मंगलवार, 25 जनवरी 2011

स्व.पु.श्री तनसिंह जी जयंती : एक अद्भभुत व्यक्तित्व का परिचय


1.   स्व.पु.श्री तनसिंह जी जयंती

: एक अद्भभुत व्यक्तित्व का परिचय
बाड़मेर
वि.सं.१९८० में बाड़मेर जिले के गांव रामदेरिया के ठाकुर बलवंत सिंह जी महेचा की धर्म पत्नी मोतिकंवरजी के गर्भ से तनसिंह जी का जन्म अपने मामा के घर बैरसियाला गांव में हुआ था वे अभी शैशवावस्था में अपने घर के आँगन में चलना ही सीख रहे थे कि उनके पिता मालाणी के ठाकुर बलवंत सिंघजी का निधन हो गया और चार वर्ष से भी कम आयु का बालक तनैराज अपने सिर पर सफ़ेद पाग बाँध कर ठाकुर तनैराज हो गया | मात्र ९०रु वार्षिक आय का ठाकुर | भाग्य ने उनको पैदा करके पालन-पोषण के लिए कठिनाईयों के हाथों सौप दिया |
घर की माली हालत ठीक होने के बावजूद भी श्री तनसिंह जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा बाड़मेर से पुरी कर सन १९४२ में चौपासनी स्कूल जोधपुर से अच्छे अंकों के साथ मेट्रिक परीक्षा पास कर सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी होने का गौरव प्राप्त किया,और उच्च शिक्षा के लिए पिलानी चले आए जहाँ उच्च शिक्षा ग्रहण करने बाद नागपुर से उन्होंने वकालत की परीक्षा पास कर सन १९४९ में बाड़मेर आकर वकालत का पेशा अपनाया,पर यह पेशा उन्हें रास नही आया | 25 वर्ष की आयु में बाड़मेर नगर वासियों ने उन्हें बाड़मेर नगर पालिका का अध्यक्ष चुन लिया और 1952 के विधानसभा चुनावों में वे पहली बार बाड़मेर से विधायक चुन कर राजस्थान विधानसभा पहुंचे और 1957 में दुबारा बाड़मेर से विधायक चुने गए | 1962 1977 में आप बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए | 1962 में तन सिंघजी ने दुनिया के सबसे बड़े और विशाल बाड़मेर जैसलमेर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव मात्र एक जीप,कुछ साथी,सहयोगी स्वयम सेवक,कार्यकर्त्ता,किंतु अपार जन समूह के प्यार और समर्थन से मात्र 9000 रु. खर्च कर सांसद बने |
1979
में मध्यावधि चुनावों का फॉर्म भरने से पूर्व अपनी माताश्री से आशीर्वाद लेते समय 7 दिसम्बर 1979 को श्री तनसिंह जी ने अपनी माता की गोद में ही अन्तिम साँस ली |
पिलानी के राजपूत छात्रावास में रहते हुए ही श्री तनसिंह जी ने अपने भविष्य के ताने-बाने बुने | यहीं उनका अजीबो-गरीब अनुभूतियों से साक्षात्कार हुआ और समाज की बिखरी हुयी ईंटों से एक भव्य-भवन बनाने का सपना देखा | केवल 22 वर्ष की आयु में ही उनके हृदय में समायी समाज के प्रति व्यथा पिघली जो " श्री क्षत्रिय युवक संघ" के रूप में निश्चित आकार धारण कर एक धारा के रूप में बह निकली |
लेकिन अन्य संस्थाओं की तरह फॉर्म भरना,सदस्यता लेना,फीस जमा करना,प्रस्ताव पारित करना,भाषण,चुनाव,नारेबाजी,सभाएं आदि करना श्री तन सिंह जी को निरर्थक लगी और 22 दिसम्बर 1946 को जयपुर के मलसीसर हाउस में नवीन कार्य प्रणाली के साथ "श्री क्षत्रिय युवक संघ " की विधिवत स्थापना की और उसी दिन से संघ में वर्तमान संस्कारमयी मनोवैज्ञानिक कार्य प्रणाली का सूत्रपात हुवा | इस प्रकार क्षत्रिय समाज को श्री तनसिंह जी की अमूल्य देन "श्री क्षत्रिय युवक संघ " अपनी नई प्रणाली लेकर अस्तित्व में आया |
राजनीती में रहकर भी उन्होंने राजनीती को कभी अपने ऊपर हावी नही होने दिया | क्षत्रिय युवक संघ के कार्यों में राजनीती भी उनकी सहायक ही बनी रही | सन 1955-56 में विवश होकर राजपूत समाज को राजस्थान में दो बड़े आन्दोलन करने पड़े जो भू-स्वामी आन्दोलन के नाम से विख्यात हुए,दोनों ही आन्दोलनों की पृष्ठभूमि में क्षत्रिय युवक संघ की ही महत्वपूर्ण भूमिका थी |
स्व.श्री तनसिंह जी की ख्याति एक समाज-संघठक,कर्मठ कार्यकर्त्ता,सुलझे हुए राजनीतीज्ञ,आद्यात्म प्रेमी,गंभीर विचारक और दृढ निश्चयी व्यक्ति के रूप में अधिक रही है किंतु इस प्रशिधि के अतिरिक्त उनके जीवन का एक पक्ष और भी है जिसे विस्मृत नही किया जा सकता | यह एक तथ्य है कि एक कुशल प्रशासक,पटु विधिविज्ञ,सजग पत्रकार और राजस्थानी तथा हिन्दी भाषा के उच्चकोटि के लेखक भी थे | पत्र लेखन में तो उनका कोई जबाब ही नही था अपने मित्रों,सहयोगियों,और सहकर्मियों को उन्होंने हजारों पत्र लिखे जिनमे देश,प्रान्त,समाज और राजपूत जाति के अतीत,वर्तमान और भविष्य का चित्र प्रस्तुत किया गया है | अनेक सामाजिक,राजनैतिक और व्यापारिक कार्यों की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने साहित्य,संस्कृति और धार्मिक विषयों पर लिखने के समय निकला |
श्री क्षत्रिय युवक संघ के पथ पर चलने वालों पथिकों और आने वाली देश की नई पीढियों की प्रेरणा स्वरूप स्व.श्री तनसिंह जी एक प्रेरणादायक सबल साहित्य का सर्जन कर गए | उन्होंने अनेक पुस्तके लिखी जो जो पथ-प्रेरक के रूप में आज भी हमारा मार्ग दर्शन करने के लिए पर्याप्त है |
1-
राजस्थान रा पिछोला
2-
समाज चरित्र
3-
बदलते द्रश्य
4-
होनहार के खेल
5-
साधक की समस्याएं
6-
शिक्षक की समस्याएं
7-
जेल जीवन के संस्मरण
8-
लापरवाह के संस्मरण
9-
पंछी की राम कहानी
10-
एक भिखारी की आत्मकथा
11-
गीता और समाज सेवा
12-
साधना पथ
13-
झनकार( तनसिंहजी द्वारा रचित 166 गीतों का संग्रह)

सोमवार, 24 जनवरी 2011

मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा महान विभूति को श्रद्धाजंली


मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा महान विभूति को श्रद्धाजंली
देश के महान शास्त्रीय गायक और भारत रत्न से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी का सोमवार सुबह 8.05 बजे पुणे के एक अस्पातल में निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। पंडित भीमसेन जोशी का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के गडक में हुआ था। इनको बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। वह किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खान से बहुत प्रभावित थे। 1932 में वह गुरु की तलाश में घर से निकल पड़े।

अगले दो वर्षों तक वह बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से संगीत की शिक्षा ली। घर वापसी से पहले वह कलकत्ता और पंजाब भी गए। सन् 1936 में पंडित भीमसेन जोशी ने पंडित रामभन कुंडगोलकर से गडग के पास कुंडगोल में संगीत प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहां उन्होंने खयाल गायकी की बारीकियां भी सीखीं।

पंडित भीमसेन जोशी ने अपनी विशिष्ट शैली विकसित करके किराना घराने को समृद्ध किया। उनको कई रागों को मिलाकर कलाश्री और ललित भटियार जैसे नए रागों की रचना करने का भी श्रेय जाता है। उन्हें खयाल गायन के साथ-साथ ठुमरी और भजन में भी महारत हासिल की है।

सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित

भीमसेन जोशी को 4 नवम्बर, 2008 को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से पुरस्कृत किया गया। इन्हें भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन् 1985 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसके साथ इन्हें पद्म विभूषण और पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

19 साल की आयु में आये सार्वजनिक मंच पर

किराना घराना के जोशी ने 19 वर्ष की आयु में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच से अपनी गायन कला का प्रदर्शन किया था। उनकी अनवरत यात्रा आज समाप्त हुई है। उन्होंने पहली बार अपने गुरु सवाई गंधर्व के 60वें जन्मदिवस पर जनवरी 1946 में पुणे अपना गायन प्रस्तुत किया था।

गीत जो हो गए अमर

जोशी जी द्वारा गाए गए गीत लोगों के बीच समां बांध देते थे। उनके संगीत में गजब का जादू था। उनके द्वारा गाए गए गीत पिया मिलन की आस, जो भजे हरि को सदा और मिले सुर मेरा तुम्हारा संगीत के क्षेत्र में मील के पत्थर हैं। इस का सम्मोहन आज भी बरकरार है

रविवार, 23 जनवरी 2011

शराब माफिया के खिलाफ प्रशासन पुलिस व आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई


शराब माफिया के खिलाफ  प्रशासन पुलिस व आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई


बाड़मेर
बाड़मेर  प्रशासन पुलिस व आबकारी विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बाड़मेर शहर में कच्ची बस्ती व ग्रामीण इलाकों से शनिवार को 133 लीटर हथकढ़ी शराब बरामद की । उधर चौहटन से छह सौ लीटर वॉश पकड़ी गई। जबकि सिणधरी के निकट भूंका भगतसिंह गांव की सरहद से ट्रक में परिवहन कर ले जाई जा रही अवैध शराब के नौ सौ कार्टन बरामद किए। पुलिस ने बाड़मेर व चौहटन की कार्रवाई में दो तथा सिणधरी में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। 
पुलिस व आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई के तहत शनिवार को एसडीएम मीठूसिंह व डीएसपी नाजीम अली के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने राजमार्ग के निकट जोगियों की दड़ी स्थित एक मकान से 113 लीटर हथकढ़ी शराब बरामद की। इस दौरान महाबार निवासी हिंगोलसिंह वहां से भाग छूटा। बरामद हथकढ़ी शराब एक ड्रम व टयूब में छुपाई हुई थी। कार्रवाई में सदर थानाधिकारी रमेश शर्मा भी साथ रहे। पुलिस ने हथकढ़ी शराब रखने के आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
उधर बाड़मेर वृत के आबकारी निरीक्षक गजेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने मय टीम सिंगड़ी राणीगांव सरहद स्थित झौंपे में दबिश देकर 20 लीटर अवैध शराब जप्त की और 1400 लीटर वॉश नष्ट करने के साथ टीम ने शराब बनाने के उपकरण भी बरामद किए।
 
शनिवार सुबह चौहटन की पहाडिय़ों में एसडीएम शंकरलाल, थानाधिकारी कैलाशदान व आबकारी सहायक निदेशक प्रवर्तन दईदानसिंह ने हथकढ़ी शराब की एक दर्जन भट्टियां नष्ट की। टीम ने दलपतसिंह के नेतृत्व में दबिश देकर 600 लीटर वॉश बरामद किया। चौहटन में हथकढ़ी शराब बनाने की एक दर्जन भट्टियां मिली।
 
सिणधरी के निकट भूंका भगतसिंह गांव के निकट मुखबिर की सूचना पर नाकाबंदी कर थानाधिकारी मूलाराम चौधरी ने ट्रक आरजे 19 जीए 7045 को रूकवाने के साथ हरियाणा निर्मित अवैध अंग्रेजी शराब के नौ सौ कार्टन बरामद किए । पुलिस ने अवैध शराब परिवहन करने के आरोप में जालोर निवासी गंगाराम विश्नोई, सोहनलाल विश्नोई एवं जयकिशन को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हरियाणा से बाड़मेर के रास्ते अवैध शराब गुजरात ले जाने की जानकारी दी। बरामद शराब की कीमत 25 लाख आंकी गई है


हत्या के दो आरोपियो की जमानत खारिज
बाड़मेर   जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुखपाल बुंदेल ने हत्या के दो आरोपियो की जमानत खारिज करने के आदेश दिए। प्रकरण के अनुसार 6 दिसंबर को श्रीमती गीगी देवी ने समदड़ी थाने में रिपोर्ट पेश कर बताया था कि उसके पति मादाराम के साथ आरोपी वीरेंद्रसिंह पुत्र रावतसिंह निवासी खंडप व रामचंद्र पुत्र हरदान निवासी अर्थडी ने मारपीट की। उसके पति की उपचार के दौरान मौत हो गई।  पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। आरोपियों की ओर से अघिवक्ता उमसिंह राठौड़ ने जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया। राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक मानाराम विश्नोई ने पैरवी की।
 परिवादी की ओर से अघिवक्ता डूंगरसिंह नामा ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपियो ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति को जातिगत शब्दों से अपमानित कर उसके साथ गंभीर मारपीट कर उसकी हत्या की है। दोनों पक्षों के अघिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश बुंदेल ने आरोपियो की जमानत खारिज करने के आदेश दिए।



शनिवार, 22 जनवरी 2011

हथकढ़ी शराब बरामद

हथकढ़ी शराब बरामद

बाड़मेर। सदर थाना क्षेत्र के दरूड़ा व लूणू गांव की सरहद में स्थित दुरूह धोरों में शुक्रवार देर शाम पुलिस व प्रशासन की संयुक्त टीम ने हथकढ़ी शराब की भियों का भण्डाफोड़ किया। पुलिस अधीक्षक संतोष चालके ने बताया कि बीट कांस्टेबल की सूचना के आधार पर पुलिस उप अधीक्षक बाड़मेर नाजिम अली खान एवं उपखण्ड अघिकारी बाड़मेर मिठूसिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीमें दरूड़ा व लूणू के धोरों में पहुंची, जहां हथकढ़ी शराब की दो भियां मिली।
यहां पर 1200 लीटर वॉश मिली, जिसमें नौसादर व यूरिया मिला हुआ पाया गया। वॉश को मौके पर ही नष्ट किया गया। मौके पर 165 लीटर हथकढ़ी शराब भी मिली जिसे बरामद किया गया। शराब बनाने की भियों के उपकरण जब्त किए गए।
उप अधीक्षक नाजिम अली खान ने बताया कि वॉश में नौसादर व यूरिया डालने से शराब बनाने लायक सामग्री का क्रियान्वयन जल्दी हो जाता है और वह आसवन के लायक हो जाती है, लेकिन इसका मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह शराब कभी कभार जहरीली भी हो जाती है। इस कार्यवाही में सदर थानाघिकारी रमेशकुमार शर्मा भी साथ रहे।
एक गिरफ्तार, दो फरार
नाजिम अली ने बताया कि शराब की दो भियां लूणू निवासी गिरधरसिंह व खंगारसिंह की है। ये दोनों मौके से फरार होने में कामयाब रहे। इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वहीं 165 लीटर हथकढ़ी शराब के साथ छुगसिंह निवासी लूणू को गिरफ्तार किया गया।

बालोतरा उपखण्ड में शुक्रवार को पुलिस व आबकारी विभाग ने कई स्थानों से अवैध शराब बरामद की। जिला पुलिस अधीक्षक संतोष चालके ने बताया कि समदड़ी,कल्याणपुर व मण्डली थाना क्षेत्रों में पुलिस ने ध्वनि विस्तारक यंत्र के जरिये आम जन से आह्वान किया है कि जहरीली शराब इस क्षेत्र में पहुंचने की आशंका है। इसलिए अवैध शराब का सेवन नहीं करें।
आबकारी दल ने शुक्रवार को शहर में दो स्थानों पर दबिश दी। वृत निरीक्षक रूपसिंह के नेतृत्व में आबकारी दल ने शुक्रवार शाम महेंद्र पुत्र मांगीलाल खटीक निवासी बालोतरा के रहवासीय मकान मे दबिश दी। आरोपी फरार होने में कामयाब रहा। दल ने यहां से चंडीगढ़ निर्मित अवैध अंगे्रजी शराब के 15 पव्वे बरामद किए।
समदड़ी रोड पर एक किराए की दुकान में शराब बेचने के आदतन आरोपी जसवंतसिंह पुत्र भैरूसिंह की दुकान पर दल ने दबिश दी। तलाशी के दौरान यहां से शराब बरामद नहीं हुई। इधर,मंडली पुलिस ने वीलो की ढाणी गांव में एक व्यक्ति के कब्जे से पंजाब निर्मित अवैध शराब बरामद की है। थानाघिकारी रेवंतसिंह भाटी मय जाप्ता ने शुक्रवार को कालूसिंह पुत्र फतेहसिंह के कब्जे से पंजाब निर्मित शराब की चार बोतल व 43 पव्वे बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
सिणधरी. पुलिस व प्रशासन की संयुक्त कार्यवाही के दौरान शाम सात बजे के बाद उपखण्ड अघिकारी गुड़ामालानी सी.आर.देवासी के निर्देशन में मेगा स्टेट हाइवे पर मांजीसा होटल में दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की। होटल में जाकर एक दुकान में छिपाई हुई अवैध अंग्रेजी शराब में चार कार्टन बीयर, एक कार्टन पव्वे, एक कार्टन विस्की, एक कार्टन बोतल व पांच पव्वे देशी मदिरा के बरामद कर आरोपी रंगाराम पुत्र चूनाराम निवासी सिणधरी को गिरफ्तार किया। अवैध शराब धरपकड़ अभियान में उप तहसीलदार भागीरथ राम चौधरी एवं थानाघिकारी मूलाराम चौधरी उपस्थित थे। इस धरपकड़ अभियान क क लगते ही हाइवे पर स्थित अन्य होटलों के संचालक भाग छूटे। इधर,सरनू गांव में गुरूवार देररात एक रहवासी ढाणी में दीपसिंह पुत्र भूरसिंह से पुलिस ने चार बोतल अवैध हथकढ़ी शराब बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया।


बालोतरा व सिवाना उपखंड क्षेत्र में भी प्रशासन व पुलिस खास एहतियात

बाड़मेर। जोधपुर व पाली में हुई शराब दु:खांतिका के बाद इन जिलों से सटे बालोतरा व सिवाना उपखंड क्षेत्र में भी प्रशासन व पुलिस खास एहतियात बरत रही है। जिला कलक्टर ने इन दोनों उपखंड क्षेत्रों मे प्रशासन व पुलिस के अघिकारियों को सजगता बरतने के निर्देश देते हुए अवैध शराब के कारोबार की रोकथाम के लिए सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस बात की अघिकारिक रूप से पुष्टि नहीं है, लेकिन बालोतरा व सिवाना क्षेत्र में जहरीली शराब की खेप पहुंचने के अंदेशे से भी इनकार नहीं है।
अरसे से अवैध कारोबार
बालोतरा व सिवाना उपखंड क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार नई बात नहीं है। शराब कारोबार से जुड़े माफिया लोगो का क्षेत्र में लंबा चौड़ा नेटवर्क है। चंडीगढ़ निर्मित अवैध शराब की क्षेत्र में काफी खपत हो रही है। स्प्रीट युक्त अंग्रेजी व देशी मदिरा, अवैध हथकढ़ शराब लंबे समय से खुले आम बिक रही है। पंजाब को गुजरात से जोड़ने वाले मेगा स्टेट हाइवे तथा बर-ब्यावर-बाड़मेर-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीते वर्ष में भारी तादाद में पकड़ी गई अवैध शराब की खेप इस सवाल का जवाब है कि क्षेत्र में अवैध शराब की खपत कितने बड़े पैमाने पर हो रही है।
गठित की टीमें
बालोतरा व सिवाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की रोकथाम व शराब तस्करों की धरपकड़ के लिए पुलिस व आबकारी विभाग की विशेष टीमें गठित की गई है। उपखंड अघिकारी सिवाना व बालोतरा ने क्षेत्र के अघिकारियों को खास तौर पर सजग रहने को कहा है। इसके अलावा लोगों को अवैध रूप से बिकने वाली शराब का सेवन नहीं करने के लिए भी आगाह किया जा रहा है।
अंदेशे से इनकार नहीं
सिवाना उपखंड क्षेत्र के कई गांव जोधपुर व पाली जिले की सीमा से सटे हैं। ऎसे में यहां भी जहरीली शराब की खेप पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। समस्त फील्ड स्टाफ को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सिवाना पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई है।
- नरेंद्र कुमार जैन, उपखंड अघिकारी, सिवाना
गश्त बढ़ाई है
बालोतरा उपखंड क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
- ओ.पी.विश्नोई, उपखंड अघिकारी, बालोतरा
तस्करों पर रखी जाएगी नजर
अवैध शराब के बिक्री स्थलो के चिह्निकरण के साथ ही खास तौर से उन लोगो पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, जिनके खिलाफ पहले से शराब तस्करी के मामले दर्ज हैं। पाली, जोधपुर के रास्तों पर नाकाबंदी के साथ ही संबंघित थानों की मदद से धरपकड़ की जाएगी। राजस्थान सरकार से अघिकृत दुकानों से ही शराब खरीदे। कम पैसों के लालच में निजी लोगों से खरीदी जाने वाली शराब मिलावटी हो सकती है, जो मौत का कारण भी बन सकती है। 

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

अवैध भाराब की रोकथाम को जन भागीदारी पर जोर


अवैध भाराब की रोकथाम को
जन भागीदारी पर जोर
बाडमेर, जनवरी। जिले में अवैध भाराब का प्रचलन रोकने को जन भागीदारी की अति आवयकता है। जहरीली भाराब के दुश्प्रभावों के प्रचार प्रसार से इन पर अंकुा लगाया जा सकता है। यह विचार गुरूवार सायं कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता में आयोजित संगोश्ठी में उभर कर आए।
इस मौके पर जिला कलेक्टर गोयल ने बताया कि जोधपुर में जहरीली भाराब दुखान्तिका से सबक लेकर इस पर अंकुा लगाने को प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। उन्होने बताया कि अवैध भाराब की रोकथाम के लिए प्रासन, पुलिस तथा आबकारी की संयुक्त समन्वय समिति बनाई गई है जो कि धडपकड अभियान चलाएगी। उन्होने बताया कि भाराब की वैद्य दुकानों मे भी स्टॉक का सत्यापन किया जाएगा तथा यह सुनिचत किया जाएगा कि इन दुकानों में कोई चोर दरवाजा नहीं हो।
जिला प्रमुख श्रीमती मदन कौर ने जोधपुर दुखान्तिका से सावधान रहते हुए इस बात को सुनिचत करने को कहा कि जोधपुर में बडी मात्रा में बनी जहरीली भाराब चोरी चुपके बाडमेर जिले में नहीं आ पाए। उन्होने जन भागीदारी की भी महती आवयकता जताई।
विधायक मेवाराम जैन ने कहा कि राज्य सरकार की पूरी मां है कि भाराब की दुकाने नियत समय के पचात नहीं खुले तथा अवैध भाराब का प्रचलन किसी भी परिस्थिति में नहीं हो। उन्होने जन प्रतिनिधियों से भी सकि्रय सहयोग का आहवान किया।
जिला पुलिस अधीक्षक सन्तोश चालके ने बताया कि आबकारी विभाग व पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में जन सहयोग भी अपेक्षित है। उन्होने विवास दिलाया कि सूचना को पूर्ण गोपनीय रखते हुए प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.एल. कन्दोई ने ग्रामीण क्षेत्रों में विोश जागरूकता अभियान चलाने की आवयकता जताई। एडवोकेट धनराज जोाी ने क्षेत्र प्रचार कार्यक्रमों के जरिये जन जागरण अभियान चलाने पर जोर दिया। संगोश्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
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अवैद्य भाराब की धडपकड
को शिकायत बाक्स लगेगा
बाडमेर, 20 जनवरी। जिले में अवैद्य भाराब की रोकथाम तथा धडपकड अभियान के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में िकायत बाक्स लगाया जाएगा।
जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने बताया कि कलेक्ट्रेट कार्यालय में नरेगा बाक्स के पास मे ही यह बका लगाया जाएगा जिसमें कोई भी व्यक्ति अवैद्य भाराब से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना डाल सकता है जिसे पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।
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गुरुवार, 20 जनवरी 2011

पीरो की जाल दरगाह का चमत्कार के तीन सौ साल


पीरो की जाल दरगाह का चमत्कार के तीन सौ साल

बाडमेर सीमावर्ती बाडमेर जिले की जालोर जिले की सरहद पर स्थित तीन सौ साल पुरानी बाबा अब्बनशाह की दरगाह जिसे पूरा हिन्दुस्तान पीरों की जाल के नाम से जसनता हैं।इस दरगाह में गत तीन सौ सालों से चमत्कार हो रहे हैं।इस चमत्कार से हजारों लोगों को नयी जिन्दगी मिली।विज्ञान के इस युग में भले ही लोग इसे अंधविश्वास का नाम दें मगर जो लोग चमत्कार से नई जिन्दगी पाऐं हैं।उनकी मानें तो पीरों की जाल आस्था और चमत्कार का अवतार हैं।जॅहा मानसिक रोगी बुरी स्थिति से बाहर निकल आते हैं। 





कहते हें किसी मर्ज का इलाज अस्पताल में होता हें लेकिन कभी सुना हें आपने कि कब्रिस्तान में किसी मर्ज का इलाज होता हें . आपकी सोच और दिमागी दोड़ से कोसो दूर हम आपको रूबरू करवा रहे हें एक ऐसे अस्पताल में जहा अपने दिमाक का संतुलन कहो चुके मरीजो के इलाज के दावे होते हें . लेकिन ये दावे धरती पे एक कब्रिस्तान में उतरते नजर आते हें . बाड़मेर जालोर कि सीमा पर स्थित पिरो की जाल में हें कब्रिस्तान में हें पागलो का अस्पताल .
 
राजस्थान के जालोर जिले में एक
  कब्रिश्तान  में पागलो का अस्पताल है. देश और दुनिया की सोच से परे एक इसी जगह झा होता हे पागलपन का इलाज . न किसी तरह का बिस्तर न कोई डाक्टर और न ही कोई दवाई .  यह हे पिरो की जाल . पिरो की जाल में  राजस्थान ,गुजरात ,महारास्ट,बिहार सहित देश  के की इलाको से अलग अलग मजहब से जुड़े  लोग आते हे . बताते हे कि  जिन  पर पागलपन  या फिर   भूतो का साया हो और जो किसी भी  इलाज से सही नही हुए  है  उन लोगो के घर वाले यहा पर उन्हें  लेकर आते है जिस समय उन को लाया जाता है  उस समय उनकी हालत मरने सरीखी होती हे . लेकिन उन्हें यहा लेन पर बरसों से चले आ रहे इलाज को दोर होता हे शुरू  . उन लोगो को   कब्रिश्तान में जजीरो से बांध दिया जाता हे . बाड़मेर के रहने वाले सरकारी कर्मचारी राजेंद्र खत्री के अनुसार सन 1971 में उसके घर पर किसी ने पलित टूने टोटेक कर दिया थे क्योकि उनके पास जो धन और सम्पति हडपना चाहते  थे इस वजह से उनके रिश्तेदारों  ने उन पर  जादू टोना कर दिया  था जिस वजह से उसकी घरवाली  और बच्चे की मोत  हो गयी थी मुझ पर भी टोटका  किया गया था तो  मुझे  भी इलाज के लिए यहा लाया गया . कई महीनो के इलाज के बाद वह सही हो गया 
राजेंद्र खत्री निवासी बाड़मेर सन 1971 में
 मरे  घर पर किसी ने पलित टूने टोटेक कर दिया थे क्योकि उनके पास जो धन और सम्पति हडपना चाहते  थे इस वजह से उनके रिश्तेदारों  ने उन पर  जादू टोना कर दिया  था जिस वजह से मेरी  घरवाली  और बच्चे की मोत  हो गयी थी मुझ पर भी टोटका  किया गया था तो  मुझे  भी इलाज के लिए यहा लाया गया . कई महीनो के इलाज के बाद वह सही हो गया

 राजेद्र खत्री के अनुसार पागलपन के दोर में  इस कब्रिश्तान में रहकर उसने बाबा की पूजा अर्चना की तो तिन सालो बाद  उसकी जजीरे अपने आप खुल गयी और आज में हर  साल में तीन बार आता हु. वह कहता हे कि मेरा  सही होना एक चमत्कार   ही था 
राजेंद्र खत्री निवासी बाड़मेर पागलपन के दोर में
  इस कब्रिश्तान में रहकर उसने बाबा की पूजा अर्चना की तो तिन सालो बाद  उसकी जजीरे अपने आप खुल गयी और आज में हर  साल में तीन बार आता हु. वह कहता हे कि मेरा  सही होना एक चमत्कार   ही था

 पिरो कि जाल में बरसों से कब्रिस्तान में होता आ रहा हे पागलो का इलाज . इस अनूठे अस्पताल के बारे में वह के खलीफा मोहोमद बक्स खिलिफा बताते हे कि कब्रिश्तान  में पागलो का अस्पताल में इनको इसलिए रखा जाता है की ये  किसी  जायरीन  के साथ मारपीट न करे फिर ये २ या तीन साल में जब ये सही होते है तो अपने आप इनका जजीरो का ताला खुल जाता है फिर हम इनके घर वालो को इतला कर देते है   ये सब बाबा का चमत्कार  होता है  इस कब्रिश्तान  में हर वक्त दर्जनों भर मानसिक रोगियों को  रखा जाता है 
मोहोमद बक्स खिलिफा पीरो की जाल जालोर
  कब्रिश्तान  में पागलो का अस्पताल में इनको इसलिए रखा जाता है की ये  किसी  जायरीन  के साथ मारपीट न करे फिर ये २ या तीन साल में जब ये सही होते है तो अपने आप इनका जजीरो का ताला खुल जाता है फिर हम इनके घर वालो को इतला कर देते है   ये सब बाबा का चमत्कार  होता है  इस कब्रिश्तान  में हर वक्त दर्जनों भर मानसिक रोगियों को  रखा जाता है 


पीरो की जाल दरगाह का चमत्कार के तीन सौ साल


पीरो की जाल दरगाह का चमत्कार के तीन सौ साल






बाडमेर सीमावर्ती बाडमेर जिले की जालोर जिले की सरहद पर स्थित तीन सौ साल पुरानी बाबा अब्बनशाह की दरगाह जिसे पूरा हिन्दुस्तान पीरों की जाल के नाम से जसनता हैं।इस दरगाह में गत तीन सौ सालों से चमत्कार हो रहे हैं।इस चमत्कार से हजारों लोगों को नयी जिन्दगी मिली।विज्ञान के इस युग में भले ही लोग इसे अंधविश्वास का नाम दें मगर जो लोग चमत्कार से नई जिन्दगी पाऐं हैं।उनकी मानें तो पीरों की जाल आस्था और चमत्कार का अवतार हैं।जॅहा मानसिक रोगी बुरी स्थिति से बाहर निकल आते हैं।

कहते हें किसी मर्ज का इलाज अस्पताल में होता हें लेकिन कभी सुना हें आपने कि कब्रिस्तान में किसी मर्ज का इलाज होता हें . आपकी सोच और दिमागी दोड़ से कोसो दूर हम आपको रूबरू करवा रहे हें एक ऐसे अस्पताल में जहा अपने दिमाक का संतुलन कहो चुके मरीजो के इलाज के दावे होते हें . लेकिन ये दावे धरती पे एक कब्रिस्तान में उतरते नजर आते हें . बाड़मेर जालोर कि सीमा पर स्थित पिरो की जाल में हें कब्रिस्तान में हें पागलो का अस्पताल .

राजस्थान के जालोर जिले में एक कब्रिश्तान में पागलो का अस्पताल है. देश और दुनिया की सोच से परे एक इसी जगह झा होता हे पागलपन का इलाज . न किसी तरह का बिस्तर न कोई डाक्टर और न ही कोई दवाई . यह हे पिरो की जाल . पिरो की जाल में राजस्थान ,गुजरात ,महारास्ट,बिहार सहित देश के की इलाको से अलग अलग मजहब से जुड़े लोग आते हे . बताते हे कि जिन पर पागलपन या फिर भूतो का साया हो और जो किसी भी इलाज से सही नही हुए है उन लोगो के घर वाले यहा पर उन्हें लेकर आते है जिस समय उन को लाया जाता है उस समय उनकी हालत मरने सरीखी होती हे . लेकिन उन्हें यहा लेन पर बरसों से चले आ रहे इलाज को दोर होता हे शुरू . उन लोगो को कब्रिश्तान में जजीरो से बांध दिया जाता हे . बाड़मेर के रहने वाले सरकारी कर्मचारी राजेंद्र खत्री के अनुसार सन 1971 में उसके घर पर किसी ने पलित टूने टोटेक कर दिया थे क्योकि उनके पास जो धन और सम्पति हडपना चाहते थे इस वजह से उनके रिश्तेदारों ने उन पर जादू टोना कर दिया था जिस वजह से उसकी घरवाली और बच्चे की मोत हो गयी थी मुझ पर भी टोटका किया गया था तो मुझे भी इलाज के लिए यहा लाया गया . कई महीनो के इलाज के बाद वह सही हो गया
राजेंद्र खत्री निवासी बाड़मेर सन 1971 में मरे घर पर किसी ने पलित टूने टोटेक कर दिया थे क्योकि उनके पास जो धन और सम्पति हडपना चाहते थे इस वजह से उनके रिश्तेदारों ने उन पर जादू टोना कर दिया था जिस वजह से मेरी घरवाली और बच्चे की मोत हो गयी थी मुझ पर भी टोटका किया गया था तो मुझे भी इलाज के लिए यहा लाया गया . कई महीनो के इलाज के बाद वह सही हो गया

राजेद्र खत्री के अनुसार पागलपन के दोर में इस कब्रिश्तान में रहकर उसने बाबा की पूजा अर्चना की तो तिन सालो बाद उसकी जजीरे अपने आप खुल गयी और आज में हर साल में तीन बार आता हु. वह कहता हे कि मेरा सही होना एक चमत्कार ही था
राजेंद्र खत्री निवासी बाड़मेर पागलपन के दोर में इस कब्रिश्तान में रहकर उसने बाबा की पूजा अर्चना की तो तिन सालो बाद उसकी जजीरे अपने आप खुल गयी और आज में हर साल में तीन बार आता हु. वह कहता हे कि मेरा सही होना एक चमत्कार ही था

पिरो कि जाल में बरसों से कब्रिस्तान में होता आ रहा हे पागलो का इलाज . इस अनूठे अस्पताल के बारे में वह के खलीफा मोहोमद बक्स खिलिफा बताते हे कि कब्रिश्तान में पागलो का अस्पताल में इनको इसलिए रखा जाता है की ये किसी जायरीन के साथ मारपीट न करे फिर ये २ या तीन साल में जब ये सही होते है तो अपने आप इनका जजीरो का ताला खुल जाता है फिर हम इनके घर वालो को इतला कर देते है ये सब बाबा का चमत्कार होता है इस कब्रिश्तान में हर वक्त दर्जनों भर मानसिक रोगियों को रखा जाता है
मोहोमद बक्स खिलिफा पीरो की जाल जालोर कब्रिश्तान में पागलो का अस्पताल में इनको इसलिए रखा जाता है की ये किसी जायरीन के साथ मारपीट न करे फिर ये २ या तीन साल में जब ये सही होते है तो अपने आप इनका जजीरो का ताला खुल जाता है फिर हम इनके घर वालो को इतला कर देते है ये सब बाबा का चमत्कार होता है इस कब्रिश्तान में हर वक्त दर्जनों भर मानसिक रोगियों को रखा जाता है