गुरुवार, 7 जुलाई 2016

जयपुर।राजस्थान: बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी बनाएंगे नई पार्टी



जयपुर।राजस्थान: बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी बनाएंगे नई पार्टी
राजस्थान: बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी बनाएंगे नई पार्टी
पार्टी से लंबे समय से साइडलाइन चल रहे भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने नई पार्टी (दीनदयाल वाहिनी) बनाने के संकेत दे दिए हैं। दीनदयाल वाहिनी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में पार्टी के संविधान के प्रारूप को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके लिए 1 करोड़ रुपए के फंड जुटाने तथा पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की भी घोषणा के साथ ही तिवाड़ी ने यह भी एेलान कर दिया कि उनकी वाहिनी प्रदेश में सैकिंड या या थर्ड फ्रंट नही बल्कि फस्र्ट फ्रंट बनेगी।कार्यक्रम में घनश्याम तिवाड़ी की लिखित पुस्तक 'आरक्षण मेरी भूमिका' का भी विमोचन किया गया।




तिवाड़ी ने बताया कि अब सदस्यता तथा प्रशिक्षण अभियान चलेगा। जिसमें कार्यकर्ताओं को राजनीतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वाहिनी के फंड के लिए पांच हजार सक्रिय सदस्यों से 2100-2100 रुपए लेकर पार्टी का फंड बनाया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में सभी जातियों के जनाधार वाले कार्यकर्ताओं तैयार किया जाएगा।




उन्होंने यह भी बताया कि दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन पर 25 सितंबर को सभी जिलों में जिला सम्मेलन होंगे तथा सार्वजनिक समारोहों आयोजित करके पदाधिकारियो कंो शपथ दिलाई जाएगी। गौरतलब है कि तिवाड़ी लंबे समय से दीनदयाल वाहिनी के कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश में घूमकर नई पार्टी की संभावनाएं तलाश रहे थे।




यूं बोला सीएम व भाजपा हमला

घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र खत्म होने से गवर्नेँस समाप्त हो गया। मंत्री को अफसर से कम ज्ञान है। मंत्री अपनी योग्यता से नहीं सीएम की मर्जी से बनते हैं। अब तो मंत्री सरकार को बचाने और मनमाने निर्णय लेने के लिए होते हैं। स्वेच्छाचारिता से नियुक्तियां होती है। कला बोर्ड में 11 में से एक भी राजस्थान का नही है।




मंत्री कहते हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मंत्रिमंडल के ऊपर सेवानिवृत्त अधिकारियों की सुपर कैबिनेट बन गई है। इस मुख्यमंत्री सलाहकार समिति का खर्च ही एक करोड़ 87 लाख रुपए पड़ रहा है। इससे गवर्नेंस समाप्त हो रहा है। अराजकता व दुष्कर्म के मामलों को देखकर शर्म आती है।




संगठन के हालात एेसे हैं कि जो पार्टी के 80 लाख पार्टी कार्यकर्ताओं में नहीं है उसे राज्यसभा का टिकट मिल जाए तो उसे काम करने की क्या जरूरत है। तीन महीने में कार्यकारिणी गठित की जानी चाहिए लेकिन तीन साल गुजर गए।




विकास के नाम पर मंदिरों को तोड़ा जा रहा है तथा भ्रष्टाचार पकडऩे वाले अधिकारियों को हटाया जा रहा है। अखिलेश तिवाडी ने आरोप लगाया कि राज्य का बजट बनाने के लिए दिल्ली से अधिकारी आते हैं और बजट बनाकर चले जाते हैं। यह गैरकानूनी है।




उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा में सामंतशाही आ गई है। विधायक रीढ़ विहीन हो गए हैं। दीनदयाल वाहिनी के सचिव अखिलेश तिवाड़ी ने तो नए दल की संरचना तथा उसके स्वरूप के बारे में बताते हुए कहा कि अलग से दल का गठन इसलिए जरूरी हो गया है,क्योंकि राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो गया है। नए दल में तीन-तीन जिलों के 11 संभाग बनाए गए हैं।




मीणा ने पद लेने के किया इंकार

कार्यक्रम में आए राजस्थान विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेश मीणा को मंच पर बुलाकर उन्हें दीनदयाल युवावाहिनी का प्रदेशअध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की गई, लेकिन इसके कुछ देर बाद ही राजेश मीणा ने पद लेने से इनकार करते हुए कहा कि वे एवीबीपी के सदस्य और फिलहाल कोई पद नहीं ले सकते।

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