दया व करूणा बगैर व्यक्ति अंधा - मुनि सम्यकरत्नसागर
बाड़मेर, 6 जनवरी। जब पाप रूपी लक्ष्मी का हमारे जीवन में प्रवेश करती है तो मन अभिमानी हो जाता है व उसका ह्दय कठोर हो जाता है। पुण्य से प्राप्त लक्ष्मी आती है तो मन नम्र हो जाता है और ह्दय उदार बनता है। ये बात प्रखर प्रवचनकार मुनि सम्यकरत्नसागर म.सा. ने स्थानीय जैन धर्मशाला में कही।

मुनि सम्यकरत्नसागर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो व्यापारी ग्राहक का चेहरा देखकर उसे किस तरह की वस्तु प्रिय है, पसन्द है उसका अनुमान लगा लेता है व ही व्यापारी सफल व्यापारी की श्रेणी में आता है। असफल व्यापारी कभी भी ग्राहक के मनोभावों को नहीं पहचान सकता है। जिसकी आंख में दया व करूणा के भाव नहीं है वो आंख होते हुए भी अंधा है। आंख में दया व करूणा का स्त्रोत बहता है तो उसके आंख नहीं होते हुए भी मानव व इंसान कहलाने का सच्चा अधिकारी कहलाता है।

मुनि श्री ने दया व करूणा का शाब्दिक अर्थ बताते हुए कहा कि दया अर्थात् दूसरों के दुःख को देखकर दुःखी होना दया है। करूणा अर्थात् दूसरों के दोषों को देखकर हित के भाव उत्पन्न होना करूणा है। जो भव्य जीव है उसका लक्षण है कि दुःखी जीवों को देखकर दया का भाव आता है। जिसकी स्तुति करो, जिस स्वामी की भक्ति कर रहे हो, जिस स्वामी का गुणगान कर रहे हो उस स्वामी के गुणों की पहचान होना जरूरी है। जिन शब्दों के माध्यम से महापुरूषों की स्मृति को स्मृति पटल पर लाओ उन शब्दों का सामान्य व विशेष ज्ञान होना जरूरी है। सामान्य ज्ञान तुम्हें नहीं है तो विशेष ज्ञान हो सकता नहीं है। जब तक सामान्य व विशेष ज्ञान नहीं होगा तब तक कहीं भी कभी भी तुम्हारी भक्ति आत्म शुद्धि, आत्म विशुद्धि का कारण बन सकती नहीं है। जैन कुल में जन्म दूनिया की बक-बक सुनने के लिए नहीं बल्कि दूनिया की बकबक बंद करने के लिए हुआ है। एक व्यक्ति का कहा हुआ भी सत्य हो सकता है तथा अबजों लोगों का कहा वचन भी झूठ हो सकता है। देखने की शक्ति जड़ पुद्गल पिंड में नहीं है, देखने की शक्ति तो आत्मा में है। आत्मा की चेतना शक्ति जाने के बाद ये हाड़ मांस का पिंजरा काम नहीं कर सकता है।

जैन श्रीसंघ चैहटन अध्यक्ष हीरालाल धारीवाल ने बताया कि आचार्य श्री के चैहटन प्रवास तक प्रतिदिन प्रातः 9.30 बजे से 10.30 बजे तक प्रवचन, प्रवचन पश्चात् स्वाध्याय, दोपहर में 2 बजे महिलाओ व बालिकाओं के लिए स्वाध्याय कक्षा एवं रात्रि. में 8 बजे पुरूषों के लिए स्वाध्याय कक्षा रहेगी।

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