नई दिल्ली। उत्तराखंड के ऎसे इलाकों में शनिवार को सेना के छाताधारी सैनिक मुसीबत में फंसे लोगों के लिए देवदूत की तरह उतर गए जहां अभी तक कोई राहत नहीं पहुंच पा रही थी और हर तरह का संपर्क कट चुका था। सेना के सूत्रों ने यहां बताया कि सेना की एक टुकड़ी बारकोट पहुंच गई जहां 700 लोग फंसे हैं। इसके अलावा सुबह सेना के जवान केदारनाथ के रास्ते में पहाडियों के बीच ऎसे दुर्गम स्थान पर पहुंच गए थे जहां 1000 लोगों मदद का इंतजार था। इन यात्रियों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सेना के छाताधारी सैनिकों ने जगह-जगह अपनी हाजिर दर्ज कराई और उन लोगों को भारी राहत दी जिन तक कहीं से कोई सहायता मिलने की उम्मीद नहीं थी।सेना अभी तक 14500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज चुकी है। सेना के 45 छाताधारी सैनिकों को जोली ग्रांट से गौचर के लिए रवाना किया गया जबकि 15 सैनिकों के छाताधारी जत्थे को ध्रुव हेलीकाप्टर से केदारनाथ-गौरीकुंड की ओर रवाना किया गया। इसके अलावा 16 छाताधारी सैनिक गौचर पहुंच गए वहां हेमकुंड के पास पुलाना गांव में हेलीकाप्टर से सैनिकों को उतारकर बचाव अभियान चलाया गया है। इस गांव तक भी अभी कोई मदद नहीं पहुंची थी। सेना के पर्वतीय राहत दलों को हेलीकाप्टरों से जगह-जगह भेजा जा रहा है। मुंडकटिया और सोनप्रयाग के बीच वासुकी गंगा पर पुल बनाकर वहां फंसे 2500 लोगों को बचाया गया है। सूत्रों ने कहा कि सेना पिंडारी ग्लेशियर में फंसे लोगों के लिए भोजन सामग्री गिरा रही है। तीस मीटर के दो पुल विमान से केदारनाथ और जोशीमठ के लिए रवाना किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सेना के 4 ध्रुव और सात चीता हेलीकाप्टर छाताधारी सैनिकों की तैनाती के काम में जुटाए गए हैं। सेना ने गौचर, हर्षिल, जोशीमठ, और रूद्रप्रयाग में संचार केंद्र बना दिए हैं और 30 सैटेलाइट फोन भी लगाए गए हैं ताकि विपत्ति में फंसे लोग अपने परिवारजनों से बातचीत कर उन्हेें अपना हाल बता सकें। बीस और सैटेलाइट फोन आपदा प्रभावित इलाकों में भेजे जा रहे हैं।राहत एवं बचाव अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता हासिल करते हुए सेना ने शनिवार को केदारनाथ मार्ग के बीच बेहद दुर्गम पहाडियों के बीच फंसे करीब एक हजार श्रद्धालुओं तक अपनी पहुंच बना ली। पर्वतीय युद्ध कौशल में दक्ष सेना की टुकड़ी शनिवार को इस स्थान तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो गई। इसके अलावा गोविंदघाट और लाम्बागर के बीच पैदल रास्ता खोल दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि सेना ने अपने संचार उपकरणों से 2300 श्रद्धालुओं की बात उनके घर वालों से कराई है और सेना ने परिवार वालों को आश्वस्त किया है कि उनके निकटजनों को सुरक्षित पहुंचाया जाएगा।उत्तराखंड में अगले 48 घंटे में मौसम का मिजाज गड़बड़ाने की खबरों को देखते हुए बचाव अभियान में जबरदस्त तेजी लाई गई है और चार अग्रिम हवाई पटि्टयों को सक्रिय कर दिया गया है। वायु सेना के सूत्रों ने बताया कि राहत अभियानतेज करने के लिए गौचर, गुप्तकाशी धारसू और पिथौरागढ की अग्रिम पटि्टयों को युद्धस्तर पर इस्तेमाल के लिए सक्रिय कर दिया गया है।वायुसेना ने पिछले 120 घंटे में 585 उड़ानें संचालित की हैं और करीब चार हजार लोगों को सुरक्षित बचाया है। वायु सेना ने अपने 43 हेलीकाप्टर और अन्य विमान इस अभियान में जुटा दिए हैं। इनमें 23 एमआई-17 के अलावा हाल ही में लिए गए अत्याधुनिक 17 एमआई 17वी-5 तथा चीता, वायु सेना का सबसे बड़ा हेलीकाप्टर एमआई-26 और सात परिवहन विमान शामिल हैं। लेकिन ये मशीनें नाजुक होती हैं। बादलों, बारिश और रोशनी की गड़बड़ी के कारण वायुसेना का राहत अभियान ठप पड़ सकता है।
नई दिल्ली। उत्तराखंड के ऎसे इलाकों में शनिवार को सेना के छाताधारी सैनिक मुसीबत में फंसे लोगों के लिए देवदूत की तरह उतर गए जहां अभी तक कोई राहत नहीं पहुंच पा रही थी और हर तरह का संपर्क कट चुका था। सेना के सूत्रों ने यहां बताया कि सेना की एक टुकड़ी बारकोट पहुंच गई जहां 700 लोग फंसे हैं। इसके अलावा सुबह सेना के जवान केदारनाथ के रास्ते में पहाडियों के बीच ऎसे दुर्गम स्थान पर पहुंच गए थे जहां 1000 लोगों मदद का इंतजार था। इन यात्रियों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सेना के छाताधारी सैनिकों ने जगह-जगह अपनी हाजिर दर्ज कराई और उन लोगों को भारी राहत दी जिन तक कहीं से कोई सहायता मिलने की उम्मीद नहीं थी।सेना अभी तक 14500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज चुकी है। सेना के 45 छाताधारी सैनिकों को जोली ग्रांट से गौचर के लिए रवाना किया गया जबकि 15 सैनिकों के छाताधारी जत्थे को ध्रुव हेलीकाप्टर से केदारनाथ-गौरीकुंड की ओर रवाना किया गया। इसके अलावा 16 छाताधारी सैनिक गौचर पहुंच गए वहां हेमकुंड के पास पुलाना गांव में हेलीकाप्टर से सैनिकों को उतारकर बचाव अभियान चलाया गया है। इस गांव तक भी अभी कोई मदद नहीं पहुंची थी। सेना के पर्वतीय राहत दलों को हेलीकाप्टरों से जगह-जगह भेजा जा रहा है। मुंडकटिया और सोनप्रयाग के बीच वासुकी गंगा पर पुल बनाकर वहां फंसे 2500 लोगों को बचाया गया है। सूत्रों ने कहा कि सेना पिंडारी ग्लेशियर में फंसे लोगों के लिए भोजन सामग्री गिरा रही है। तीस मीटर के दो पुल विमान से केदारनाथ और जोशीमठ के लिए रवाना किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सेना के 4 ध्रुव और सात चीता हेलीकाप्टर छाताधारी सैनिकों की तैनाती के काम में जुटाए गए हैं। सेना ने गौचर, हर्षिल, जोशीमठ, और रूद्रप्रयाग में संचार केंद्र बना दिए हैं और 30 सैटेलाइट फोन भी लगाए गए हैं ताकि विपत्ति में फंसे लोग अपने परिवारजनों से बातचीत कर उन्हेें अपना हाल बता सकें। बीस और सैटेलाइट फोन आपदा प्रभावित इलाकों में भेजे जा रहे हैं।राहत एवं बचाव अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता हासिल करते हुए सेना ने शनिवार को केदारनाथ मार्ग के बीच बेहद दुर्गम पहाडियों के बीच फंसे करीब एक हजार श्रद्धालुओं तक अपनी पहुंच बना ली। पर्वतीय युद्ध कौशल में दक्ष सेना की टुकड़ी शनिवार को इस स्थान तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो गई। इसके अलावा गोविंदघाट और लाम्बागर के बीच पैदल रास्ता खोल दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि सेना ने अपने संचार उपकरणों से 2300 श्रद्धालुओं की बात उनके घर वालों से कराई है और सेना ने परिवार वालों को आश्वस्त किया है कि उनके निकटजनों को सुरक्षित पहुंचाया जाएगा।उत्तराखंड में अगले 48 घंटे में मौसम का मिजाज गड़बड़ाने की खबरों को देखते हुए बचाव अभियान में जबरदस्त तेजी लाई गई है और चार अग्रिम हवाई पटि्टयों को सक्रिय कर दिया गया है। वायु सेना के सूत्रों ने बताया कि राहत अभियानतेज करने के लिए गौचर, गुप्तकाशी धारसू और पिथौरागढ की अग्रिम पटि्टयों को युद्धस्तर पर इस्तेमाल के लिए सक्रिय कर दिया गया है।वायुसेना ने पिछले 120 घंटे में 585 उड़ानें संचालित की हैं और करीब चार हजार लोगों को सुरक्षित बचाया है। वायु सेना ने अपने 43 हेलीकाप्टर और अन्य विमान इस अभियान में जुटा दिए हैं। इनमें 23 एमआई-17 के अलावा हाल ही में लिए गए अत्याधुनिक 17 एमआई 17वी-5 तथा चीता, वायु सेना का सबसे बड़ा हेलीकाप्टर एमआई-26 और सात परिवहन विमान शामिल हैं। लेकिन ये मशीनें नाजुक होती हैं। बादलों, बारिश और रोशनी की गड़बड़ी के कारण वायुसेना का राहत अभियान ठप पड़ सकता है।
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