शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

एटीएम से रूपए निकालने पर चुकाना होगा शुल्क

मुंबई। अभी तक एटीएम से रूपए निकालने वालों को किसी तरह का शुल्क नहीं चुकाना पड़ता है।

लेकिन अब एटीएम से रूपए निकालने पर आपको अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकों को इस बात की अनुमति देने जा रहा है कि वे एटीएम से पैसे निकालने वालों से एक निश्चित राशि वसूल सकते हैं।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने कहा कि भारतीय रिर्जव बैंक को इस बात से कोई ऎतराज नहीं होगा कि बैंक ऎसी सेवाओं के लिए उचित फीस मांग लें।

उन्होंने कहा यदि बैंक एटीएम ट्रांजेक्शन पर उचित फीस मांग लें तो आरबीआई को कोई ऎतराज नहीं होगा।

अभी उपभोक्ता अपने बैंक के एटीएम से महीने में कितनी ही बार रूपए निकाल सकते हैं, वहीं किसी दूसरे बैंक के कैश अउटलेट से महीने में पांच बार। बैंक को हर फ्री ट्रांसेक्शन के लिए भी दूसरे बैंक को 15 रूपए और टेक्स चुकाना पड़ता है।

अब यह बोझ उपभोक्ताओं पर आ सकता है। फिलहाल बैंक इस बारे में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन से चर्चा कर रहे हैं। चर्चा के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

तानाशाह ने चाचा को नंगा करके कुत्तों के हवाले किया

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग ने अपने ही चाचा जैंग सोंग थाएक को बहुत ही क्रूर तरीके से मरवा दिया था। हत्या को देश की इतिहास की सबसे क्रूर हत्या बताया जा रहा है। हांगकांग के एक स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक तानाशाह ने अपने चापा को नंगा करके तीन दिनों से भूखे 120 शिकारी कुत्तों के पिंजरे में डाल दिया था। इतना ही नहीं जैंग के साथ ही उनके पांच साथियों को भी उस पिंजरे में डाला गया था। शिकारी कुत्ते उन छह लोगों को एक घंटे तक नोचते रहे। तानाशाह ने चाचा को नंगा करके कुत्तों के हवाले किया

जैंग सोंग थाएक उत्तर कोरिया के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स माने जाते थे। उत्तर कोरिया में आम तौर पर राजनीतिक बंदियों की गोली मारकर हत्या की जाती है। किम जोंग ने अपने चाचा की हत्या पर संकेतों में कहा था कि उन्होंने गुटबाजी की गंदगी को साफ किया है। अब राज्य और मजबूत होगा। हालांकि उन्होंने अपने भाषण में एक बार भी थाएक का नाम नहीं लिया। थाएक पर सत्तासीन पार्टी और देशहित के खिलाफ काम करने के आरोप था।

किम जोंग ने उतरी कोरियां की कमान 2011 में अपने पिता की मौत के बाद संभाली थी।

जयपुर में देह व्यापार का एक और अड्डा पकड़ा

जयपुर। राजधानी जयपुर की पुलिस ने देह व्यापार के गोरखधंधे पर कार्रवाई करते हुए पांच जनों को गिरफ्तार किया। देह व्यापार के इस अड्डे का भंडाफोड़ करधानी थाना इलाके में हुआ। गौरतलब है कि राजधानी जयपुर में देह व्यापार के बढ़ते अपराधों के बारे में गुरूवार को ही खबर प्रकाशित की गई थी। रोचक बात ये है कि पिछले पंद्रह-बीस दिनों में पुलिस ने राजधानी में आधा दर्जन से ज्यादा वेश्यावृत्ति के अaों का भंडाफोड़ किया है। जयपुर में देह व्यापार का एक और अड्डा पकड़ा
झोटवाड़ा एसीपी नसीमुल्लाह खान ने बताया कि इस संबंध में मुखबिर ने सूचना दी। इसके बाद निवारू रोड स्थित एक फ्लैट में कार्रवाई को अंजाम दिया। किराए के फ्लैट में यह धंधा चल रहा था। एडि. कमिश्नर डॉ. गिर्राज मीणा ने बताया कि देह व्यापार के विरूद्ध पुलिस सख्त है और आगामी दिनों में भी निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।

आरोपियों से हो रही है पूछताछ
एसीपी खान ने बताया कि गुरूवार शाम करीब साढ़े सात बजे निवारू रोड जयकरणी नगर स्थित एक फ्लैट पर बोगस ग्राहक भेजा गया था। हजार रूपए में सौदा तय होने पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी और एक युवती, एक महिला और तीन पुरूषों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी महिला मधु पत्नी लक्ष्मण दास वेश्यावृत्ति कराते हुए पकड़ी गई थी। जिया पुत्री समीर, सामोद निवासी आदित्य सिंह उर्फ सोनू, पाली निवासी सुरेंद्र और अलवर निवासी पूरण दास (28) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

मनमोहन बोले,मोदी पीएम बने तो देश की होगी बर्बादी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीडिया से रूबरू होते हुए शुक्रवार को कहा कि वे तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे। प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी किसी दूसरे को देंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि यूपीए-2 सरकार की तीन बड़ी नाकामियां रहीं। भ्रष्टाचार, महंगाई और युवाओं को रोजगार देने में कमी रही। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि उन्होंने विपक्ष का साथ दिया। विपक्ष ने भी भ्रष्टाचार को दुष्प्रचारित किया। उन्होंने खुद पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप पर दुख जताया। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी ने कभी उनसे इस्तीफा नहीं मांगा। मनमोहन बोले,मोदी पीएम बने तो देश की होगी बर्बादी
सिंह ने कहा कि मैं चुप नहीं रहता और जब भी जरूरत पड़ती है बोलता हूं। उन्होंने साफ किया कि वे अगले प्रधानमंत्री को पद सौंपेंगे। सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमने अच्छा काम किया और देश की आर्थिक स्थिति को सुधारा। गरीबों का ख्याल रखा। उन्होंने कहा कि सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव ठीक नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि वे अभी अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। पिछला दशक उतार-चढ़ाव से भरा रहा।

उन्होंने कहा कि हमने एनडीए सरकार से अच्छा काम किया। महंगाई बढ़ी तो लोगों की आमदनी बढ़े इसके लिए भी सरकार ने प्रयास किए। देश इस बात को समझेगा और यूपीए-3 की सरकार में फिर कांग्रेस का प्रधानमंत्री बनेगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सरकार में होते तो ताकत बढ़ जाती। उन्होंने राहुल को प्रधानमंत्री पद के लिए काबिल उम्मीदवार बताया।

हालात सही नहीं थे इसलिए पाक नहीं गया

पाकिस्तान से तल्खी बढ़ने और सरकार के उस पर कदम उठाने के बारे में पीएम ने कहा कि वहां मुशर्रफ के हटने के बाद काफी हालात बदले। विपरीत परिस्थितियों के चलते ही वे पाकिस्तान की यात्रा पर नहीं गए।

पत्रकारों से रूबरू होते हुए पीएम ने ये बातें मीडिया के सामने रखीं...


- पीएम ने सभी को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चुनाव से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। भारत की आर्थिक स्थिति सुधरी है। पिछला दशक उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरू में आर्थिक हालात अच्छे थे बाद में बिगड़े हैं। बाकी दुनिया की वजह से हालात बिगड़े हैं। हमारे कार्यकाल में सभी तबकों की तरक्की हुई है। पिछड़े तबकों का भी विकास हुआ है।

- नरेगा से लोगों को रोजगार मिला है। रोजगार की वजह से क्रय शक्ति बढ़ी है। किसानों को फसल का उचित दाम मिला। हमारे कार्यकाल में गरीबी घटी है।

- हम मंदी का मुकाबला कर पाए। कमजोर तबकों का विकास हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में विकास हुआ। पिछडे इलाकों में भी शिक्षा का फायदा मिला। नए आईआईटी और आईआईएम खुले। हम नौकरियां नहीं बढ़ा पाए। छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को अधिकार देने के लिए कई कानून बनाए। उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। महंगाई को काबू में न करना हमारी नाकामी है।

-विधानसभा चुनावों में हार के सवाल पर पीएम ने कहा कि मैं ईमानदारी से कहूंगा कि महंगाई एक वजह रही है विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की। विधानसभा चुनाव में हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। नतीजों से हम सबक लेंगे। महंगाई बढ़ी साथ में लोगों की आमदनी भी बढ़ी है। हमने भ्रष्टाचार रोकने के लिए नीतियां बदली। मैं पहले भी बता चुका हूं कि महंगाई की वजहें हमारे कंट्रोल के बाहर थीं। महंगाई की कई वजह हैं, हमारी सरकार ने समाज के गरीब तबके को महंगाई से बचाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। मनरेगा और दूसरी रोजगार स्कीम के जरिए हमने किसान और मजदूर को सुरक्षा मुहैया कराई है। इन्हें दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए।

-पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहते हैं। देश की सुरक्षा में पैसे खर्च करते रहेंगे। हमारी कोशिश हमेशा पड़ोसी देशों से रिश्तों सुधारने की रही है।

-इस बार पीएम की जिम्मेदारी दूसरे को दूंगा। पीएम ने कहा कि वे अगली बार पीएम नहीं बनेंगे। चुनाव के बाद अगले पीएम को अपनी जिम्मेदारी दूंगा। राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उचित उम्मीदवार हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे अभी इस्तीफा नहीं देंगे। राहुल पर पार्टी फैसला करेगी।

यूपीए पर भ्रष्टाचार के आरोपों के सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां तक भ्रष्टाचार के आरोपों की बात हैं, उनमें से ज्यादातर यूपीए के पहले कार्यकाल के समय लगे। कोल ब्लॉक या 2जी अलोकेशन में अनियमितता के आरोप यूपीए-1 के समय लगे। उसके बाद हम चुनावों में गए और अपने प्रदर्शन के दम पर चुनाव जीता। लोगों ने हमें जनादेश दिया। इसलिए ये जो मुद्दे जिन्हें समय-समय पर सीएजी, कोर्ट या मीडिया ने उठाया है। ये याद रखना चाहिए कि ये यूपीए-1 के दौरान के हैं। इस देश के लोगों ने करप्शन के उन आरोपों पर ध्यान नहीं दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स, 2जी, कोल इन सबने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। क्या कोई और तरीका था। मैं दुखी महसूस करता हूं। मैं ही था, जिसने जोर दिया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन को पारदर्शी और निष्पक्ष होना चाहिए। मैंने ही कोल ब्लॉक की बात कही थी। विपक्ष के अपने स्वार्थ हैं। मीडिया उनके हाथों में कई बार खेल जाता है।

-सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के सवाल के जवाब में मनमोहन ने कहा कि हमने सच्चरी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए काफी काम किया है। मुझे दुख है कि ये तमाम काम अवाम तक नहीं पहुंच सका। ये भी ठीक है कि कुछ ऎसी बातें हैं जो अभी करनी बाकी हैं। कुछ कोट्र्स में हैं, कुछ और मुश्किलें आई हैं। जिसकी वजह से और चीजें लागू नहीं की जा सकीं। जहां तक हमारी सरकार का ताल्लुक है हमारी सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए छात्रवृत्ति बढ़ाई है।

-हिमाचल प्रदेश के सीएम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के सवाल पर उनका कहना था कि मुझे अभी इस पर दिमाग लगाने का समय नहीं मिला है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। अभी मैंने कुछ अखबारों में ही इसके बारे में पढ़ा है।

-बदलाव के बारे में उन्होंने कहा कि मैं वही आदमी हूं, जो 9 साल पहले था। मुझमें कोई बदलाव नहीं आया है। मैंने पूरे निष्ठा-समर्पण के साथ काम किया है। इस दौरान कभी अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का काम नहीं किया।

-भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में पीएम ने कहा कि ऎसे आरोपों पर अफसोस है। विपक्षियों ने दुष्प्रचार किया है।

-मोदी के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर पीएम ने कहा कि अगर मोदी पीएम बनते हैं देश की बर्बादी होगी। अगला पीएम यूपीए का ही होगा। जिसके राज में दंगे हुए वो पीएम नहीं बन सकता।

- एक पत्रकार ने पीएम से सवाल पूछा कि क्या कांग्रेस ने कभी आपसे इस्तीफा मांगा। तो पीएम ने कहा कि मुझसे पार्टी ने कभी भी इस्तीफा नहीं मांगा। सोनिया गांधी ने हमेशा साथ दिया है। मैंने भी कभी इस्तीफा देने के बारे में कभी नहीं सोचा। पिछले 9-10 सालों में कभी ऎसा मुश्किल वक्त आया, जब आपको लगा हो कि इस्तीफा दे देना चाहिए? इस सवाल पर उन्होंने जवाब दिाय दिया कि नहीं ऎसा कभी नहीं लगा। मुझे अपने काम में मजा आया। मैंने समर्पण, पूरी ईमानदारी और एकाग्रता के साथ काम किया और बिना किसी डर या फेवर के साथ किया।

-पाकिस्तान के साथ संबंधों के बारे में पीएम ने कहा कि पाक के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के हटने की वजह से शांति प्रक्रिया रूकी है और हम अपने पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं।

-मेरे कार्यकाल को इतिहास तय करेगा कि मैंने देश के लिए क्या किया और क्या नहीं किया।

-सिख दंगों के पीडितों के सवाल पर पीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने सिख दंगों के पीडितों के लिए बहुत कुछ किया है। 1984 में जो दंगे हुए हमारी कोशिश होगी कि वे दोबारा से देश में न हो। सिख दंगों के लिए हमने माफी मांगी है।

-सरकार में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के विचारों को सम्मान होता है। सरकार ने कई बार उनके विचारों का माना है। लेकिन सरकार उनकी हर बात को मानने के लिए बाध्य नहीं है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के विचारों से सरकार को फायदा मिला है।

-आप पार्टी के दिल्ली चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के सवाल पर मनमोहन ने कहा कि आप पार्टी को वक्त मिलना चाहिए।

बतौर प्रधानमंत्री उनके दूसरे कार्यकाल में यह दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है और पूरे दस साल के कार्यकाल में वे तीसरी बार पत्रकारों से रूबरू हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने उन्होंने यूपीए सरकार की उपलब्धियों को रखा। साथ ही उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार, इकोनोमी, विधानसभा चुनाव के नतीजों और अन्य मुद्दों पर पत्रकारों की सवालों का जवाब दिया।

बाड़मेर नगर परिषद्। . स्वर्ण जयन्ती योजना में करोडो का घपला फर्जी भुगतान का माला बोर्ड बैठक में भी उठा था

बाड़मेर नगर परिषद्। . स्वर्ण जयन्ती योजना में करोडो का घपला फर्जी भुगतान का माला बोर्ड बैठक में भी उठा था 

बाड़मेर स्वर्ण जयन्ती योजना के तहत सरकार की महत्वाकांक्षी स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना में बड़ा घपला सामने आया है. जिसके चलते ना सिर्फ सरकारी खजाने को भारी भरकम चपत ही लग रही है बल्कि बेरोजगार महिलाओं के सपने भी चकनाचूर हो रहे हैं.
हमारे द्वारा की गयी पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एक बड़े अधिकारी से जब इस योजना में गड़बडिय़ों को लेकर जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि आप प्रशिक्षण में गड़बड़ी की बात कर रहे हो, जबकि यह मामला तो इतना बड़ा है कि इसकी गहराई से जांच हो तो कई बड़े पेच खुलेंगे। इस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि योजना में गड़बड़ी तो दिसंबर से ही शुरू हो गई थी जब आदेश आए थे। इस अधिकारी ने यह भी बताया कि जनवरी से शुरू होने वाले प्रशिक्षण केंद्र फरवरी से ही क्यों शुरू हुए और नागौर परिषद क्षेत्र में यह शिविर अब अप्रैल में जाकर क्यों शुरू हो रहे हैं। इनकी जांच होनी चाहिए।
स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के नाम पर सांख्यिकी विभाग व कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं जिले में कागजी खानापूर्ति में जुटी हैं। जिले में 22 सौ महिलाओं को योजना का लाभ देना था ताकि वे अपने पांवों पर खड़ी हो सके. अपने स्तर पर छोटे मोटे काम करके घर परिवार चलाने में मदद कर सके। मगर जिले में कई जगह तो इस योजना के तहत ट्रेनिंग का काम शुरू ही नहीं हुआ है। कई स्थानों पर एनजीओ ने सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों के साथ बंदरबांट करते हुए कागजों में ही ट्रेनिंग दे दी।
अधिकृत सूत्रों के अनुसार स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के तहत बाड़मेर जिले में 22 सौ महिलाओं को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जाना था। यह कार्य वैसे तो जनवरी 2013 में ही शुरू हो जाना था मगर जिले में कई स्थानों पर पालिका व सांख्यिकी विभागों के अधिकारियों की बीच की खींचतान व कमीशन की सेटिंग नहीं बैठने से यह काम समय पर शुरू नहीं हो पाया। बाड़मेर में तो पूरा गड़बड़ झाला नज़र आ रहा है. एक भी वार्ड में प्रशिक्षण आयोजित नहीं हुआ. एक वार्ड में मेडिकल शिविर कुछ देर के लिए लगाया गया जिसका उद्घाटन कराया गया था उद्घाटन करतो के जाते ही शिविर समेत लिया. आयुक्त द्वारा सी एस डी कमेटी में बिना अनुमोदन के कई संस्थाओ को काम दिया गया हें जबकि कमेटी में मात्र दो संस्थाओ के ही प्रस्ताव आये थे. आयुक्त के गृह जिले की एक संस्था को लाखो रुपयों का काम फर्जी वादे में दिया गया हें .आयुक्त के स्वजातीय रिश्तेदार की इस संस्था को बिना अनुमोदन के कार्य दिया गया .
शुरुआत अप्रैल में क्यों
योजना के तहत बीपीएल परिवारों की गरीब महिलाओं को प्रशिक्षण जनवरी में ही शुरू हो जाना चाहिए था, मगर बाड़मेर ,बालोतरा पालिका क्षेत्रों में यह कार्य फरवरी माह में शुरू हो पाया। बाड़मेर नगर परिषद क्षेत्र में तो यह कार्य अब अप्रैल में शुरू हो रहा है। परिषद क्षेत्र में तो इस योजना के तहत आठ स्वयं सेवी संस्थाओं को ट्रेनिंग देने का जिम्मा सौंपा गया है, मगर अभी 2 अप्रैल को केवल मात्र एक संस्था की ओर से ही कार्य प्रारंभ करने की पुष्टि हो पाई है। आयुक्त ने 28 मार्च को ही प्रशिक्षण कार्य शुरू करने के आदेश दिए थे।
1 करोड़ 98 लाख की है योजना
सूत्रों ने बताया कि स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के तहत बाड़मेर जिले में जिन 22 सौ महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाना है, उसके लिए करीब 1 करोड़ 98 लाख रुपए का बजट प्रस्तावित है। इसमें प्रत्येक महिला के नाम पर नौ हजार रुपए तक का खर्चा एनजीओ के माध्यम से किया जा सकता है। मगर जमीनी स्तर कितनी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाना है और कितनी महिलाओं के नाम दर्ज है और कितनी महिलाओं के नाम से पैसे उठाए जा रहे हैं, यह भी अब जांच का विषय बन गया है।
इस तरह खर्च होता है पैसा
तीन माह के प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षार्थी महिला को 500 रुपए प्रति माह के हिसाब से 15 सौ रुपए का चेक स्टाइपेंड के तहत देना है। इसके अलावा 15 सौ रुपए का टूल किट भी दिया जाना है। प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर बैंकों से ऋण दिलवाने का काम भी एनजीओ का है। इसमें प्रति समूह 1.25 लाख रुपए का अनुदान परिषद व पालिकाओं द्वारा दिया जाता है। यह राशि सरकार ने पालिकाओं व परिषदों के खाते में भी जमा करा दी।
बाड़मेर जिले की नगर परिषद् में गत पांच सालो से इस योजना का काम एक मात्र संस्था को ही दिया जा रहा है. परिषद् द्वारा कभी संस्थाओ से प्रस्ताव नहीं मांगे गए. इस बार भी दो संस्थाओ के प्रस्ताव आये थे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जिसका अनुमोदन किया था. सरकारी आदेश के अनुसार कार्य जनवरी में आरम्भ किया जाना था, मगर आपसी बन्दर बाँट और सेटिंग में समय लगने से अप्रेल मे आदेश के साथ भुगतान करने का मामला सामने आया हें 

ब्लाउज ने बचाई पोस्टमेन की इज्जत!

लंदन। यह आपको सुनकर हैरानी होगी इंलैंड का रहने वाला विक्टर नाम का यह पोस्टमेन ब्लाउज के चक्कर में ही जेल गया था और अब ब्लाउज ने ही उसको रिहा करवाया है।
दरअसल मामला ये है कि विक्टर नियनल नाम के इस पोस्टमेन को 1997 में एक 22 वर्षीय किशोरी से रेप करने के जुर्म में 17 साल जेल की सजा मिल, लेकिन अब वह बाहर निकला गया है।

जब विक्टर पर बलात्कार आरोप लगा तो उनके पास बचने का कोई ठोस नहीं था और ना ही उस वक्त उनके वकील उन्हें सजा से बचाने में कामयाब हो पाए। इसलिए सजा कम पाने के लिए विक्टर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

विक्टर के केस में जांच कर रही टीम के हाथ एक ऎसा सबूत लगा है जिसने उन्हें बेगुनाह साबित कर दिया। ये सबूत कोई नहीं बल्कि उस महिला का ही ब्लाउज था जिसने उन पर रेप का आरोप लगाया था।

जब पीडित महिला के ब्लाउज की जांच की गई तो सामने आया कि उसेमें मौजूद डीएनए विक्टर के नहीं बल्कि किसी और के हैं और इसी सबूत के चलते उन्हें दिसम्बर 2013 में बाइज्जत रिहा कर दिया गया।

लेकिन विक्टर को अफसोस है कि उनकी जिंदगी के महत्वपूर्ण साल जेल में फालतू में ही बर्बाद हो गए। इसी के चलते अब वो पुलिस पर उल्टा केस ठोंकने की तैयारी में हैं। लेकिन फिलहाल वो अपनी आजादी को लेकर बहुत खुश हैं और इसका जश्न मना रहे हैं।

रिश्वत लेते डीएसपी, एसएचओ को रंगे हाथों पकड़ा



फलासिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने गुरूवार देर शाम शराब के एक मामले में वसूली करने की शिकायत पर कोटडा डीएसपी, पानरवा एसएचओ सहित एक हेडकांस्टेबल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
रिश्वत लेते डीएसपी, एसएचओ को रंगे हाथों पकड़ा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता सुनील व गोपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों में बताया कि पानरवा पुलिस द्वारा 27 नवंबर को उनकी शराब पकडी गई थी। मामले को रफा-दफा करने के लिए कोटडा डीएसपी मनीष शर्मा, पानरवा थानाधिकारी धूलजी मीणा व डैया चोकी हेडकांस्टेबल प्रभु लाल ने पांच लाख रूपए की मांग की। इस पर शिकायतकर्ताओं ने 4 लाख 70 हजार रूपए तो दे दिए किंतु इसके बाद भी पुलिसकर्मी तीस हजार रूपए व मासिक बंदी पचास हजार रूपए की मांग कर रहे थे।


एसीबी द्वारा शिकायत की तस्दीक सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जाल बिछाया गया और गुरूवार को पानरवा थाने में ही शेष राशि देने पर शिकायतकर्ताओं द्वारा सहमति व्यक्त कर दी गई ।


एसीबी अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद गोयल के निर्देशन में डीएसपी राजीव जोशी के नेतृत्व में एसीबी की टीम भी थाने के आसपास सादी वर्दी में इंतजार करती रही। जैसे ही शिकायतकर्ताओं का इशारा मिला टीम ने थाने में मौजूद डीएसपी, थानेदार व हेडकांस्टेबल को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।


एसीबी की टीम ने रात भर सभी कागजी कार्यवाही निपटाई। देर रात तक थाने में ही सो रहे अन्य पुलिसकर्मियों को भी मामले की भनक तक नहीं लगी। सुबह जैसे ही पानरवा कस्बा मुख्यालय पर मामले की जानकारी मिली। ग्रामीणों का भी पुलिस थाने में तांता लग गया। एसीबी टीम आरोपियों को उदयपुर के लिए लेकर रवाना हुई। इधर थाना परिसर में सन्नाटा पसर गया और पुलिसकर्मियों के चेहरे उतर गए। एसीबी टीम में सीआई विरेन्द्र सिंह व हरिश चुण्डावत सहित अन्य कर्मी मौजूद थे।

सर्वे में पार्टी को 70 से 75 सीटें सर्वे ने कांग्रेस की नींद उड़ा

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर आंतरिक सर्वे ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी। सूत्रों की मानें तो उसके सर्वे में पार्टी को 70 से 75 सीटें ही मिल रही है। पिछली बार 206 सीटें मिली थी।
राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ में हालत और बिगड़ेंगे। पार्टी ने सर्वे ऎसे समय कराया, जब राहुल गांधी को पीएम प्रत्याशी बनाने की बात है।

महिला कांग्रेस देश मे अभियान चला 17 जनवरी की एआईसीसी बैठक में बकायदा राहुल को पीएम प्रत्याशी बनाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। एआईसीसी के कुछ सदस्य भी ऎसा प्रस्ताव लाएंगे।

यहां भी घाटा
सूत्रों की मानें तो सर्वे ने पार्टी के भीतर राहुल गांधी को लेकर चिंता बढा दी है। सर्वे में कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान हिंदी भाषी राज्यों में हो रहा है।

कांग्रेस शासित उत्तराखंड, हरियाणा, आंध्रप्रदेश और हिमाचल में भी पार्टी को भारी नुकसान होने जा रहा है। उत्तरप्रदेश में पार्टी पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पा रही है। बिहार में भी सुधार नहीं है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में विधानसभा चुनाव वाले जैसे हालात रहने वाले हैं।

चिंता...दुविधा...क्या करें
सर्वे से कांग्रेस में काफी हलचल है। नेता दबी जुबान से स्वीकारने लगे हैं कि हालत चिंताजनक हैं। राहुल को आगे कर चुनाव लड़ा जाए। भ्रष्टाचार-महंगाई को लेकर कड़े कदम उठाएं आदि। दुविधा है, फिर भी हालात नहीं सुधरे तो राहुल के सिर पर सारी बात आएगी। कांग्रेस को नरेंद्र मोदी से चुनौती मिल रही थी। अब आप ने परेशानी बढ़ा दी है। आप वोट बैंक पर सेध लगा रही है।

4.5 करोड से होगा गोडावन का संरक्षण

मिलेगी प्रोत्साहन राशि प्रचार- प्रसार किया जाएगा

लगेंगे बेरियर व केमरें गोडावन पर होगी रिसर्च नए कलोजर बनेंगे



जैसलमेर



राज्य पक्षी गोडावन (ग्रेड इंडियन बस्टर्ड) की घटती संख्या को देखते हुए गोडावन परियोजना के तहत इसके संरक्षण के लिए प्रयास तेज कर दिए गए है। सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए इस वर्ष में 4.5 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। जिसके द्वारा गोडावन के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयास किए जाएंगे। गौरतलब है कि राजस्थान के राज्यपक्षी गोडावन की संख्या लगातार कम होती जा रही है तथा इसका क्षेत्र भी सिमटता जा रहा है। लेकिन इनकी संख्या जैसलमेर के राष्ट्रीय रु उद्यान में ही है। जानकारी के अनुसार जैसलमेर के अलावा कहीं पर भी ये संरक्षित प्राणी नहीं बचा है।

इसी को देखते हुए सरकार द्वारा ग्रेड इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रयास तेज कर दिए गए है। इसके लिए गोडावन परियोजना बनाई गई है तथा विभिन्न चरणों में प्रयास किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार जैसलमेर क्षेत्र में गोडावन की संख्या 40 ही रह गई है।




॥गोडावन परियोजना के तहत 4.5 करोड रुपए से नए कार्य करवाएं जाएंगे ताकि राज्यपक्षी गोडावन का जिले में संरक्षण व संवर्धन हो सके। अधिकांश कार्य शुरू हो चुके है। डीके भारद्वाज, डीएफओ, डीएनपी

राज्य पक्षी के संरक्षण व संवर्धन के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जाग्रत करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टर लगाए जांएगे तथा स्कूली छात्र- छात्राओं को इनकी रक्षा के प्रति जागरुक किया जाएगा। अभियान के तहत पोस्टर छपवाए जा चुके है तथा गोडावन के चित्र के पोस्टकार्ड भी छपवाए गए है। ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सके।

गोडावन के प्रति आमजन को जोडऩे के लिए प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अगर किसी को गोडावन दिखाई दिया जाता है तो उसे डीएनपी विभाग द्वारा प्रोत्साहन स्वरुप नगद पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही इसके शिकार की सूचना देने पर भी प्रोत्साहन राशि मिलेगी। साथ ही सूचना देने वाले की सारी जानकारी गुप्त रखी जाएगी। इसका वन विभाग के अधिकारी इसकी पुष्टी करेंगे उसके पश्चात ही प्रोत्साहन राशि मिलेगी।



गोडावन के मूवमेंट, डीएनपी क्षेत्र में बार- बार जगह बदलने एवं इनकी हर हरकत पर नजर रखने के लिए देहरादून से आए विशेषज्ञों द्वारा रिसर्च की जाएगी। रिसर्च टीम द्वारा इसके प्रशय स्थलों, इनकी हरकतों एवं गोडावन के संवर्धन पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिससे इनके अस्तित्व को बचाने में सहयोग मिलेगा।



गोडावन बाहुल्य क्षेत्र में इनके विचरण व शिकार की घटनाओं पर नजर बनाए रखने के लिए वाच टावरों का निर्माण होगा। करीब 50 फीट के ये वाच टावर जैसलमर के रामदेवरा व सम में बनाए जाएंगे। जिनके माध्यम से इन पर नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही बरना, सम व जामड़ा गांव में वन विभाग द्वारा बेरियर लगाए जाएंगे। जिन पर सीसीटीवी केमरों से निगरानी रखी जाएगी। बेरियर पार करने वाले वाहनों की भी जांच की जाएगी।

जैसलमेर व बाडमेर के राष्ट्रीय मरु उद्यान क्षेत्र में गोडावन के विचरण के लिए नए कलोजरों का निर्माण किया जाएगा। योजना के तहत सुदासरी में 100 हेक्टर के दो, गांगा गांव में 100 हेक्टर का एक, रामदेवरा में 150 व 200 हेक्टर तथा मोडरडी गांव के गुड्डी में 100-100 हेक्टर के दो कलोजर बनाए जाएंगे। कलोजर की फेंसिंग की जाएगी। साथ ही सेवणघास लगाई जाकर गोडावन के पेयजल की व्यवस्था के लिए टांके बनाए जाएंगे। ताकि गोडावन के समक्ष खाने व पानी की कोई समस्या न आए। साथ ही पूर्व में बने कलोजरों की मरम्मत भी करवाई जाएगी।

विवाहिता ने किया आत्मदाह

विवाहिता ने किया आत्मदाह

बाड़मेरमहिला पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ कि राणीगांव में विवाहिता सोनी देवी भील ने पति, ससुर से परेशान होकर आत्मदाह कर लिया।

विवाहिता को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था, जिसके बाद विवाहिता ने अपने शरीर पर केरोसीन उड़ेलकर आत्मदाह कर लिया।

विवाहिता घायलावस्था में बाड़मेर के राजकीय चिकित्सालय में इलाज के लिए लाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया।

अमर प्रेम कहानी का साक्षी मांडू ,ऐतिहा‍सिक इमारतों का स्थान मांडू



मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी है। यहां के खंडहर व इमारतें हमें इतिहास के उस झरोखे के दर्शन कराते हैं, जिसमें हम मांडू के शासकों की विशाल समृद्ध विरासत व शानो-शौकत से रूबरू होते हैं।


कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गांव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर गाथा। हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ा मांडू विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल रहा है। यहां के शानदार व विशाल दरवाजे मांडू प्रवेश के साथ ही इस तरह हमारा स्वागत करते हैं। मानों हमने किसी समृद्ध शासक के नगर में प्रवेश कर रहे हो।


मांडू में प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडू के बारे में जानने की तथा इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने की हमारी जिज्ञासा चरम तक पहुंच जाती है। यहां के विशाल इमली के पेड़ व मीठे सीताफलों से लदे पेड़ों को देखकर हमारे मुंह में पानी आना स्वभाविक है।

यहां की कबीटनुमा स्पेशल इमली के स्वाद के चटखारे लिए बगैर भला कैसे हमारी मांडू यात्रा पूरी हो सकती है। आप भी यदि मांडू दर्शन को जा रहे हैं तो एक बार अवश्य यहां की इमली, सीताफल व कमलगट्टे का स्वाद चखिएगा। आइए चलते हैं मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडू की सैर पर।

मांडू के बारे में कुछ बातें : मांडू का दूसरा नाम 'मांडवगढ़' भी है। यह विन्ध्याचल की पहाड़ियों पर लगभग 2,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मांडू को पहले 'शादियाबाद' के नाम से भी जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'खुशियों का नगर'।

मांडू पहाड़ों व चट्टानों का इलाका है, जहां पर ऐतिहासिक महत्व की कई पुरानी इमारते हैं। मालवा के राजपूत परमार शासक भी बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा के लिए मांडू को एक महफूज स्थान मानते थे।

मांडू में यहां जरूर जाएं : मांडू में पर्यटकों के लिए देखने लायक बहुत से स्थान हैं, जिनमें रानी रूपमती का महल, हिंडोला महल, जहाज महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख हैं।


इसी के साथ ही मांडू को 'मांडवगढ़ जैन तीर्थ' के नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान सुपार्श्वनाथ की पद्मासन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुंदर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मंदिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्मावलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।


स्वागत करते प्रवेश द्वार : मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार है, जो मांडू में 45 किलोमीटर के दायरे में मुंडेर के समान निर्मित है। इन दरवाजों में 'दिल्ली दरवाजा' प्रमुख है। यह मांडू का प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण सन् 1405 से 1407 के मध्य में हुआ था। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है, जहां पहुंचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती थी।

इस दरवाजे में प्रवेश करते ही अन्य दरवाजों की शुरुआत के साथ ही मांडू दर्शन का आरंभ हो जाता है। मांडू के प्रमुख दरवाजों में आलमगीर दरवाजा, भंगी दरवाजा, रामपोल दरवाजा, जहांगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा आदि अनेक दरवाजे हैं।

जामा मस्जिद (जामी मस्जिद) : मांडू का मुख्य आकर्षण जामा मस्जिद है, इस विशाल मस्जिद का निर्माण कार्य होशंगशाह के शासनकाल में आरंभ किया गया था तथा महमूद प्रथम के शासनकाल में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई थी। इस मस्जिद की गिनती मांडू की नायाब व शानदार इमारतों में की जाती है। यह भी कहा जाता है कि जामा मस्जिद डेमास्कस (सीरिया देश की राजधानी) की एक प्रसिद्ध मस्जिद का प्रतिरूप है।

अशरफी महल : जामा मस्जिद के सामने ही अशरफी महल है। अशरफी का अर्थ होता है 'सोने के सिक्के'। इस महल का निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक भाषा के विद्यालय (मदरसा) के लिए किया था। यहां विद्धार्थियों के रहने के लिए कई कमरों का निर्माण भी किया गया था।

जहाज महल : जहाज महल का निर्माण 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य कराया था। यह महल जहाज की आकृति में दो कृत्रिम तालाबों कपूर तालाब व मुंज तालाब दो तालाबों के मध्य में बना हुआ है। लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानों तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज तैर रहा हो। संभवत: इसका निर्माण श्रृंगारप्रेमी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने विशेष तौर पर अंत:पुर (महिलाओं के लिए बनाए गए महल) के रूप में किया था।


होशंगशाह की कब्र : होशंगशाह की कब्र, जो कि भारत में मार्बल से बनाई हुई ऐसी पहली कब्र है, जिसमें आपको अफगानी शिल्पकला का बेहतर नमूना देखने को मिलता है। यह यहां का गुंबज, बरामदे तथा मार्बल की जाली आदि की खूबसूरती बेजोड़ है।

हिंडोला महल : हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला का अर्थ होता 'झूला'। इस महल की दीवारे कुछ झुकी होने के कारण यह महल हवा में झुलते हिंडोले के समान प्रतीत होता है। अत: इसे हिंडोला महल के नाम से जाना जाता है। हिंडोला महल का निर्माण ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य सभा भवन के रूप में निर्मित सुंदर महल है। यहां के सुंदर कॉलम इसे और भी खूबसूरती प्रदान करते हैं। इस महल के पश्चिम में कई छोटे-बड़े सुंदर महल है। इसके समीप ही चंपा बाबड़ी है।

रानी रूपमती का महल : रानी रूपमती के महल को देखे बगैर मांडू दर्शन अधूरा सा है। 365 मीटर ऊंची खड़ी चट्टान पर स्थित इस महल का निर्माण बाजबहादुर ने रानी रूपमती के लिए कराया था। इसी के साथ ही सैनिकों के लिए मांडू की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के बेहतर स्थान के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता था।

कहा जाता है कि रानी रूपमती सुबह ऊठकर मां नर्मदा के दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थी। अत: रूपमती के नर्मदा दर्शन को सुलभ बनाने हेतु बाजबहादुर ने ऊंचाई पर स्थित इस महल का निर्माण कराया था।

बाज बहादुर का महल : बाज बहादुर के महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल में विशाल आंगन व हॉल बने हुए हैं। यहां से हमें मांडू का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।

हवा में खड़ा अद्भुत मंदिर 'शुआन खोंग'



मंदिर और मठ या तो जमीन पर बनाया जाते हैं या पहाड़ पर, लेकिन चीन में एक ऐसा मंदिर है जो लगभग हवा में खड़ा है। यह मंदिर उत्तरी चीन के शानजी प्रांत में स्थित है। इस अनोखे मंदिर का निर्माण 1500 सौ वर्ष पूर्व हुआ था।


इस मंदिर का नाम है 'शुआन खोंग'। इसका अंग्रेजी में मतलब होता है 'हैंगिंग टैम्पल'। चीन के शहर ताथोंग से यह मंदिर 65 किलोमीटर दूर है। हवा में खड़ा मंदिर ऐतिहासिक स्थलों और मुख्य पर्यटक आकर्षणों में से एक हैं। यह चीन में अब तक सुरक्षित एकमात्र बौध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली से बना अदभुत मंदिर है।

एक बार की नजर में हवा में लटके इस मंदिर को देखना काफी भयभीत करने वाला दृश्य लगता है।



यह मंदिर शानसी प्रांत के हुनयान कस्बे में हंग पहाड़ी के एक ऐसे स्पॉट पर बनाया गया है जो बेहद ही संकरा है। लेकिन यह मंदिर लंबाई में बहुत ही लंबा है। एक बार ही इस देखने पर लगता है कि अब गिरा तब गिरा। क्योंकि यह बिल्कुल हवा में लटका है। इसलिए वह हवा में खड़ा मंदिर के नाम से चीन में मशहूर हैं।

यह मंदिर घनी पहाड़ियों की घाटी में फैले एक छोटे से बेसिन में स्थित है। घाटी के दोनों ओर 100 मीटर की ऊंची-ऊंची चट्टानें सीधी खड़ी हैं। यह मंदिर सीधी खड़ी चट्टान पर जमीन से 50 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है, जो हवा में खड़ा हुआ नजर आता है।

यह बहु-मंजिला मंदिर दस से अधिक पतली-पतली लंबी लकड़ियों पर खड़ा है और मंदिर के ऊपर पहाड़ी चट्टान का एक विशाल टुकड़ा बाहर की ओर आगे बढ़ा हुआ है, ऐसा लगता है कि मानो वह अभी मंदिर पर गिर जाएगा।

इस मंदिर में छोटे-बड़े 40 से अधिक भवन व मंडप हैं, जिन्हें चट्टान पर गाड़कर लकड़ियों के बल पर टिकाया है। इस मंदिर पर जाने वाले और धड़कन तब बढ़ने लगती है जबकि वह बेहद ही संकरी और लकड़ी के बनी पगडंडी से होकर इस मंदिर में पहुंचता है। इस दौरान नीचे खाई को देखना मना है। जरा-सी लापरवाही और सीधे खाई में।

आश्चर्य है कि चट्टान से सटा मंदिर जरा भी हिचकोले नहीं खाता हैं। ऐसे लगता है मानो किसी बने बनाये मंदिर को इस सीधी खड़ी चट्टान पर लटका दिया हो।

पतली-पतली लकड़ियों के सहारे टिका है यह मंदिर। उन लकड़ियों को विशेष तेल से सिंचित किया हुआ हैं, जिससे उनमें दीमक लगने और सड़ने या गलने की कोई संभावना नहीं। मंदिर का तल्ला इसी प्रकार के मजबूत आधार पर रखा गया है।

हवा में खड़े मंदिर की संरचना बहुत सुनियोजित और सूक्ष्म है।


सवाल उठ सकता है कि आखिर इस मंदिर को यहां बनवाने की जरूरत क्यों पड़ी। चीन की सरकारी वेबसाइट अनुसार बताया जाता है कि इस मंदिर को बनाने के पीछे दो कारण थे- पहला यह था कि उस समय वो पहाड़ी घाटी यातायात और आवाजाही का एक प्रमुख मार्ग था। वहां से जब भिक्षु और धार्मिक अनुयायी गुजरते थे, तो मंदिर में आराधना कर सकते थे।

दूसरा कारण यह था कि उस पहाड़ी घाटी में अक्सर बाढ़ आती थी। प्राचीन चीनी लोगों का मानना था कि ड्रैगन ही बाढ़ का प्रकोप मचाता हैं। यदि वहां एक मंदिर बनाया जाता है, तो ड्रैगन को वशीभूत किया जा सकता हैं। इस तरह यह मंदिर अस्तित्व में आया।

कबीर : भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही सं‍त


कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं, उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है। महात्मा कबीर के प्राकट्यकाल में समाज ऐसे चौराहे पर खड़ा था, जहां चारों ओर धार्मिक पाखंड, जात-पात, छुआछूत, अंधश्रद्धा से भरे कर्मकांड, मौलवी, मुल्ला तथा पंडित-पुरोहितों का ढोंग और सांप्रदायिक उन्माद चरम पर था। आम जनता धर्म के नाम पर दिग्भ्रमित थी।


मध्यकाल जो कबीर की चेतना का प्राकट्यकाल है, पूरी तरह सभी प्रकार की संकीर्णताओं से आक्रांत था। धर्म के स्वच्छ और निर्मल आकाश में ढोंग-पाखंड, हिंसा तथा अधर्म व अन्याय के बादल छाए हुए थे। उसी काल में अंधविश्वास तथा अंधश्रद्धा के कुहासों को चीर कर कबीर रूपी दहकते सूर्य का प्राकट्य भारतीय क्षितिज में हुआ।


वैसे संत कबीर के कोई जीवन वृत्तांत का पता नहीं चलता परंतु, विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर साहेब का जन्म विक्रम संवत 1455 तथा मृत्यु विक्रम संवत 1575 माना जाता है। जिस तरह माता सीता के जन्म का पता नहीं चलता, उसी तरह कबीर के जन्म का भी रहस्य आज भी भारतीय लोकमानस में जीवंत है।



कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत हैं। वे आम जनता से अपनी बात पूरे आवेग और प्रखरता के साथ किया करते हैं, इसलिए कबीर परमात्मा को देखकर बोलते हैं और हम किताबों में पढ़कर बोलते हैं। इसलिए कबीर के मन और संसारी मन में भिन्नता है।

आज समाज के जिस युग में हम जी रहे हैं, वहां जातिवाद की कुत्सित राजनीति, धार्मिक पाखंड का बोलबाला, सांप्रदायिकता की आग में झुलसता जनमानस और आतंकवाद का नग्न तांडव, तंत्र-मंत्र का मिथ्या भ्रम-जाल से समाज और राष्ट्र आज भी उबर नहीं पाया है।

छह सौ वर्षों के सुदीर्घ प्राकट्यकाल के बाद भी कबीर हमारे वैयक्तिक एवं सामाजिक जीवन के लिए बेहद प्रासंगिक एवं समीचीन लगते हैं। वे हमारे लोकजीवन के इर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं। साहेब की बीजक वाणी में हिन्दू और मुस्लिम के साथ-साथ ब्रह्मांड के सभी लोगों को एक ही धरती पर प्रेमपूर्वक आदमी की तरह रहने की हिदायत देते हैं।

वे कहते हैं : 'वो ही मोहम्मद, वो ही महादेव, ब्रह्मा आदम कहिए, को हिन्दू, को तुरूक कहाए, एक जिमि पर रहिए।' कबीर मानवीय समाज के इतने बेबाक, साफ-सुथरे निश्छल मन के भक्त कवि हैं जो समाज को स्वर्ग और नर्क के मिथ्या भ्रम से बाहर निकालते हैं।

वे काजी, मुल्ला और पंडितों को साफ लफ्जों में दुत्कारते हैं- 'काजी तुम कौन कितेब बखानी, झंखत बकत रहहु निशि बासर, मति एकऊ नहीं जानी/दिल में खोजी देखि खोजा दे / बिहिस्त कहां से आया?' कबीर ने घट-घट वासी चेतन तत्व को राम के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने राम को जीवन आश्रय माना है, इसीलिए कबीर के बीजक में चेतन राम की एक सौ सत्तर बार अभिव्यंजना हुई है।

कबीर आज भी दहकते अंगारे हैं। कानन-कुसुम भी हैं कबीर जिनकी भीनी-भीनी गंध और सुवास नैसर्गिक रूप से मानवीय अरण्य को सुवासित कर रही है। हिमालय से उतरी हुई गंगा की पावनता भी है कबीर।

कबीर भारतीय मनीषा के भूगर्भ के फौलाद हैं जिसके चोट से ढोंग, पाखंड और धर्मांधता चूर-चूर हो जाती है। कबीर भारतीय संस्कृति का वह हीरा है जिसकी चमक नित नूतन और शाश्वत है।

राजा पृथ्वीराज ने देखा ख्वाजा का चमत्कार

विश्व प्रसिद्ध चिश्ती सूफी संत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का 797वाँ उर्स बड़ी धूमधाम से अजमेर में मनाया जा रहा है। इस मौके पर सभी धर्मों के लोग बड़ी मुहब्बत और श्रद्धा के साथ वहाँ हाजिरी देते हैं।

एक दिन का वाक्या है कि ख्वाजा गरीब नवाज खुदा की याद में डूबे थे। आपने आकाश से एक आवाज सुनी। आपने आवाज पर ध्यान दिया। आवाज ये आई - ऐ मुईनुद्दीन! हम तुझ से खुश हैं। तुझे बख्श दिया। चाहे जो कुछ माँग, ताकि अता करें। ख्वाजा गरीब नवाज यह सुन कर बहुत खुश हुए।

शुक्रगुजार बंदों की तरह सरे नियाज जमीन पर रख दिया, और कहा मुझ पर अपनी दया दृष्टि कर और सभी मुरीदों के गुनाहों को बख्श दे। खुदा वंदा!

खुदा की आवाज आई। मुईनद्दीन! जो तेरे मुरीद और तेरे सिलसिले में ता कयामत मुरीद होंगे, मैं इन्हें बख्श दूँगा। कुछ दिनों मक्का में कयाम पजीर रहे। हज का फरीजा अंजाम दिया। फिर मक्का मोअज्जमा से मदीना मुनव्वराह रवाना हो गए। मदीना मुनव्वराह में आप इबादात में मशगूल रहते। मस्जिदे कुबा में आप इबादात करते इशके इलाही में सरशार रहते। इस तरह वक्त गुजरता रहा।




आखिरकार वह खुश साअत आ पहुँची कि जब आप को दरबारे रिसालत से नवाजा गया। आपको वह खुशखबरी मिली कि जिस से आप की खुशी की कोई इंतिहा न रही। आप को दरबारे रिसालत से बशारत हुई। फिर वह मा मदीना गए। वहाँ दिन-रात ईश्वर की इबादात में व्यस्त रहते।

आखिरकार आकाशवाणी हुई, 'ऐ मुईनुद्दीन, तू मेरे दीन का मुईन है। मैंने कुफ्र व जुलमत फैली हुई है, तू अजमेर जा। तेरे वजूद से जुलमते कुफ्र दूर होगी, और इस्लाम रोनक पजीर होगा।' आपकी खुशी की कोई इंतिहा न थी। मगर एक बात आप की समझ में न आई कि अजमेर कहाँ है कि मुलक में है, कैसी जगह है, कौन-सा मकाम है, मदीने से कितनी दूर है। इन्ही ख्यालात में ख्वाजा गरीब नवाज की आँख लग गई सपने में आपको हजरत मुहम्मद अजमैर का तमाम शहर किला व कोहिस्तान दिखाया।

जब हजरत ख्वाजा गरीब नवाज अपने साथियों के साथ अजमेर पहुँचे तो अपने एक मुकाम पर ठहरे। यहाँ दरख्तों का साया था और यह मुकाम शहर से भी बाहर था। लेकिन राजा पृथ्वीराज के मुलाजिम ने आपको वहाँ ठहरने नहीं दिया। इन्होंने हजरत ख्वाजा गरीब नवाज से कहा, 'आप यहाँ नहीं बैठ सकते। यह जगह राजा के ऊँटों के बैठने की है। यहाँ राजा के ऊँट बैठते हैं आप नहीं बैठ सकते।'

ख्वाज गरीब नवाज को यह बात नागवार गुजरी, आपने फरमाया कि- अच्छा ऊँट बैठते हैं तो बैठें यह कलमात फरमाकर आप खड़े हो गए। वहाँ से रवाना होकर आपने अना सागर के किनारे डेरा डाला। ऊँट अपनी जगह पर आए और बैठे, लेकिन अब वो ऐसे बैठे की उठाने से भी न उठे। परेशान हुए। उन्होंने इस पूरे वाक्ये की इत्तिला राजा पृथ्वीराज को कही। राजा पृथ्वीराज को बहुत हैरत हुई।

राजा ने सिपाहियों को हुक्म दिया कि वो उन फकीर यानी ख्वाजा गरीब नवाज से माफी माँगे। सारबान ख्वाजा गरीब नवाज की खिदमत अकदस में हाजिर हुए माफी के खुवास्त गार हुए। ख्वाजा गरीब नवाज ने उनको माफ किया और कहा। अच्छा जाओ ऊँट खड़े हो गए। सिपाही खुशी-खुशी वापस आए। इनकी खुशी और ताज्जुब की कोई इंतहा न थी जब कि इन्होंने देखा कि ऊँट खड़े थे।

फरियादी से मांगी रिश्वत, एसीबी टीम को देख भागा हैड कांस्टेबल


फरियादी से मांगी रिश्वत, एसीबी टीम को देख भागा हैड कांस्टेबल

बाड़मेर  पुलिस थाना चौहटन के हैड कांस्टेबल ने मामला दर्ज करने की एवज में फरियादी से चार हजार रुपए की रिश्वत की मांग रखी। इस संबंध में फरियादी ने एसीबी बाड़मेर में शिकायत दर्ज करवाई। रिश्वत का सत्यापन होने पर एसीबी टीम पुलिस थाना चौहटन पहुंची। टीम की भनक लगते ही हैड कांस्टेबल ने फरियादी को हवालात में डालकर स्वयं भाग छूटा।

एसीबी बाड़मेर के डीएसपी विजयसिंह ने बताया कि फरियादी श्रवण कुमार व कमला देवी पत्नी हनुमानराम निवासी तरड़ो का तला बिसारणिया ने 30 दिसंबर को शिकायत दर्ज करवाई कि पुलिस थाना चौहटन में मामला दर्ज करने के लिए रिपोर्ट पेश करने पर हैड कांस्टेबल खुमाराम रिश्वत की मांग कर रहा है। इस पर पहले रिश्वत की मांग संबंधित शिकायत का सत्यापन करवाया गया। इसके बाद गुरुवार को टीम पुलिस थाना पहुंची। फरियादी श्रवण व कमला देवी ने हैड कांस्टेबल को पैसे देने चाहे लेकिन उसे पहले से एसीबी की भनक लग चुकी थी। इस पर हैड कांस्टेबल ने श्रवण को हवालात में बंद कर दिया। इसके बाद वह स्वयं मौके से भाग छूटा। एसीबी टीम देर रात तक इंतजार करती रही। लेकिन हैड कांस्टेबल नहीं लौटा। रिश्वत मांगने के संबंध में मामला दर्ज कर एसीबी ने जांच शुरू की।


बिसारणिया डीलर पर आरोप आरटीआई कार्यकर्ता है श्रवण
चौहटन पुलिस थाने का मामला, मामला दर्ज करने की एवज में मांगे चार हजार रुपए, हैड कांस्टेबल के खिलाफ दर्ज होगा मामला

आरटीआई कार्यकर्ता श्रवण कुमार के अनुसार उचित मूल्य की दुकान बिसारणिया में राशन वितरण में अनियमितताएं बरतने के संबंध में सूचना के अधिकार से सूचनाएं मांगने के बाद डीलर उदयसिंह ने उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करवाकर परेशान किया। वे उसके परिवार के सदस्यों को प्रताडि़त कर रहा है। 30 दिसंबर को घर पर मारपीट करने आए लोग भी डीलर के व्यक्ति थे।

तरड़ो का तला निवासी श्रवण कुमार ने बताया कि 30 दिसंबर को रामाराम पुत्र हनुमानराम, जगदीश पुत्र हनुमानराम, नरपत पुत्र पूनमाराम जाट ने उसके घर में प्रवेश कर उसकी भाभी कमला देवी के साथ मारपीट की। साथ ही गाली गलौच करते हुए अभद्र व्यवहार किया। इस संबंध में मामला दर्ज करने के लिए पुलिस थाना चौहटन में रिपोर्ट देने पर हैड कांस्टेबल ने कहा कि चार हजार रुपए देने के बाद ही मामला दर्ज होगा। इस पर उसने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई।