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धरातल पर काम,कैनवास पर कूची ,यहाँ दोनों चलते है

-सिवाना प्रधान गरिमा की चित्रकारिता है मशहूर

-जिले की पहली पोस्टग्रेजुएट महिला प्रधान

बाड़मेर

कहते है एक फनकार अपनी कूची से केनवास पर तो सुनहरे रंग भर सकता है लेकिन उसी फनकार के हाथ में कूची की जगह राजनीती की कमान दे जाए तो उस फनकार के चुनोती आना लाजमी है। रेतीले बाड़मेर के सिवाना में प्रधान पद पर चुनी गई युवा प्रधान ना केवल जिले की पहली पोस्ट ग्रेजुएट प्रधान है वही फ़ाईन आर्ट में कई पुरुस्कार भी जीत चुकी है। अब तक जवाहर कला केंद्र में तीन दर्जन के करीब चित्रप्रदर्शनी लगा चुकी युवा प्रधान अपने इलाके में बालिका शिक्षा और महिला एवं बाल विकास के लिए कई बेहतरीन कार्य कर रही है।

सतरंगी कैनवास पर चलती मखमली कुंची,कल्पनाएं जब आकार लेती है तो आँखे खुद ब खुद ठहर सी जाती है।यह चित्रकार पेशेवर नही शौकिया है और इसी शौक के चलते शोहरत पाई लेकिन आज इनके चर्चे किसी और बात पर है।यह है बाड़मेर के सिवाना पंचायत समिति की प्रधान गरिमा राजपुरोहित।बाड़मेर जैसे पिछड़े इलाके की पहली पोस्ट ग्रेजुएट प्रधान का तमगा हासिल करने के साथ साथ चित्रकारिता के हुनर के चलते कई पुरस्कार अपनी झोली में डाल चुकी प्रधान गरिमा राजपुरोहित मूलतः बीकानेर से है और तालीम भी वही हुई।बीकानेर से बाड़मेर शादी होने के बाद यहाँ बसने के बाद अपनी काबिलियत के बल पर आज पूरे मारवाड़ में इनके चर्चे है।बीते दिनों वीर दुर्गादास मातृ शक्ति पुरस्कार से नवाजी गई प्रधान गरिमा राजपुरोहित अपनी चित्रकारिता को वह आधार मानती है जिसे उन्हें पहचान दी सबसे अलग।

अपने ससुर और अपने शौहर के उम्दा राजनीती अनुभव का सपना आगे बढ़ाते हुए बीते पंचायती राज चुनावो में अपना भाग्य आजमाया और जनता ने इनके सर पर सजा दिया प्रधान का सेहरा।अपनी पहली ही बैठक में अपने मजबूत इरादे रखने वाली प्रधान गरिमा राजपुरोहित आज जवाहर कला केंद्र जयपुर के जानी मानी फनकार है।घुघट और चौखट तक सीमित रहने वाली औरतों के बीच से मजबूत इरादों से आगे बढ़ चुकी गरिमा राजपुरोहित खुद के काम बालिका शिक्षा के प्रति समर्पित करती नजर आती है

अपने पहले राजनीती अनुभव के बावजूद गरिमा राजपुरोहित अपने हर काम को बारीकी से देखती है।बकौल गरिमा उन्होंने बालिका शिक्षा,महिला एवं बाल विकास और इलाके में जन सुविधाओं पर अपना पूरा ध्यान दिया है।विभिन्न आधारों से सिवाना की आवाज को पुरजोर तरीके से मुखर कर रही गरिमा राजपुरोहित ने अभिनव पहल करते हुए बालिकाओं के सम्मान की मुहिम शुरू की है जिससे इलाके बालिकाओं के स्कुल में नामंकन में तेजी से इज़ाफ़ा हुआ है।अपनी बैठकों को नारी जनप्रतिनिधियों के नाम समर्पित करने वाली गरिमा राजपुरोहित ने इलाके विकास को पहली प्राथमिकता बनाया है।

कल तक घर की चार दिवारी तक सीमित रहने वाली नारी जब जब घर से बाहर निकली है तब तब वह शक्ति बनकर उभरी है,ऐसी ही शक्ति की मिसाल बन चुकी सदूर सिवाना की प्रधान गरिमा राजपुरोहित ना केवल लोगो की रोल मॉडल बन रही है साथ ही आने वाले दिनों में उनका अनुशरण करने वाले भी हजारो नजर आएंगे यह तय है।

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