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चुनावी रणभेरी जैसलमेर चुनाव दलगत राजनीती से ऊपर उठा व्यक्तिगत प्रभाव का दिखेगा असर



जैसलमेर अब जबकि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी रणक्षेत्र कि स्थिति साफ हो चुकी हें। प्रथम दौर में भाजपा ने अपना प्रत्यासी कांग्रेस से पहले घोषित कर कर चुकी हें वाही भाजपा कि दूसरी बड़ी सफलता बागी सांग सिंह भाटी को मानना रहा भाजपा के लिए यह उत्साहजनक था। इधर कांग्रेस ने प्रत्यासी चुनने में देर लगाई जिससे गुटबाज़ी को बल मिला। भाजपा ने वर्त्तमान विधायक छोटू सिंह भाटी को मैदान में उतरा तो कांग्रेस ने सेवानिवृत मुख्य अभियंता रूपाराम धनदे को मैदान में उतारा। पांच अन्य निर्दलीय और पार्टियो के प्रत्यासी हे जिनका ज्यादा वजूद नहीं हें।


कांग्रेस ने इन चुनावो में नया गम खेला। अपनी परंपरागत राजपूत उम्मीदवार उतरने कि बजाय सामान्य सीट पर अनुसूचित जाति के रूपाराम धंदे पर दांव खेल राजपूतो कि नाराजगी मोल ले ली। क्षेत्र में करीब उन सितर हज़ार राजपूत मतदाता हें वाही उनचालीस हज़ार मुस्लिम और छबीस हज़ार अनुसूचित जाति ,तेरह हज़ार अनुसूचित जन जाती के मतदाता प्रमुख हें.कांग्रेस ने इस बार दांव खेला हें मुस्लिम मेघवाल गठजोड़ पर। इस नए गठजोड़ के चलते कांग्रेस के परंपरागत राजपूत वोट बेंक पूरी तरह खिसक गया ,कांग्रेस द्वारा राजपूत उम्मीदवार कि टिकट कटाने से जैसलमेर के तीन धड़ो में बनते राजपूत एक हो गए वाही आस पास के जिलो में इसका साफ़ असर देखा जा सकता हें।


कांग्रेस के लिए दिक्कत फ़क़ीर परिवार हें इस बार गाज़ी फ़क़ीर कि हिस्ट्रीशीट खुलने के प्रकरण के बाद इस परिवार कि छवि पर इसका अन्य जाति समाजो ममे विपरीत प्रभाव पड़ा हें ,इस परिवार पर राष्ट्रद्रोह के आरोप खुद सरकारी कारिंदो ने लगाये। जिसका असर इन चुनावो में दिखेगा।


कांग्रेस प्रत्यासी रूपाराम धनदे। … रूपाराम धंदे ने अपनी सरकारी सेवा का अधिकांस समय जैसलमेर में गुजारा हें उनके हर समाज जाति वर्ग में बेहतर व्यक्तिगत रिश्ते हें। व्यक्तिगत प्रभाव कितना कारगर साबित होगा यह आने वाले समय में पता चलेगा ,रूपराम का व्यक्तिगत प्रभाव कांग्रेस पार्टी से भारी हें। उन्हें हर वर्ग से समर्थन मिल रहा हें तो कई लोग सही आदमी गलत पार्टी का नारा बुलंद कर रहे हें। रूपराम ने अपने कार्यकाल में कई लोगो और परिवारो को लाभान्वित किया किसी न किसी रूप में। जिसका फायदा उन्हें मिल सकता हें ,रूपराम के पास पैसे का बड़ा जरिया हें।


भाजपा प्रत्यासी छोटू सिंह भाटी। … भाजपा के वर्त्तमान विधायक छोटू सिंह भाटी पेशे से ठेकेदार ह्वेन ,उनका सरल स्वाभाव जैसलमेर कि जनता को लुभाता हें ,उनके हर समाज जाती वर्ग से बेहतर व्यक्तिगत रिश्ते हें। इन रिश्तो के चलते वे पिछला चुनाव जीते थे ,गत चुनावो में राजपूत समाज के साथ भाजपा भी कई धड़ो में बंटी थी इस बार उन्हें सांग सिंह भाटी पूर्व विधायक का साथ मिला हें ,संग सिंह ने निर्दलीय नामांकन भरा था पार्ट्री के आदेश से उन्होंने ना केवल नामांकन वापस लिया अप[इतु छोटू सिंह के साथ हो लिए। इस बार राजपूत समः एक मत हें इसका फायदा उन्हें मिल सकता हें ,छोटू सिंह को परम्परागत भाजपा वोटो के साथ कांग्रेसी राजपूतो के वोट मिलेंगे जो उनके लिए बोनस साबित हो सकते हें।


हालफिलहाल दोनों प्रत्यासी जोर आज़माईश में लगे हें ,मुकाबला कडा होने के प्रबल आसार हें। मुस्लिम मेघवाल गठजोड़ के प्रतिक रहे पूर्व निर्दलीय विधायक मुल्तानाराम बारुपाल और राजपूत नेता जनक सिंह भाटी कांग्रेस को अलविदा कह चुके हें कांग्रेस के लिए यह झटका था।


--विधानसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारो ने एड़ी से चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय पार्टियो के प्रत्याशियो के अलावा स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान मे उतरे प्रत्याशी मतदाताओ को रिझाने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहे।


शहरी क्षेत्रो मे चुनाव प्रचार करने के साथ दूर-दराज के गांव व ढाणियो तक पार्टी प्रत्याशियो ने युद्ध स्तर पर अपनी कार्ययोजना को मूर्त रूप देना शुरू कर दिया है। जिले के शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण क्षेत्रो मे भी चुनावी रंग जमने लगा है। चाय की थडियो से लेकर गली-मोहल्ले व चौपालो पर हर जगह चुनावो की ही चर्चा है। इस दौरान उम्मीदवारो के दौरो ने इन चुनावी रंग को गहरा कर दिया है।

चुनाव कार्यालयो मे छाई रौनक

जैसलमेर मे पार्टियो की ओर से खोले गए चुनावी कार्यालयो मे इन दिनो उत्सव सा माहौल है। यहां चुनावी रणनीति बनाते लोग समूह विचार विमर्श करते हुए या फिर जाातिगत वोटो पर चर्चा करने मे मशगूल कार्यकर्ताओ को देखा जा सकता है। यहां यह भी चर्चा हो रही है कि किस गांव व क्षेत्र मे कौनसे कार्यकर्ताओ की टीम जाएगी। चर्चाओ के इस दौर के बीच खोले गए चुनावी कार्यालयो मे चहल-पहल देखी जा सकती है।

ये है चुनावी मैदान मे


नामांकन वापस लेने के बाद अब जैसलमेर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस से रूपाराम मेघवाल, भाजपा से छोटूसिंह भाटी, बसपा से हुकुमसिंह शेखावत के अलावा हरीश कुमार, रामनिवास छीपा, रोशनसिंह व भगवानसिंह चुनावी मैदान मे है।

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