शनिवार, 1 दिसंबर 2012

जैसलमेर चोरी का माल खरीदने वाला कबाड़ी जितेन्द्र गिरफ्तार

जैसलमेर चोरी का माल खरीदने वाला कबाड़ी जितेन्द्र गिरफ्तार 

जैसलमेर पुलिस अधीक्षक जिला जैसलमेर ममता राहुल, के आदेशानुसार जिले में सरकारी सम्पति चोरों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत कल्याणमल बण्जारा वृताधिकारी वृत पोकरण के निर्देशन में रमेशकुमार नि.पु. थानाधिकारी पोकरण के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए, पोकरण हल्खा में विभिन्न जगहो पर तलाशी की गई तो जितेन्द्र पुत्र नेमीचन्द खटीक निवासी पोकरण के पास चोरी किये गये विधुत टावरों के ऐंगल बरामद हुए जिसे पुछने पर उसने उक्त सामान को खरीदना बताया जिस पर जितेन्द्र को चोरी का माल खरीदने के जूर्म में गिरफ्तार किया गया तथा मुलजिम से पुछताछ जारी तथा चोरी का माल बरामद करने के प्रयास किये जा रहे है।

बाड़मेर अलगोजा के महान कलाकार धोधे खां


राजिव गांधी के बाराती बने थे .मुफलिसी में गुजर रहे दिन 

अलगोजा के महान कलाकार धोधे खां
राजस्‍थान के बाड़मेर जिले में राणका फकीरों का अलगोजा वादन पर पूरा अधिकार है। इस जिले के बींजराड़, कुंदनपुर, बुरहान का तला, भूणिया, भलीसर, झड़पा और देरासर गांव ‘अलगोजा वादकों के गांव’ के नाम से जाने जाते हैं, लेकिन दूधिवा गांव अलगोजा वादक गांवो में शीर्ष स्थान पर है। बाड़मेर-अहमदाबाद मार्ग पर मांगता गांव से पांच किलोमीटर दूर रेतीले टीलों के बीच स्थित दूधिया गांव ने अलगोजे के सुप्रसिद्ध वादक धोधे खां की सुरीली स्वर लहरियों से ही अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में आयोजित एशियाड-82 का उद्घाटन समारोह धोधे खां के अलगोजे की धुनों से ही शुरू हुआ और श्रोताओं की मांग पर लगातार पांच दिन तक उनकी धुनों की रिकार्डिंग आयोजकों को बजानी पड़ी। धोधे खां ने अपनी कला से दूधिया गांव के साथ-साथ राजस्थान और भारत का गौरव बढ़ाया है। 
अलगोजा नडकट, केर, टाली, बांस की नली, सुपारी या कंगोर की लकड़ी का बना होता है। बाड़मेर की चौहटन तहसील के एकल गांव के भील लक्ष्मण और मोती केर की लकड़ी के अलगोजे बड़ी खूबसूरती से बना लेते हैं। अलगोजे में दो अलग-अलग बांसुरीनुमा लम्बी-छोटी नलियां होती है। नली में 4 से 7 तक छेद किए जाते हैं। दोनों नली के मुंह मत्स्याकार होते हैं। दोनों नली को मुंह में रखकर धोधे खां जब बड़ी नली से श्‍वांस खींचकर छोटी नली से स्वर निकालते हैं, तो सुनने और देखने वाले मोहित हुए बिना नही रह पाते। अलगोजे में संगीत के आरोह-अवरोह संगीत प्रेमियों को संगीत के रस से सराबोर कर देते हैं।
धोधे खां बताते है कि सुषिर वाद्य यंत्र बजाने के लिए साधना और सांस की ताकत की आवश्‍यकता होती है। बिना साधना किए अलगोजे पर उंगलियां सुगमता से चल नहीं सकतीं। धोधे खां यों तो संगीतज्ञ परिवार से हैं, लेकिन 10 वर्ष की अल्पायु में ही पिता मीरा खां के देहावसान के बाद उन्हें पीर मिश्री जमाल, पाकिस्तान के कामआरा शरीफ गांव के भीटघणी स्कूल की शरण मे जाकर अलगोजा वादन विद्या में पारंगत होना पड़ा। छह वर्ष की कठिन साधना के बाद धोधे खां ने कुंदन की तरह निखर कर पाकिस्तान के युवा अलगोजा वादकों में अपनी छाप छोड़ दी। पाकिस्तान के हैदाराबाद क्षेत्र के खैरपुर गांव के रहने वाले धोधे खां के पिता मीरा खां की शादी दूधिया गांव के धुरा की लड़की मारियल से हुई थी। धोधे खां कामआरा शरीफ से शिक्षा ग्रहण करने के बाद दूधिया लौट आए और ननिहाल के साये और सहयोग से आगे बढऩे लगे।
रामा, पीर, भिटाई, धोटिया, कानूड़ा, मलहूद, यानबी, प्रभातिया आसा भजन की धुनें जब धोधे खां अलगोजे पर निकालते हैं, तो भजन प्रेमी भक्तिरस से सराबोर हो जाते हैं। शादी-ब्याह मे लाडेला, सेहरो, डोरो, मेंहदी, अरणी, तोरण के गीतों पर अलगोजे के संगीत और महेन्द्र-मूमल, मीर-महेन्द्र, ढोला-मारू, सस्सी-पुन्नु, ऊजली-जेठा और बीजा सोरठ की प्रेम गाथाओं को अलगोजे पर बजाने मे तो धोधे खां को महारत हासिल है। धोधे खां सिंधी धुनो में पारंगत है और राणा-महेन्द्र, काफी आदि को सिंधी धुनों मे खूबी से प्रस्तुत करते हैं। राग मल्हार, श्याम कल्याण, राणा, दरबारी, कलवाड़ा में धोधे खां सिद्धहस्त हैं। अमरकोट के कलाकार हमीर मुथा, हवेली के लतीफ, नारा ढोरा के हनीफ, सादी लिपली के मुवीन एवं तमाची, धोधे खां के प्रिय कलाकारों में हैं।
नेहरू युवा केन्द्र ने स्थानीय जजमानों की दुनिया से निकाल कर उनकी कला के सार्वजनिक प्रदर्शन करवाने का प्रथम प्रयास किया। गत दो दशक मे नेहरू युवा केन्द्र एवं जोधपुर की रूपायन संस्था के नेतृत्व में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत जोधपुर, लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता, मद्रास, बेलगांव में धोधे खं अपनी कला प्रतिभा के जौहर दिखाए, वहीं 15-20 वर्ष से उन्हें आकाशवाणी जोधपुर से भी कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया था। धोधे खां ने जहां हर रोज कला के प्रति अपने समर्पण भाव को दर्शाया, वहीं हर कोई इनकी कला की कद्र करता नजर आया।
धोधे खां का मानना है कि सरकार अलगोजे को रेतीले इलाके में ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय बनाए। स्कूलों मे लोक संगीत को अनिवार्य बनाया जाए, तभी अलगोजे जैसे वाद्य यंत्र समाज में पुन: प्रतिष्ठित हो पाएंगे।

चिकित्सको को हटाया तो गंभीर होंगे परिणाम

प्रतिनियुक्त चिकित्सको को हटाने का विरोध कराया दर्ज ,मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

चिकित्सको को हटाया तो गंभीर होंगे परिणाम


बाड़मेर ग्रुप फॉर पीपुल्स ने राजकीय चिकित्सालय के तीन चिकित्सको की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के सरकार के निर्णय का विरोध दर्ज करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरुण पुरोहित को ज्ञापन सौंपा ग्रुप फॉर पीपुल्स के संयोजक चन्दन सिंह भाटी ने बताया ग्रुप के पदाधिकारी और कार्य करता रमेश सिंह ,इन्दा दिग्विजय सिंह चुली ,भेरा राम सुथर ,स्वरुप सिंह झनकली ,रामेश्वर सोनी ,कैलाश जायदू ,दीपक महावर ,अजय सिंह भाटी ,तेजा राम हुड्डा ,सहित कई जानो की उपस्थिति में अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सुपुर्द किया ,ज्ञापन में लिखा हें की राज्य सरकार के आदेशानुसार प्रतिनियुक्ति पर लगे सरकारी कारिंदों को गृह विभाग में भेजा हें ,निःसंदेह सरकार का बेहतरीन कदम हें ,मगर बाड़मेर जिले के राजकीय चिकितास्लय में लम्बे अरसे बाद प्रतिनियुक्ति पर तीन चिकित्सक लगे हें जिसमे डॉ सुरेन्द्र चौधरी के आने के बाद पहली बार बाड़मेर के अस्थि रोग पीडितो को जिलो और प्रान्तों में इलाज़ हेतु , बाड़मेर जिले में अस्थि के ओप्रेसन सपने जैसा था मगर इस सपने को सुरेन्द्र चौधरी ने साकार किया ,अस्थि रोगिये के ओप्रेसन बाड़मेर के अस्पताल में बड़ी तादाद में हुए वो भी सफलता ,पूर्वक सुविधा के आभाव के बावजूद इस युवा चिकितासक ने सेवा भाव से कार्य कर जनता का दिल और विशवास जीता हें ,जहा बाड़मेर कोई नया चिकित्सक आना नहीं चाहता जो आये उन्हें हटा दिया जाए यह उचित नहीं ,आम जनता के के , हें बाड़मेर जिले की परिस्थितियों को भली भांति जानते हें ऐसे में बाड़मेर के राजकीय चिकित्सालय में नियुक्त चिकित्सको को किसी भी सूरत में नहीं हटाया जाए ,राजकीय चिकित्सालय के तीन होनहार और सेवा भावी चिकितस्क प्रतिनियुक्ति पर हें ,उने हटाया नहीं जाए ,बाड़मेर जिले की जनता की मांग हें की इन चिकित्सको की प्रतिनियुक्ति को स्थाई सेवा में बदल दिया जाये ,.यदि इन चिकित्रसको को हटाया गया तो उग्र आन्दोलन किया जाएगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी ,ज्ञापन के जरिये चिकितासको को नहीं हटाने ककी गुहार की हे साथ ही चिकित्सको को हटाने की दशा में उग्र आन्दोलन करने को लेकर सरकार को चेताया हें,साथ ही बाड़मेर बंद करने के साथ गतिविधिया ठप्प करने की चेतावनी दी हें

बलात्कार के मामले में तीन को सजा

बलात्कार के मामले में तीन को सजा

इंदौर। मध्यप्रदेश में इंदौर की विशेष अदालत ने चार वर्ष पहले एक लडकी के अपहरण और बलात्कार के मामले में एक पुलिस कर्मचारी समेत तीन आरोपियों को कारावास की सजा सुनायी है।

विशेष सत्र न्यायाधीश अवनींद्र कुमार सिंह ने जिले के बेटमा थाना क्षेत्र की इस घटना के सिलसिले में मुख्य आरोपी साहेब सिंह को शुक्रवार सात वर्ष की सजा सुनाई। इस आरोपी को सहयोग करने के लिए पुलिस कर्मचारी कै लाश और मुकेश को तीन.तीन वर्ष की सजा से दंडित किया गया। सरकारी अधिवक्ता ज्योति तोमर ने बताया कि बेटमा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक लडकी को साहेब सिंह ने मई 2008 में अगवा कर लिया था। बाद में उसने उसके साथ बलात्कार किया। परिजनों की शिकायत के बाद लडकी को खोजा गया और वह साहेब सिंह के घर से मिली। बताया गया है कि शेष दो आरोपियों ने साहेब सिंह की मदद की थी।

नार्वे में भारतीय दम्पती को जेल !

नार्वे में भारतीय दम्पती को जेल !
हैदराबाद/ओस्लो। अपने 7 साल के बेटे को प्रताडित करने के आरोपों से घिरे नॉर्वे के ओस्लो में कार्यरत आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के वी.चन्द्रशेखर और उनकी पत्नी पर सजा की तलवार लट रही है। बेटे को अनुशासन सिखाने के कारण नॉर्वे पुलिस के हत्थे चढ़े चन्द्रशेखर और उनकी पत्नी को हिरासत में लेने के साथ ही एक साल और तीन महीने की सजा की सिफारिश की गई है। ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट इस मामले में 3 दिसम्बर को फैसला सुनाएगी।

जानकारी के अनुसार दंपती पर बच्चे के साथ बार-बार दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है। पुलिस डिपार्टमेंट के अनुसार धमकी देना,हिंसा आदि पैनल कोड 219 के तहत गलत है। इस के तहत चन्द्रशेखर की पत्नी को 1 साल 3 महीने और 1 साल 6 महीने के सजा खुद चन्द्रशेखर को दी जा सकती है।

यह था मामला

चन्द्रशेखर के भतीजे वी. शैलेन्द्र ने हैदराबाद में बताया कि ओस्लो पुलिस ने उनके ऊपर अपने पुत्र को अनुशासित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। गत 28 नवम्बर की गिरफ्तारी की सूचना पड़ोसियों से मिली। शैलेन्द्र ने बताया कि नौ माह पहले उनके बच्चे ने स्कूल बस में लघुशंका की थी। शिकायत पर पिता ने बच्चे को धमकाया था कि उसने फिर ऎसा किया तो वह उसे भारत भेज देंगे। बच्चे के स्कूल से खिलौना उठा लाने की शिकायत भी मिली थीं। उधर,ओस्लो स्थित भारतीय दूतावास ने पूरे प्रकरण का दंपती के दोस्तों से ब्योरा मांगा है।