मंगलवार, 8 मार्च 2011

जिला कलक्टर की संवेदनशीलता से मिला जीने का सुकून नारायण को


जिला कलक्टर की संवेदनशीलता से मिला जीने का सुकून नारायण को

जैसलमेर कहाँ तो तय था कि पुराने कर्ज के मर्ज को ले जिन्दगी यों ही गुजर जाती जैसेतैसे। उनकी मिली निगाह ऐसी कि निहाल हो गए।’’ जैसलमेर जिले की साँकड़ा पंचायत समिति अन्तर्गत ग़ी चंपावतों गाँव के रहने वाले श्री नारायणलाल मेघवाल की ठहरी हुई जिन्दगी में जिला कलक्टर की बदौलत शुरू हुए बदलाव के दौर ने जीने का सुकून दे दिया।
जैसलमेर जिला कलक्टर श्री गिरिराज सिंह कुशवाहा की संवेदनशीलता के कारण जिले के ग़ी चम्पावतों निवासी श्री नारायणराम पुत्र भीखाराम मेघवाल को 23 वर्ष पूर्व लिए गये सहकारी ऋण से छुटकारा मिल गया है। कर्ज के चुकारे के बाद अब वह ग्रामसेवा सहकारी समिति के माध्यम से अगले वित्तीय वर्ष में अपनी आवश्यकता के अनुरूप अल्प अवधि कृषि ऋण ले सकेगा।
श्री नारायणराम मेघवाल ने अपने व्यवसाय में वृद्धि के लिए सहकारी ऋण लेने हेतु झाबरा ग्राम सेवा सहकारी समिति की सदस्यता ग्रहण की। अनुसूचित जाति के इस कमजोर तबके के व्यक्ति को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा। सहकारी समिति के चक्कर काटने के बाद वर्ष 198889 में समिति द्वारा ऊँट खरीद और खादबीज के लिए 3 हजार रुपये की ऋण राशि स्वीकृत की गई।
श्री नारायणराम ने बड़े उत्साह के साथ अपने खेत में खरीफ फसल बोयी तथा ऊँट खरीद कर गांव में ही फुटकर घरेलू सामग्री एवं सवारियाँ पहुंचाने का काम प्रारंभ किया। नारायणराम की किस्मत ने साथ नहीं दिया तथा थोड़े दिनों बाद ही उसके ऊँट के मर जाने से आय के स्रोत समाप्त से हो गए। इस क्षेत्र में पड़े अकाल ने उसकी रहीसही आशाओं को भी निराशा में बदल दिया। रोजीरोटी के साधन समाप्त हो जाने से समय पर ऋण की किश्तों का भुगतान भी नहीं कर पाया तथा उसके सिर पर कर्ज का बोज ब़ता ही गया। ऋण का समय पर भुगतान नहीं करने के कारण नारायणराम राज्य सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं से भी वंचित रहा।
केन्द्र सरकार की ऋण माफी योजनाओं का भी नारायणराम को लाभ नहीं मिल पाया। इन हालातों में उसके द्वारा ली गई ऋण राशि ब्याज सहित लगातार ब़ती ही गयी। वह पिछले 23 साल से न तो नया ऋण ले सका एवं न ही पूर्व में लिये गये ऋण से छुटकारा पा सका।
श्री नारायणराम मेघवाल के लिए जिला कलक्टर श्री गिरिराज सिंह कुशवाहा सचमुच देवदूत सिद्ध हुए। नारायणराम ने श्री कुशवाहा की संवेदनशीलता के बारे में सुना तो हिम्मत करके जिला कलक्टर से मिलने का निश्चय किया। उसने श्री कुशवाहा को अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति से अवगत कराया तथा पूर्व में लिए गये ऋण एवं इसके ब़ते ब्याज के कारण उसे हो रही परेशानियों की जानकारी दी।
श्री कुशवाहा ने श्री नारायणराम मेघवाल के ऋण राहत आवेदनपत्र को दी जैसलमेर सैन्ट्रल कॉआपरेटिव बैंक लिमिटेड जैसलमेर को भेज कर इस सम्बन्ध में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कृषिअकृषि ऋण राहत योजना के अन्तर्गत उसे राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। नारायणराम मेघवाल ने अपने भाई बंधुओं के सहयोग से पूर्व में लिये गये ऋण के बदले 3 हजार 948 रुपये का चुकारा किया। कृषिअकृषि ऋण राहत योजनान्तर्गत झाबरा ग्राम सहकारी समिति द्वारा उसे पुनः ऋण साख चक्र से जोड़ा गया। इस प्रकार ऋण राहत आवेदनपत्र के आधार पर 23 साल पूर्व लिए गये 3000 रुपये के ऋण के बदले मात्र 3 हजार 948 रूपये के भुगतान से पुराने ऋण से नारायणराम मेघवाल को छुटकारा मिल गया है।
दी जैसलमेर सैण्ट्रल कॉपरेटिव बैंक के वरिष्ठ प्रबन्धक श्री एम.एल. भाटिया के मुताबिक अगले वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2011 से नारायणराम मेघवाल अपने 20 बीघा खेत में खरीफ फसल की बुवाई के लिये झाबरा ग्रामसेवा सहकारी समिति के माध्यम से अपनी आवश्यकतानुसार खादबीज के लिये 15 से 20 हजार रुपये की ऋण राशि प्राप्त कर सकेगा।
जिला कलक्टर गिरिराजसिंह कुशवाहा की संवेदनशीलता से बेहद अभिभूत श्री नारायणलाल मेघवाल मानते हैं कि जिला कलक्टर की बदौलत उसे बहुत बड़ी राहत मिली है। इसके लिए वह जिला कलक्टर को लाखलाख धन्यवाद देता हुआ कहता है कि अब वह ऋण प्राप्त कर नई जिन्दगी जीएगा और घरपरिवार में खुशहाली लाने के लिए जी जान से प्रयास करेगा।

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