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मानव  अधिकार सरंक्षण पर सेमिनार  हुआ आयोजित ,

बाड़मेर मानव अधिकारो के प्रति आम जन खुद जागरूक होव। ..बोथरा


बाड़मेर नगर परिषद् बाड़मेर द्वारा शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय हॉल में एक दिवसीय मानव अधिकार सरंक्षण विषय पर सेमिनार का आयोजन सभापति लूणकरण बोथरा के मुख्य आतिथ्य में और आयुक्त श्रवण विश्नोई की अध्यक्षता में आयोजित किया गया ,सेमिनार में ग्रुप फॉर पीपल के संयोजक चन्दन सिंह भाटी ,ताल्लुक विधिक सहायता समिति सदस्य अमित बोहरा ,पन्नालाल जांगिड़ ,एन यु एल एम् प्रभारी भंवरू खान ,पार्षद प्रकाश सराफ ,सुल्तान सिंह ,तरुण सिंधी ,अनिल जोशी , ने शिरकत कर मानव अधिकारों के सरंक्षण को लेकर चर्चा की ,

सभापति लूणकरण बोथरा ने कहा की किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान का अधिकार ही मानव अधिकार है। मनुष्य योनि में जन्म लेने के साथ मिलने वाला प्रत्येक अधिकार मानवाधिकार की श्रेणी में आता है। संविधान में बनाये गए अधिकारों से बढ़कर महत्व मानवाधिकारों का माना जा सकता है। इसका कारण यह है कि ये ऐसे अधिकार हैं जो सीधे प्रकृति से सम्बन्ध रखते हैं जैसे जीने का अधिकार केवल कानून सम्मत अधिकार नहीं है बल्कि इसे प्रकृति से प्रदान किया गया है। सभी व्यक्तियों को गरिमा और अधिकारों के मामले में जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है। वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे जीवन स्तर को प्राप्त करने का अधिकार है जो उसे और उसके परिवार के स्वास्थ्य, कल्याण और विकास के लिए आवश्यक है। मानव अधिकारों में आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों के समक्ष समानता का अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार आदि नागरिक और राजनैतिक अधिकार भी सम्मिलित हैं।
 आयुक्त श्रवण विश्नोई ने कहा की मानव समाज में मौजूद समस्याओं का निराकरण करना ही मानवाधिकार की संकल्पना का लक्ष्य है। सूखा, बाढ़, गरीबी, अकाल, सुनामी, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध एवं दुर्घटनाओं आदि से पीड़ित व्यक्तियों को राहत और पुनर्वास के मानवाधिकारों का ध्यान रखा जाना अपेक्षित है। जिससे लोगों की वाक्-अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता एवं भय तथा अभाव मुक्त एक ऐसी विश्व व्यवस्था की उस स्थापना की जनसाधारण की सर्वोच्च आकांक्षा पूर्ण हो सके क्योंकि सम्पूर्ण मानव समाज के सभी सदस्यों के जन्मजात गौरव और समान अविच्छिन्न अधिकार की स्वीकृति ही विश्व शांति, न्याय और स्वतंत्रता की बुनियाद है। 

ग्रुप फॉर पीपल के संयोजक चन्दन सिंह भाटी ने कहा की हमारे देश में आये दिन घटित होने वाली महिलाओं के शारीरिक और मानसिक शोषण और प्रताड़ना की घटनाएँ, प्रतिदिन होने वाली हजारों भ्रूण हत्याएं भारतीय संस्कृति की गरिमा तार-तार करती हैं। भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, शारीरिक प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न आदि अत्याचारों से पीड़ित महिलाओं के विषय में मानवाधिकारों की आवश्यकता को रेखांकित करते ही हमारा समाज प्रायः मौन हो जाता है। ऐसे ही सैकड़ो वर्षों से वनों अथवा उसके आस-पास के क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी और वनवासी समाज के परंपरागत अधिकारों और मानव अधिकारों की समुचित रूप से पहचान तक नहीं की जा सकी है तथा उन्हें आज तक चकबंदी, सीलिंग, पट्टे भू-अभिलेख या भूमि आवंटन का पर्याप्त लाभ नहीं मिल सका है।

अमित बोहरा ने बताया की आज भी एक खास तबके के लोगों को ही हैसियत के अनुसार मानवाधिकार मिल पाते हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान आदि राज्यों में जहाँ साक्षरता का स्तर थोड़ा काम है वहां मानवाधिकारों का हनन आम बात है। इन राज्यों के पिछड़े और अशिक्षित क्षेत्रों में प्रायः बेक़सूर और गरीब लोगों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा अमानवीय तरीके से कानूनी कार्यवाही करने अथवा अन्य तरीके से शोषण किये जाने की घटनाएँ चर्चा में बनी रहती हैं लेकिन इसके विपरीत जिन शहरों में लोग साक्षर हैं वहां इसका गलत इस्तेमाल भी करते हैं।सेमिनार को भंवरू खान ,पन्नालाल जांगिड़ ,विद्युत् मजदूर संघ के कोशलाराम चौधरी ,स्वरुप वासु ,राजाराम सोलंकी ,सायर कंवर ने भी संबोधित किया ,इस अवसर पर बड़ी तादाद में महिलाए उपस्थित थी ,सेमिनार में चंद्रवीर खत्री ,स्वरुप शर्मा ,ओमप्रकाश ,इस्लाम खान ,सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे 

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