शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

ये लड़की राह चलते लोगों से पूछती हैं, क्या मेरे साथ सेक्स करोगें?

अगर आपको रास्ते में जाते हुए कोई लड़की सेक्स के लिए कहे तो आपको कैसा लगेगा? आप तो एक पल के लिए हैरान हो जाएंगे। लेकिन, एंड्रिया नाम की यह लड़की रास्ते में आने जाने वाले लोगो को बेबाक सेक्स के लिए पूछ रहा हैं। देख्‍ाने में आकर्षक यह लड़की हर रोज यह अजीबोगरीब हरकत करती है।
इस लड़की ने आज तक जितने लड़को को सेक्स का प्रस्ताव दिया, उनमें से आधे लड़को ने उसे मना कर दिया। खबर के अनुसार, एंड्रिया दरअसल यूट्यूब के ‘आस्किंग गॉयज फॉर सेक्स: ए स्पेशल एक्सपेरिमेंट’ सेगमेंट के लिए यह काम कर रही है। इसलिए वह बिना हिचकिचाहट लड़कों से सेक्स के लिए पूछ रही हैं। इसके अलावा वह बकायदा उनके जवाब रिकॉर्ड भी करती है। कई लोग इसे मजाक समझते, तो कई उसे पागल कहते।

इस वीडियो शूट के दौरान एंड्रिया ने करीब 14 लोगों से बात ‌की, जिनमें से सात लोगो ने उसे सेक्स के लिए हां कही। इनमें से लोग अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थे, फिर भी उन्होंने एंड्रिया को हां बोला। हालांकि एंड्रिया को इस दौरान इतने बुरे अनुभव ले नहीं गुजरना पड़ा, जितना बुरा हाल ‘ए गॉयज आस्क 100 गर्ल्स फार सेक्स’ की रिकॉर्डिंग करने वाले शख्स का हुआ था।

महिला कांस्टेबल से शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास

कोटा: एक महिला कांस्टेबल को कथित रुप से शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास करने और बाद में उसे जान से मारने की धमकी देने के आरोप में विभागीय जांच का सामना कर रहे राजस्थान में कोटा के महावीर नगर थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक विजय शंकर शर्मा को आखिर कोटा छोडऩा पड रहा है।
जयपुर में पुलिस मुख्यालय ने कल आधी रात बाद प्रदेश के जिन 143 निरीक्षकों के तबादले की सूची जारी की है, उसमें विजय शंकर का नाम भी शामिल हैं। हालांकि यह तबादला सूची जारी होने से पहले कल दिन में ही कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमृत कलश ने एक आदेश जारी करके विजय शंकर शर्मा को महावीर नगर थाने से हटाकर बारां जिले में भेज दिया था लेकिन मध्यरात्रि बाद आई तबादला सूची में उन्हें भरतपुर रेंज में भेज दिया गया है।

महिला कांस्टेबल द्वारा की गई शिकायतों की कोटा के पुलिस उप अधीक्षक चतुर्थ जांच कर रहे हैं जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट अभी उच्चाधिकारियों को नहीं सौंपी हैं। हालांकि इस मामले में महिला कांस्टेबल के लिखित में शिकायत किये जाने के बावजूद शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है और महानिरीक्षक के आदेश पर उपअधीक्षक मामले की जांच कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि उद्योग नगर थाने में तैनात एक महिला कांस्टेबल ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी कि जब निरीक्षक
विजय शंकर शर्मा उद्योग नगर थाने के प्रभारी थे तब उन्होंने उससे शादी का वायदा करके शारीरिक सम्बंध बनाने की कोशिश की लेकिन बाद में शादी करने से इनकार कर दिया। महिला कांस्टेबल ने उच्चाधिकारियों को शिकायत करने की बात की तो शर्मा ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

निरीक्षक शर्मा की इन कथित धमकियों से तंग आकर गत 19 जुलाई को महिला कांस्टेबल एक पत्र छोडकर घर से लापता हो गई कि यदि उसकी मृत्यु हो गई तो शर्मा इसके लिये जिम्मेदार होंगे। गत 20 जुलाई को महिला कांस्टेबल के परिवारजनों ने कोटा के बोरखेडा थाने में उसकी गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने महिला कांस्टेबल को 22 जुलाई को जयपुर से बरामद कर लिया था।

बाद में महिला कांस्टेबल ने इसी थाने में निरीक्षक शर्मा के खिलाफ लिखित में रिपोर्ट पेश की जिसकी पुलिस महानिरीक्षक के आदेश पर पुलिस उपअधीक्षक जांच कर रहे हैं। हालांकि इस बारे में अधिकारिक तौर पर तो कुछ भी नहीं बताया गया है लेकिन समझा जाता है कि जांच को प्रभावित करने से रोकने के लिये विजय शंकर शर्मा को कोटा से हटाकर भरतपुर रेंज में तैनात करने के आदेश दिये गये हैं।

कंवल - केहर : प्रेम कथा

गुजरात का बादशाह महमूद शाह अपने अहमदाबाद के किले में मारवाड़ से आई जवाहर पातुर की बेटी कंवल को समझा रहा था , " मेरी बात मान ले,मेरी रखैल बन जा | मैं तुझे दो लाख रूपये सालाना की जागीर दे दूंगा और तेरे सामने पड़े ये हीरे-जवाहरात भी तेरे | जिद मत कर मेरा कहना मान और मेरी रखैल बनना स्वीकार करले | कह कर बादशाह ने एक हीरों का हार कंवल के गले में डालने की कोशिश की , पर ये क्या ? इतने शक्तिशाली बादशाह की बात ठुकराते हुए कंवल ने हीरों का हार तोड़कर फैंक दिया |
उसकी माँ जवाहर पातुर ने बेटी की हरकत पर बादशाह से माफ़ी मांगते हुए बेटी कंवल को समझाने का थोडा समय माँगा | माँ ने कंवल को बहुत समझाया कि बादशाह की बात मान ले और उसकी रखैल बन जा तू पुरे गुजरात पर राज करेगी | पर कंवल ने माँ से साफ़ कह दिया कि वह "केहर" को प्यार करती है और उसकी हो चुकी है इसलिए गुजरात तो क्या,अगर कोई दुनियां का बादशाह भी आ जाये तो उसके किस काम का |
कँवर केहरसिंह चौहान महमूद शाह के अधीन एक छोटीसी जागीर "बारिया" का जागीरदार था और कंवल उसे प्यार करती थी | कंवल की माँ ने कंवल को खूब समझाया कि तू एक वेश्या की बेटी है एक पातुर है ,तुने किसी एक की चूड़ी नहीं पहन रखी | पर कंवल ने साफ कह दिया कि "केहर जैसे शेर के गले में बांह डालने वाली उस गीदड़ महमूद के गले कैसे लग सकती है |"
पास ही के कमरे में उपस्थित महमूद के कानों में जब ये शब्द पड़े तो वह गुस्से से भर गया उसने कंवल को महल में कैद करने के आदेश देने के साथ ही कंवल से कहा " अब तू देखना तेरे शेर को तेरे आगे ही पिंजरे में मैं कैसे कैद करके रखूँगा |
और बादशाह में अपने सिपहसालारों को बुला एलान कर दिया कि केहर को कैसे भी कैद करने वाले को केहर की जागीर बारिया जब्त कर दे दी जाएगी पर केहर जैसे राजपूत योद्धा से कौन टक्कर ले ,दरबार में उपस्थित उसके सामन्तो में से एक जलाल आगे आया उसके पास छोटी सी जागीर थी सो लालच में उसने यह बीड़ा उठा ही लिया |
योजना के अनुसार साबरमती नदी के तट पर शीतला माता के मेले के दिन महमूद शाह ने जल क्रीडा आयोजित की, जलाल एक तैराक योद्धा आरबखां को जल क्रीड़ा के समय केहर को मारने हेतु ले आया , जल क्रीड़ा शुरू हुई और आरबखां केहर पर पानी में ही टूट पड़ा पर केहर भी तैराकी व जल युद्ध में कम न था सो उसने आरबखां को इस युद्ध में मार डाला | केहर द्वारा आरबखां को मारने के बाद मुहमदशाह ने बात सँभालने हेतु केहर को शाबासी के साथ मोतियों की माला पहना शिवगढ़ की जागीर भी दी | बादशाह द्वारा आरबखां को मौत के घाट उतारने के बावजूद केहर को सम्मानित करने की बात केहर के सहयोगी सांगजी व खेतजी के गले नहीं उतरी वे समझ गए कि बादशाह कोई षड्यंत्र रच रहा है उन्होंने केहर को आगाह भी कर दिया,पर केहर को बादशाह ने यह कह कर रोक लिया कि दस दिन बाद फाग खेलेंगे और फाग खेलने के बहाने उसने केहर को महल के जनाना चौक में बुला लिया और षड्यंत्र पूर्वक उसे कैद कर एक पिंजरे में बंद कर कंवल के महल के पास रखवा दिया ताकि वह अपने प्रेमी की दयनीय हालत देख दुखी होती रहे |
कंवल रोज पिंजरे में कैद केहर को खाना खिलाने खुद आती और मौका देख केहर से निकलने के बारे में चर्चा करती, एक दिन कंवल ने एक कटारी व एक छोटी आरी केहर को लाकर दी व उसी समय केहर की दासी टुन्ना ने वहां सुरक्षा के लिए तैनात फालूदा खां को जहर मिली भांग पिला बेहोश कर दिया इस बीच मौका पाकर केहर पिंजरे के दरवाजे को काट आजाद हो गया और किसी तरह महल से बाहर निकल अपने साथियों सांगजी व खेतजी के साथ अहमदाबाद से बाहर निकल आया |
उसकी जागीर बारिया तो बादशाह ने जब्त कर जलाल को दे दी थी सो केहर मेवाड़ के एक सीमावर्ती गांव बठूण में आ गया और गांव के मुखिया गंगो भील से मिलकर आपबीती सुनाई | गंगो भील ने अपने अधीन साठ गांवों के भीलों का पूरा समर्थन केहर को देने का वायदा किया |
अब केहर बठूण के भीलों की सहायता से गुजरात के शाही थानों को लुटने लगा, सारा इलाका केहर के नाम से कांपने लगा बादशाह ने कई योद्धा भेजे केहर को मारने के लिए पर हर मुटभेड में बादशाह के योद्धा ही मारे जाते, महमूदशाह का कोई सामंत केहर के आगे आने की हिम्मत नहीं करता सो वह बार बार जलाल को ख़त लिखता कि केहर को ख़त्म करे पर एक दिन बादशाह को समाचार मिला कि केहर की तलवार के एक बार से जलाल के टुकड़े टुकड़े हो गए |
कंवल केहर के ज्यों ज्यों किस्से सुनती,उतनी ही खुश होती और उसे खुश देख बादशाह को उतना ही गुस्सा आता पर वह क्या करे बेचारा बेबस था | केहर को पकड़ने या मारने की हिम्मत उसके किसी सामंत व योद्धा में नहीं थी |
कंवल महमूद शाह के किले में तो रहती पर उसका मन हमेशा केहर के साथ होता वह महमूद शाह से बात तो करती पर उपरी मन से | केहर की वीरता का कोई किस्सा सुनती तो उसका चेहरा चमक उठता और वह दिन रात किले से भागकर केहर से जा मिलने के मनसूबे बनाती |
छगना नाई की बहन कंवल की नौकरानी थी एक दिन कंवल ने एक पत्र लिख छगना नाई के हाथ केहर को भिजवाया | केहर ने कंवल का सन्देश पढ़ा - " मारवाड़ के व्यापारी मुंधड़ा की बारात अजमेर से अहमदाबाद आ रही है रास्ते में आप उसे लूटना मत और उसी बारात के साथ वेष बदलकर अहमदाबाद आ जाना | पहुँचने पर मैं दूसरा सन्देश आपको भेजूंगी | ईश्वर ने चाहा तो आपका और मेरा मनोरथ सफल होगा |"
अजमेर अहमदाबाद मार्ग पर मुंधड़ा की बारात में केहर व उसके चार साथी बारात के साथ हो लिए केहर जोगी के वेष में था उसके चारों राजपूत साथी हथियारों से लैस थे | मुंधड़ा भी खुश था कि इन चार हथियारों लैस बांके राजपूतों को देख रास्ते में बारात को लुटने की किसी की हिम्मत नहीं पड़ेगी |
केहर को चिट्ठी लिखने के बाद कंवल ने बादशाह के प्रति अपना रवैया बदल लिया वह उससे कभी मजाक करती कभी कभार तो केहर की बुराई भी कर देती पर महमूद शाह को अपना शरीर छूने ना देती | उधर मुंधड़ा जी की बारात अहमदबाद पहुँच चुकी थी कंवल ने अपनी दासी को बारात देखने के बहाने भेज केहर को सारी योजना समझा दी |
बारात पहुँचने से पहले ही कंवल ने महमूद शाह से कहा - "हजरत केहर का तो कोई अता-पता नहीं आखिर आपसे कहाँ बच पाया होगा, उसका इंतजार करते करते मैं भी थक गई हूँ अब तो मेरी जगह आपके चरणों में ही है | लेकिन हुजुर मैं आपकी रखैल,आपकी बांदी बनकर नहीं रहूंगी अगर आप मुझे वाकई चाहते है तो आपको मेरे साथ विवाह करना होगा और विवाह के बारे में मेरी कुछ शर्तें है वह आपको माननी होगी |"
१-शादी मुंधड़ा जी की बारात के दिन ही हों |
२-विवाह हिन्दू रितिरिवाजानुसार हो | विनायक बैठे,मंगल गीत गाये जाए ,सारी रात नौबत बाजे |
३- शादी के दिन मेरा डेरा बुलंद गुम्बज में हों |
४- आप बुलंद गुम्बज पधारें तो आतिशबाजी चले,तोपें छूटें.ढोल बजें |
५- मेरी शादी देखने वालों के लिए किसी तरह की रोक टोक ना हो और मेरी मां जवाहर पातुर पालकी में बैठकर बुलन्द गुम्बज के अन्दर आ सके |
उस खुबसूरत कंवल को पाने हेतु उस कामुक बादशाह ने उसकी सारी शर्तें स्वीकार कर ली और मुंधड़ा जी की बारात के दिन अपनी व कंवल की शादी का दिन तय कर दिया |
शादी के दिन साँझ ढले कंवल की दासी टुन्ना पालकी ले जवाहर पातुर को लेने उसके डेरे पर पहुंची वहां योजनानुसार केहर शस्त्रों से सुसज्जित हो पहले ही तैयार बैठा था टुन्ना ने पालकी के कहारों को किसी बहाने इधर उधर कर दिया और उसमे चुपके से केहर को बिठा पालकी के परदे लगा दिए | पालकी के बुलन्द गुम्बज पहुँचने पर सारे मर्दों को वहां से हटवाकर कंवल ने केहर को वहां छिपा दिया |
थोड़ी ही देर में महमूद शाह हाथी पर बैठ सजधज कर बुलंद गुम्बज पहुंचा, कंवल की दासी टुन्ना चांदी का कलश ले बधाई को आई और कंवल ने आगे बढ़कर बादशाह को मुजरा किया व आदाब बजाई |
महमूद शाह के बुलंद गुम्बज में प्रवेश करते ही बाहर आतिशबाजी होने लगी,पटाखे छूटने लगे,तोपों की आवाज गूंजने लगी और ढोल पर जोरदार थाप की गडगडाहट से बुलंद गुम्बज थरथराने लगी | तभी छिपा हुआ केहर बाहर निकल आया और उसने बादशाह को ललकारा -" आज देखतें है शेर कौन है और गीदड़ कौन ? तुने मेरे साथ बहुत छल कपट किया सो आज तुझे मारकर मैं अपना वचन पूरा करूँगा|"
और दोनों योद्धा भीड़ गए,दोनों में भयंकर युद्ध हुआ | खड्ग,गुरंज,कटार,तलवार सभी हथियारों का खुलकर प्रयोग हुआ और फिर दोनों मल्ल-युद्ध करने लगे | उनके पैरों के धमाकों से बुलंद गुम्बज थरथराने लगा पर बाहर हो रही आतिशबाजी के चलते अन्दर क्या हो रहा है किसी को पता न चल सका | चूँकि केहर मल्ल युद्ध में भी प्रवीण था इसलिए महमूद शाह थोड़ी देर में ही केहर के घुटनों के निचे था,केहर ने महमूद शाह को अपने मजबूत घुटनों से कुचल दिया बादशाह के मुंह से खून का फव्वारा छुट पड़ा और कुछ ही देर में उसकी जीवन लीला समाप्त हो गयी |
दासी टुन्ना ने केहर व कंवल को पालकी में बैठा पर्दा लगाया और कहारों और सैनिकों को हुक्म दिया कि - जवाहरबाई की पालकी तैयार है उसे उनके डेरे पर पहुंचा दो और बादशाह आज रात यही बुलंद गुम्बज में कंवल के साथ विराजेंगे |
कहार और सैनिक पालकी ले जवाहरबाई के डेरे पहुंचे वहां केहर का साथी सांगजी घोड़ों पर जीन कस कर तैयार था | केहर ने कंवल को व सांगजी ने टुन्ना को अपने साथ घोड़ों पर बैठा एड लगाईं और बठूण गांव का रास्ता लिया | जवाहरबाई को छोड़ने आये कहार और शाही सिपाही एक दुसरे का मुंह ताकते रह गए |


नोट : यह मूल कहानी राजस्थानी भाषा की मूर्धन्य साहित्यकार पद्मश्री डा.लक्ष्मीकुमारी जी चुण्डावत की लिखी हुई है जिसे यहाँ छोटे रूप में प्रस्तुत किया गया|

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बणी-ठणी : राजस्थान की मोनालिसा

ज्ञान दर्पण से सा आभार 
राजस्थान के किशनगढ़ की विश्व प्रसिद्ध चित्रशैली “बणी-ठणी” का नाम आज कौन नहीं जनता ? पर बहुत कम लोग जानते है कि किशनगढ़ की यह चित्रशैली जो रियासत काल में शुरू हुई थी का नाम “बणी-ठणी” क्यों और कैसे पड़ा ? आज चर्चा करते है इस विश्व प्रसिद्ध चित्रशैली के नामकरण पर-

राजस्थान के इतिहास में राजा-रानियों आदि ने ही नहीं बल्कि तत्कालीन शाही परिवारों की दासियों ने भी अपने अच्छे बुरे कार्यों से प्रसिद्धि पायी है| जयपुर की एक दासी रूपा ने राज्य के तत्कालीन राजनैतिक झगडों में अपने कुटिल षड्यंत्रों के जरिये राजद्रोह जैसे घिनोने, लज्जाजनक और निम्नकोटि के कार्य कर इतिहास में कुख्याति अर्जित की तो उदयपुर की एक दासी रामप्यारी ने मेवाड़ राज्य के कई तत्कालीन राजनैतिक संकट निपटाकर अपनी राज्य भक्ति, सूझ-बुझ व होशियारी का परिचय दिया और मेवाड़ के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवाने में सफल रही| पूर्व रियासत जोधपुर राज्य की एक दासी भारमली भी अपने रूप और सौंदर्य के चलते इतिहास में चर्चित और प्रसिद्ध है|

“बणी-ठणी” भी राजस्थान के किशनगढ़ रियासत के तत्कालीन राजा सावंत सिंह की दासी व प्रेमिका थी| राजा सावंत सिंह सौंदर्य व कला की कद्र करने वाले थे वे खुद बड़े अच्छे कवि व चित्रकार थे| उनके शासन काल में बहुत से कलाकारों को आश्रय दिया गया|


“बणी-ठणी” भी सौंदर्य की अदभुत मिशाल होने के साथ ही उच्च कोटि की कवयित्री थी| ऐसे में कला और सौंदर्य की कद्र करने वाले राजा का अनुग्रह व अनुराग इस दासी के प्रति बढ़ता गया| राजा सावंतसिंह व यह गायिका दासी दोनों कृष्ण भक्त थे| राजा की अपनी और आसक्ति देख दासी ने भी राजा को कृष्ण व खुद को मीरां मानते हुए राजा के आगे अपने आपको पुरे मनोयोग से पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया| उनकी आसक्ति जानने वाली प्रजा ने भी उनके भीतर कृष्ण-राधा की छवि देखी और दोनों को कई अलंकरणों से नवाजा जैसे- राजा को नागरीदास, चितवन, चितेरे,अनुरागी, मतवाले आदि तो दासी को भी कलावंती, किर्तिनिन, लवलीज, नागर रमणी, उत्सव प्रिया आदि संबोधन मिले वहीं रसिक बिहारी के नाम से वह खुद कविता पहले से ही लिखती थी|

एक बार राजा सावंतसिंह ने जो चित्रकार थे इसी सौंदर्य और रूप की प्रतिमूर्ति दासी को राणियों जैसी पौशाक व आभूषण पहनाकर एकांत में उसका एक चित्र बनाया| और इस चित्र को राजा ने नाम दिया “बणी-ठणी” | राजस्थानी भाषा के शब्द “बणी-ठणी” का मतलब होता है "सजी-संवरी","सजी-धजी" |राजा ने अपना बनाया यह चित्र राज्य के राज चित्रकार निहालचंद को दिखाया| निहालचंद ने राजा द्वारा बनाए उस चित्र में कुछ संशोधन बताये| संशोधन करने के बाद भी राजा ने वह चित्र सिर्फ चित्रकार के अलावा किसी को नहीं दिखाया| और चित्रकार निहालचंद से वह चित्र अपने सामने वापस बनवाकर उसे अपने दरबार में प्रदर्शित कर सार्वजानिक किया| इस सार्वजनिक किये चित्र में भी बनते समय राजा ने कई संशोधन करवाए व खुद भी संशोधन किये|

इस चित्र की सर्वत्र बहुत प्रसंशा हुई और उसके बाद दासी का नाम “बणी-ठणी” पड़ गया| सब उसे “बणी-ठणी” के नाम से ही संबोधित करने लगे| चितेरे राजा के अलावा उनके चित्रकार को भी अपनी चित्रकला के हर विषय में राजा की प्रिय दासी “बणी-ठणी” ही आदर्श मोडल नजर आने लगी और उसने “बणी-ठणी” के ढेरों चित्र बनाये| जो बहुत प्रसिद्ध हुए और इस तरह किशनगढ़ की चित्रशैली को “बणी-ठणी” के नाम से ही जाना जाने लगा|

और आज किशनगढ़ कि यह “बणी-ठणी” चित्रकला शैली पुरे विश्व में प्रसिद्ध है| “बणी-ठणी” का पहला चित्र तैयार होने का समय संवत 1755-57 है| आज बेशक राजा द्वारा अपनी उस दासी पर आसक्ति व दोनों के बीच प्रेम को लेकर लोग किसी भी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करे या विश्लेषण करें पर किशनगढ़ के चित्रकारों को के लिए उन दोनों का प्रेम वरदान सिद्ध हुआ है क्योंकि यह विश्व प्रसिद्ध चित्रशैली भी उसी प्रेम की उपज है और इस चित्रशैली की देश-विदेश में अच्छी मांग है| किशनगढ़ के अलावा भी राजस्थान के बहुतेरे चित्रकार आज भी इस चित्रकला शैली से अच्छा कमा-खा रहें है यह चित्रकला शैली उनकी आजीविका का अच्छा साधन है|

“बणी-ठणी” सिर्फ रूप और सौंदर्य की प्रतिमा व राजा की प्रेमिका ही नहीं थी वह एक अच्छी गायिका व कवयित्री थी| उसके इस साहित्यक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार 

सौभाग्य सिंह शेखावत लिखते है-
राजकुलीय परिवारों की राणियों महारानियों की भांति ही राजा महाराजाओं के पासवानों, पड़दायतों और रखैलों में कई नारियाँ अच्छी साहित्यकार हुई है| किशनगढ़ के ख्यातिलब्ध साहित्यकार महाराजा सावंतसिंह की पासवान “बनीठनी” उत्तम कोटि की कवयित्री और भक्त-हृदया नारी थी| अपने स्वामी नागरीदास (राजा सावंत सिंह) की भांति ही बनीठनी की कविता भी अति मधुर, हृदय स्पर्शी और कृष्ण-भक्ति अनुराग के सरोवर है| वह अपना काव्य नाम “रसिक बिहारी” रखती थी| रसिक बिहारी का ब्रज, पंजाबी और राजस्थानी भाषाओँ पर सामान अधिकार था| रसीली आँखों के वर्णन का एक पद उदाहरणार्थ प्रस्तुत है-

रतनारी हो थारी आँखड़ियाँ |
प्रेम छकी रस बस अलसारणी, जाणी कमाल पांखड़ियाँ |
सुन्दर रूप लुभाई गति मति हो गई ज्यूँ मधु मांखड़ियाँ|
रसिक बिहारी वारी प्यारी कौन बसि निसि कांखड़ियाँ||


रसिक प्रिया ने श्रीकृष्ण और राधिका के जन्म, कुञ्ज बिहार, रास-क्रीड़ा, होली, साँझ, हिंडोला, पनघट आदि विविध लीला-प्रसंगों का अपने पदों में वर्णन किया है| कृष्ण राधा लीला वैविध की मार्मिक अभिव्यक्ति पदों में प्रस्फुटित हुई है| एक सांझी का पद इस प्रकार पाठ्य है-

खेले सांझी साँझ प्यारी|
गोप कुंवरि साथणी लियां सांचे चाव सों चतुर सिंगारी||
फूल भरी फिरें फूल लेण ज्यौ भूल री फुलवारी|
रहया ठग्या लखि रूप लालची प्रियतम रसिक बिहारी||


प्रिय की अनुपस्थिति प्रिया के लिए कैसी कितनी पीड़ाप्रद और बैचेनी उत्पन्न करने वाली होती है, यह तथ्य एक पंजाबी भाषा के पद में प्रकट है-

बहि सौंहना मोहन यार फूल है गुलाब दा|
रंग रंगीला अरु चटकीला गुल होय न कोई जबाब दा|
उस बिन भंवरे ज्यों भव दाहें यह दिल मुज बेताब|
कोई मिलावै रसिक बिहारी नू है यह काम सबाब दा ||



नोट : "बणी-ठणी" पर इसी माह राजस्थान की एक पत्रिका मूमल ने विशेषांक निकाला है जिसमे "बणी-ठणी" पर विस्तार से जानकारी देते हुए उसके चित्र व उसके सौन्दर्य पर प्रकाश डाला गया है| इस पत्रिका का डिजिटल अंक आप यहाँ चटका लगाकर पढ़ सकते है|



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स्थापत्यकला की गरिमापूर्ण कृति बेट द्वारका



स्थापत्यकला की गरिमापूर्ण कृति बेट द्वारका 

भगवान श्री कृष्ण अपने यादव परिवारों सहित मथुरा छोडकर सुराष्ट्र (सौराष्ट्र) में आते है। प्रभुने अब अपना बसेरा इस पवित्र भूमि में ही रखने का सोचा है और इस इरादों से वे सौराष्ट्र के समुद्र तट पर घुम रहे थे। उन्हे वहाँ की भूमि से मानो अच्छा लगाव हो गया और अपनी राजधानी स्थल के लिये स्थलचयन कर दिया। फौरन विश्वकर्माजी से बुलाया गया और प्रभुने अपनी इच्छा प्रगट की। विश्वकर्माजीने समुद्र तट पर अपनी दृष्टि डालते हुऐ बताया कि स्थान तो अदभूत है। राजधानी यहीं पर ही बनाना ठीक रहेगा लेकिन भूमि-विस्तार कम पडेगा। ज्यादा भूमि के लिये समुद्र देवसे प्रार्थना की गई प्रभु कृष्णने खुद समुद्रदेवकी आराधना की और समुद्रदेवने तटविस्तार से अपनी सीमाको थोडा अंदर की और लेते हुए द्वारिकाके निर्माणका रास्ता खोल दिया। बारह जोजन की भूमि सागरमहाराजने अपने स्थान से हटकर द्वारिका के लिये समर्पित कर दी। फिर तो विश्वकर्मा प्रभुने श्रीकृष्ण द्वारा कल्पनातीत नगरीका निर्माण कर दिया। सुवर्णनगरी का नाम द्वारिका रखा गया। द्वारावती या कुशस्थलीनाम से उसे जाना जाता था।

और एक किवदंती अनुसार श्रीकृष्ण प्रभु जब अपने अंतिम दिनोंमें सोमनाथ के नजदिक आये भालकतिर्थमें एक पारघी के बाण से घायल होकर त्रिवेणीसंगम स्थल पर अपना देहोत्सर्ग किया, तब उनकी बनाई हुई द्वारिका समुद्रमें डूब गइ थी।

भारतिय संस्कृति के युगप्रवर्तक - श्रीकृष्ण की पाटनगरी द्वारका:

सिन्धुसागर याने अरबसागर पर बसी हुई द्वारका गुजरात राज्य के पश्चिम छौर पर आयी हुई है। भगवान श्री कृष्णसे जिसका नाम जुडा हुआ हो वैसा अति प्राचीन तिर्थधाम है। द्वारिका को मोक्षनगरी से जाना जाता है। इसलिये हिन्दु धर्मीयात्री यहाँ वर्षभर दर्शनार्थे भावसे आते रहते है। प्रभुश्री कृष्णने यहाँ अपना साम्राज्य काफि काल तक फैलाया था। अपने बाल सखा सुदामाजी से सुभग मिलन बेट द्वारिकामें हुआ था। प्रभु प्रेम की दीवानी मीराबाईने भी मेरे तो गीरधर गोपाल दूसरो ना कोइ रे गाते हुए अपने अंतिम श्वास इस तिर्थभूमि पर ही त्याग कर मोक्षमार्ग पर चल दिया था। श्रीकृष्ण के राज्यकालमें द्वारिका सुवर्ण की ही बनी हुइ थी जो कालांतर से समुद्रमें समा गई ऐसा माना जाता है। प्रभु के साम्राज्य की समाप्ति के बाद यहाँ गुप्तवंश, पल्लववंश और चालुक्यवंश के भिन्न भिन्न राजाओंने राज्य किया था।

गोमती नदी और सिन्धुसागर (अरबसमुद्र) के संगमस्थान पर खडी हुयी द्वारिका में अदभुत नयनरम्य और जगमशहूर है श्रीकृष्णका जगतमंदिर। इस को करीब २५०० साल पुराना माना गया है। १६० फुट की सतहवाला यह भव्यमंदिर पाँच-पाँच मंजिलो से शोभायमान है। किवदंती में बताया गया, द्वारिका मंदिर तो विश्वनाथ प्रभुने निमिषमात्र में - चौवीस घंटेमें – बना दिया था केकिन उसका अभी अस्तित्व कहाँ, अब जो मंदिर हम देखते है वह पत्थरो की गई शिल्पकलासे सभर है। आठ आठ खंभो पर टीका हुआ है मंदिर का गुंबज। मंदिर के बाहरकी दिवारें भी पत्थर से बनी हुई है और बाटीक शिल्पकला से सज्ज है। शुध्ध चांदीसे आवृत सिहासन पर प्रभु श्री कृष्ण की मूर्ति मंदिर के मुख्य गर्भगृहमें बिराजमान है। श्याम शिलामें से निर्माण की गई प्रभु की मूर्ति चतुर्भूजा है। बडी नयनरम्य और पवित्र मूर्ति है वह।

द्वारिका से दो किमी के अंतर पर प्रभु की पटरानी देवीजी का १६०० साल पुराना मंदिर है। स्थापत्यकला की गरिमापूर्ण कृतिसम निर्माण किया हुआ है यह मंदिर। समुद्र में करीब ३२ कि.मी. की दूरी पर बेट द्वारका आया हुआ है। यात्री बोटमें बैठकर वहाँ के प्राचीन मंदिर संकुल को देखने और अपनी श्रध्धाको पूराकरने वहाँ अवश्य जाते है।

रेपिस्ट को भीड़ ने पीटकर मार डाला

ग्वालियर। एक छात्रा को अगवा कर उसके साथ गैंगरेप करने में शामिल एक दुष्कर्मी को लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला। जानकारी के अनुसार रामपुरी बस्ती की 11वीं की छात्रा बुधवार रात को शौच के लिए घर से निकली थी। तीन हजार रूपए के इनामी गुंडे नरेंद्र सिंह और दिनेश ने उसे अगवा कर लिया, फिर दोनों ने छात्रा से दुष्कर्म किया। पीडिता ने सुबह दोनों की शिकायत बहोड़ापुर पुलिस से की। रेपिस्ट को भीड़ ने पीटकर मार डाला


पुलिस गिरफ्त से बचता हुआ नरेंद्र गुरूवार शाम कट्टा लेकर छात्रा को धमकाने उसके घर पहुंचा, तभी बस्तीवालों ने उसे घेरकर पीटना शुरू कर दिया। लोगों ने उसे तब तक पीटा जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। सीएसपी रक्षपाल यादव ने बताया कि इलाज के लिए नरेंद्र को ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।



दुष्कर्म के दूसरे आरोपी दिनेश की तलाश की जा रही है। नरेंद्र को पीटने वालों की पहचान भी की जा रही है। नरेन्द्र का रामपुरी बस्ती में खौफ था। उस पर हत्या के प्रयास, डकैती की साजिश रचने सहित पांच संगीन वारदातों के मुकदमे दर्ज थे। गुंडे को बहोड़ापुर पुलिस ने स्मैक के साथ भी पकड़ा था।

आरटेट 2011 के द्वितीय स्तर का रिजल्ट संशोधित

आरटेट 2011 के द्वितीय स्तर का रिजल्ट संशोधित 

अजमेर  राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कोर्ट के आदेश पर राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (आरटेट) 2011 के द्वितीय लेवल का गुरुवार को संशोधित परिणाम जारी किया। प्रथम स्तर का परिणाम नहीं बदला गया है। हालांकि दोनों ही स्तरों के पात्रता प्रमाण पत्र फिर से जारी होंगे।

बोर्ड सचिव मिरजूराम शर्मा के मुताबिक आरटेट-11 का परिणाम 28 अगस्त 2011 को घोषित किया गया था। कोर्ट के आदेश पर बोर्ड ने उत्तर कुंजी का परीक्षण विशेषज्ञ समिति से कराया गया। समिति के अनुसार प्रथम स्तर की उत्तर कुंजी में कोई परिवर्तन नहीं पाया गया, लेकिन द्वितीय स्तर की आंसर-की में आंशिक संशोधन पाया गया। उसके बाद यह संशोधित परिणाम जारी किया गया।

परिणाम में 1 लाख 27 हजार 8 पुरुष तथा 1 लाख 13 हजार 992 महिला अभ्यर्थी पात्र घोषित की गई हैं। बोर्ड सचिव के अनुसार परिणाम में १८००-१९०० अभ्यर्थी बाहर हुए हैं। जबकि १९ हजार नए अभ्यर्थी शामिल हुए हैं।

अलग तेलंगाना पर बढ़ा तनाव,चार कैबिनेट मंत्री देंगे इस्तीफा!

हैदराबाद। अलग तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फैसले के खिलाफ चार केन्द्रीय मंत्री शुक्रवार सुबह 11 बजे इस्तीफा देंगे। एक समाचार चैनल के मुताबिक जो मंत्री इस्तीफा देंगे उनमें केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू,पुरंदेश्वरी,जेडी शीलम और कृपारानी शामिल है। इनके अलावा सीमान्ध्र के 10 सांसद भी इस्तीफा देंगे।
अलग तेलंगाना पर बढ़ा तनाव,चार कैबिनेट मंत्री देंगे इस्तीफा!

दिल्ली में कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात



चारों मंत्रियों और 10 सांसदों ने गुरूवार को दिल्ली में कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात की। राजू ने कहा कि अलग तेलंगाना का गठन चिंता का विषय है। इसका आंध्र प्रदेश पर लंबे समय में प्रभाव पड़ेगा। राजू ने कहा कि मैंने अपने विचार कांग्रेस महासचिव और आंध्र प्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह के सामने व्यक्त कर दिए हैं।



आंध्र के 19 मंत्रियों ने भी दिए इस्तीफे



उधर आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार के 37 में से 19 मंत्रियों ने गुरूवार को इस्तीफे दे दिए। मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी से मुलाकात के बाद इन मंत्रियों ने इस्तीफे दिए। सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों ने आंध्र प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह से फोन पर बात की। 19 मंत्रियों के अलावा 26 विधायकों ने भी विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। टीडीपी के 14 नेताओं ने कहा है कि उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है।



दिल्ली में चला मुलाकातों का दौर



उधर दिल्ली में कांग्रेस सांसद केवीपी रामचंद्र राव के घर मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें केन्द्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश के सांसद शामिल हुए। उधर कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में फैसला वापस नहीं लिया जाएगा। कांग्रेस ने मामले को संभालने के लिए दो महासचिवों को हैदराबाद भेजा है। केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि पार्टी ने एक फैसला लिया है। मुझे पता है कि वे विरोध कर रहे हैं। यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।



सीमांध्र में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन



केंद्र सरकार के पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की मांग को मंजूरी देने के विरोध में सीमांध्र में लगातार दूसरे दिन गुरूवार को भी प्रदर्शन किया और बंद रखा। सीमांध्र के सभी बड़े शहरों में लगातार दूसरे दिन दुकानें, व्यवसायिक और शिक्षण संस्थान बंद रहे, जबकि बसें भी नहीं चलीं।

हेमाराम राजनितिक षड़यंत्र के शिकार। … कटारिया

हेमाराम राजनितिक षड़यंत्र के शिकार। … कटारिया 

प्रतिपक्ष नेता कटारिया ने किए नाकोड़ा व जसोल के दर्शन 

 बालोतरा



राजस्थान विधानसभा प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद कटारिया गुरुवार को जैन तीर्थ नाकोड़ा दर्शनार्थ पहुंचे। कटारिया ने तीर्थ पर दर्शन पूजन कर प्रदेश में खुशहाली की कामना की। इससे पूर्व कटारिया का नाकोड़ा ट्रस्ट की ओर से फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इसके बाद कटारिया ने भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और फीडबैक लिया। इस दौरान कटारिया ने राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी के इस्तीफे पर बोलते हुए कहा कि चौधरी एक सुलझे हुए नेता है। राजनीति में अच्छे लोगों की भी कमी नहीं है। लेकिन वे राजनीतिक षडय़ंत्र के शिकार हो रहे हैं। कटारिया ने सुराज यात्रा को मिल रहे जनसमर्थन से काफी उत्साहित दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार के कुराज से जनता त्रस्त है और छुटकारा पाना चाहती है। इस दौरान नाकोड़ा ट्रस्ट के पदाधिकारियों सहित भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।

राजस्थान विधानसभा प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद कटारिया ने महावीर इंटरनेशनल (अपेक्स) के ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट को पर्यावरण शुद्धि की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। महावीर इंटरनेशनल के पूर्व जोन चेयरमैन ओम बांठिया ने ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट के अंतर्गत पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में दो वर्षों में 1.50 लाख नीम व खेजड़ी के पौधे लगाने के लक्ष्य एवं क्रियान्वयन की रुपरेखा कटारिया को बताई। कटारिया ने पर्यावरण शुद्धि के लिए महावीर इंटरनेशनल के ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट को अपना पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाया। 'ग्रीन इंडिया' फोल्डर को महावीर इंटरनेशनल बालोतरा केंद्र उपाध्यक्ष अशोक भंसाली, कोषाध्यक्ष दलपत जैन, निदेशक महावीर छाजेड़ ने प्रदान किया। कटारिया ने सपत्नीक जसोल स्थित माता राणी भटियाणी मंदिर में माजीसा के दर्शन पूजन कर मंदिर की परिक्रमा लगाई और खुशहाली की कामना की।

एक माह के लिए करोड़ों की कारें


एक माह के लिए करोड़ों की कारें 

बोर्ड-निगमों के चेयरमैनों के लिए सरकार ने दी 17 कारें खरीदने को मंजूरी, सितंबर से लग जाएंगी आचार संहिता 
जयपुर राज्य सरकार ने हाल ही नियुक्त किए गए निगम बोर्डों के चेयरमैनों के लिए 17 टाटा सफारी खरीदने की मंजूरी गुरुवार को दे दी। एक टाटा सफारी की कीमत सवा 12 लाख रुपए होगी। वित्त विभाग ने देर शाम इन गाडिय़ों के लिए दो करोड़ 8 लाख 25 हजार रुपए का बजट मंजूर कर दिया। 

खास बात ये है कि 15 सितंबर के बाद किसी भी दिन चुनाव आचार संहिता लग सकती है। यानी ये गाडिय़ां नव नियुक्त बोर्ड-निगम और अन्य मुखिया लोग लगभग एक महीने ही इस्तेमाल कर पाएंगे। स्थानीय एजेंट ने भी इन गाडिय़ों की डिलीवरी जयपुर में 20 अगस्त के बाद देने का भरोसा दिलाया है।

अधिकारियों ने बताया कि ये गाडिय़ां मोटर गैराज विभाग के बजाय संबंधित विभाग सीधे ही खरीदेंगे। इसके बाद ये गाडिय़ां विभागों के काम आएंगी। सबसे ज्यादा छह टाटा सफारी सामाजिक न्याय विभाग को मिलेंगी। उद्योग, पशुपालन विभाग और खेल-युवा विभाग को दो-दो, आयोजना, ग्रामीण विकास, जनजाति विकास, पर्यटन विभाग, और राजस्व विभाग को एक-एक टाटा सफारी खरीदने की मंजूरी दी गई है।

किन्हें मिलेंगी टाटा सफारी : निगम, बोर्ड व आयोगों में नवनियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और आयुक्तों को ये टाटा सफारी दी जाएंगी। इन्हें राज्य मंत्री और उप मंत्री का दर्जा दिया गया है।

मंत्री का दर्जा है, मंत्री की पावर नहीं :निगमों-बोर्डों-आयोगों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और आयुक्त को लग रहा है कि उन्हें काफी पावर मिल गई है। वे आदेश तक दे रहे हैं।लेकिन जब संबंधित विभाग के आला अफसरों से वे कुछ कहते हैं तो उन्हें जवाब मिलता है कि आपको मंत्री, राज्य मंत्री या उप मंत्री का दर्जा है। आपको मंत्री की पावर नहीं है! 

दो-दो ड्राइवर भी

हर एक नई टाटा सफारी के लिए वित्त विभाग ने दो-दो चालकों की मंजूरी भी दे दी है। हर टाटा सफारी पर दो-दो चालक रहने से दुर्घटना का खतरा कम रहेगा।

पिता ने ही दो पुत्रियों को जिंदा जलाकर मारा

अहमदाबाद। शहर के मेघाणीनगर थाना इलाके में मेन्टल हॉस्पिटल परिसर स्थित सीआईडी क्राइम कार्यालय के समीप गुरूवार दोपहर एक पिता ने अपनी दो पुत्रियों के ऊपर पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जलाकर मार डाला। दोनों ही के शवों का सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।पिता ने ही दो पुत्रियों को जिंदा जलाकर मारा
इलाके के सहायक पुलिस आयुक्त पी.एम.भालिया ने बताया कि आरोपी गोविंद राठौड़ मेघाणीनगर स्थित डी कोलोनी में रहता है और ऑटो रिक्शा चलाकर गुजारा करता है। उसके संतान में चार पुत्रियां और एक छोटा पुत्र है। दो पुत्रियां गांधी आश्रम निवासी स्कूल में पढ़ती हैं। जबकि दो अन्य पुत्रियां नेहा (5) व पूनम (7)व छोटा पुत्र उसके साथ रहता हैं। नेहा मेघाणीनगर प्राथमिक स्कूल में पहली कक्षा में जबकि व पूनम तीसरी कक्षा में पढ़ती हैं। नेहा और पूनम को गुरूवार दोपहर ऑटो रिक्शा में स्कूल ले जाने के लिए निकला था। रास्ते में इसने पेट्रोल खरीदा और सीआईडी क्राइम के कार्यालय के समीप ऑटो रिक्शा रोककर दोनों ही पुत्रियों के ऊपर पेट्रोल डालकर उन्हें जिंदा जला दिया। दोनों ही बçच्चयों ने ऑटो रिक्शा में ही दम तोड़ दिया।

मेघाणीनगर थाने के पुलिस निरीक्षक व जांच अधिकारी डी.ए.देसाई ने बताया कि दोनों ही पुत्रियों की हत्या करने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। तफ्तीश जारी है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार कुछ लोग आरोपी की मां को लेकर अभद्र टिप्पणी करते थे, जिसके चलते उसने ऎसा किया। आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है। गोविंद पहले सीआईडी क्राइम में सफाई का काम भी करता था।


मृतक पुत्रियों की मां इन्दूबेन का कहना था कि उन्हें ख्याल भी नहीं था कि इनका पिता ऎसा करेगा। वो बçच्चयों को स्कूल छोड़ने जाने की बात कहकर ऑटो रिक्शा में लेकर गए थे। थोड़ी देर बाद उन्हें जलाकर मारने की खबर मिली।

गुरुवार, 1 अगस्त 2013

पाकिस्तान में 'पुलिसगिरी' और 'मैन ऑफ स्टील' पर बैन

इस्लामाबाद।। पाकिस्तान के सेंसर बोर्ड गुरुवार को संजय दत्त की फिल्म 'पुलिसगिरी' और हॉलिवुड फिल्म 'मैन ऑफ स्टील' के प्रदर्शन पर बैन लगा दिया है। हालांकि इस फैसले के पीछे कोई खास कारण नहीं बताया गया है।Policegiri
पाकिस्तान के केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड की ओर से जारी प्रेस रिलीज में सिर्फ इतना ही कहा गया है कि ये फिल्में 'मोशन पिक्चर्स ऑर्डिनेंस 1979' का उल्लंघन करती हैं, इसलिए उन्हें बैन किया गया है।

दोनों फिल्में कई हफ्ते पहले ही पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में रिलीज हो चुकी हैं। फिलहाल कराची और लाहौर के कुछ सिनेमा घरों में उनके शो चल रहे हैं। संजय दत्त, प्राची देसाई और प्रकाश राज स्टारर 'पुलिसगीरी' 2003 की सुपरहिट तमिल फिल्म 'सामी' की रीमेक है।फिल्म का डायरेक्शन के. एस. रविकुमार ने किया है। मुंबई बम विस्फोट के सिलसिले में जेल की सजा काटने के लिए सरेंडर करने से पहले संजय दत्त ने फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली थी। यह फिल्म भारत में पांच जुलाई को रिलीज हुई है। 'मैन ऑफ स्टील' अमेरिकी सुपरहीरो सुपरमैन सीरीज की नई फिल्म है। इसका डयरेक्शन जैक सिंडर ने किया है।

बीजेपी-संघ की बैठक में मोदी पर नहीं लगी मुहर

नई दिल्‍ली।। दिल्ली में गुरुवार को करीब छह घंटे तक चली आरएसएस और बीजेपी के टॉप नेताओं की बैठक में मोदी को पीएम कैंडिडेट बनाने पर कोई फैसला नहीं हुआ। बैठक खत्म होने के बाद बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि संघ नेताओं से केवल आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि संघ और बीजेपी नेताओं की इस बैठक को बेहद अहम बताया जा रहा था। माना जा रहा था कि बैठक में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर मुहर लग सकती है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।rajnath-singh
बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम कैंडिडेट समेत किसी भी राजनीतिक विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इसका फैसला सेंट्रल पार्ल्यामेंट्री बोर्ड करेगा। उन्होंने कहा कि बैठक में आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत हुई और पांच-छह घंटों का समय भी कम पड़ गया। इस सवाल पर कि क्या आरएसएस बीजेपी के समर्थन में खुलकर सामने आएगा, पर राजनाथ सिंह ने कहा कि संघ में विप या फिर समर्थन पत्र जारी करने की परंपरा नहीं है।

दिल्ली के बसंत विहार इलाके में बीजेपी की यह बैठक करीब छह घंटे तक चली। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संघ और बीजेपी के सीनियर नेता शामिल हुए, हालांकि आडवाणी इससे दूर ही रहे। आडवाणी बैठक से ठीक पहले बीजेपी कार्यकर्ता की शोकसभा में शामिल होने के लिए तमिलनाडु रवाना हो गए थे। हालांकि चर्चा रही कि आडवाणी आरएसएस के एक नेता से खासे नाराज हैं। बैठक में उस नेता की मौजूदगी के कारण ही आडवाणी ने अपना अलग कार्यक्रम बना लिया।गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी को आरएसएस के टॉप नेताओं का पूरा समर्थन हासिल है। कहा जा रहा था कि पार्टी की मंशा इस साल के अंत में 5 राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में मोदी की लोकप्रियता को भुनाना है। इसी से इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि विधानसभा चुनाव के को लेकर सितंबर में चुनाव आयोग की अधिसूचना से पहले पीएम कैंडिडेट के लिए मोदी के नाम की घोषणा की जा सकती है।

बारह साल के लड़के ने किया पांच साल की बच्ची से बलात्कार



जबलपुर।। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बारह साल के लड़के द्वारा पांच साल की बच्ची से कथित रूप से बलात्कार का मामला सामने आया है। यह घटना जिले के गोसलपुर पुलिस चौकी क्षेत्र के आमी गांव में हुआ है। पुलिस ने आरोपी बच्चे के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे कस्टडी में ले लिया है।

गोसलपुर पुलिस चौकी प्रभारी याकूब खान ने बताया कि पीड़ित बच्ची की मां ने कल शाम रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी पांच वर्षीय बच्ची पड़ोस में रहने वाले बारह वर्षीय बच्चे के साथ दोपहर के समय खेल रही थी। लड़का अमरूद का लालच देकर उसकी बच्ची को बगीचे में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची रोते हुए घर आई और घटना की जानकारी अपनी मां को दी।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि आरोपी लड़का चौथी क्लास तक पढ़ा है और एक साल पहले उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। स्कूल से उसकी उम्र के संबंध में डॉक्युमेंट मांगे गए हैं। हालांकि प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार के संबंध में डाक्टर ने स्पष्ट राय व्यक्त नहीं की है।पीड़ित बच्ची को जांच के लिए जबलपुर के शासकीय विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया है। आरोपी लड़के और पीड़ित बच्ची दोनों के ही परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
पुलिस ने आरोपी लड़के के खिलाफ धारा 363, 366, 376(2), बाल लैंगिक अपराध संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3(5), 6 के तहत केस दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

इस्तीफे के बाद हेमाराम चौधरी पहली बार जयपुर रवाना

इस्तीफे के बाद हेमाराम चौधरी पहली बार जयपुर रवाना


बाड़मेर राज्य सरकार में राजस्व मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार गुरूवार शाम को हेमाराम चौधरी जयपुर के लिए मालानी एक्सप्रेस रेल से रवाना हुए। गौरतलब हें की राजस्व मंत्री पद से हेमाराम ने एक सप्ताह पूर्व ओस्तिफा दे दिया था। मुख्यमंत्री सहित प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभान ने टेलीफोन पर वार्ता कर उनसे इअस्तिफ़ वापस लेने का अनुरोध भी किया था जिसे उन्होंने अनदेखा कर दिया था। सप्ताह भर की ख़ामोशी के बाद हेमाराम अचानक आज जयपुर के लिए रवाना हो गए। एक दिन पूर्व ही उनके राजनितिक विरोधी बायतु विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी को कांग्रेस संघठन द्वारा चुनाव कम्मेटी में स्थान दिया था। जिससे भी हेमाराम आहात हुए बताये जा रहे हें।

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