानता दे और समानता रो अधिकार देवणों पड ी।

इस अवसर पर संयोजक रिड़मल सिह दांता ने कहा कि राजस्थान की पहचान राजस्थानी से है। राजस्थानी भाषा की मिठास और अदब का कोई सानी नही है। उन्होने कहा कि वृहद संस्कृति की पहचान मायड भाषा राजस्थानी भाषा कोई मान्यता देने दिलाने के लिए आम जनता में जबरदस्त उत्साह है। इस अवसर पर चन्दनसिंह भाटी ने कहा कि हर राजस्थानी के कण्ठ में बसी राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिये हर स्तर पर जरूरी प्रयास करने होगें। इसके लिए हर स्तर पर जरूरी प्रयास करने होगें। इसके लिए सामुहिक प्रयासों की आवद्गयकता रहेगी। इस अवसर पर पार्षद सुरतानसिह रेडाणा, अद्गवनी रामावत, रूपसिंह माडपुरा, पार्षद उमा जैन, बोला सरपंच चिमाराम चौधरी, मौलवी हनीफ, ताराराम मेगवाल, दिनेद्गा दवें, एडवोकेट उदयभानसिह, प्रकाद्गा जोद्गाी सहित सैकड ो थारवासियों ने हस्ताक्षर कर अभियान को समर्थन दिया

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

राजस्थानी भाषा को मान्यता संघर्ष में पूरा समर्थन-मानवेन्द्रसिह




बाडमेर [चन्दन भाटी] मायड भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने के उद्देश्य से कृष्णा संस्था, संकल्प एज्यूकेद्गानल एण्ड सोद्गियल डवलपमेंन्ट सोसायटी, गु्रप फोर पीपुल्स द्वारा राजस्थानी भाषा मान्यता सघर्ष समिति बैनर तले चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान को आज बाड मेर जैसलमेंर के पूर्व सांसद मेजर मानवेन्द्रसिंह ने पूर्ण समर्थन देते हुए मान्यता मिलने तक सघर्ष जारी रखने का आहवान किया।

इस अवसर पर मेजर मानवेन्द्रसिंह ने कहा कि राजस्थानी भाषा म्हारे हिये में बसी है। राजस्थानी भाषा के मान्यता हर हाल मे मिलनी चाहिए। इसके लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होने बाड मेर की जनता से अपील की है कि राष्ट्रीय कार्यक्रम जनगणना में सभी थार निवासी प्रथम भाषा के रूप में राजस्थानी दर्ज कराए। उन्होने कहा कि संविधान की आठवी सूची में राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिए जरूरी है कि आम जनता मायड भाषा के प्रति संवेदनद्गील रह कर पूर्ण सहयोग करें उन्होने राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मान्यता के लिए सतत्‌ प्रयासों की आवद्गयकता है मानवेन्द्रसिंह ने कहा कि जैसलमेंर में भी राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिए अभियान चलाया जाएगा। इस अवसर पर समिति संयोजक रिड मलसिंह दांता ने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिए चलाए जा रहे अभियान को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है लोगो के मन में राजस्थानी भाषा के प्रति आस्था का ज्वार उमड रहा है एक अवसर पर तरूण कागा ने कहा कि जननी भाषा को मान्यता मिलने तक सघर्ष को पूरा सहयोग किया जाएगा। इस अवसर पर तेजदान चारण ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि हमारी मायड भाषा की मान्यता के लिए अभियान चलाना पड रहा है। इस अवसर पर चन्दनसिंह भाटी ने कहा कि इस अभियान को गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक ले जाया जाएगा तथा हर व्यक्ति से समर्थन व सहयोग मांगा जाएगा। पार्षद सुरतानसिंह रेडाणा, वीरसिह भाटी, कचरा खां, सादिक खां, हरीद्गा मूदडा, सांगसिह लुणू, संकल्प संस्था के सचिव विजय कुमार ने भी राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए चलाए जा रहे अभियान को पूर्ण सहयोग का आहवान किया।

सघर्ष समिति द्वारा संचालित हस्ताक्षर अभियान को शुक्रवार को चूनाराम पूनड़, प्रेमजीत धोबी, दुर्जनसिह गुडीसर ईद्गाा खां, कचरा खां, युसुफ खां ने भी अपने हस्ताक्षर कर समर्थन जाहिर किया। प्रेमजीत धोबी ने कहा कि राजस्थानी भाषा हमारे हदय में बसी है। हमारी संस्कृति की परिचालक है। अभियान के दूसरे दिन बड ी तादाद में थारवासियों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन जाहिए किया। पहाड सिह भाटी, भाखरसिंह गोरडि या, बद्रीद्गारदा, सजय रामावत, लजपतराज जागिड , द्गाक्षाविद्‌ देवीसिह चौधरी, रहमान खां हालेपोतरा, अमीन खां समा, सदर असरफ अली मजूंद अहमद, राजेन्द्रसिंह भीयाड श्रीमती उम्मेद बानू, कबूल खां, रहमद खां, अद्गवनी रामावत, सहित कई वरिष्ठ नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया