बालोतरा प्रवासी पक्षियो ने पचपदरा में डाला डेरा
ओम प्रकाश सोनी
बालोतरा। बालोतरा उपखंड के पचपदरा तहसिल क्षेत्र के तालाबो पर प्रवासी पक्षी कुरजां के आने का क्रम शुरू हो गया है। तालाबो के आस पास हजारो की तादाद में ट्रांस साईबेंरियन क्रेन जिसे स्थानिय भाषा में कुरजां कहा जाता है,ने डेरा डाल रख है। ये प्रवासी पक्षी रूस जेसे ठंडे देशो से हजारो किलोमीटर का सफर तय करके प्रजनन का ल के लिये पचपदरा पहुचते है। पचपदरा में तालाबो के पानी ओर आस पास के खेतो में चुग्गा मिलने के कारण पचपदरा का क्षेत्र कुरजा के लिये अनुकूल है। तालाबो में कलरव करते कुरजांे के किल्लोल से पक्षी प्रेमियो में खुशी का आलम है। सुबह से लेकर शाम तक पचपदरा के आसमान मंें हजारों के तादाद में कुरजा अठखेलियां कर रही है। शाम के समय लालिमा के बीच में कुरजा की अठखेलियो से देखने लायक दृश्य बन पड़ता है। पचपदरा के तालाबो में पानी की घटती मात्रा के साथ ही इन प्रवासी परिंदो के आने की तादाद में भी कमी हो रही हैं। दूर देश से आने के कारण इन प्रवासी पक्षियो का मारवाड़ के लोकगीतो में भी काफी महत्व है। मारवाड़ के लोकगीतो के अनुसार ऐसी किवदंती है कि पुर्व में जब संचार के साधन नही होते थे तब दूर देश में कमाने जाने वाले लोगो को उनके परिजन कुरजो के माध्यम से घर आने का संदेष भेजते थे। पचपदरा में कुरजा की आवक को देखते हुए करीब 15 वर्ष पुर्व सरकार ने पचपदरा में पर्यटन को बढावा देने की योजना बनाई थी पर वो योजना सिरे नही चढ पाई। पचपदरा के पर्यावरण प्रेमी अब भी सरकार से कुरजा को संरक्षण दिलवाने ओर पचपदरा को पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग कर रहे है।
ओम प्रकाश सोनी
बालोतरा। बालोतरा उपखंड के पचपदरा तहसिल क्षेत्र के तालाबो पर प्रवासी पक्षी कुरजां के आने का क्रम शुरू हो गया है। तालाबो के आस पास हजारो की तादाद में ट्रांस साईबेंरियन क्रेन जिसे स्थानिय भाषा में कुरजां कहा जाता है,ने डेरा डाल रख है। ये प्रवासी पक्षी रूस जेसे ठंडे देशो से हजारो किलोमीटर का सफर तय करके प्रजनन का ल के लिये पचपदरा पहुचते है। पचपदरा में तालाबो के पानी ओर आस पास के खेतो में चुग्गा मिलने के कारण पचपदरा का क्षेत्र कुरजा के लिये अनुकूल है। तालाबो में कलरव करते कुरजांे के किल्लोल से पक्षी प्रेमियो में खुशी का आलम है। सुबह से लेकर शाम तक पचपदरा के आसमान मंें हजारों के तादाद में कुरजा अठखेलियां कर रही है। शाम के समय लालिमा के बीच में कुरजा की अठखेलियो से देखने लायक दृश्य बन पड़ता है। पचपदरा के तालाबो में पानी की घटती मात्रा के साथ ही इन प्रवासी परिंदो के आने की तादाद में भी कमी हो रही हैं। दूर देश से आने के कारण इन प्रवासी पक्षियो का मारवाड़ के लोकगीतो में भी काफी महत्व है। मारवाड़ के लोकगीतो के अनुसार ऐसी किवदंती है कि पुर्व में जब संचार के साधन नही होते थे तब दूर देश में कमाने जाने वाले लोगो को उनके परिजन कुरजो के माध्यम से घर आने का संदेष भेजते थे। पचपदरा में कुरजा की आवक को देखते हुए करीब 15 वर्ष पुर्व सरकार ने पचपदरा में पर्यटन को बढावा देने की योजना बनाई थी पर वो योजना सिरे नही चढ पाई। पचपदरा के पर्यावरण प्रेमी अब भी सरकार से कुरजा को संरक्षण दिलवाने ओर पचपदरा को पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग कर रहे है।
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