जैसलमेर के शक्तिपीठ
माता आवड का स्वरुप हे तेमडेराय माता का मंदिर ,चार सौ साल पहले हुई थी स्थापना
जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान का जैसलमेर जिला धार्मिक आस्था का केंद्र हैं ,यदुवंशी शासकों द्वारा जैसलमेर में मंदिरों का निर्माण रियासत की स्थापना के साथ ही निर्माण कराये तो कई शासकों ने इन मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया ,जैसलमेर में सात शक्तिपीठ हैं ,जिसमे प्रमुख रूप से आवड माता हिंगलाज का स्वरुप माना जाता हैं ,दूसरा माता स्वांगिया जो जैसलमेर शासकों की कुलदेवी हैं ,
जैसलमेर में रियासतकाल से ही इन शक्तिपीठों प्रति पूर्ण आस्था रही ,माता हिंगलाज का स्वरुप आवड माता के जैसलमेर में कुल 52 मंदिर हैं ,जिसमे प्रमुख मंदिर तेमडेराय हैं जो जैसलमेर मुख्यालय से बीस किलोमीटर दूर भू गांव की पहाड़ी पर स्थित हैं ,हाल ही में ही में तेमडे राय मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ ,मंदिर का वर्तमान सूंदर और आकर्षक हैं ,ऊँचे गुम्बज पर फहराती पताका कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती ,हैं ,तेमडे राय माता के प्रति जन जन में आस्था देखते बनती हैं ,लाखो श्रद्धालु दर्शार्थ देश के कोने कोने से आते हैं ,चारण जाति के श्रद्धालु पैदल संघ लेकर कई जिलों से आते हैं ,माता के प्रति गहरी आस्था हैं ,
आवड़ माता का यह स्थल जैसलमेर के दक्षिण में 21 कि.मी. की दूरी पर गरलाउणे नामक पहाड़ की कंदरा में बना हुआ है। लोकमान्यता है कि देवी स्वांगियां ने यहाँ रहने वाले तेमड़े नाम के दैत्य का दमन कर उसकी गुफा एक विशाल शिला से बन्द कर दी थी। यहां उत्कीर्ण शिलालेख के अनुसार संवत् 1734 में महारावल अमरसिंह ने तेमड़ेराय पहाड़ की ‘पाज’ बंधाई। तत्पश्चात् अमरसिंह के पुत्र जसवन्तसिंह ने संवत् 1760 में परसाल व बुर्ज का निर्माण कराया। संवत् 1981 में महारावल जवाहरसिंह ने मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। यह स्थान भाटी शासकों और छतीस कौम के श्रद्धा का केन्द्र रहा है। चारण लोग तो इसे दूसरा हिंगलाज धाम भी मानते हैं क्योंकि देवी स्वांगियां ने यहाँ कई वर्षों तक निवास किया था।
तेमडे राय मंदिर की मुख्य देवी प्रतिमा गर लाउने पहाड़ी की गुफा में स्थापित हैं ,जहाँ प्रतिदिन पूजा पाठ होते हैं ,नवरात्रि को मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहत्ती हैं ,चूँकि मंदिर ऊँची पहाड़ी पर हे तो मंदिर का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक रहता हैं ,तेमडेराय माता का मंदिर बीकानेर में देशनोक के करनी माता मंदिर के एकदम पास में स्थापित हैं ,करनी माता के दर्शन के बाद तेमडेराय मंदिर के दर्शन के बिना देशनोक यात्रा अधूरी मानी जाती हैं
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