गुरुवार, 20 मार्च 2014

मशहूर लेखक खुशवंत सिंह नहीं रहे, पंचतत्‍व में विलिन हुए

नई दिल्‍ली। प्रसिद्ध लेखक एवं पत्रकार खुशवंत सिंह का गुरुवार को 99 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने दोपहर 12. 55 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र राहुल ने दी। आज शाम करीब 5 बजे उनका अंतिम संस्‍कार लोधी रोड स्थित श्‍मशान घाट में किया गया। उनके अंतिम संस्‍कार में भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी, केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला, कपिल सिब्‍बल, भाजपा नेता विनेाद खन्‍ना और पूर्व चुनाव आयुक्‍त एम.एस गिल पहुंचे। इससे पहले दोपहर करीब तीन बजे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी भी खुशवंत सिंह के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने के लिए उनके आवास पहुंचे। सिंह के निधन पर लेखन, राजनीतिक एवं सिनेमा जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्‍यक्‍त किया है।
मशहूर लेखक खुशवंत सिंह नहीं रहे, 99 साल की उम्र में हुआ निधन
सांस लेने में आ रही थी परेशानी

उनके पुत्र राहुल सिंह ने बताया कि उम्रदराज होने की वजह से वे बेहद कमजोर हो गए थे और कुछ दिनों से उन्‍हें सांस लेने में दिक्‍कत भी आ रही थी। सिंह ने बताया कि जब उन्‍होंने ज्‍यादा बेचैनी की शिकायत की तो डॉक्‍टरों को बुलाया गया। कुछ देर बाद उन्‍होंने अंतिम सांस ली। राहुल के अनुसार, डॉक्‍टरों ने उन्‍हें बताया कि बेहद कमजोरी की वजह से उन्‍हें हार्ट अटैक हुआ, जिससे उनकी मृत्‍यु हुई। राहुल के अनुसार, गुरुवार सुबह उनके पिता ने अखबार और कुछ पुस्‍तकें पढ़ीं।

जन्म और शिक्षा

खुशवंत सिंह का जन्म 2 फरवरी, 1915 को पंजाब के हदाली नामक स्थान (अब पाकिस्तान में) पर हुआ था। खुशवंत सिंह के पिता का नाम सर सोभा सिंह था, जो अपने समय के प्रसिद्ध ठेकेदार थे। उस समय सोभा सिंह को आधी दिल्ली का मालिक कहा जाता था। खुशवंत ने 'गवर्नमेंट कॉलेज', लाहौर और 'कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी' में शिक्षा पाई थी। इसके बाद लंदन से ही कानून की डिग्री ली। उसके बाद तक वे लाहौर में वकालत करते रहे। उनका विवाह कवल मलिक के साथ हुआ। इनके पुत्र का नाम राहुल सिंह और पुत्री का नाम माला है।

कॅरियर

खुशवंत सिंह ने पत्रकारिता में काफी प्रसिद्धि पाई। 1947 से कुछ वर्षों तक खुशवंत सिंह ने विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी कार्य किया था। 1951 में वे आकाशवाणी से संबद्ध थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र 'योजना' का संपादन किया। इसके अतिरिक्‍त वे मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेजी साप्ताहिक 'इल्लस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया' और 'न्यू डेल्ही' के संपादक भी रहे। 1983 तक दिल्ली के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'हिन्दुस्तान टाइम्स' के संपादक भी वही थे। इसके अतिरिक्‍त वे 1980 से 1986 तक वे राज्य सभा के मनोनीत सदस्य भी रहे।

प्रसिद्ध रचनाएं

'डेल्ही', 'ट्रेन टू पाकिस्तान', 'दि कंपनी ऑफ वूमन', आई शैल नोट हियर द नाइटिंगेल। इनके अतिरिक्‍त वर्तमान संदर्भों तथा प्राकृतिक वातावरण पर भी उनकी कई रचनाएं हैं। दो खंडों में प्रकाशित 'सिक्खों का इतिहास' उनकी प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है। 95 की उम्र में उन्‍होंने 'द सनसेट क्‍लब' नामक नॉवेल भी लिखा। 2000 में पेंगुइन प्रकाशन ने उनकी आत्‍मकथा ‘सच, प्‍यार और थोड़ी सी शरारत’ भी प्रकाशित की। उम्र के अंतिम पड़ाव तक वो लेखन में सक्रिय रहे। पिछले साल उनकी किताब 'खुशवंतनामा: दि लेसन्स ऑफ माई लाइफ' प्रकाशित हुई थी।

सम्मान तथा पुरस्कार

- 1974 में राष्ट्रपति ने उन्हें 'पद्म भूषण' के अलंकरण से सम्मानित किया, जो अमृतसर के 'स्वर्ण मंदिर' में केंद्र सरकार की कार्रवाई के विरोध में उन्होंने 1984 में लौटा दिया था।
- 2007 में इन्हें 'पद्म विभूषण' से भी सम्मानित किया गया।

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