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बाड़मेर  बरियाड़ा तिहरा हत्याकाण्ड, पुलिस थाना शिव, बाड़मेर का पर्दाफाश




डाॅ. गगनदीप सिंगला, पुलिस अधीक्षक, जिला बाड़मेर ने बताया कि दिनांक 06.06.2017 को ग्राम बरियाड़ा पुलिस थाना शिव में हुए तिहरे हत्याकाण्ड में 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।

घटनाक्रम:-

दिनांक 06.06.2017 को श्री विशनाराम पुत्र श्री खेमाराम जाट उम्र 87 वर्ष निवासी फतेहपुरा, बरियाड़ा पुलिस थाना शिव जिला बाड़मेर ने एक रिपोर्ट दर्ज करवाई कि मैं घर कार्य हेतु रिश्तेदारी में 2 दिन पूर्व ग्राम बालासर गया हुआ था। घर पर मेरा पुत्र नगाराम उम्र 60 वर्ष पत्नी मिरगोंदीवी उम्र 85 साल व पुत्र वधु भूरीदेवी उम्र 56 साल थे जिन्हें अज्ञात लोगों ने रात को सोये हुए के साथ मारपीट कर उलटे लटकाकार बुरी तरह से पीटकर मार डाला। मेरी पत्नी आंगन में बंधी पड़ी थी, मेरी पुत्रवधू छपरे में बंधी हुई थी और जिसके दोनों पैर उपर बंाधे हुए थे तथा मुह पर तौलिया बांधा हुआ था। नगाराम को दूसरे छपरे में हाथ व पांव से बांधा हुआ था। तीनों मरे हुए थे। इस सम्बन्ध में पुलिस थाना शिव पर प्रकरण संख्या 72 धारा 458, 302 भा.दं.सं. में दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया।

मामले की गम्भीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रामेश्वरलाल तथा वृताधिकारी बाड़मेर श्री ओमप्रकाश उज्ज्वल के नेतृत्व में श्री देवीचन्द ढाका, निरीक्षक पुलिस थानाधिकारी नागाणा, श्री धन्नापुरी गोस्वामी थानाधिकारी ग्रामीण, श्री जयराम थानाधिकारी सदर, श्री मानाराम गर्ग, थानाधिकारी शिव, श्री पुष्पेन्द्र वर्मा निरीक्षक पुलिस, श्री रणवीरसिंह थानाधिकारी महिला थाना, श्री हनुमानराम उप निरीक्षक व श्री मोहनलाल उप निरीक्षक को शामिल कर टीमों का गठन किया गया एवं त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिये गए। श्री पन्नाराम सहायक उप निरीक्षक के नेतृत्व में सर्वश्री महिपालसिंह हैड कानि., मेहाराम कानि., प्रेमाराम कानि व भूपेन्द्रसिंह कानि. को तकनीकी सहायता हेतु शिव मुख्यालय रखा गया।

वारदात का पर्दाफाश

घटना की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं वृताधिकारी तथा गठित टीमों ने घटना स्थल का गहनता से निरीक्षण कर सभी पहलुओं का सुक्ष्मता से अध्ययन कर जांच प्रारम्भ की। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि मृतका भूरीदेवी के किसी से भी अच्छे सम्बन्ध नहीं थे तथा उसके खेत के पड़ोसी जब खेत में आते तो गाली गलोज किया करती थी। नगाराम मानसिक रूप से विक्षिप्त था तथा घर पर ही रह रहा था। घटना स्थल के पड़ोसी नवला राम के पुत्र वीरमाराम तथा टीकमाराम का पुत्र गोमदराम उर्फ भुट्टा घटना से 4 दिन पहले खेत की सफाई करने के लिए अपने पुस्तैनी गाॅव सनावड़ा से बरियाड़ा आए थे जिनका मृतक परिवार के साथ खेत शामिलाती होने से बंटवारा करवाने हेतु दिनांक 03.06.2017 को सम्बन्धित पटवारी से सम्पर्क किया था तथा इस सम्बंध में इन्होंने विशनाराम से भी बात की थी। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर टीम द्वारा विरमाराम तथा गोमदराम से गहन पूछताछ करने पर घटना करना स्वीकार किया जिस पर इन्हें हिरासत में लिया गया।

तरीका वारदात

प्रारम्भिक पूछताछ में सामने आया कि दिनांक 02.06.2017 को सांय काल अपराधी विरमाराम व गोमदराम उर्फ भुट्टा द्वारा अपने खेत में सफाई (सूड़) की जा रही थी तभी मृतका भूरी इनके पास खेत की मेड़ पर आई तथा इन दोनों को गालियां निकाली एवं कहा कि मेरे खेत के सेढे पर सूड़ करने की जरूरत नहीं है, चले जाओ। जिस पर दोनों काम बन्द कर अपने खेत में बने कमरे चले गए। भूरी द्वारा भद्दी-भद्दी गालियां निकालने की बात को इन्होंने मन में बिठा दिया और दोनों ने भूरी को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया। दिनांक 04.06.2017 को विरमाराम तथा गोमदराम ने रामजी का गोल पहुंच वारदात को अंजाम देने की रणनीति बनाई। अपना छुपाव करने के उद्देश्य से गोमदराम ने अपने मित्र गोमाराम पुत्र श्री साजनराम जाट निवासी मीठड़ा खुर्द से अपनी मोटरसाईकिल की लाईट खराब होने का बहाना बनाकर अपनी बहिन के यहाॅं धनाउ जाने का कहकर उससे मोटरसाईकिल ली। कस्बा धोरीमन्ना से घटना को अंजाम देने के लिए रस्सी, डंडे तथा मिरची खरीदी एवं रात में अपना बचाव करने के लिए काले कलर की बनियान तथा नये चप्पल खरीदे एवं रास्ते में शराब पीते हुए बाड़मेर शिव होते हुए रात्रि करीब 2.00 बजे विशनाराम के घर पहंुचे। विशनाराम के घर घुसते ही भूरी देवी के चिल्लाने पर उसको गोमदराम द्वारा दबोच दिया। विरमाराम द्वारा नगाराम को बांधकर उसके साथ मारपीट की तथा उसके हाथ बांध दिये। उसके पश्चात् भूरीदेवी के अति प्रतिक्रिया करने पर विरमाराम व गोमदराम दोनों द्वारा मुंह बांधकर, टांगे बांधकर छपरे से लटकाकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। उसके बाद मिरगों देवी के खड़े होने पर उसे धक्का देकर गिराकर उसके हाथ बांध दिये ताकि यह उनको खोल न पाए। इस घटना के बाद पास से गुजरने वाले रास्ते से कोई वाहन आता दिखाई देने पर दोनों वहंा से शिव, मोखाब से बायतु पहुुंच गये। वहाॅं से विरमाराम पचपदरा चला गया तथा गोमदराम बाड़मेर धोरीमन्ना होते हुए रामजी का गोल पहुंच गया। रामजी का गोल पर वह पूरे दिन बजरंग ढाबा पर बैठा रहा।

टीम के सदस्य -

गणपतसिंह हैड कानि

गोरधनराम हैड कानि.

वीरमखाॅं कानि.

विरेन्द्रकुमार चैधरी कानि.

हरदानराम कानि.

कंवराराम कानि.

करणसिंह कानि.

रामचन्द्र कानि.

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