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रविवार, 1 मार्च 2020

जैसलमेर विख्यात संगीतकार आनंद जी के साथ उनके 88 वें जन्मदिन पर खास मुलाकात* *आज के संगीत में आत्मा और गीतों में भावना का अभाव;आनंद जी*

जैसलमेर विख्यात संगीतकार आनंद जी के साथ उनके 88 वें जन्मदिन पर खास मुलाकात*

*आज के संगीत में आत्मा और गीतों में भावना का अभाव;आनंद जी*






विख्यात संगीतकार आनंद जी के साथ उनके 88 वें जन्मदिन पर खास मुलाकात*

*आज के संगीत में आत्मा और गीतों में भावना का अभाव;आनंद जी*

*जैसलमेर बीते जमाने के बॉलीवुड के विख्यात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंद जी के आनंद जी जीवन के 88 बसंत देख चुके।फिल्मी दुनिया की पारी खत्म करने के बाद सामाजिक सरोकार के कार्यो से जुड़कर समाज और देश की सेवा में जुटे है।।88 साल की उम्र में भी आनद जी का हौसला और उत्साह बरकार है।।88 वां जन्मदिन 2 मार्च को मनाने अपने परिवार सहित 35 साल बाद जैसलमेर आये आनंद जी से दो पल शकुन की मुलाकात हुई।।सहज और सरल अंदाज़ आज भी उन्हें खास बनाता है।।चार दशकों तक फिल्मी दुनिया मे अपने सुमधुर सदाबहार संगीत का डंका बजाने वाले आनंद जी जेसलमेर प्रवास के दौरान किले पर होटल गढ़ जैसल में उनसे खास मुलाकात के दौरान हुई बातचीत पेश है।


*बहुत तेज़ी से सब कुछ बदला*

*सब कुछ बदल गया।।वो समय था जब हम संगीत तैयार करते पूरा वक़्त देते आज जैसी भाग दौड़ नहीं थी।।संगीत प्रेमियों की पसन्द का ख्याल रख कर संगीत तैयार किया जाता था।।आज वक़्त बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।।लोगो की पसन्द बदली है।।

*दो दशकों में संगीत में आया अंतर*

आज संगीत का मतलब ही बदल गया।।गीतों में संगीत के नाम पर शोर ज्यादा है।।उस वक़्त के गीतों में भावना जुड़ी होती थी तो संगीत में आत्मा।।आज के संगीत में इन दोनों का अभाव है।।
इसीलिए आज का संगीत दिल के करीब नही होता।।

संगीत का बाजारीकरण से मिठास खत्म 

*सबकी अपनी शैली है।।किसी विशेष नाम का उल्लेख नहीं करूंगा।।मगर लम्बे समय तक याद रखे जाने वाले संगीत का अभाव है।।समय के साथ संगीत प्रेमियों की पसन्द भी बदली है।संगीत का बाजारीकरण हो जाने से मिठास खत्म हो गई।
 
डॉन का खाइके पान बनारस वाला

किशोर दा ने इस गीत को अमर कर दिया था।अमिताभ बच्चन ने इसको पर्दे पर जी लिया।अमिताभ के अपने फेन है।।शाहरुख के अपने ।।शाहरुख के फैन तुलना करते है अमिताभ पर फिल्माया गीत शाहरुख पर कैसा लगेगा।।संगीत प्रेमी खुद फैसला कर सकते है बेहतर कौन था।।

फिल्मी दुनिया में आज भी योगदान

जी बिल्कुल।।फिल्मी दुनिया ने सब कुछ दिया।संगीत में सक्रिय नहीं है मगर फिल्मी आयोजनों,अवार्ड फंक्शन,आदि में याद करते है तो जाते है।।

पुराने गीत ब्रांड है,रीमिक्स के जरिये मार्केटिंग 

पुराने गीत ब्रांड है।।उनकी मांग आज भी उतनी है।।पुराने गीतों के ब्रांड और वेल्यू को ध्यान में रख रीमिक्स कर बाजार में उतारा जा रहा है।।मूल संगीत गीत की आत्मा होती थी आत्मा रीमिक्स में निकल जाती है।।

उम्र के इस पड़ाव में समाज सेवा

आनंद जी उम्र के इस पड़ाव में सामाजिक सरोकार के कार्यो से जुड़कर सेवा कर रहे।उन्होंने बताया कि वो नशामुक्ति,शिक्षा,पर्यावरण,घर घर शौचालय ,स्वच्छता जैसे सामाजिक मुद्दों के साथ जुड़कर कार्य कर रहे है।।आनंद जी ने बताया कि ईश्वर ने जो जिन्दगि दी उसे पूरी तरह जीना चाहिए।।

जैसलमेंर खूबसूरत जगह

आनंद जी ने जेसलमेर को खूबसूरत शहर बताते हुए कहा कि वो अक्सर आते रहते है।।इस शहर में शकुन मिलता है।।पर्यटन के हिसाब से बेहतर स्थान है।।मेरे आराध्य देव रूणिचा (बाबा रामदेव मंदिर) दर्शन करने आते रहता हूँ।।जेसलमेर मेरे दिल के करीब है।।