बाड़मेर। बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है थार

बाड़मेर।  बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है थार 



बाड़मेर रेगिस्तान के समंदर में लोग आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। हालांकि थार के बाशिंदों का हलक तर करने के लिए हजारों करोड़ की पेयजल योजनाओं का काम चल रहा है, लेकिन गर्मियां आते ही हालात बद से बदतर हो जाते हैं।

इस वर्ष सीमावर्ती बाड़मेर जिले के करीब 1400 गांवों में अकाल की स्थिति रही। सरकार ने पहले एक महीने के लिए और फिर नब्बे दिन के लिए पशु शिविर स्वीकृत कर पशुओं को राहत देने का प्रयास किया, लेकिन उसके बाद एक-एक कर शिविर बंद होने लगे। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से पशु शिविर चल रहे हैं।



इधर, भीषण गर्मियां शुरू होते ही थार में पेयजल संकट गहरा गया है। सीमावर्ती गांवों में स्थिति और ज्यादा विकट है। यहां पेयजल स्रोत सूख चुके हैं और सरकारी पानी बंद हुए महीनों बीत गए हैं। ऐसे में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

हालांकि थार में पानी की राजनीति हमेशा से ही होती रही, लेकिन आज भी थारवासी हलक तर करने के लिए मीलों सफर करने को मजबूर हैं।

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