शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

बाड़मेर थार का चुनावी रणक्षेत्र ,थार की राजनितिक शख्सियत रावळ उम्मेद सिंह

बाड़मेर थार का चुनावी रणक्षेत्र ,थार की राजनितिक शख्सियत  उम्मेद सिंह रावळ

सबसे कम उम्र में  विधायक बनने का कीर्तिमान आज भी आपके नाम 

बाड़मेर के पहले राजनितिक शख्स जिले से बाहर जाकर चुनाव लड़े और जीते 

बाड़मेर थार के तपते धोरो में राजनीती करना पचास और साठ के दशक में बहुत मुश्किल था ,इस  थार की थळी ने राजस्थान की राजनीती में नायब हीरे दिए ,चाहे वो तन सिंह महेचा हो या रमदान चौधरी हो या वृद्धि चंद जैन या अब्दुल हादी ,बहुत से नाम हे जो राजस्थान की राजनीती में लम्बे समय तक ध्रुव टारे की तरह चमकते रहे ,ऐसे ही एक राजनीती सितारे का उदय हुआ ,उस वक़्त बाड़मेर की जनता ने जागीरदार घरानो के प्रति अटूट आस्था थी ,उन घरानो का जबरदस्त सामान था। 1962 के विधानसभा चुनाव थे ,राम राज्य परिषद का जोरदार बोलबाला था ,इससे पूर्व रामराज्य परिषद से तन सिंह महेचा चुनाव लड़ चुके थे ,बाद में वो सांसद बन गए तो नए चेहरे की तलाश आरम्भ हुई,ज्यादा कोई मशक्क्त किये बाड़मेर फोर्ट के रावळ उम्मेद सिंह को चुनाव लड़ने का न्योता जनता की तरफ से गया ,उस वक़्त रावळ सा की उम्र पच्चीस साल से कुछ दिन कम थी ,पर फार्म भरने तक उम्र पच्चीस हो रही थी ,उस वक़्क़त रावळ साब के प्रति आमजन में खूब मान सम्मान था ,जनता का स्नेह देख वो राम राज्य परिषद की और से चुनाव मैदान में उत्तर गए उनका मुकाबला कांग्रेस के वृद्धि चंद  , वृद्धि चंद जैन जागीरदारी प्रथा के खिलाफ बोलने और आंदोलन चलने वाले चर्चित वकील थे ,बड़ा कड़ा मुकाबला लग रहा था ,लेकिन चुनाव का दौर चलते चलते रावळ सा काफी बढ़त ले चुके थे ,उन्होंने चुनाव और जनता का दिल दोनों जीते ,बेहद सहज सरल और मृदुभाषी उम्मेद सिंह के प्रति लोगो में दीवानगी थी ,उन्होंने जब अपना पहला चुनाव जीता तब वे पूर्ण पच्चीस साल और कुछ दिन के थे ,सबसे क उम्र में चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचने का उनका कीर्तिमान आज भी कायम हे ,अगला १९८० का चुनाव उनको डीडवाना से लड़ाया गया ,वे पहले शख्स हे थार के जिन्होंने अपने गृह जिले से बाहर जाकर चुनाव लड़ा और जीते दूसरी बार विधायक बने ,ये उनके व्यक्तित्व का  कमाल था की बाहरी जिले की विधानसभा से चुनाव लड़े और जीत क्र विधानसभा पहुंचे ,तीसरा चुनाव उन्होंने शिव विधानसभा क्षेत्र से १९८५ में लड़ा ,उनका मुकाबला कांग्रेस के तेज तर्रार अमिन खान से था ,अपनी मतदाताओं में अच्छी पकड़ और सीधा संपर्क होने के कारन उन्होंने अमिन खान को ग्यारह हजार से अधिक मतो से हराकर विधानसभा पहुंचे ,

बाड़मेर की जागीर के रावळ उम्मेद सिंह 87 गाँवो के जागीरदार थे उस वक़्क़त उनकी जागीर का राजस्व 1891 से सत्तर हजार था ,उनका व्यक्तित्व विशाल था ,उच्च शिक्षित होने के साथ आमजन से सीधा जुड़ाव उन्हें खास बनता था ,सर्व समाज में बहुत लोकप्रिय थे ,उनका आदर मान लोग दिल से करते ,आम लोगो की मदद करना उन्होंने अपना धर्म बना रखा था ,उनके द्वार से कोई खाली नहीं जाता ,२९ सितंबर 2006 को जब उन्होंने अंतिम साँस ली मनो पुरे बाड़मेर पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा हो ,उनकी शव यात्रा में हज़ारो लोग पहुंचे ,जो उनकी शख्सियत को ब्यान करती हे ,उन्होंने बाड़मेर जिले की जनता के लिए विकास के कार्य खूब किये ,सकारात्मक सोच के साथ वे अंत तक विकास में जुटे रहे ,

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