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अनुभवहीन और कम टैंकरों की कंपनियों को दे दिए क्रूड ऑयल परिवहन के ठेके

राजनीतिक रसूख केयर्न की मिलीभगत | टैंकरों की टेंडर प्रक्रिया ही स
|बाड़मेर
वालों के घेरे में 






क्रूडऑयल चोरी के मामले में पुलिस की जांच दस दिन से केवल टैंकर चालकों के इर्द-गिर्द ही सीमित है। पूछताछ में कई पहलुओं पर खुलासा होने के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। इससे पुलिस जांच पर भी कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। इधर, केयर्न की ओर से तेल परिवहन की टेंडर प्रक्रिया को ताक पर रखकर संबंधित कंपनियों को ठेका दे दिया, जिनके पास तो तेल परिवहन का अनुभव था और ही 30 प्रतिशत खुद के टैंकर थे। इतना ही नही बहुत ही कम दर पर टेंडर जारी किए गए थे, जिसके बाद क्रूड ऑयल के हुए बड़े घोटाले में कई अधिकारियों और तेल परिवहन कंपनियों के नाम सामने आने के बाद अब मामले को रफा-दफा करने के प्रयास में जुट गए है। गौरतलब है कि क्रूड चोरी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कई बार क्रूड तेल चोरी के मामले सामने आए, लेकिन पुलिस और कंपनियों की मिलीभगत से उजागर नहीं हो पाए।

संदेह; 10 दिन से पुलिस जांच टैंकर चालकों तक ही सीमित

ऐसा संभव नहीं, सालों से क्रूड तेल चोरी और अधिकारियों को पता नहीं | क्रूडचोरी का गोरखधंधा करीब एक दशक से चल रहा था। 2003 में जब बाड़मेर से गुजरात रिफाइनरी के लिए तेल परिवहन हो रहा था उस समय भी क्रूड चोरी का मामला सामने आया था। इसे तो पुलिस ने गंभीरता से लिया और ही केयर्न अधिकारियों ने। इसी वजह से सालों से क्रूड चोरी कर सरकार को नुकसान पहुंचाया गया। ऐसा संभव नहीं है कि सालों से क्रूड चोरी कर एमपीटी नागाणा में खाली हो रहे थे, लेकिन अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी।

तेल परिवहन टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल | तेलपरिवहन के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए उसके पास तेल परिवहन क्षेत्र में अनुभव जरूरी है। इसके अलावा तेल परिवहन कंपनी के पास 30 प्रतिशत टेंडर खुद के होना जरूरी है, अगर टेंडर खुद के नहीं है तो उसको टेंडर नहीं दिया जा सकता। ऐसे में जिन कंपनियों को टेंडर दिए गए वो कई तरह के सवालों के घेरे में है। बिना अनुभव और खुद के वाहन नहीं होने के बावजूद टेंडर कैसे दे दिए गए। इतना ही नहीं एक तेल परिवहन कंपनी के खिलाफ तो बाड़मेर, गुजरात सहित कई थानों में क्रूड चोरी अन्य हेराफेरी के मामले दर्ज है। इधर, केयर्न के अधिकारी एपी गौड़ के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में 30 प्रतिशत टैंकर कंपनी खुद के होने चाहिए। नियमों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया को किया गया है।

एक माह पहले पकड़ा था क्रूड से भरा टैंकर, मामला रफा-दफा | दरअसलजून 2017 में आरजे 04 जीबी 0359 नंबर टैंकर को धवा पुलिस चौकी के पास पकड़ा था। उसमें क्रूड भरा हुआ था। जबकि टैंडर पर जीपीएस लगा हुआ होना जरूरी होता है। इसके बावजूद इस टैंकर के पकड़े जाने के बाद मौके पर पहुंचे केयर्न के जांच अधिकारी ने टैंकर में भरे क्रूड को केयर्न का होने से इनकार कर दिया था। ऐसे में सवाल यह है कि बिना जांच के अधिकारी ने यह कैसे पुष्टि कर दी थी कि यह क्रूड केयर्न का नहीं है। वहीं पुलिस ने भी इस मामले को इतना गंभीरता से क्यों नहीं लिया था? अगर मामले का खुलासा होता तो एक माह पहले ही पूरा मामला सामने सकता है। ऐसे में क्रूड तेल की चोरी केयर्न अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं लग रही है। पुलिस और केयर्न निचले स्तर के अधिकारियों को इस गोरखधंधे में फंसा कर बड़े अधिकारियों को बचाने में जुटी हुई है।

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