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2070 तक खत्म हो जाएगा पेट्रोल !

प्रोटीन बायो टेक्नोलॉजी से बायो फ्यूल विकल्प पर शोध जारी


- आनन्द एम.वासु -
जैसलमेर । कनाडा के वैज्ञानिक एवं यू्निवर्सिटी ऑफ क्यूबेक के जैव रसायन प्रोफेसर एवं वैज्ञानिक मार्क ब्यूरेगार्ड की माने तो, 2070 तक धरती से पेट्रोल-डीजल खत्म हो जाएगा। इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिक पेट्रोल-डीजल के विकल्पों पर शोध कर रहे है। बायो फ्यूल इसका बेहतर विकल्प है। वैज्ञानिक ब्यूरेगार्ड इन दिनों सिरोही प्रवास पर है और वे प्रोटीन बायो टेक्नोलॉजी अपनाने पर जोर देते हैं ।

उल्लेखनीय है कि कनाडा की यू्निवर्सिटी ऑफ क्यूबेक में जैव रसायन प्रोफेसर एवं वैज्ञानिक मार्क ब्यूरेगार्ड के मार्गदर्शन में ही सिरोही निवासी विनय खत्री पीएचडी कर रहा है। विनय खत्री के परिवार में आयोजित एक कार्यक्रम में शरीक होने के लिए वैज्ञानिक प्रो. मार्क उनकी पत्नी के साथ सिरोही पहुंचे है।

गौरतलब है कि बायो फ्यूल पर दुनिया भर में काम करने वाले वैज्ञानिकों की टीम वे खुद भी शामिल है। प्रो. मार्क ब्यूरेगार्ड के अनुसार वे कनाडा में प्रोटीन जैव तकनीकी पर शोध कर रहे हैं और जैव ईंधन की खोज की है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल खत्म होने पर इसका उपयोग किया जा सकेगा। पेट्रोल-डीजल सीमित मात्रा में उपलब्ध होने से यह खत्म हो जाएंगे, लेकिन जैव ईंधन कभी खत्म नहीं होने वाला उपाय है। क्योंकि, इसका उत्पादन वनस्पति से होगा और वनस्पति लगातार तैयार कर सकते हैं। जैव ईंधन का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को सुरक्षित रखना है, जबकि पेट्रोल-डीजल आदि ईंधन से पर्यावरण प्रदूषित होता है।

इंडस्ट्री में भी प्रोटीन की एप्लीकेशन

प्रो.मार्क के अनुसार इंडस्ट्री में केमिकल के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इसलिए वे केमिकल की जगह प्रोटीन की एप्लीकेशन पर भी काम कर रहे हैं, ताकि प्रदूषण कम हो। इससे उद्योगों में उत्पादन की लागत भी कम होगी और वातावरण सुरक्षित रहेगा। प्रोटीन शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व है और इसके एंजाइम लगातार काम करते रहते हैं। यदि शरीर में प्रोटीन नहीं होगा तो शरीर काम करना ही बंद कर देगा। इसी एंजाइम का इंडस्ट्री में भी इतना ही महत्व है।

प्रोटीन आधारित जैव ईंधन की खोज

प्रो.मार्क के अनुसार पेट्रोल-डीजल आदि प्रचलित ईंधन के 2070 तक खत्म होने के अनुमान को देखते हुए भविष्य में ईंधन की विकट समस्या से निपटने के लिए प्रोटीन आधारित जैव ईंधन की खोज की गई है। इससे बिना पर्यावरण प्रदूषण के ईंधन प्राप्त किया जा सकेगा। पादपों से प्राप्त एंजाइम के द्वारा कार्बनिक ईंधन को विकसित किया जा रहा है। प्रोटीन एक शुद्ध कार्बनिक पदार्थ है, जिसके उपयोग से पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना ईंधन का निर्माण करना संभव किया है।

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