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बाड़मेर 25 दिसम्बर

व्यक्तित्व विकास और संस्कार पुस्तको से आते है - प्रो. आहुआ

बाड़मेर के महाबार गांव में आसोतरा गादी पति तुलछाराम महाराज के द्वारा प्रारम्भ करवाये गये युवा संस्कार शिविर के दूसरे दिन प्रथम सत्र में कई विशेष विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर सैकड़ों की संख्या में हिस्सा ले रहे युवाओं को कई मुद्दों पर जानकारियां दी। इस दौरान व्याख्याता मुकेश पचैरी ने विद्यार्थियों और युवाओं को खास तौर पर अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देते हुए व्यक्तित्व विकास की सबसे जरूरी और पहली सीढ़ी पर विचार करने को कहा। उन्होनें कहा कि जहां पर दिनचर्या सही और निरन्तरता हो वहीं व्यक्तित्व विकास की उम्मीद कि जानी चाहिए। उन्होने कहा कि इस तरह के शिविर निश्चित तौर पर युवाओं को विशेष रूप से बेहतर करने की शिक्षा देते है। कार्यक्रम में बोलते हुए जय नारायण व्यास विश्व विद्यालय के प्रोफेसर रामचन्द्र सिंह आहुआ ने व्यक्तित्व विकास एवं संस्कार विषय पर बोलते हुए कहा कि सुसंगति अच्छी पुस्तकों से मिलती है। उन्होने मिसाईल मैन भारत रत्न और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की पुस्तकों के बारे में चर्चा की। उन्होनें कहा कि अब्दुल कलाम ऊंचे सपने देखने के हिमायती थे और वे जब भी युवाओं, बच्चों से मुलाकात करते वे शिक्षा और विकास की बात करते क्यों कि वे जानते थे कि अभी से युवाओं को शिक्षा के बारे में जागरूक नहीं किया गया तो विकास की अवधारणा खत्म हो जायेगी।

इससे पहले मंगलाचरण के साथ प्रारम्भ प्रथम सत्र में वैदान्ताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज ने चर्चा करते हुए कहा कि व्यक्ति में सुशील होने के सारे गुण समाहित होने लगते है और उसके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होने लगता है।

इस मौके पर राजपुरोहित समाज के गणमान्य लोग बड़ी तादाद में वहां मौजूद थे।

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