*बाड़मेर अराजकता का माहौल।मूलभूत सुविधाओं को भी तरसे शहरवासी।बेदर्द अधिकारी।*



बाड़मेर अराजकता का माहौल।मूलभूत सुविधाओं को भी तरसे शहरवासी।बेदर्द अधिकारी।*



*बाड़मेर बाड़मेर शहर में पिछले कुछ समय से अराजकता का माहौल हो गया।शहरवासी मूलभूत सुविधाओं को तरस गए।विभागीय अधिकारी इतने बेदर्द हो गए उन्हें नागरिकों की समस्याए सुनाई नही दे रही।राजनीति वरदहस्त के चलते अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हो गए।शहर में लम्बे समय से पेयजल की समस्या चल रही ।जनता परेज़हां हो रही कोई सुनने वाला नही।क्योंकि विभाग के आला अधिकारी निकृष्ट होते हुए वर्षो से राजनीतिक वरदहस्त से जमे है।बैठकों में खरी खरी सुनने के बाद भी कोई असर नही।जनता 500 रुपये देकर टैंकर डलवा रही।पेयजल बाधा के प्रेसि नोट निकाल रहे है मगर विभाग से ही निजी टैंकर भरवा रहे।कलेक्टर के आदेश हवा हो रहे है।इन अधिकारियों और कर्मचारियों की टैंकर मालको से बंधी बंधी है।।कलेक्टर को शहर के गली मोहलो में जाकर जनता से रूबरू होना चाहिए।*




*आयुक्त बदलने के साथ जेसा अनुमान था नगर परिषद बिना धणी धोरी हो गई।सभापति के बारे में कुछ भी लिखना कलम का अपमान लगता है।आयुक्त छूटी पे चल रहे।आर ओ बाड़मेर आते ही वसूली पे लग गए।कल प्रभारी मंत्री के सामने आर ओ का विधायक ने लताड़ा ।बेशर्मी की हद हो गई।आर ओ के चेहरे पे शिकन नही शहर सड़ रहा है।बाड़मेर शहर में राय कॉलोनी,इंदिरा नगर,शास्त्री नगर जसए इलाके डेंगू जॉन में है।स्थतिया जल्द बेकाबू होने वाली है।शायद अधिकारियों को आभास नही।शहर के हालात बदतर हो गए।कोई सुनने वाला नही।।बाबुओं के भरोसे नगर परिषद चल रही।आयुक्त को बाड़मेर रहना नही बार बार बाड़मेर से अवकाश के बहाने भाग रहे।*




मंत्रालयिक कर्मचारियो की 18 दिन से हड़ताल चल रही।सरकारी दफ्तरों में आम आदमी के काम नही हो रहे।कोई परवाह नही।कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन द्वारा नही की गई।।बाबू हड़ताल पे है तो आपका कोई काम नही होगा।।बोले तो जिमेदार अधिकारी बोलते फ़ाइल तो बाबू ही पुट आप करेगा।तभी काम ह्योग।




*बिजली विभाग की मार सबसे बड़ी।बिना कोई कारण जब चाहे तब बिजली काट दी जाती कोई नही बोलता।विभाग के अधिकारियों को विभाग से मोबाइल मील हुए ।घण्टी जाती है मगर उठाते नही।राजवेस्ट कॉलोनी में पिछले तीन दिन से लाइट नही शास्त्री नगर वालो की अंगुलिया ऊंची करवा दी ।आम लोगो को परेशान किया जा रहा है।पब्लिक को।।पब्लिक बेचारी करे भी तो क्या।शांत पब्लिक के धैर्य का इम्तिहान लिए जा रहे शायद।।अंडर ग्राउंड केबलों से जुड़े DP में चिंगारिया निकलती।किसी बड़े हादसे का इंतज़ार हो रहा है।।*




*राज सरकार की मुखिया आम जन को राहत देने की डींगें हाँकरहे तो धरातल पे कोई काम नही हो रहे।दूरसंचार विभाग के हालत बुरे है।*




*लम्बी फेहरिस्त है क्या क्या लिखे।।लम्बे समय से एक ही स्थान पे जमे अधिकारी अपना वक़्त निकाल रहे।उन्हें पब्लिक ग्रीवेंस से कोई नतलब।।जब तक ये लोग नही हटेंगे तब तक काम नही होने।*




*जिला कलेक्टर साहब शहर भी आपका कार्य क्षेत्र है।इस पे भी नजर इनायत करे।लोगो को जोड़ने का काम करे।*))

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