शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

यहां बच्चों की शादी कराई जाती है, कुत्ते से

रायपुर । दुनिया में आपको कई अजीबोगरीब परंपराओं के बारे में सुनने को मिलता है। इसी तरह की एक परंपरा छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आदिवासी मुंडा समाज में आज भी कायम है, यहां ग्रह-दोष मिटाने के लिए बच्चों का विवाह कुत्ते के बच्चे के साथ किया जाता है।
बालको नगर के समीप बेलगरी नाला बस्ती के उडिया मोहल्ले में मकर संक्रांति के अगले दिन पारंपारिक गीतों के बीच दुधमुंहे बच्चे सहित पांच साल के आठ बच्चों की शादी धूमधाम से की जाती है।

बताया जाता है कि समाज में ऎसी मान्यता है कि दुधमुंहे बच्चों के ऊपरी दांत पहले निकलने पर उसे ग्रहदोष लग जाता है, इसलिए पांच वर्ष से पहले ऎसे बच्चों की शादी इस जानवर से की जाती है, शादी भी पूरे रीति-रिवाज व धूमधाम से होती है। बच्चों को दूल्हा-दुल्हन के रूप में सजाने के साथ साथ कुत्ते के बच्चे को भी सजाया जाता है।

बारात निकालकर गांव के आखिरी छोर में बच्चों की शादी की जाती है। बड़े-बुजुर्ग पूजा-अर्चना के साथ ही बच्चों व कुत्तों को हल्दी भी लगाते हैं। इसके बाद सामान्य शादी की तरह मांग भरी जाती है, आशीर्वाद लिया जाता है। शादी संपन्न होते ही समाज की महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए झूमते-नाचते दूल्हा दुल्हन को घर ले जाती हैं जहां उनके पैर धुलाकर घर प्रवेश कराया जाता है। कुत्ते के बच्चे को खाना खिलाया जाता है और इसके बाद रातभर जश्न मनाया जाता है।

दूल्हा-दुल्हन की देखरेख की जिम्मेदारी बड़े होने तक समाज के लोग ही निभाते हैं समाज के लोगों के मुताबिक इस परंपरा को निभाने से बच्चों पर से सभी प्रकार के ग्रहदोष मिट जाते हैं। समाज की उम्रदराज महिला ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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