पश्चिमी सीमा क्षेत्र से.यहां रस्सियों में कैद हैं नापाक कश्तियां
यहां रस्सियों में कैद हैं नापाक कश्तियां

गुजरात के कच्छ जिले के कोटेश्वरम में कदम रखते ही सबसे पहले रस्सियों में कैद नापाक कश्तियां नजर आती हैं। समुद्री सीमा के उस पार पकिस्तान से इस ओर भारतीय सीमा में आने वाली कश्तियों को सीमा सुरक्षा बल यहां अपनी हिरासत में तट पर लंगर से बांध कर रखता है। नीले और गहरे समंदर में हवा से बातें करने वाली पाकिस्तान की नौकाएं यहां रस्सियों की गिरफ्त में कई सालों से बंधी हैं। इनके यहां जमावड़े का आलम यह है कि बीते साल (2016 ) में दर्जन से ज्यादा नावें पकड़ी गई और इन पर सवार 30 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। बीते पांच सालों का यह आंकड़ा सैकड़ों पार है। सीमा सुरक्षा बल के गश्ती दल की चौकसी की बदौलत समुद्री सरहद पर पाकिस्तानी घुसपैठ में कमी आ रही है लेकिन गाहे-बगाहे पाकिस्तानी नावों का भारत की सीमा में प्रवेश करना अभी जारी है।

बरामद की मछलियां और जाल भी

भारतीय सीमा में पाकिस्तानी नावों और नागरिकों की गिरफ्तारी पर होने वाली बरामदगी की घटनाएं कुछ अजीब सी हैं। बीते साल कोटेश्वर सीमा चौकी के निकट बीएसएफ ने 14 पाक मछुआरों और चार बच्चों को पकड़ा। बीएसएफ ने मछली पकडऩे की दो नौकाएं भी जब्त की थी। मशीनीकृत नौकाओं की तलाशी के दौरान बीएसएफ कर्मियों को करीब 350 किलो मछली, मछली पकडऩे वाले चार जाल, एक आइस बाक्स और प्लास्टिक कैन में अतिरिक्त ईंधन मिला। इससे पहले 10 मछुआरों को पकड़ा था और उनकी दो नौकाएं जब्त की थी। जिसमें ईंधन के अलावा कुछ नही मिला था। जिन-जिन नौकाओं में पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार हुए उनमें मछली पकडऩे का सामान और मछलियां मिली हैं, लेकिन कुछ नावें ऐसी भी गिरफ्त में आई हैं, जिनमें कोई शख्स नहीं था। उन नावों में पाकिस्तानी करंसी, ईंधन और ड्राय फ्रूट मिले थे।

मुस्तैद है मरीन बटालियन

भारत-पाक समुद्री सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की मरीन बटालियन तैनात है। जिनको अरब सागर का बादशाह कहा जाता है। इसकी तैनातगी के बाद पाकिस्तान की तरफ से जब भी घुसपैठ की कोशिश की गई, उसे मुंह की खानी पड़ी। रात के अंधेरे में भी घुसपैठ की कोशिश हमेशा नाकाम रही है और यही वजह है कि केवल 2016 में मरीन बटालियन के नाम सबसे ज्यादा घुसपैठ रोकने और पाक नागरिक गिरफ्तारी का रिकॉर्ड है।

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