सोमवार, 15 जून 2020

जैसलमेर रामगढ़ कॉपरेटिव बैंक गबन प्रकरण बैंक प्रशासक को अँधेरे में रखा ,गबन की कोई पत्रावली कलेक्टर तक नहीं पहुंची


जैसलमेर  रामगढ़ कॉपरेटिव बैंक गबन प्रकरण

बैंक प्रशासक को अँधेरे में रखा ,गबन की कोई पत्रावली कलेक्टर तक नहीं पहुंची

जैसलमेर जैसलमेर सेन्ट्रल कॉपरेटिव बैंक की रामगढ़  शाखा में करीब छह करोड़ के गबन के मामलो में बैंक प्रशासक की कूटरचित चालो के चलते गबन की कोई फाइल बैंक के प्रशासक और जिला कलेक्टर के पास नहीं पहुंची,जबकि गत वर्ष इस मामले के उजागर होने के बाद तीन कार्मिको को निलंबित किया  शेष के खिलाफ कार्यवाही के लिए बैंक के अधिकारियो को रजिस्टर  था,मगर बैंक में काबिज मुख्य प्रबंधक  बैंक प्रशासक और जिला कलेक्टर तक पहुंचने ही नहीं दी ,जनवरी 2020 में अतिरिक्त रजिस्टर धन सिंह देवल द्वारा इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट जारी कर मुख्य प्रबंधक को दोषी कार्मिको के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे ,मगर मुख्य प्रबंधक ने इस जाँच रिपोर्ट को संस्थापन मार्क कर फाइल को दबा दिया इस जाँच रिपोर्ट की प्रतिलिपि भी बैंक प्रशासक को नहीं दी जबकि बैंक की हर डाक बैंक प्रशासक और जिला कलेक्टर को प्रतिलिपि दी जाती हैं ,जबकि इस गबन प्रकरण की फाइल एक मर्तबा भी प्रशासक के पास नहीं भेजी ,प्रशासक को अँधेरे में रखा ,चूँकि मुख्य प्रबंधक पद पर उप रजिस्टर सहकारी संस्थाए सुजानाराम को अतिरिक्त कार भार दे रखा था ,सुजानाराम खुद इस गबन प्रकरण का मुख्य आरोपी हैं ,जाँच रिपोर्ट को इन्होने आसानी से खुर्द बोर्ड कर प्रशासक से छुपाये राखी ,इस सम्बन्ध में जिला कलेक्टर और बैंक प्रशासक नमित मेहता से बात हुई तो उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा की इस तरह के रामगढ़ बैंक में गबन को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं हैं ,जाँच रिपोर्ट को लेकर उन्होंने बताया की उनके पास कोई जाँच रिपोर्ट नहीं आई ,न ही गबन प्रकरण की कोई फाइल मेरे तक पहुंची ,उन्होंने बताया की बैंक प्रशासक की हैसियत से न सही लेकिन जिला कलेक्टर की हैसियत से भी बैंक रजिस्टर द्वारा उन्हें जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि नहीं दी गयी ,रामगढ़ बैंक में लगभग छह करोड़ के गबन की जाँच रिपोर्ट उजागर होने के बाद बैंक के दोषी कार्मिको में खलबली मची हैं





बाड़मेर। राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में पंचों के तुगलकी फरमान का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां जातीय पंचों ने एक परिवार को समाज से बहिष्कृत कर उसका हुक्का पानी बंद कर दिया है। तथाकथित जातीय पंचों ने दुष्कर्म मामले में राजीनामा नहीं करने के चलते इस परिवार को समाज से बहिष्कृत करते हुए उसका हुक्का-पानी बंद करने का फरमान जारी किया है। पीड़िता के परिवार ने शनिवार को एसपी दफ्तार में ज्ञापन सौपकर कार्यवाही की गुहार लगाई है।

बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी थाना इलाके के मीठी बेरी गांव के इस मामले में खुद को समाज का ठेकेदार मानने वाले जातीय पंचों ने एक परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया। यही नहीं इन पंचों ने समाज से बाहर निकाले गए परिवार का हुक्का-पानी भी बंद कर दिया। मीठी बेरी निवासी पीड़ित परिवार ने बाड़मेर पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा को ज्ञापन सौपकर जातीय पंचों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।


एक संतान सबसे अपने माता- पिता के पास रहकर सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती है। लेकिन अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो किसी पर भी विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही घटना बाड़मेर में सामने आई है। दरअसल बाड़मेर पुलिस अधीक्षक से एक युवती ने न्याय व सुरक्षा की गुहार लगाई है। आरोप है कि एक विवाहिता युवती के रिश्तेदारों द्वारा अपहरण कर उसका बलात्कार किया गया और वीडियो बनाकर वायरल भी कर दिया गया । खास बात यह है कि इस मामले में पीड़िता के माता- पिता ही राजीनामे के लिए लगातार उस पर दबाव बना रहे हैं।


एसपी को सौंपा ज्ञापन
जिले के गिड़ा थाना क्षेत्र में एक विवाहिता ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा करने की गुहार लगाई है। दरअसल विवाहिता की शादी एक वर्ष पूर्व हुई थी,जब पहली बार विवाहिता वापिस अपने पीहर आई तो उसके चेचरे भाई ने जबरदस्ती बलात्कार कर अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।




पति के साथ मारपीट

मिली जानकारी के अनुसार जब पीड़िता के पति को इस संबंध में जानकारी मिली, तो वह ससुराल पहुंचा। लेकिन इस दौरान उसके पति के साथ पीहर पक्ष वालों ने मारपीट की गई। इसके बाद पीड़िता ने गिड़ा पुलिस थाने में मामला दर्ज कर आरोपी चचेरे भाई जगदीश को गिरफ्तार करवाया। इसके बाद से विवाहिता के पीहर पक्ष की ओर से मामले में राजीनामा करने को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है । साथ ही उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही है।




भारत-पाक के बीच चलने वाली साप्ताहिक थार एक्सप्रेस कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद से भले ही बंद हाे,लेकिन पाक रेलवे ने भारत के सामने जीरे पॉइंट रेलवे स्टेशन का नाम बदल दिया है। पाक रेलवे ने स्टेशन का नाम मारवी रखा है। अब जब भी दोनों देशों की रेल सेवा वापस बहाल होगी तब पाक का जीरो पॉइंट रेलवे स्टेशन नहीं होगा। पाक का ये पहला स्टेशन मारवी होगा। पाक रेलवे की अाेर से स्टेशन का नाम बदलने की कवायद काे सुरक्षा एजेंसियां भी समझ नहीं पाई है। रेलवे स्टेशन के नामकरण से पहले सीमा के उस पार पाक का पहला स्टेशन जीरो पॉइंट स्टेशन था। पाक ने थार एक्सप्रेस बंद कर दी थी, उसके बाद दोनों देशों के बीच रेल सेवा बंद है। अब पाक ने अपने जीरो पॉइंट रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर प्रेम एवं सच्चाई की पहचान पाक की एक युवती मारवी के नाम कर दिया है।
प्रेमिका के खातिर अमरकोट के शासक उमर ने दी थी अग्निपरीक्षा
सुमरो के आगे मारवी के सौंदर्य की बखान करने लगा और उमर सुमरो सवार होकर मलीर गया। उसको अमरकोट लेकर चला गया। उमर ने मारवी से शादी करने के लिए बहुत सारी कोशिशें की मगर मारवी ने कभी हां नहीं भरी। सिंध के मशहूर सूफी शायर शाह अब्दुल लतीफ अपने सिंधी रिसाले में लिखते हैं कि मारवी ने उमर को अपनाया नहीं और कहा कि मैं यहां मर जाऊं तो मुझे मेरे गांव में दफनाना। उन्होंने एक साल के बाद मारवी को आजाद कर दिया। फिर मारवी की शादी खेतसेन से की गई। खेतसेन शक की निगाह से देखने लगा। जब इस बात का उमर को पता चला तब मलीर आया और उमर ने अग्नि परीक्षा दी। इसमें वह बेगुनाह साबित हुए। मारवी मलीर में खेतसेन के साथ रही और उमर वापस अपने शहर अमरकोट चला गया।

सिंध में उमर मारवी नाम से प्रेम कथा प्रचलित है। साहस के कारण मारवी को प्यार का प्रतीक माना जाता है। सिंध के अमरकोट में राजा उमर सुमरो का शासन था। उस वक्त मलीर गांव में पालिनी नामक चरवाहा अपनी पत्नी मादुई के साथ रहता था। उसकी एक पुत्री थी जिसका नाम था मारूई (उर्दू में मारवी) था। मारवी के पिता ने बचपन में ही उसका विवाह खेतसेन नामक किसी युवा के साथ तय कर दिया था। वह जब युवा हुई तो उसी गांव का कोई फोगसेन नामक संपन्न किसान शादी करने के लिए परिवार पर दबाव डालने लगा। मारवी के पिता ने यह रिश्ता देने से इनकार किया तो वह सीधा अमरकोट के बादशाह उमर सुमरो के दरबार में पहुंआ।
इस प्रेम कहानी पर बनी सिंधी भाषा में पहली फिल्म हुई थी मार्च 1956 में रिलीज
उमर मारवी की इस लोककथा पर एक पाकिस्तानी फिल्म 12 मार्च 1956 को रिलीज हुई, यह पाकिस्तान में बनी पहली सिंधी भाषा की फीचर फिल्म थी। अमरकोट का नाम वहां के एक किले के नाम पर है, जहां प्रेम और बहादुरी के कई किरदारों की यादें हैं। अमरकोट पर राजपूत और बाद में सुमरो खानदान बादशाहत करता रहा है। मारवी को बादशाह उमर ने वहां कैद कर रखा था। उसे मारवी का कैद खाना कहा जाता है। मारवी का संबंध थार के खानाबदोश कबीले से था। इस पूरे किस्से को शाह अब्दुल लतीफ ने अपनी शायरी का विषय बनाया और मारवी के किरदार को देशप्रेम और अपने लोगों से मुहब्बत की मिसाल बनाकर पेश किया है। मुगल बादशाह अकबर का जन्म अमरकोट के किले में हुआ था।
पाक में उमर-मारवी की प्रसिद्ध एक पेंटिंग
पाक में उमर-मारवी की प्रेम कथा की नायिका मारवी के नाम स्टेशन




प्रेम प्रसंग के  चलते युवक ने आत्महत्या की

बाड़मेर सीमावर्ती बाड़मेर जिले के सिणधरी कस्बे में शनिवार को छत्रावास में एक युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस थाना सिणधरी के थानाधिकारी पुलिस बल सहित मौके पर पहुँच गए ,

पुलिस सूत्रानुसार सिणधरी स्थित मेघवाल छत्रावास में अध्ध्ययनरत द्वितीय वर्ष  छात्र मिश्राराम पुत्र राणाराम निवासी करडाली ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली ,मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को निचे उतरा ,थानाधिकारी जेठाराम जयपाल ने बताया की युवक के पास से सुसाइड नॉट बरामद हुआ ,युवक का प्रेम प्रसंग का मामला था ,युवक के परिजनों को सूचित किया गया ,हैं परिजनों के आने के बाद शव का अन्त्य परीक्षण किया जायेगा




बाड़मेर,सामाजिक सुरक्षा पेंशन यजना में 27 लाख के  गबन के प्रकरण में पचपदरा पुलिस ढाई साल से चालान पेश नहीं  कर रही,

बाड़मेर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में फर्जीवाड़ा कर 27 लाख का गबन काने वाली सामाजिक स्वयं सेवी संस्था रेड्डी संस्था  खिलाफ उप कोष कार्यालय  पचपदरा द्वारा पचपदरा थाना में मुकदमा दर्ज कराये चार साल बीत गए मगर पचपदरा पुलिस ने चालान पेश करने नब्बे दिन की अवधि बीत जाने के चार साल बाद भी न्यायालय में चालान पेश नहीं किया ,जबकि तमान जांचो में रेड्डी संस्था  सचिव देवाराम चौधरी /गोदारा दोषी पाए गए ,

जानकारी के मुताबीख चार आरोपियों ने मिलकर उप कोष कार्यालय पचपदरा में सेवा प्रदाता एजेंसी रेड्डी संस्था के कार्मिक प्रवीण कुमार पुत्र जगदीश कुमार धोबी निवासी बालोतरा ने उप कोष कार्यालय पचपदरा की आई डी और पासवर्ड का दुरूपयोग कर सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में सेंध लगाकर पेंशन जारी करने में हेराफेरी कर दी ,उसके द्वारा पेंशनर्स के रूप में काल्पनिक पुराने पी पी ओ  नंबर दर्ज कर बैंक खाता संख्या फीड क्र दी ,पेंशनर्स के पुराने पी पी ओ नंबर बैंक खाते के साथ फीड कर दिए ,इस रिपोर्ट के आधार पर उप कोष कार्यालय पचपदरा द्वारा पेंशनर्स के खातों में राशि हस्तांतरित होती गई ,364 पेंशनर्स के लाखो रुपये का फर्जी भुगतान संस्था के द्वारा खोले खातों में होता रहा ,जिसकी खबर कोष कार्यालय को भी नहीं लगी मगर एक ग्राम पंचायत के जागरूक कार्मिको ने शिकायत उप कोष कार्यालय और तत्कालीन जिला कलेक्टर को कर दी ,जाँच में फर्जीवाड़े की पोल खुलकर सामने आई ,गांव गांव में गरीबो के साथ यह छलावा होने और लाखो रूपये की फर्जी पेंशन का भुगतान होने की जानकारी मिलने पर अधिकारियो के हाथ पांव फूल गए ,यह बात भी सामने आई की गबनकर्ताओ व् इनके बिचैलियो ने पेंशन शुरू करवाने के नाम पर गरीबो से तीन तीन हजार रूपये भी वसूले। इस गबन के उजागर होने पर उप कोष अधिकारी देवीलाल पुत्र आईदानराम सुथार ने रेड्डी संस्था बालोतरा के द्वारा उपलब्ध कराये गए कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रवीण कुमार ,निविदादाता फर्म रेड्डी के सचिव देवाराम चौधरी ,उम्मीद सिंह पुत्र जालम सिंह  निवासी चारलाई ,तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता मंजू के खिलाफ सांठगांठ का राजकीय राशि के गबन का मामला 27 अक्टूबर 2017 को पचपदरा थाने में दर्ज कराया ,जिसमे बिना दस्तावेजों के काल्पनिक पी पी ओ नंबर दर्ज करने ,फर्जी सहायक लेखाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करणे ,फर्जी पी पी ओ जारी करने लिगेसी पेंशननाश के रूप में डाटा दर्ज करने ,फर्जी लिगेंसी पेंशनर्स के दस्तावेजों को कार्यालय से गायब क्र खुर्द बुर्द करने ,राजकीय कार्य में बढ़ा डालने पेंशनर्स और बिचोलियो से संत गांठ कर राजकीय राशि हड़पने की नियत से गबन और धोखा धड़ी करने के आरोप लगाए , साथ ही गबन की गयी राशि 27 लाख 62 हजारे 7 सौ 50 रूपये की राजकीय राशि ब्याज सहित वसूलने व् आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने का लिखा गया ,मजेदार बात हे की पुलिस थाना पचपदरा में यह मामला 2017 में दर्ज हुआ ,मामले की जाँच पूर्ण हुए अरसा बीत गया ,चालान पेश करने की नब्बे दिन की अवधि बीत जाने के बाद भी इन आरोपियों के खिलाफ चालान पेश नहीं किया ,जिसके चलते जिन पेंशन धरियो के नाम फर्जी पेंशन उठाई उनसे विभाग वसूली के नोटिस जारी कर वसूल कर  रहे जबकि उन्होंने कभी पेंशन उठाई नहीं ,

हमने निविदादाता फर्म रेड्डी संस्था के खिलाफ पचपदरा थाना में मुकदमा दर्ज कराया था ,पुलिस थाना पचपदरा तीन साल भी कजोई कार्यवाही नहीं क्र रहा ,हमने सारे दस्तावेज उपलब्ध करा जाँच में पूर्ण सहयोग किया ,आगे की कार्यवाही पुलिस को करनी हैं ,देवीलाल सुथार ,उप कोषाधिकारी  पचपदरा बाड़मेर

पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने इस प्रकरण को लेकर बताया की इसप्रकरण को मैं खुद देखु  ,जल्द ही कार्यवाही अम्ल में लाई जाएगी ,




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