मंगलवार, 8 सितंबर 2015

जोधपुर विदेशी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार



जोधपुर विदेशी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार


जर्मन महिला के साथ जोधपुर में हुए सामूहिक दुष्कर्म के दस साल पुराने बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपील खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है।

उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व न्यायाधीश विजय बिश्नोई की खण्डपीठ ने घटना को संगीन अपराध ठहराते हुए अपर जिला न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) संख्या-1 जोधपुर प्रवीण भटनागर के फैसले की पुष्टि की।

यह वही मामला है, जिसमें पुलिस ने महज 3 दिन में अनुसंधान और कोर्ट ने 16 दिन में ट्रायल पूरा कर फैसला देते हुए त्वरित न्याय की दिशा में मिसाल कायम की थी।

खण्डपीठ ने इस फैसले को विधि सम्मत बताते हुए कहा कि आरोपियों ने विदेशी महिला के साथ दुष्कर्म कर ना केवल देश की छवि को धूमिल किया है, बल्कि समाज के साथ भी अपराध किया है।

32 पृष्ठ के विस्तृत फैसले में कोर्ट का मानना था कि भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भव: यानी अतिथियों को देवता के समान माना जाता है। ऐसे में अतिथि के साथ इस तरह के दुराचार के मामले में सजा कम भी नहीं की जा सकती। मामले में राज्य सरकार की ओर से उपराजकीय अधिवक्ता जे.पी. भारद्वाज ने पैरवी की।

यह था मामला

जर्मनी की एक महिला जोधपुर भ्रमण पर आई थी। 11 मई, 2005 को उसने होटल ताज हरि महल से खाना खाया और हवेली गेस्ट हाउस जाने के लिए रिक्शा लिया। रिक्शे में दो व्यक्ति शंकरलाल व राकेश सवार थे।

वे उसे सुनसान रास्ते ले गए और जोधपुर-पाली हाइवे पर जोजरी नदी के पास ले जाकर दुष्कर्म किया। महिला के चिल्लाने की आवाज सुनकर मेघवालों की ढाणी के कुछ लोग वहां आए, तो आरोपी वहां से भाग गए। ग्रामीणों ने महिला की मदद की फिर उसने शास्त्रीनगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें