बाड़मेर। आवारा पशुओं को गोशालाओं को सुपुर्द करें प्रशासन


बाड़मेर। आवारा पशु चुनौती बनते जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से आवारा पशुओं की समस्या के निदान के लिए कोई पहल नहीं किए जाने से समस्या बढ़ती जा रही है। लोग परेशान और सहमे हुए हैं। बुधवार को एक शव यात्रा में घुसे आवारा सांड के हमले में दो जने बुरी तरह घायल हुए।जिसमे एक बुजुर्ग बांक सिंह की स्थति गंभीर होने के कारण उन्हें जोधपुर रेफर किया गया तो दूसरे युवा छोटू सिंह पंवार के काफी गंभीर चोट लगी हैं।इस हादसे से पूर्व भी आवारा पशुओं के हमले में बाड़मेर शहर में कई जाने जा चुकी हैं।जब जब हादसे होते है लोग नगर परिषद को कोसना शुरू करते हैं।बाड़मेर में एक दर्जन गो शालाए हैं जिन्हें सरकारी अनुदान भी मिलता हैं।जिला प्रशासन को कठोर निर्णय लेकर बाड़मेर के आवारा पशु इन गो शालाओं को सुपुर्द कर देना चाहिए।गो शालाए मात्र दुधारू पशु रखते हैं।क्या गो शालाए संचालित करने वाली संस्थाओं का दायित्व नही की आवारा गो धन का भी पालन करे।नगर परिषद को कांजी हाउस के लिए बार बार कहा जाता हैं सरकारी नियम अनुसार कांजी हाउस में आवरा पशु अधिक से अधिक सात दिन रख सकते है।सात दिन में उड़ाका मालिक न आये तो उसे नीलाम करने का प्रावधान हैं।कांजी हाउस आवारा पशुओं के लिए अस्थायी व्यवस्था हो सकती हैं।स्थायी नही।ऐसे में जिला प्रशासन को कठोर कदम उठा कर आवारा पशु रखने की जिम्मीदरी गो शालाओं को देनी चाहिए।सभी गो शालाओं को बराबर पशु दे दिए जाए तो समस्या का समाधान हो जाये।

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