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जैसलमेर ।70 करोड़ की योजना के बाद भी नहीं दूर हुआ शहर का जल संकट 
नहीं बना रोजाना जलापूर्ति का सिस्टम
हर रोज पानी की सप्लाई बनी मृग मरीचिका
- आनन्द एम.वासु -




जैसलमेर । जिले में पानी के अथाह भंडार, यहां तक नहर भी जिससे जोधपुर को पानी सप्लाई फिर भी इस शहर सहित जिलेभर में पानी की किल्लत लोगों के गले नहीं उतर रही है । अभी तक यहां रोजाना जलापूर्ति का सिस्टम नहीं बन पाया है जबकि पानी की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आरयूआईडीपी की 70 करोड़ की योजना 5 वर्ष पूर्व पूर्ण हो चुकी है । आरयूआईडीपी की यह योजना कारगर साबित नहीं हुई है । शहरवासियों को हर रोज पानी की सप्लाई एक मृग मरीचिका बनी हुई है । हाल ही समय में अभी तक औसतन चार से पांच दिन के अंतराल में जलापूर्ति हो रही है ।

5 वर्ष पूर्व एक उम्मीद जगी थी कि शहरवासियों की सबसे बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ । यहां सर्दी हो या गर्मी पानी का संकट हमेशा ही रहता है । सर्दी के मौसम में जहां पानी की खपत कम होने से समस्या कम रहती है वहीं गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए हाहाकार मचा रहता है । हालात यह है कि 5 से 6 दिन के अंतराल में शहरवासियों को केवल एक घंटे ही जलापूर्ति हो रही है । लेकिन ये समस्याएं अभी बरकरार है और पानी के बिना लोगों के हाल बेहाल है । जबकि इस समस्या के निराकरण के लिए आरयूआईडीपी की 70 करोड़ की योजना फेल साबित हो रही है । शहरवासियों को हिमालय का पानी नहीं मिला है । मोहनगढ़ स्थित नहर से जैसलमेर शहर में स्थित गजरूप सागर पम्प हाउस तक बिछाई गई पाइप लाइन से श्हार में जलापूर्ति के लिए लगी सभी टंकियों तक पानी नहीं पहुंच रहा है ।

गौरतलब है कि आरयूआईडीपी की मोहनगढ़ से जैसलमेर तक लाइन बिछाने की 70 करोड़ की योजना 5 वर्ष पूर्व पूरी हो चुकी है और जोधपुर विद्युत वितरण निगम लि. की टीम की ओर सर्वे कर बिजली का कनेक्शन भी दिया गया लेकिन नियमित जलापूर्ति अब भी नहीं हो रही है ।
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मोदी का वादा बना झांसा ?
देश के 52 फीसदी किसानों परिवारों पर कर्ज
- आनन्द एम.वासु -
मोदी सरकार ने वादा किया, 2022 तक किसानों की इनकम डबल जबकि
एनएसएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में यदि अगर आमदनी में इजाफा नहीं हुआ तो किसानों के लिए परेशानियां और ज्यादा बढ़ जाएगी

गुजरात में लगातार 20 साल तक शासन करने वाले नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को केन्द्र में सत्ता दिलाई जो देश के लिए नहीं वरन् विदेशों में भी एक आश्चर्यजनक सत्ता परिवर्तन माना गया । मोदी वाक्चातुर्य से 10 साल यानि 2024 तक शासन चलाने की मुहिम छेड़ रखी है । मोदी सरकार ने वादा किया है कि वह 2022 तक किसानों की इनकम डबल कर देगी । जबकि एनएसएसओ ( नेशनल सैम्पल सर्वे आॅफिस ) की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में यदि अगर आमदनी में इजाफा नहीं हुआ तो किसानों के लिए परेशानियां और ज्यादा बढ़ जाएगी ।

देश के किसान आज सड़क पर हैं और खेती की हालत बेहद खराब है । किसान आंदोलन कर रहे हैं । नेशनल सैम्पल सर्वे आॅफिस की रिपोर्ट के अनुसार देश के 52 फीसदी किसानों परिवारों पर कर्ज हैं । ये किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं । अगर इनकम नहीं बढ़ी तो आने वाले दिन उनके लिए और परेशानी वाले हो सकते हैं । इन किसानों का काफी पैसा कर्ज चुकाने में चला जाता हैं । ऐसे में उनका अपना परिवार पालना मुश्किल हो रहा है ।

एनएसएसओ के डाटा के अनुसार, किसानों को अपने उत्पादों को बेहतर दाम न मिलने के पीछे कारण है थोक मूल्य में गिरावट । आंकड़े बता रहे हैं कि साल 2014 से 2017 तक बीच गेंहू, चावल और दलहन जैसी प्रमुख फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी महत 12 फीसदी ही बढ़ा है । वहीं, सब्जियों के थोक मूल्य 70 फीसदी तक घट गए । इससे साफ है कि किसानोें की इनकम नेगेटिव ग्रोथ की ओर है ।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को राहुल साथ ले कर नहीं चलते या 
वरिष्ठ कांग्रेसी उनके साथ नहीं जा रहे ?
- आनन्द एम.वासु -
20 साल तक गुजरात में लगातार शासन करने वाले नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में जब बीजेपी ने जब लोकसभा चुनाव लड़ने की योजना बनाई तो कांग्रेस की मती मारी गई थी कि उसने तुलनात्मक रूप से बेहद कमजोर कड़ी की अगुवाई में चुनाव लड़ा और मुंह की खानी पड़ी । उसके बाद भी कांग्रेस को गांधी के अलावा किसी अन्य चेहरा नहीं दिखाई दिया और लगातार चुनाव हारती गई जिसमें देश का सबसे बड़ा राज्य यूपी में कांग्रेस की बुरी गत हुई । अब भी कांग्रेस पार्टी में राहुल अकेले पता नहीं किस रणनीति के तहत् मुद्दों को भुनाने में लगे है ।

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