रविवार, 10 अगस्त 2014

रक्षाबंधन विशेष: पत्नी भी बांधती है रक्षा सूत्र



श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रविवार को श्रावणी पर्व पड़ रहा है। यह पर्व सृष्टि का आदि पर्व है। मान्यता है कि ब्रह्माण्ड के जीवंत ग्रह धरती की रक्षा के लिए देवऋषियों ने इस पर्व की सर्जना तब की थी, जब ब्रह्मा की सृष्टि आकार ले रही थी।



शक्ति के प्रतीक रक्षा सूत्रों और जनेऊ के संधान से सकल चराचर को सुरक्षित रखने का उपक्रम ऋषियों ने श्रावणी के माध्यम से आरंभ में ही कर लिया था।

हेमाद्रि संकल्प लेते हुए ऋषि-मुनियों ने घंटों स्नान कर ब्रह्माण्ड रक्षा के बीज बो दिए थे। इसी दिन संधानित रक्षा सूत्रों को शिष्यों की कलाई पर बांधकर विश्व को संकट मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था। उत्तारणी आने पर यज्ञोपवीत में ब्रह्मगांठ लगाकर ऋषि अपने शिष्यों को पुष्ट करते थे। संस्कृति के ये तार आज भी बुने जाते हैं।
रविवार को गंगा आदि पवित्र नदियों के अनेक तटों पर हजारों पुरोहित ऋषि तर्पण एवं हेमाद्रि संकल्प के माध्यम से दोनों हाथों में कुशाएं लेकर घंटों स्नान करेंगे। बाद में वैदिक मंत्रों से रक्षा सूत्रों का संधान किया जाएगा।
कैसे होता है स्नान
हरिद्वार के गंगातट पर संधानित सूत्र पुरोहित यजमानों की कलाई पर बांधेंगे। यह सूत्र फिर अगली श्रावणी तक कलाई पर बंधा रहेगा। मान्यता है कि यह सूत्र जीवन रक्षा करता है। कलाई पर रक्षा सूत्र पुरोहित बांधते हैं। यह दायित्व नगर पुरोहित निभाते आए हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि युद्ध में इंद्र की रक्षा के लिए उनकी पत्नी इंद्राणी ने गुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।

स्वयं लक्ष्मी ने राजा बलि के पाताल स्थित महल जाकर राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।

उस समय उनके पति भगवान विष्णु चार महीनों के लिए बलि के दरबार में रहकर दिया वचन निभा रहे थे। रानी पद्मिनी ने हुमांयू को राखी भेजकर अपने परिजनों की रक्षा की थी।श्रावणी का स्नान करीब तीन घंटे चलता है। रक्षा सूत्रों के संधान से पूर्व पुरोहित और ब्राह्मण रेत, मिट्टी, गोबर, गौमूत्र, पंचामृत, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घृत, फल-फूल, केवड़ा आदि अनेक द्रव्यों से स्नान करते हैं। प्रत्येक स्नान के बाद एक गोता गंगा में लगता है।

क्या है हेमाद्रि संकल्प
हेमाद्रि संकल्प वस्तुत: इस पूर्व ब्रह्माण्ड के तत्वों को मंत्रों से बांध देता है। फल-फूल, वृक्ष, हिमालय, नदियों, सागरों, द्वीपों, प्रांतों, देशों आदि का आवाह्न हेमाद्रि संकल्प में किया जाता है। अर्थ है कि ये सब जीव का जीवन बचाते हैं, बनाते हैं। संदेश है कि इन सबकी रक्षा हमें करनी है। हेमाद्रि संकल्प स्नानोपरांत रक्षा सूत्रों के माध्यम से समूची प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया जाता है।

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