BNT

BNT

जयपुर. महंगाई के खिलाफ बने चौतरफा दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने मंगलवार देर रात रसोई गैस सिलेंडर 25 रुपए सस्ता कर दिया है। रसोई गैस पर वैट नहीं है, इसलिए सरकार सब्सिडी देगी। वहीं डीजल पर 54 पैसे प्रति लीटर की राहत दी गई है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में केरोसिन को पूरी तरह वैट मुक्त किया गया है। केरोसिन पर 14 प्रतिशत वैट था। ये फैसले तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। हालांकि सरकार ने पेट्रोल पर किसी प्रकार की राहत नहीं दी है। अब गैस सिलेंडर 373.05 रुपए में तथा डीजल 42.90 रुपए प्रति लीटर मिलेगा। अभी तक बीपीएल को मिलने वाला केरोसिन ही वैट मुक्त था। अब इसे पूरी तरह वैट मुक्त कर दिया गया है। इसका फायदा सभी वर्ग के लोगों को मिलेगा। मुख्यमंत्री गहलोत ने देर रात अपने निवास पर राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई।

बैठक में सभी मंत्रियों ने कीमतें घटाने बारे में फैसला करने के लिए वित्त मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही अधिकृत कर दिया। बैठक में तय किया गया कि केंद्र ने डीजल की दरों में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है। इस पर राज्य में 18% की दर से 54 पैसे वैट बनता है। सरकार यह पैसा नहीं वसूलेगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही केंद्र ने रसोई गैस 50 रुपए प्रति सिलेंडर, डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर और केरोसिन पर 2 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की थी। इसी तरह रसोई गैस सिलेंडर पर वृद्धि का भार आम गृहिणी पर देखते हुए 25 रुपए की सब्सिडी देने का फैसला किया गया।

फिर भी 2510 करोड़ की कमाई: राज्य सरकार को डीजल पर वैट के रूप में सालाना करीब 2550 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति होती है। फिलहाल सरकार ने इसमें से करीब 40 करोड़ रुपए की ही राहत दी है।

देर रात इसलिए लिया फैसला: डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के बढ़े दामों में देर रात राहत देने के फैसले के पीछे भी राजनीतिक मजबूरियां हैं। दरअसल, बुधवार को राज्यभर के कांग्रेस कार्यकर्ता जन जागरण रैली के लिए जयपुर में जुट रहे हैं। महंगाई पर मुख्यमंत्री गहलोत को इन कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब देने पड़ते। इस रैली में दिल्ली से भी कांग्रेस नेता आ रहे हैं, इसलिए 10 जनपथ को भी यह संदेश देना था कि महंगाई के कारण घट रही लोकप्रियता को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास हो रहे हैं। कीमतें कम करके विपक्ष का बढ़ता दबाव भी दूर करने का प्रयास किया है।

सांसदों और विधायकों का भी दबाव: पहले पेट्रोल और बाद में डीजल तथा रसोई गैस की कीमतों में हुई वृद्धि के बाद राज्य सरकार पर कीमतें कम करने के लिए सत्तापक्ष के सांसदों और विधायकों का भी दबाव बन रहा था। इसकी वजह यह थी कि पार्टी के घोषणा पत्र में वैट को कम करने का वादा किया गया था। सत्तापक्ष से जुड़े अन्य जनप्रतिनिधि भी चुनावी वायदा याद दिलाकर मुख्यमंत्री से वैट दरों में कमी करने की मांग कर रहे थे।

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.

 
Top