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बाछड़ाऊ । चातुर्मास आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है- अनंतदर्षना
बाछड़ाऊ । कुशल भवन के प्रांगण में चलने वाली वीतराग वाणी में प्रवचन का शुभारंभ वंदनपाठ से किया गया। साध्वी अनन्तदर्शनाश्री जनसमुह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन पाकर बचपन को हंसी ठिठोली में खो दिया, तरुणावस्था में कामकाज में गवा दी वृद्धावस्था में जब कुछ हाथ में ना रहा तो प्रभु याद आये। 

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अनंतकाल से हमारी आत्मा इसी प्रकार की प्रकृृति में परिभ्रमण करती हुई 4 गति 84 लाख जीवायोनि में भटक रही हैं। इस भटकती हुई आत्मा का कैसे विकास हो और श्रावक कैसे अपने श्रावकाचार को जानकर श्रावक बनने का अधिकार प्राप्त करें। इस लक्ष्य से चातुर्मास के अंतर्गत साधु साध्वी भगवन्त चार मास एक स्थान पर स्थिर रहते हैं। उन्होने कहा कि चातुर्मास एक आराधना करने का महान आलम्बन है। आत्मोध्यान की विशिष्ट क्रियाओं का उपक्रम है। एक प्रकार का आध्यात्मिक शिविर है जीवन परिवर्तन के संस्कारो की विशिष्ट प्रकिया के साथ आध्यात्मिक संस्कारो का नया बीजारोपण करने का अनमोल अवसर है चातुर्मास। आत्मा की समीपता को प्राप्त करने का सशक्त त माध्यम है चातुर्मास। आत्मा के अनादि कालीन कषायों को दुर्बल करने के लिए चातुर्मास आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। साध्वी श्री ने फरमाया की इस संसार के भवभव के बंधन से मुक्त होने के लिए तन से ही नहीं अपितु मन से तप जप धर्म आराधना करना अतिआवश्यक है बीना तप जप के संसार मे जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना नामुमकिन है। प्रवचन के अंत में महिलाओं व पुरुषों को प्रवचन के आधारित प्रश्न पुछे जाते है और विजेता को उपहार प्रदान किये जाते है। जैन श्री संघ बाछडाऊ के अध्यक्ष प्रकाष मालू व विनित मालू ने बताया कि दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक दैनिक चलने वाले महिलाओं के शिविर में साध्वी अनन्तदर्शना दैनिक विभिन्न विशय कन्या भु्रण हत्या नही चलेगी,बेटी नारायणी है,बेटी नही तो बहु कहा से लाआंेगे,आओ रिश्तों को महकाएं जीवन बगिया महकाये, मकान नही घर बनायें, पति-पत्नी का रिश्ता बडा अनमोल, रिश्तों का निचोड़ सहित कई विशयों पर षिविर मंे चर्चा की जाती है। स्वरूप भन्साली ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन 3 से 4 बजे तक चलने वाले बालिकाओं के शिविर में साध्वीश्री द्वारा जैन आगम पढाए जा रहे है जिसमें स्वाध्याय कराकर अंत के 10 मिनट मे प्रशनोतर पुछे जाते हैं और रात को 9 बजे से 10 बजे तक चलने वाले प्रतिदिन पुरुषों की क्लास में स्वाध्याय कराकर व श्रावक के नियमों को बताया जाता है। भन्साली ने बताया कि प्रतिदिन आयंम्बिल, सांकली,अट्ठम (तेला, सिद्धितप आदि चल रहे हैं।

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तपस्वीयों के अभिनन्दन में बडी सांझी का आयोजन-तपस्वीयों के अभिनन्दन स्वरूप कुशल भवन के प्रांगण में रात्रि को बड़ी सांझी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने तपस्वीयों के स्वागत में स्तवन गाये। जैन श्री संघ के अध्यक्ष ने बताया कि 01 उपवास से लेकर 08 उपवास तक की तपस्या युवाओं द्वारा कि जा रही है।

पयुशर्ण की तैयारियां जौरो पर- प्रकाष मालू ने बताया कि पयुशर्ण पर्व को लेकर तैयारियां की जा रही है। 19 अगस्त से प्रारम्भ होने वाले जैन धर्म महापर्व को लेकर बाछडाऊ में विषेश तैयारियां की जा रही है। उन्होने बताया कि 08 दिनो तक होने होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जा रही है। तपस्या के लिए नाम लिखे जा रहे है,सबसे अच्छी बात ये है कि तपस्या को लेकर युवा वर्ग में ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होने बताया कि साध्वीवर्या की निश्रा में प्रवचन का प्रकाष चहुं ओर दिखाई देने लगा है।


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