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बाड़मेर में बाल विवाह के प्रति सब जागरूक हो गए?

संदर्भ जिला प्रशासन की बाल विवाह जागरूकता के प्रति उदासीनता।





बाड़मेर सात दिन बाद अक्षय तृतीया है।।इस दिन सेकड़ो की तादाद में विवाह होने का राज सरकार अंदेशा जाता रही है।बाल विवाह को रोकने के लिए राज्य सरकार शारदा एक्ट की पालना और बाल विवाह से पहले जागरूकता के विभिन कार्यक्रम आयोजित करने के दिशा निर्देश जारी कर चुके है।इसकी पालन में बाड़मेर को छोड़ सभी जिलों में जागरूकता के कार्यक्रम और जिला प्रशासन की चेतावनियां अखबारों की सुर्खियों में आ चुकी है।मगर लगता है बाड़मेर जिला प्रशासन इस सामाजिक मुद्दे की अनदेखी कर रहा हैं।।जिला प्रशासन की और से नजे तो जागरूकता के कोई प्रयास किए जा रहे न ही को प्रेस नोट जारी हुए।।कहने को औपचारिकता निभाते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक बैठक अवश्य हो चुकी हैं।प्रति वर्ष जिला प्रशासन ऐसे जागरूकता के प्रयास करता हैं।टीमो का गठन होता है।सर्वविदित है पश्चिमी राजस्थान खासकर बाड़मेर जिले में अक्षय तृतीया को अनबूझे सावे के तहत सेकड़ो विवाह होते है जिसमे बाल विवाह भी शामिल है।इस बार इस सामाजिक मुद्दे पर जिला प्रशासन की उदाशीनता समझ से परे हैं।।आखिर इस ज्वलन्त मुद्दे पर जिला प्रशासन चुप क्यों।साथ ही बड़ी बड़ी बातें करने वाले स्वयं सेवी संगठन भी मौन धारण किये हैं।बिना बजट एन जी ओ काम नही करते।।जिला कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा संवेदनशील अधिकारी हैं।इस संवेदन शील मुद्दे पर उन्हें पहल करनी चाहिए।।ग्रामीण क्षेत्रो में विवाहों की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। यकीनन शारदा एक्ट की धज्जियां उड़ेगी।जिला प्रशासन का कुछ तो दायित्व बनता हैं।।

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