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अजमेर,मजबूत विद्यालय प्रबन्धन समिति ही स्कूल में शैक्षिक गुणवत्ता का आधार - प्रो. देवनानी
शिक्षा राज्य मंत्राी ने किया पुस्तक का विमोचन, स्कूलों में बेहतर प्रबन्धन का आधार बनेगी यह पुस्तक
अजमेर, 14 मई। शिक्षा एवं पंचायतीराज राज्य मंत्राी प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि स्कूलों में विद्यालय की भौतिक और शैक्षिक गतिविधियों को सशक्त करने के लिए गठित विद्यालय प्रबन्धन समिति अगर मजबूत है तो निश्चित रूप से उस स्कूल की शैक्षिक गुणवत्ता भी सुदृढ़ होगी। यह समिति सिर्फ शिक्षक एवं अभिभावकों का समूह ही नहीं बल्कि स्कूल की प्रत्येक गतिविधि को आगे बढ़ाने और ऊंचाई की ओर ले जाने वाली संस्था है। हमें इस समिति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहना चाहिए।

शिक्षा एवं पंचायतीराज राज्य मंत्राी प्रो. देवनानी आज बस स्टैण्ड के सामने शैक्षिक प्रोैद्योगिकी विभाग परिसर में विभाग द्वारा तैयार शोधपरक पुस्तक “विद्यालय की प्रभावशीलता एवं गुणवत्ता के संदर्भ में विद्यालय प्रबन्धन समिति की भूमिका का अध्ययन“ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविदों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यालयों के लिए गठित प्रबन्धन समितियांें को राज्य सरकार ने पूरी तरह सशक्त किया है। यह समितियां स्कूल के भौतिक विकास एवं शैक्षिक उन्नयन के प्रति भी जागरूक है। समितियों में शामिल अभिभावकों को चाहिए कि वे विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि में शामिल हों। समय समय पर शैक्षिक विकास के लिए अपने सुझाव भी दें।

उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में प्रबन्धन समितियों का गठन सत्रा के प्रारम्भ में ही हो जाना चाहिए। संस्था प्रधान औपचारिक रूप से सदस्यों को जोड़ने के बजाए सक्रिय सदस्यों को जोड़ें। समिति में कैश बुक, पासबुक, कार्यकारी बैठक का रजिस्टर एवं पत्रावलियां आदि अलग से संधारित की जाए। बैठक में विद्यार्थी हित के लिए संचालित राज्य सरकार की योजनाएं एवं अन्य लोक कल्याणकारी योजनाओं पर आवश्यक रूप से चर्चा की जाए। सर्व शिक्षा अभियान एवं राज्य सरकार से प्राप्त विभिन्न प्रकार के अनुदानों की वार्षिक व्यय योजना समिति में सदस्यों के साथ विचार कर तय की जाए।




प्रो. देवनानी ने कहा कि एसएफजी, मरम्मत राशि, मिड डे मील राशि एवं स्वच्छता राशि से संबंधित कार्यो एवं भुगतान पत्रों आदि को सत्रा की अंतिम बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों के सम्मुख आवश्यक रूप से प्रस्तुत किया जाए। विद्यालयों को भामाशाहों के लिए आयकर में छूट संबंधित प्रक्रिया को अपनाने के लिए विद्यालयों को यथाशीघ्र पंजीयन कराना चाहिए। क्षेत्राीय जन प्रतिनिधि का अधिक से अधिक सहयोग विद्यालय विकास के लिए लिया जाए। विद्यालय यह सुनिश्चित करें कि एसएमसी की बैठक अमावस के दिन ही हो ताकि ज्यादा से ज्यादा अभिभावक ज्यादा से ज्यादा भाग ले सकें। स्वतंत्राता एवं गणतंत्रा दिवस पर विद्यालय में अधिकतम आर्थिक एवं संसाधनों का सहयोग करने वाले सदस्य एवं भामाशाहों को सम्मानित भी किया जाए।

कार्यक्रम में उपनिदेशक श्री जीवराज जाट, श्री दीपक जौहरी, श्री रामनिवास गालव, श्रीमती दर्शना शर्मा, श्री अमित शर्मा सहित अन्य शिक्षाविद् एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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