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बाड़मेर, स्वच्छ भारत मिशन कार्यशाला आज,वेस्ट मैनेजमेंट गुरू सी.श्रीनिवासन आएंगे

- अंबिकापुर शहर की तर्ज पर बाड़मेर मंे कचरा प्रबंधन सालिड एंड लिक्विट वेस्ट मैनेजमेंट की तैयारी
बाड़मेर, 10 अगस्त। पूरे देश मंे कचरा प्रबंधन सालिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट मंे बेहतरीन कार्य के लिए सुर्खियांे मंे आए अंबिकापुर शहर की तर्ज पर बाड़मेर एवं बालोतरा शहर मंे कचरा प्रबंधन की रूपरेखा तैयार होगी। इसको लेकर वेस्ट मैनेजमेंट गुरू सी.श्रीनिवासन शनिवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर भगवान महावीर टाउन हाल मंे दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाली कार्यशाला के दौरान वेस्ट मैनेजमंेट के विविध पहलूआंे से रूबरू कराएंगे। अंबिकापुर समेत विभिन्न शहरांे मंे इनकी देखरेख मंे कचरा प्रबंधन कार्य योजना की क्रियान्विति की गई थी।

जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते ने बताया कि भगवान महावीर टाउन हाल मंे शनिवार को दोपहर 3 बजे स्वच्छ बाड़मेर अभियान के तहत कार्यशाला आयोजित होंगी। इसमंे इंडियन ग्रीन सर्विस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सी.निवासन स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन के बारे मंे प्रशिक्षण देंगे। इस दौरान जन प्रतिनिधियांे सांसद, विधायक, प्रधान, नगर परिषद के सभापति, वार्ड पार्षद, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य, गौशालाआंे, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियांे, समाजसेवियांे, कंपनियांे, उद्योगपतियांे, विभिन्न सामाजिक संगठनांे के प्रतिनिधियांे, भामाशाहांे, समस्त सरकारी एवं निजी विद्यालयांे के प्राचार्य एवं स्टाफ, प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया के प्रतिनिधियांे, विभागीय अधिकारियांे, एनसीसी, स्काउट, एनएसएस, ई-मित्र संचालकांे, होटल व्यवसायियांे, निजी चिकित्सालयांे के प्रतिनिधियांे एवं गणमान्य नागरिकांे को आमंत्रित किया गया हैं। उन्हांेने बताया कि बालोतरा शहर मंे 13 अगस्त को स्वच्छ बालोतरा अभियान के तहत कार्यशाला आयोजित होगी। जिला कलक्टर ने अधिकाधिक लोगांे से इस कार्यक्रम मंे शामिल होकर बाड़मेर शहर के विकास मंे भागीदारी बनने की अपील की है।

कैसे होता है अंबिकापुर मंे कचरा प्रबंधनः केंद्रीय नगरीय निकाय मंत्रालय भारत सरकार एवं स्वच्छ भारत मिशन ने अंबिकापुर का चयन बेहतर कचरा प्रबंधन वाले शहर के रूप में किया है। पूरे देश में कचरा प्रबंधन सॉलिड एण्ड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट में बेहतर कार्य के लिए सात शहरों का चयन किया गया है ,जिनमें अंबिकापुर का कचरा प्रबंधन को सबसे बेहतर है। अंबिकापुर शहर के अधिकाशं वार्डों में एसएलआरएम सेंटरों की स्थापना हो चुकी है और सैकड़ों महिलाओं का समूह कचरा प्रबंधन के कार्य में लगा है। अंबिकापुर मंे तीन वक्त डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जाता है। ठोस और द्रव्य कचरों को एसएलआरएम सेंटरों में अलग-अलग किया जाता है। साथ ही बड़े पैमाने पर जमा इस कचरे, जिनमें प्लास्टिक, लोहा एवं अन्य बिक्री योग्य सामग्रियां होती है, को नीलाम कर महिला समूहों को आय का बड़ा जरिया बना दिया गया है। इस कार्य को देखने के लिए विभिन्न नगरीय निकायों से जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी लगातार आ रहे हैं और अपने नगरीय निकायों में इसे लागू कर रहे हैं। अंबिकापुर शहर में कचरा प्रबंधन के कार्य की शुरूआत तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर श्रीमती ऋतु सैन की पहल पर सिनेस्टार आमिर खान के धारावाहिक सत्यमेव जयते फेम सी.श्रीनिवासन के देखरेख में किया गया था। अंबिकापुर के साथ गुजरात के सूरत, कर्नाटक के बैंगलोर, मैसूर, पंजाब के मोहाली, महाराष्ट्र के पुणे, नवी मुंबई, शोलापुर का नाम भी बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए शामिल है।

अंबिकापुर मॉडल बदल सकता है बाड़मेर की तस्वीर
बाड़मेर, 11 अगस्त। अंबिकापुर का कचरा प्रबंधन मॉडल आज पूरे देश में चर्चा में है। जबकि आज बाड़मेर एवं बालोतरा शहर से निकलता सॉलिड वेस्ट का प्रबंधन बड़ी चुनौती बना हुआ है। घरों एवं दुकानों से निकलते कचरे को उठाने के लिए यदि छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर का मॉडल अपना लिया जाए तो हमारा शहर भी साफ एवं सुंदर हो सकता है। इसके मददेनजर बाड़मेर जिला प्रशासन नवीन पहल करने मंे जुटा है। हालांकि इसमंे शहरवासियों की जागरुकता एवं सहभागिता जरूरी है।

सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से अंबिकापुर निगम में सफाई के साथ कमाई भी हो रही है। स्वच्छ भारत मिशन में मैसूर के बाद अब देश में अंबिकापुर नगर निगम के सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की चर्चा हैं। छत्तीसगढ़ में बीते साल शहरों में साफ-सफाई के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन जैसी योजना शुरू की गई और इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने बैटरी चलित रिक्शा पर करोड़ों रुपए खर्च किए, लेकिन अंबिकापुर निगम ने अलग मिसाल पेश की और शहर से रोज निकलने वाली गंदगी एवं कचरे के निपटारे के लिए लिए बीड़ा उठाया। तत्कालीन कलेक्टर ऋतु सेन ने इसके लिए आमिर खान के धारावाहिक सत्यमेव जयते से चर्चा में आए सी. श्रीनिवासन सहयोग लिया और अंबिकापुर के 48 वार्डों से निकलने वाले कूड़े-कचरे के लिए सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम शुरू हुआ।

स्वच्छता,जल संरक्षण और हरियाली का संदेशः अंबिकापुर में जिस स्थान पर कंचरा डंप किया जा रहा था, वहां अब सेनेटरी पार्क के जरिए स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण को हरा-भरा रखने का संदेश दिया गया है। इसमें अपशिष्ट पदार्थों को अलग किया जा रहा है। वेस्ट रिसोर्सेस के टर्सरी सेग्रिगेशन से कई वस्तुएं रिसाइक्लिंग कर उपयोगी बनाई जाती है। मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए श्रेडर मशीन लगाई गई है। इसके अलावा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण बायो गैस तैयार कर रहा है। रूफ वाटर हार्वेस्टिंग एवं वर्षा जल संचयन मॉडल का भी निर्माण किया गया है।

ऐसे काम करता है अंबिकापुर मॉडलः महिलाओं का समूह वार्डों से रोजाना निकलने वाले कचरे को अलग-अलग एकत्र करता है। इसके लिए लोगों के घरों में जाकर हर सुबह रिक्शा से कचरा लाया जाता है, उसके बाद सूखे और गीले कचरे की छटाई की जाती है। कूड़े के ढेर से कबाड़ एवं ठोस कचरों की बिक्री की जाती है और गीले कचरे से जैविक खाद तथा गैस बनाकर सप्लाई की जाती है। अंबिकापुर मंे वार्डों में ही एसएलआरएम सेंटर में एकत्र कर इसकी ग्रेडिंग की जाती है। यहां लोगों से गीला एवं सूखा कचरा अलग- अलग लिया जाता है। रिक्शा में दो बाक्स बने होते है। उसके बाद एसएलआरएम सेंटर में डिलीवरी की जाती है। अंबिकापुर मंे महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर कचरे की परिभाषा बताई गई और इसके निपटारे के लिए ग्रेडिंग का तरीका भी विस्तार से सिखाया गया।

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