गुरुवार, 29 मई 2014

एसपी व दलाल फरहीन में होती थी रोमांटिक बात

जयपुर। रिश्वत मामले में एसीबी के हत्थे चढ़ी फरहीन खान एसपी सत्यवीर सिंह के लिए सिर्फ दलाली का ही काम नहीं करती थी, वह एसपी की बेहद "खासमखास" भी थी। एसीबी के मुताबिक एसपी की दम्पती से रोजाना कई घंटे तक बात होती थी। एसीबी के पास सैकड़ों घंटों की रिकॉर्डिग मौजूद है। इनमें ज्यादातर बातचीत सत्यवीर और फरहीन की है।

एसीबी के डीआईजी हवा सिंह घुमरिया ने कहा कि एसपी और फरहीन के बीच मोबाइल पर सब तरह की बातें हुआ करती थीं। आप जितना सोच सकते हो, उससे भी कई ज्यादा। दो माह से ज्यादा समय से इनके फोन सर्विलांस पर थे। दोनों के बीच व्हाट्स एप पर भी कई रोमांटिक मैसेज का आदान-प्रदान हुआ।

नए अफसर को करती मैसेज

फरहीन खान के मोबाइल में कई बड़े पुलिस अफसरों के मोबाइल नम्बर हैं। इनमें से कुछ से वह नियमित सम्पर्क में रहती है, जिनसे उसका लगातार सम्पर्क नहीं होता, उन्हें भी वह व्हाट्स एप पर मैसेज करती थी। एसीबी की जांच में इसका खुलासा हुआ है। एसीबी सूत्रों ने बताया कि जैसे ही कोटा या आसपास जिले में नया अधिकारी पदस्थापित होता था, तो फरहीन उसके मोबाइल नम्बर ले लेती। व्हाट्स एप के जरिए मोबाइल पर वेलकम मैसेज करती। इसमें खुद का नाम भी लिखती और परिचय भी देती। कई अधिकारी ऎसे भी हैं, जिन्होंने पहला मैसेज मिलने के बाद ही उसके व्हाट्स एप कॉन्टेक्ट को ब्लॉक कर दिया।

एडीजी भी हैं घनिष्ठ

सूत्रों की मानें तो महिला का एक एडीजी स्तर के अधिकारी से गहरा सम्पर्क है। इनसे उसकी खूब बात हुआ करती थी। यह अधिकारी जब भी कोटा आते थे तो फरहीन से बिना मिले नहीं जाते थे। पुलिस में आम चर्चा है कि जिन एडीजी के महिला नजदीक थी, कोटा शहर एसपी उन्हीं के करीबी माने जाते हैं। संभवत: इसी वजह से एसपी कुछ ही दिनों में महिला के करीब आ गए।

नॉनवेज खिलाकर फांसती

एसीबी के मुताबिक अधिकारियों को जाल में फांसने के लिए फरहीन नॉनवेज बनवाकर भेजती थी। लजीज नॉनवेज का स्वाद यदि किसी अधिकारी को मुंह चढ़ जाता तो वह इसके जाल में फंस जाता था।

घर पर वर्दी में पिता की तस्वीर

एसीबी दल ने जब फरहीन के घर छापा मारा तो वहां उसके दिवंगत पिता की वर्दी में तस्वीर लगी हुई थी। उसके पिता पुलिस में उप निरीक्षक थे। ब्राह्मण परिवार में जन्मी मूलत: सुल्तानपुर की फरहीन ने निसार से प्रेम विवाह किया। यूं तो प्रेम विवाह के बाद से ही उसका परिवार उससे दूर हो गया, लेकिन पुलिस की वर्दी के चलते पिता की तस्वीर टांग रखी थी। घर आने वाले लोग भी इस तस्वीर को देखकर उससे प्रभावित होते थे।

सीआई और हैडकांस्टेबल ने फंसाया

एसपी सत्यवीर सिंह ने कहा कि मुझे एसीबी, गोपीचंद एवं मलिक ने साजिश रच फंसाया है। गोपीचंद मीणा सीआई है, जो पहले कोटा शहर में तथा वर्तमान में कोटा ग्रामीण पुलिस में कार्यरत है। रवीन्द्र मलिक कोटा शहर में हैड कांस्टेबल है। वह सत्यवीर सिंह के कार्यकाल में एक बार निलंबित हो चुका है। एसपी के आरोप के जवाब में गोपीचंद ने पत्रिका को बताया कि मेरी इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। मेरी तबीयत खराब होने से मैं दस दिन से अवकाश पर हूं। गोपीचंद ने कहा कि मुझे ट्रेप करवाना होता तो मैं पांच दिन पहले ही करवा देता जब मेरे परिचित बिल्डर से एसपी ने डेढ़ लाख रूपए लिए थे। उधर, मलिक ने भी एसपी के आरोप नकारे हैं।

...और रो पड़ी फरहीन

पेशी के दौरान उपजे हालात देखने के बाद जब तीनों को फिर से अन्वेषण भवन लाया गया तो फरहीन फूट-फूटकर रो पड़ी। जब सुबह न्यायालय में उसने उनके खिलाफ जनाक्रोश देखा तो वह सहम गई। वह करीब 15 मिनट तक रोती रही। यहां उसकी बेटी ने उससे मुलाकात की। मां से मिलकर उसकी भी आंखें भर आई।

सामना कराया तो हो गए पानी-पानी

तीनों अभियुक्तों से एसीबी अधिकारियों की पूछताछ रात 3:30 बजे तक चली। लंबी पूछताछ के दौरान एसपी सत्यवीर सिंह और दलाल फरहीन को आमने-सामने भी बैठाया गया। अधिकारियों ने एसपी से एक ही सवाल किया कि आखिर ऎसे क्या कारण थे, जो वे महिला के कहे अनुसार हर काम को प्राथमिकता से करते रहे? इस पर एसपी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए। महिला भी खुद से एसपी के संबंधों को बार-बार नकारती रही। हालांकि, सर्विलांस में सामने आई वार्ता के एक-एक पृष्ठ पढ़कर जब अधिकारी उन्हें सुनाने लगे तो दोनों आंखें भी नहीं मिला पाए।

तफ्तीश बदलने का "अजब" खेल

कोटा शहर में पिछले कुछ दिनों से किसी भी मामले की तफ्तीश बदल दी जाती थी और इसकी मॉनीटरिंग खुद एसपी करते थे। डीआईजी घुमरिया ने बताया कि ऎसे करीब तीन दर्जन ऎसे मामले आए हैं, जिनमें जांच बदलकर दूसरे अधिकारी को सौंपी गई। सभी मामले जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े हैं। यह भी पता चला है कि इनमें से ज्यादातर पत्रावलियों में महिला दलाल फरहीन का दखल था।
 

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