नई दिल्ली । हाल ही भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होते हुए केंद्रीय सरकार को झटका देने वाले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर कमर कस ली है। दागियों को बचाने वाले अध्यादेश पर नाराजगी जताने के बाद एक और मामला सामने आया है। प्रणब ने हरियाणा के व्हिसल ब्लोअर आईएफएस अफसर संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ आरोप गलत बता चार्जशीट नकार दी। पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रपति की ओर से आदेश जारी कर हरियाणा सरकार को उनके खिलाफ जांच तुरंत बंद करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला
2009 में चतुर्वेदी ने करोड़ों रूपए के पौधरोपण घोटाले का पर्दाफाश किया था। हरियाणा सरकार ने उन्हीं का नाम घोटाले की चार्जशीट में डाल दिया। प्रणब को यह रास नहीं आया। उनकी नाराजगी के बाद अफसर का नाम चार्जशीट से हटा दिया गया है। चतुर्वेदी 2009 में हरियाणा में डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर थे। पौधरोपण के लिए विदेशी एजेंसियों और राज्य सरकार से मिले करोड़ों रूपए के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया था। पौधरोपण कागजों में हुआ था। पूरी राशि नौकरशाहों व नेताओं में बंट गई थी।
तबादलों का झेला दर्द
सरकार ने चतुर्वेदी का झज्जर से तबादला कर दिया गया। 2005 से 2010 तक उनके 12 तबादले किए गए। भ्रष्टाचार उजागर करने के चलते वे निशाने पर रहे। अभी नई दिल्ली एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी हैं।
अड़ी रही हरियाणा सरकार
इससे पहले भी चतुर्वेदी की ईमानदारी के कारण संकट में फंसती रही हरियाणा सरकार ने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी थी। यह मामला भी पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील तक पहुंचा था। उन्होंने भी चतुर्वेदी का नाम चार्जशीट से हटा दिया था। बावजूद इसके हरियाणा सरकार नहीं मानी और उसने उनका नाम फिर आरोप-पत्र में डाल दिया। प्रणब हुड्डा सरकार के इस कदम से नाराज हुए और उन्हें मामले में तीसरी बार कार्रवाई करनी पड़ी।
कलाम के बाद मुखर्जी से उम्मीद
अमूमन यह देखा जाता है कि सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार अपने ही खेमे का चुनती है और यह भी देखा गया है कि पद पर आसीन होने के बाद राष्ट्रपति सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में निर्णय करता है, लेकिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस मिथ्य को तोड़ते हुए लीक से हटकर काम किया है। एपीजे अब्दुल कलाम की ईमानदारी के बाद अब भारत की निगाहें मुखर्जी पर हैं ओर वे जनता के भरोसे पर खरे भी उतर रहे हैं।
क्या है मामला
2009 में चतुर्वेदी ने करोड़ों रूपए के पौधरोपण घोटाले का पर्दाफाश किया था। हरियाणा सरकार ने उन्हीं का नाम घोटाले की चार्जशीट में डाल दिया। प्रणब को यह रास नहीं आया। उनकी नाराजगी के बाद अफसर का नाम चार्जशीट से हटा दिया गया है। चतुर्वेदी 2009 में हरियाणा में डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर थे। पौधरोपण के लिए विदेशी एजेंसियों और राज्य सरकार से मिले करोड़ों रूपए के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया था। पौधरोपण कागजों में हुआ था। पूरी राशि नौकरशाहों व नेताओं में बंट गई थी।
तबादलों का झेला दर्द
सरकार ने चतुर्वेदी का झज्जर से तबादला कर दिया गया। 2005 से 2010 तक उनके 12 तबादले किए गए। भ्रष्टाचार उजागर करने के चलते वे निशाने पर रहे। अभी नई दिल्ली एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी हैं।
अड़ी रही हरियाणा सरकार
इससे पहले भी चतुर्वेदी की ईमानदारी के कारण संकट में फंसती रही हरियाणा सरकार ने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी थी। यह मामला भी पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील तक पहुंचा था। उन्होंने भी चतुर्वेदी का नाम चार्जशीट से हटा दिया था। बावजूद इसके हरियाणा सरकार नहीं मानी और उसने उनका नाम फिर आरोप-पत्र में डाल दिया। प्रणब हुड्डा सरकार के इस कदम से नाराज हुए और उन्हें मामले में तीसरी बार कार्रवाई करनी पड़ी।
कलाम के बाद मुखर्जी से उम्मीद
अमूमन यह देखा जाता है कि सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार अपने ही खेमे का चुनती है और यह भी देखा गया है कि पद पर आसीन होने के बाद राष्ट्रपति सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में निर्णय करता है, लेकिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस मिथ्य को तोड़ते हुए लीक से हटकर काम किया है। एपीजे अब्दुल कलाम की ईमानदारी के बाद अब भारत की निगाहें मुखर्जी पर हैं ओर वे जनता के भरोसे पर खरे भी उतर रहे हैं।
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