रविवार, 25 जनवरी 2015

बाड़मेर जिले के गडरारोड का मामला ओबीसी सर्टिफिकेट निरस्त करने के आदेश को हाईकोर्ट ने अमान्य किया


बाड़मेर जिले के गडरारोड का मामला ओबीसी सर्टिफिकेट निरस्त करने के आदेश को हाईकोर्ट ने अमान्य किया


बाड़मेर जिले के गडरारोड का मामला

लीगल रिपोर्टर | जोधपुर

हाईकोर्ट ने एक याचिका स्वीकार करते हुए तहसीलदार द्वारा ओबीसी सर्टिफिकेट को निरस्त करने के दिए गए आदेश को अमान्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को सुने बगैर इस तरह सर्टिफिकेट को निरस्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता लक्ष्मी कंवर की ओर से अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को जारी ओबीसी सर्टिफिकेट को तहसीलदार गडरारोड, बाड़मेर ने गत 9 जनवरी को आदेश जारी कर निरस्त कर दिया। अधिवक्ता ने कहा कि तहसीलदार ने गुप्त आदेश द्वारा याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना ही निरस्त कर दिया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामपाल बनाम हरियाणा राज्य के निर्णय की प्रति भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की। जबकि प्रतिवादी के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता जारी किए गए ओबीसी सर्टिफिकेट के लिए पात्र नहीं थी। आदेश में सुधार हमेशा स्वीकार्य है, इसलिए तहसीलदार द्वारा पारित किया गया आदेश गलत नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस संगीत लोढ़ा ने कहा कि ओबीसी सर्टिफिकेट निरस्त करने से पहले तहसीलदार ने याचिकाकर्ता को सुनने का अवसर नहीं दिया। जस्टिस लोढ़ा ने याचिका को स्वीकार करते हुए तहसीलदार द्वारा जारी आदेश को अमान्य घोषित कर दिया।

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