बुधवार, 18 सितंबर 2013

राजनितिक शाख्श्यत जीवन परिचय किसानो के सच्चे हमदर्द हेमाराम चौधरी







राजनितिक शाख्श्यत जीवन परिचय किसानो के सच्चे हमदर्द हेमाराम चौधरी



श्री हेमाराम चौधरी का जीवन परिचय

बाड़मेर जिले की राजनीती में ध्रुव तारे की तरह चमके हेमाराम चौधरी ने साधारण किसान परिवार में जन्म लेकर राजनीती के शिखर तक का सफ़र तय लिया। किसानो के सच्चे हितेश हेमाराम ने राजनीती जीवन में किसानो का हित सर्वोपरि। रखा आज उनका जीवन परिचय बाड़मेर न्यूज़ ट्रैक के शिकार पर कोलम में दे रहे हें।


सहज, सरल, मिलनसार व्यक्तित्व के धनि चौधरी भावुक, संवेदनशील, सह्रदय इंसान भी हैं। आपने कई आन्दोलनों का सफल नेतृत्व किया. गुढा मालानी तहसील के अकाल पीड़ित किसानों का आन्दोलन हो या शिक्षक आन्दोलन। शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर तो आपने भूख हड़ताल की। फलस्वरूप सैंकड़ों युवाओं को शिक्षक की नौकरी मिली। आप राजनीतिज्ञ होने के साथ अच्छे समाज सेवी भी हैं। कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए चौधरी सदैव किसान एवं पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए समर्पित रहे हैं। आप श्री किसान छात्रावास बाड़मेर के वर्षों से उपाध्यक्ष हैं। जाट चेरिटेबल ट्रस्ट के 1999 से अध्यक्ष रहे। आपकी सहधर्मिणी भीखी देवी तीन बार बायतु भीमजी ग्राम पंचायत की निर्विरोध सरपंच रही हैं।



श्री हेमाराम चौधरी का जन्म 18 जनवरी, 1948 को बाडमेर जिले की बायतु तहसील के ग्राम बायतु भीमजी में स्वर्गीय मूलाराम चौधरी धतरवाल के परिवार में हुआ।

आपने प्रारंभिक शिक्षा गाँव में प्राप्त करने के पश्चात् बालोतरा एवं जोधपुर से जोधपुर विश्वविद्यालय से बी.कॉम, एल.एल.बी. तक शिक्षा अर्जित की।

वर्ष 1971 में श्री चौधरी का चवा के विख्यात अभोणी सारण परिवार की श्रीमती भीखी चौधरी के साथ विवाह हुआ। आपके एक पुत्र व एक पुत्री है। आपके पुत्र वीरेन्द्र चौधरी बीकानेर इंजीनियरिंग कालेज में प्रोफ़ेसर हैं ।

वकालत प्रारंभ की

सन 1973 में आपने बाड़मेर में वकालत प्रारंभ की । युवा वकील चौधरी ने अल्प समय में ही महत्वपूर्ण फैसले करवाकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाली । उस समय के जटिल सीलिंग प्रकरण में आपने किसानों की जोरदार तरीके से पैरवी कर किसानों को न्याय दिलाया ।

राजनीती में प्रवेश

व्यवसाय से वकील एवं कृषक श्री चौधरी 1978 में हुए पंचायत चुनाओं में प्रथम बार वार्ड पञ्च बनकर राजनीति की दहलीज पर पैर रखा । आप 5 बार विधान सभा का चुनाव जीते:

श्री चौधरी वर्ष 1980 में सातवीं विधान सभा के लिए गुढामालानी क्षेत्र (बाडमेर) से सदस्य रहे।
पुन: 1985 में आठवीं विधान सभा के लिए गुढामालानी क्षेत्र से से सदस्य रहे,
1998 में 11वीं विधान सभा के लिए गुढामालानी क्षेत्र से से सदस्य रहे।
2003 में 12वीं विधान सभा के लिए गुढामालानी क्षेत्र से सदस्य रहे।
2008 में तेरहवीं विधान सभा के लिए भी आप गुढामालानी क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं।

श्री चौधरी वर्ष 1980-82 में विधान सभा की प्राक्कलन समिति के, वर्ष 1980-81 व 86-87 में अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के, वर्ष 1982-84 व 86-87 में प्राक्कलन समिति ’’क’’ के, वर्ष 1985-86 में राजकीय उपक्रम समिति के, वर्ष 1987-88 में जन लेखा समिति के सदस्य तथा वर्ष 1999-2002 में विशेषाधिकार समिति के सभापति रहे। श्री चौधरी 14 मई, 2002 से 4 दिसम्बर, 2003 तक गहलोत सरकार में परिवार कल्याण ( स्वतंत्र प्रभार), कृषि राज्यमंत्री रहे हैं।

श्री चौधरी बारहवीं राज्य विधान सभा में मार्च, 2004 तक राजकीय उपक्रम समिति के, मार्च से नवम्बर, 2004 तक पिछडे वर्ग के कल्याण संबंधी समिति के तथा नवम्बर, 2004 से 05 तक याचिका समिति के सभापति भी रहे हैं। श्री चौधरी केन्द्रीय सहकारी बैंक बाडमेर के अध्यक्ष तथा जिला कांग्रेस (आई) कमेटी के महामंत्री भी रहे हैं। आप जिला स्तर पर राज्य सरकार द्वारा गठित विभिन्न कल्याणकारी समितियों के साथ ग्राम सेवा सहकारी समिति, बायतु भीमजी के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

श्री चौधरी 12वीं राज्य विधान सभा में 23 अक्टूबर, 2007 से प्रतिपक्ष के नेता रहे।

श्री चौधरी को 19 दिसम्बर, 2008 को राजभवन में महामहिम राज्यपाल ने गहलोत मंत्रिमंडल में कबीना मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। आप राजस्व, उपनिवेशन, सैनिक कल्याण विभाग मंत्री के प्रभार में हैं ।

समाज सेवा

श्री चौधरी समाजसेवा, पिछडे व दलित वर्ग की समस्याओं के समाधान के रचनात्मक कार्यों में सदैव सक्रिय रहे हैं। आपने वर्ष 1985 में राजस्थान से भेडों के निष्क्रमण संबंधी मामलों पर उत्पन्न समस्याओं के निराकरण हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति के सदस्य के रूप में विशिष्ट सेवाएं दी हैं।

सहज, सरल, मिलनसार व्यक्तित्व के धनि चौधरी भावुक, संवेदनशील, सह्रदय इंसान भी हैं। आपने कई आन्दोलनों का सफल नेतृत्व किया. गुढा मालानी तहसील के अकाल पीड़ित किसानों का आन्दोलन हो या शिक्षक आन्दोलन। शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर तो आपने भूख हड़ताल की। फलस्वरूप सैंकड़ों युवाओं को शिक्षक की नौकरी मिली। आप राजनीतिज्ञ होने के साथ अच्छे समाज सेवी भी हैं। कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए चौधरी सदैव किसान एवं पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए समर्पित रहे हैं। आप श्री किसान छात्रावास बाड़मेर के वर्षों से उपाध्यक्ष हैं। जाट चेरिटेबल ट्रस्ट के 1999 से अध्यक्ष रहे। आपकी सहधर्मिणी भीखी देवी तीन बार बायतु भीमजी ग्राम पंचायत की निर्विरोध सरपंच रही हैं।

श्री चौधरी की समाज सेवा के साथ कबड्डी, वॉलीबाल व शतरंज आदि खेलों में विशेष अभिरूचि रही है।


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