सोमवार, 1 सितंबर 2014

गंगानगर मे वायुसेना अधिकारी संदिग्धावस्था में गिरफ्तार -

श्रीगंगानगर। जिले के सीमावर्ती अनूपगढ़ क्षेत्र में रविवार रात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर रैंक के अधिकारी को संदिग्ध अवस्था में गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि पाकिस्तान सीमा पर स्थित कैलाश चौकी के पास बल के जवानों ने एक व्यक्ति को संदिग्धावस्था में देखकर उससे पूछताछ की तो उसने खुद का नाम शशांक शेखर बताते हुए अम्बाला में विंग कमांडर के रूप में पदस्थ होना बताया। IAF officer arrested by BSF in Rajasthan`s Ganganagar district
सूत्रों के मुताबिक, तलाशी लेने पर उसके जूतों में छुपाया पासपोर्ट मिला। इसके अलावा कुछ कागजात भी बरामद हुए। सूत्रों ने बताया कि बल ने सोमवार दोपहर उसे स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया है। इसकी जानकारी मिलते ही खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी वहां पहुंच गए और उससे पूछताछ कर रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि उस पर जासूसी में लिप्त होने का संदेह किया जा रहा है। गंगानगर के पुलिस अधीक्षक हरि प्रसाद शर्मा ने बताया कि उससे पूछताछ में हासिल जानकारी की पुष्टि की जा रही है। उधर रक्षा सूत्रों ने शशांक शेखर के विंग कमांडर होने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अम्बाला में पदस्थ है और लम्बे समय से मतिभ्रम बीमारी से पीडित है। सूत्रों ने बताया कि सेना की ओर से भी जांच की जा रही है। 

बुलन्दशहर रेप के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई फांसी सजा

बुलन्दशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की एक अदालत ने बलात्कार के बाद नाबालिग की हत्या के मामले में अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई है। the district court sentenced to death of rape accused
सरकारी अधिवक्ता रविन्द्र कु मार ने बताया कि गत 12 फरवरी 2011 की शाम डिबाई क्षेत्र के गालिबपुर निवासी डम्बर सिंह की नौ साल की पुत्री अपनी सहेली के साथ खेत पर जा रही थी। रास्ते में गांव के ही नेमपाल सिंह नामक एक व्यक्ति ने बालिका को दबोच लिया और बालात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी।

बालिका के साथ गई उसकी सहेली ने गांव में आकर घटना की जानकारी दी जिस पर परिजनों के साथ ग्रामीणों ने रातभर बालिका की तलाश की तो उसका शव खेत में पडा मिला।

पुलिस ने आरोपी नेमपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मुकदमें की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीष्ा कामनी पाठक ने बलात्कार के आरोप में नेमपाल को आजीवन कारावास तथा 10 हजार के जुर्माने के अलावा हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। - 

कृष्ण नहीं बचाएंगे, खुद हथियार उठाएं महिलाएं

नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने समाज में महिलाओं से सशक्त होने का आह्वान करते हुए सोमवार को कहा कि श्रीकृष्ण उन्हें बचाने नहींआएंगे बल्कि उन्हें स्वयं अपने खिलाफ हो रहे अन्याय से लड़ने के लिए हथियार उठाना होगा। smriti irani says women do self defence in any critical situation
ईरानी ने यहां वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ. सूर्यकांतबाली की पुस्तक महाभारत का धर्म संकट का विमोचन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी रक्षा के लिए स्वयं शस्त्र उठाने हैं और खुद अपना बचाव करना है क्योंकि इस युग में उन्हें बचाने के लिए भगवान कृष्ण आने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि समाज को उन्नत बनाने के लिए बच्चों को संस्कारी बनाना आवश्यक है। सरकार बच्चों को पढ़ाने के लिए सुविधा दे सकती है लेकिन उन्हें संस्कारी परिवार और समाज ही बना सकता है। उनका कहना था कि धर्म का पालन जरूरी है और यदि धर्म पर संकट आता है तो भगवान राम और भगवान कृष्ण का नाम लेकर धर्म पर आए संकट को दूर किया जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने ईरानी को जवाब देते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारी बनाने का काम स्कूलों का भी है। उन्होंने कहा कि स्कूल में मिले संस्कारों के बल पर ही समाज को संस्कारी बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि संस्कृत भाषा में समाज को सुसंस्कृत बनाने की क्षमता है लेकिन अंग्रेजों ने संस्कृत से देश को दूर करने का काम किया है और आज हमारा युवा वर्ग संस्कृत वांडमय से बहुत दूर चला गया है।

उन्होंने कहा कि आदिकाल में महिलाएं बहुत मजबूत थीं और यही वजह है कि ऋग्वेद की ऋचाओं को लिखने में 29 महिला ऋषियों ने अपना योगदान किया था। उन्होंने कहा कि महाभारत के धर्म संकट में श्रीकृष्ण मार्ग दर्शक का काम करते हैं और समाज को प्रेरणा देते हैं। डॉ. बाली ने कहा कि सबसे पहले हमें धर्म को समझना होगा।

उनका कहना था कि धर्म का आशय रिलीजन अथवा मजहब नहीं है। इस सोच से धर्म को अलग कहना है क्योंकि धर्म का अर्थ सिर्फ धर्म ही होता है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रौद्योगिकी का विकास आवश्यक है और यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहनी चाहिए लेकिन इसमें इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि समृद्धि के लिए मर्यादाएं टूटने नहीं पाए। उनका कहना था कि समृद्धि के साथ साथ मर्यादा का बना रहना भी आवश्यक है तभी स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।

821 साल बाद फिर खुला नालंदा विश्वविद्यालय!



नई दिल्ली। सैकड़ों साल तक भारतीय मस्तिष्क और तेजस्विता की पहचान रहा नालंदा विश्वविद्यालय सालों बाद इतिहास की धूल झाड़कर एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है। दुनिया में भारत के ज्ञान-विज्ञान की चमक का प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय में 821 साल बाद आज एक बार फिर पढ़ाई शुरू हो गई। अभी यहां इतिहास और पार्यावरण विज्ञान पढ़ाया जाएगा, लेकिन भविष्य में यहां कुल सात विषयों में उच्च अध्ययन होगा। फिलहाल यहां 15 छात्रों को प्रवेश दिया गया है जबकि एक हजार छात्रों ने आवेदन किया था।




शुरुआत में यहां जापान और भूटान के एक-एक छात्रों सहित कुल 15 छात्रों को प्रवेश दिया गया है। अभी सिर्फ इतिहास और पर्यावरण विज्ञान पढ़ाया जाएगा। आगे चलकर सात विषयों में उच्च अध्ययन और शोध की व्यवस्था होगी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना प्राचीन विश्वविद्यालय से 12 किलोमीटर दूर राजगीर में हुई है।



विश्वविद्यालय के कुलपति गोपा सबरवाल ने बताया कि आज से यहां फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है। यहां दो विषय पढ़ाया जाएगा और कोशिश है कि बाकी विषय भी जल्द ही शुरू किया जाय। डीन अंजना शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय किराये के मकान में शुरू किया गया है। भवन बन रहा है और जल्द ही तैयार हो जाएगा।



मालूम हो कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 413 ईस्वी में हुई थी और 780 साल तक यह बौद्ध धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, वास्तु, धातु और अतंरिक्ष विज्ञान के अध्ययन का विश्वप्रसिद्ध केंद्र रहा। 1193 में हमलावरों ने इस विश्वविद्यालय को तहस-नहस कर दिया था। फिलहाल 11 शिक्षकों के साथ राजगीर कन्वेंशन सेंटर में पढ़ाई शुरू हुई है। यहां चुने गये छात्रों को लग रहा है कि वे इतिहास का हिस्सा बन रहे हैं।



जापानी छात्र ह्युमिन किन के मुताबिक हम लोगों का आज से क्लास शुरू हो गया। अच्छा लग रहा है। छात्रा

सबिता के मुताबिक अब धीरे-धीरे इसका विस्तार होगा। हम लोग बहुत खुश हैं।



वैसे, विश्वविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन 14 सितम्बर को होना है। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2006 में इसकी कल्पना की थी ।साल 2010 में इसकी स्थापना के लिए संसद में कानून बना। राजगीर की पहाड़ियों की तलहटी में 455 एकड़ में विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर बनना है।

चेन्नई।"हैवान" डीएसपी बाप! प्रेमी के बारे में बताया तो लोहे की गर्म रॉड़ से दागा -


चेन्नई। रेलवे पुलिस के डीएसपी और उसकी पत्नी के खिलाफ अपनी ही बेटी को लोहे की रॉड़ से दागने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। उनकी 24 वर्षीय बेटी ने जब उन्हें अपने प्रेमी से शादी की बात कही तो वे आग बबूला हो गए और उन्होंने उसे कमरे में बंद करके क्रिकेट बैट से पीटा और लोहे की रॉड़ से उसके शरीर को दागा। पीडिता ने अपने परिवार वालों से प्रेमी से शादी करने की अनुमति मांगी थी। अस्पताल में बहन और नौकरानी द्वारा भर्ती कराए जाने के बाद पीडिता ने पुलिस में अपने ही माता-पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने पीडिता की शिकायत के आधार पर तमिलनाडू के त्रिरूची में कार्यरत राजकीय रेलवे पुलिस के डीएसपी डानावेल और उनकी पत्नी के खिलाफ अपनी बेटी की बर्बरता से पिटाई करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
DSP Assaults Techie Daughter With Cricket Bat

सूत्रों के मुताबिक पीडिता चेन्नई की एक आईटी कंपनी में काम करती है। वह अपने स्कूल के दिनों के दोस्त के साथ परिवार वालों के विरोध के बावजूद कई सालों से रिलेशन में थी। गुरूवार को उसने अपने प्रेमी और उसके परिवार वालों को अपने परिवार वालों से मिलाने के लिए बुलाया था। वहां पीडिता ने अपने माता-पिता से अपने प्रेमी के साथ शादी की अनुमति मांगी, लेकिन पीडिता के पिता ने प्रेमी के परिवार को वहां से चले जाने के लिए कहा और कहा कि वह अपनी बेटी की शादी आपके बेटे से नहीं करेंगे। लड़के के परिवार वालों के जाने के बाद डीएसपी और उसकी पत्नी ने पीडिता को एक कमरे में बंद करके क्रिकेट बैट से पीटा। इसके साथ ही उसके शरीर को गर्म लोहे की रॉड़ से भी दागा। पीडिता के सिर, टखने, पैरों और कुल्हों में गंभीर चोट आई है।

अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद लड़की ने अपने परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी डीएसपी है इसलिए इसकी जांच एडिशनल डीएसपी को सौंपी गई है। - 

पाक में तख्ता पलट का खतरा! पीटीवी पर छोड़ा कब्जा, दोबारा प्रसारण शुरू -

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का वीवीआईपी इलाका रेड जोन पिछले 24 घंटों से जंग के मैदान में तब्दील हो चुका है। पाक में तख्ता पलट का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद स्थित सरकारी टीवी चैनल पीटीवी की इमारत पर कब्जा कर तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ के बाद पीटीवी का प्रसारण बंद हो गया था। इसके बाद तहरीक-ए-इंसाफ के चीफ इमरान खान ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और पीटीवी की इमारत से बाहर आने के लिए कहा। इसके साथ ही वहां सेना के जवान पहुंच गए थे, उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पीटीवी की इमारत खाली करवाई। जिसके बाद टीवी चैनल का प्रसारण दोबारा से शुरू कर दिया गया है। Pakistan: anti-government protesters enter Secretariat
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को सचिवालय का गेट तोड़ दिया था और उसके अंदर घुस गए। इसके साथ ही उन्होंने संसद के अंदर भी घुसने की कोशिश की थी। सेना का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सचिवालय के अंदर स्थित किसी भी मंत्रालय में घुसने नहीं दिया। हालांकि प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे इमरान खान और कादरी ने पहले कहा था कि वे किसी भी सरकारी इमारत को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

तहरीक-ए-इंसाफ के इमरान खान और पाकिस्तान आवामी तहरीक के ताहिर-अल-कादरी के नेतृत्व में चल रहा यह प्रदर्शन उस वक्त हिंसक हो गया जब पुलिस के आंसू गोलों और रबड़ की गोलियां को जवाब में प्रदर्शनकारियों ने सेना के जवानों पर फायरिंग की। हंगामा तब रूका जब सेना ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला किया।

इसी बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ राहिल शरीफ ने सोमवार को सभी कोर कमांडरों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में सेना अपने अगले कदम का फैसला लेगी। रेड जोन में पाकिस्तानी संसद और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का घर है। तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान और धर्मगुरू ताहिर उल कादरी की अगुवाई में यहां 18 दिन से प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस में जमकर झड़प हुई। शनिवार देर रात शुरू हुई इस झड़प में अब तक तीन लोगों के मारे जाने की खबर आई है। 535 से ज्यादा लोग घायल हैं। इसमें 100 के करीब पुलिसवाले भी हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यहां करीब 25 हजार लोगों की भीड़ मौजूद थी। बवाल उस वक्त शुरू हुआ जब इमरान खान और ताहिर उल कादरी ने लोगों से प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर की तरफ चलने के लिए कहा। ये लोग नवाज के घर का घेराव करना चाहते थे। - 

सरकारी कर्मचारियों को पेंशन जारी करने के लिए नया नियम

नई दिल्ली। सेवानिवृत्त हो रहे सरकारी कर्मचारियों को नियत समय पर पेंशन जारी करने में किसी भी वजह से देरी होने या कोई अड़चन आने पर सरकार ने संब ंधित विभाग प्रमुख को जिम्मेदार मानने का नियम बनाया है।
new pension rules for government employees


सरकार के पेंशन जारी करने के नए अधिसूचित नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारी को पेंशन देने की प्रक्रिया सेवानिवृत्ति की तिथि से एक वष्ाü पूर्व विभाग प्रमुख द्वारा शुरू कर देनी चाहिए। फिलहाल यह प्रक्रिया दो वर्ष पूर्व शुरू कर दी जाती है।

नए नियमों के मुताबिक, पेंशन जारी कराने के लिए कर्मचारी को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना होगा और उसके आवेदन में किसी भी कमी या त्रुटि को दूर कराने की जिम्मेदारी विभाग प्रमुख की होगी। अगर किसी आवश्यकता को पूरी करने में कर्मचारी अक्षम है और उसे अलग से हलफनामा देना होगा।

विभाग प्रमुख को कर्मचारी की सेवानिवृति से एक वर्ष पूर्व फार्म-सात भरना होगा। इसके अलावा कर्मचारी के सर्विस रिकार्ड को जांचने और नियत समय रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी विभाग प्रमुख की होगी।

क्या कहता है नया नियम
नए नियमों के अनुसार, अगर विभाग प्रमुख या अन्य संबंधित अधिकारी नियत समय के भीतर रिपोर्ट देने में नाकाम रहते हैं तो संबंधित मंत्रालय का सचिव स्तर का अधिकारी इसकी जिम्मेदारी तय करेगा और उचित कार्रवाई करेगा।

नए नियमों में ऎसी कई अड़चनों को हटाया गया है, जिनसे सेवानिवृत्त कर्मचारी या उसके परिजनों या इसके आश्रितों को पेंशन प्राप्त करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर पेंशन प्राप्त करने वाला नाबालिग है या शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम है तो उसक अभिभावकों को पेंशन का दावा करने के लिए फार्म-14 भरना होगा।

केन्द्र सरकार के पेंशन भोगी कर्मचारियों की संख्या तकरीबन 50लाख है। सामान्य तौर पर पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया कर्मचारी को अपने बुते पूरी करनी पड़ती है। इसके लिए उसे इधर-उधर दौड़ना पड़ता है।

केन्द्र सरकार के कर्मचारी अक्सर स्थानांतरण पर जाते है। कई बार ये लोग विभाग को छोड़कर अन्य विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भी जाते हैं इससे इन कर्मचारियों को अपना सर्विस रिकार्ड अपने बुते पर जुटाना मुश्किल होता है।

मारवाडियों ने शादी पर नहीं माना ये नियम तो सख्त सजा! -

मुंबई। मारवाड़ी शादियां भारी भरकम खर्चे और भव्यता के लिए जानी जाती हैं। कई शादियों में भव्यता का आलम ये होता है कि 100 करोड़ रूपए तक खर्च कर दिए जाते हैं।
new rules for marwari weddings


बेहिसाब खर्च को देखते हुए दक्षिण राजस्थान के गांवों और शहरों के मारवाड़ी समाज के बड़े-बुजुर्गो ने एक कड़ा फैसला किया है।

बडे-बुजुर्गो ने शादियों में बेहिसाब खर्चे को पैसे की बर्बादी बताया है। उनका कहना है कि कई बार भव्य शादी के लिए लड़की वालों पर आर्थिक रूप से बड़ा दबाव भी पड़ता है।

राजस्थान के पाली और जालौर जिलों के तखतगढ़, बाली, सादरी और अन्य गांवों के रहने वाले लोगों ने शादियों के लिए एक नया नियम बनाया है। अगर कोई उस नियम को तोड़ेगा तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जा सकता है या फिर उस पर 50 हजार रूपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।

क्या है नया नियम?
उदाहरण के तौर पर तखतगढ के मारवाड़ी लोगों को शादियां अपने गांव में करनी होंगी। बारात आने पर ढोल बजाने वालों और सजावट के लिए लाइटों की संख्या सीमित होगी।

शादी समारोह की सामान्य व्यवस्था करनी होगी। खाने में दो से अधिक मिठाई नहीं होनी चाहिए।

वहीं पाली जिले के बाली के रहने वालों ने मुंबई जैसे शहर में शादी की अनुमति दी है। लेकिन शादी समारोह केवल एक दिन ही करना होगा। सूर्यास्त के बाद डिनर के कार्यक्रम पर पाबंदी लगा दी है। जो लोग डिनर पार्टी देंगे उनका तीन सात तक सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाएगा।

क्या कहना है लोगों का
मुंबई के दादर में रहने वाले चिंतामणि जैन का कहना है कि यह नियम सही है। इससे शादियोे में होने वाले रूपयों की बर्बादी पर रोक लग सकेगी। उन्होंने कहा कि जब अगले साल उनकी बेटी की शादी होगी तो वह इन नियमों का पालन करेंगे।

सादरी के रहने वाले ज्वैलर किशोर जैन का कहना है कि वे लोग इस नियम को लागू कराने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि ये नियम व्यवहारिक नहीं हैं। मारवाड़ी समाज में शादी हमेशा से ही भव्यता के साथ होती रही है।

यौन संबंध के लिए बीवी पिलाती है शराब खिलाती है दवा

मुंबई। एक पत्नी यौन संबंध के लिए इस कदर पागल थी कि पति के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करने लगी।

पति जब भी काम से थका हारा घर लौटे, तो पत्नी उसे आराम के लिए नहीं बल्कि यौन संबंध बनाने के लिए कहने लगती।
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सालों से पत्नी की इस इच्छा से प्रताडित पति ने राहत के लिए कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट ने पति के दर्द को समझा और उसे पत्नी से तलाक की मंजूरी दे दी।

यह चौंका देने वाला मियां-बीवी के तलाक का फैसला मुंबई की एक फैमिली कोर्ट में सुनाया गया है।

इतना यौन संबंध बनाया कि पहुंच गया अस्पताल
इस अजीब किस्से की शुरूआत अप्रैल 2012 से तब शुरू हुई जब दोनों शादी के बंधन में बंधे। पीडित पति ने कोर्ट में कहा कि पत्नी शादी के बाद से ही उसपर अत्यधिक यौन क्रिया का दबाव बनाने लगी थी।

एक वक्त ऎसा भी आया जब हद से ज्यादा यौन संबंध बनाने के कारण पति की हालत खराब हो गई। पति की हालत इस कदर खराब हुई कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

पीडित के अनुसार उसका इलाज कर रहे डॉक्टर ने उसे चेताया था कि वो कुछ दिन तक यौन संबंध बनाए। ऎसा करने से वो बड़ी मुश्किल में पड़ सकता है।

अस्पताल से निकलते ही पत्नी फिर बनी वहशी
कोई पत्नी इतनी क्रूर कैसे हो सकती है! अस्पताल से डिस्चार्ज होने बाद पीडित पति की स्वास्थ्य में आई खामी को दूर करने को पत्नी ने रास्ता सुझाया कि वे कुछ दिन के लिए उसकी बहन के घर पर रहेंगे।

पति के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना पत्नी फिर वाइल्ड हो गई। बहन के घर में भी आरोपी पत्नी ने पति पर अत्याचार बदस्तूर जारी रखाा।

अस्पताल से डिस्चार्ज हुए पति को अभी महज कुछ घंटे ही बीते होंगे कि पत्नी ने उसपर यौन संबंध के लिए फिर से दबाव बनाना शुरू कर दिया।

ऎसा तो कोई कस्साई भी नहीं करता
यौन संबंध की प्रगाढ़ इच्छा को पूरा करने के लिए आरोपी पत्नी, पति को दवाइयां भी खिलाती थी। इतना ही नहीं यौन संबंध में चरम आनंद पाने के लिए उसने पति को शराब पीने के लिए भी फोर्स किया है।

यही कारण रहा कि पीडित पति की तबीयत खराब हुई और उसे अस्पताल तक जाना पड़ा। अस्पताल में उसे शर्मसार भी होना पड़ा जब डॉक्टर ने उसे यौन संबंध बनाने से मना किया।

देती थी दूसरे मर्द से यौन संबंध बनाने की धमकी
केस में गौर करने वाली एक और बात है। पत्नी के जानवरों जैसे बर्ताव और यौन संबंध के पागलपन के चलते पति को यौन संबंध बनाने से चिढ़ मचने लगी थी।

भय के मारे वो अपने इस दर्द को कभी पत्नी के सामने बयां नहीं कर पाता था। हां, कभी-कभी वो यौन संबंध से बचने के लिए पत्नी से थके होने की बात जरूर कह देता था।

जब कभी भी पति ने पत्नी से ऎसी बात कही तो, उसे यातना झेलनी पड़ी। इतना ही नहीं पति के थके होने की बात कहते ही पत्नी उससे कहने लगती कि वो गैर मर्द से यौन संबंध बना लेगी।

कोर्ट में नहीं हुई पेश
रोज-रोज के यौन संबंध से आजिज आ चुके पति ने एक मर्तबा पत्नी को मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह दी थी। पति की इस सलाह पर पत्नी आग-बबूला हो गई थी।

उसने फिर वही धमकी दोहराई थी कि अगर उसने किसी से यह बात कही तो वो गैरमर्द से यौन संबंध बनाने लगेगी। पत्नी को सुधारने के लिए हर प्रयास आजमाने के बाद पति ने उससे अलग होने का फैसला ले लिया।

पत्नी को बताए बिना उसने मुंबई की कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी डाल दी। केस की तारीखों और फैसले के दिन भी आरोपी पत्नी कोर्ट नहीं पहुंची।

माना जा रहा था कि हैवानियत की हकीकत सामने आने से पत्नी किसी को चेहरा दिखाने के काबिल नहीं थी और उसने कोर्ट आना भी ठीक नहीं समझा।

पीडित पति के सारे तथ्यों और पत्नी के कोर्ट में पेश न होने पर फैमिली कोर्ट की प्रिंसिपल जज ने पति की तलाक की अजी पर मुहर लगा दी और उसे तलाक की मंजूरी दे दी। -