बुधवार, 2 नवंबर 2011

प. बंगाल के अस्‍पताल में हुई हद: बच्चा जन्म लेने के बाद एसिड से कर दी महिला की सफाई



नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में लापरवाही सिलसिला नहीं थम रहा है। पिछले कुछ दिनों में लापरवाही के शिकार बच्चे हो रहे थे, लेकिन ताज़ा मामले में एक महिला इसकी शिकार बनी है। मुर्शिदाबाद जिले के लालबाग अस्पताल में कर्मचारियों ने बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसकी मां की एसिड से सफाई कर दी। खबरों के मुताबिक अस्पताल के कर्मचारियों ने वहां रखे एसिड को एंटीसेप्टिक समझ लिया और उसका इस्तेमाल कर लिया। अस्पताल की इस लापरवाही से लोग भड़क गए और उन्होंने अस्पताल में तोड़फोड़ मचा दी।



गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के चलते पिछले 10 दिनों में 47 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसमें ज़्यादातर मामले कोलकाता के बीसी रॉय अस्पताल में सामने आए हैं। लालबाग अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।





लेकिन अस्पतालों में लापरवाही पर पश्चिम बंगाल सरकार की उदासीनता का आलम यह है कि सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बच्चों की मौत के सवाल को विपक्ष के सिर मढ़ कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। बनर्जी ने सीपीएम को राज्य के अस्पतालों के खस्ताहाल के लिए जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी पार्टियां तीन दशकों से भी ज़्यादा समय तक सत्ता पर काबिज रहीं। इस साल मई में ही ममता बनर्जी ने राज्य की सत्ता संभाली है।




पिछले दिनों बीसी रॉय अस्पताल के दौरे पर आईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया को बताया था कि कमज़ोर और कुपोषण के शिकार कई बच्चों को दूर दराज़ के इलाक़ों से अस्पताल लाया जाता है। उन्होंने कहा था, 'कमज़ोर बच्चों के बचने की संभावना यूं भी बहुत कम होती है। अस्पताल में आधुनिक औज़ार मौजूद हैं लेकिन मरीजों की भीड़ बहुत ज़्यादा होती है क्योंकि कोलकाता में बच्चों का कोई और अस्पताल नहीं है।' राज्य का स्वास्थ्य मंत्रालय ममता बनर्जी के पास ही है। पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में जच्चा-बच्चा के इलाज में लापरवाही के ये मामले नए नहीं है। इस साल जून में बीसी रॉय अस्पताल में 25 बच्चों की मौत के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जांच करवाने की घोषणा की थी क्योंकि तब भी कई अभिभावकों और माता-पिताओं ने अस्पताल में बदइंतज़ामी की शिकायत की थी। पर अस्पताल ने तब भी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी।
बीसी रॉय अस्पताल में सुविधाओं की भारी कमी है और यहां लाए जाने वाले बीमार बच्चों की तादाद काफ़ी ज़्यादा होती है। बीमार बच्चों को जहां तहां अस्पताल के फ़र्श पर सोते देखा जा सकता है क्योंकि अस्पताल में पर्याप्त बिस्तर मौजूद नहीं है। इससे पहले भी 2002 में इन्हीं परिस्थितियों में इस अस्पताल में 30 बच्चों की मृत्यु हो गई थी।

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