गुरुवार, 26 मई 2011

राज्य के सीमावर्ती जिलों में बढ़ी आबादी


राज्य के सीमावर्ती जिलों में बढ़ी आबादी

राज्य के सीमावर्ती जिलों में बढ़ी आबादी ने कई तरह के चौंकाने वाले सवाल पैदा करने शुरू कर दिए हैं। पिछली जनगणना के मुकाबले सर्वाधिक ३२.५५ प्रतिशत की वृद्धि बियांवान रेत के धोरों के लिए मशहूर बाड़मेर जिले में होना इस आशंका को बल दे रहा है। हैरतअंगेज यह भी है कि बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जिले में खासकर ग्रामीण इलाकों में जिस तेजी से आबादी बढ़ी है, वह तेजी जनसुविधाओं की दृष्टि से अधिक विकसित इनके पड़ोसी जिलों बीकानेर, जालौर, पाली, नागौर और सिरोही में नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि अचानक बढ़ी इस आबादी में बाहरी लोगों के सीमावर्ती जिलों में आकर बसने की संभावनाओं से खारिज नहीं किया जा सकता है। इस वर्ष जारी जनगणना के आंकड़ों में १९७१ के भारत-पाक युद्ध के समय महज साढ़े सात लाख आबादी वाला बाड़मेर २६ लाख से अधिक आबादी लेकर राज्य में १०वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष १९९१-०१ की जनगणना में यह आंकड़ा १९ लाख ६४ हजार ८३५ था। १९८१-९१ और १९९१-०१ की जनगणना के आंकड़े देखें तो बाड़मेर में ग्रामीण आबादी में करीब ४०.९३ प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि हुई। इस बार भी माना जा रहा है कि आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक बढ़ी है। बाड़मेर में ग्रामीण क्षेत्र अधिकांशत: भारत-पाक सीमावर्ती है। बाड़मेर में १९६१ में ६ लाख ४९ हजार ७९४, १९७१ में ७ लाख, ७४ हजार ८०५, १९८१ में ११ लाख १८ हजार ८९२, १९९१ में १४ लाख ३५ हजार २२२ और २००१ में १९ लाख ६४ हजार ८३५ की आबादी थी। वर्ष २०११ की जनगणना में यह आंकड़ा पिछले ५० वर्ष की तुलना में १९ लाख ५४ हजार ६५९ बढ़ गई है। अन्य सीमावर्ती जिलों में जैसलमेर की स्थिति भी भिन्न नहीं है। २००१ की जनगणना में ५ लाख ८ हजार २४७ की आबादी वाला जैसलमेर इस बार २०११ की जनगणना में ६ लाख ७२ हजार के आंकड़े को भी पार कर गया है। जोधपुर जिले की आबादी में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। गत जनगणना के मुकाबले ७ लाख ९९ हजार १७६ की वृद्धि कर जोधपुर ३६ लाख ८५ हजार ६८१ पर पहुंच गया है। सीमावर्ती जिलों में बढ़ रही आबादी का हैरतअंगेज पहलू यह है कि इनके पड़ोसी जिले पाली में इस बार गत जनगणना के मुकाबले केवल ११.९९ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नागौर १९.२५, सिरोही में २१.८६, बीकानेर में २४.४८ और जालौर में २६.३१ प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि यह पड़ोसी जिले जनसुविधाओं की दृष्टि से सीमावर्ती जिलों से अधिक संपन्न होने के कारण बसावट के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। गौरतलब है कि सीमावर्ती जिलों में अचानक बढ़ी आबादी से उठते सवालों को देखते हुए सरकार एक बार इनके आंकड़े जारी करने से रोकने का कदम भी उठा चुकी है। डरावने आंकड़े गत जनगणना के मुकाबले राज्य की आबादी १.२२ करोड़ बढ़कर ६.८६ करोड़। इसमें १६ लाख से अधिक आबादी तो केवल तीन (बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर) जिलों में ही बढ़ी है। बाड़मेर और जोधपुर को मिलाकर जनसंख्या ६३ लाख पहुंच गई है जबकि इनके पड़ोसी विकसित चार जिलों नागौर, पाली, जालौर और सिरोही की आबादी ८२ लाख। पिछले ५० वर्षों में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर में ही सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि हुई है। ५० वर्षों में बाड़मेर की आबादी ६.५० से १९.५० लाख बढ़कर २६ लाख। सीमावर्ती जिलों में बढ़ोत्तरी जिला १९७१-८१ १९८१-९१ १९९१-०१ २००१-११ बाड़मेर ४४.४१ २८.२७ ३६.९० ३२.५५ जैसलमेर ४४.८४ ४१.७३ ४७.५२ ३२.२२ जोधपुर ४४.८२ २९.१२ ३०.०४ २६.६९ बीकानेर ४६.३४ ४१.८४ ३७.७१ २४.४८ पड़ोसी जिलों में बढ़ोत्तरी जालोर ३५.२ २६.५२ २६.८१ २६.३१ सिरोही २७.९ २०.६६ ३०.१३ २१.८६ नागौर २९.०४ ३१.६९ २९.३८ १९.२५ पाली ३१.३९ १६.६३ २२.४६ ११.९९

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